05 May

??????? ????

बद्रीनाथ – गोबिंद घाट – घाघंरिया (गोबिंद धाम) : भाग 5

By

जब भगवान विष्णु योग ध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत ही ज्यादा हिम पात होने लगा। भगवान विष्णु बर्फ में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का ह्रदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर(बद्री) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगी। भगवान विष्णु को धुप वर्षा और हिम से बचाने लगी। कई वर्षों बाद जब भगवान् विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा की माता लक्ष्मी बर्फ से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा की हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा। और क्यूंकि तुमने मेरी रक्षा बद्री रूप में की है सो आज से मुझे बद्री के नाथ-बद्रीनाथ के नाम से जाना जायेगा।

Read More

Uttarakhand Sojourn – Ride in to the Wilderness (Camping in Deoban)

By

Sitting there on the green patch overlooking Spider Colony, we felt exactly how a falcon would feel when flying high. For as far as we could see, there were just waves of misty mountains. Paahji and I felt lucky to be living our lives exactly the way we wanted to. On our back was an intimidating rocky wall, behind which lay Deoban.
A kilometer or so up from that place, we started spotting snow on the road side and then, all hell broke loose. The first 20-foot stretch of snow on the road made me really nervous. There were paths through the snow made by what must have been army vehicles, but those paths were strewn with treacherous black ice. Paahji looked nervously at me as I struggled through that stretch. He was slightly better off with his long legs working as outriggers. There was another such stretch in the next corner and then there was another. After a number of snowed stretches, we got to a Y point where the road on the right went to Mundali and the one on the left went to Deoban. We took the left one and as we got closer to Deoban, the quantity of snow on the road kept increasing. Fortunately, the road was not too steep and it was somewhat manageable. Suddenly, Paahji took a left turn and stopped. He asked me where we were heading. The road ahead had two feet of snow for as far as we could see and we definitely couldn’t take our bikes through that. Paahji looked at me with a huge question mark on his face. We got off the bikes and looked around. Wow! What a sight! The place was about 4 kilometers short of Deoban. There was a shallow gorge that slid down to a frozen pond. The slopes were heavily snowed on all sides except for the areas that were getting direct sunlight. There was a nice and flat green patch on the right of the pond where tree-cutting work must have been on till recently. Loads of firewood lay abandoned alongside freshly cut logs.

Read More
??????? ??? 2

गौरीकुंड – चोपटा – जोशीमठ – बद्रीनाथ (भाग 4)

By

कोई शक नही हिन्दुस्तान मे चोपटा की प्राक्रतिक सुंदरता नायाब है। कोसानी के बारे मे महात्मा गाँधी ने स्विट्ज़रलैंड ऑफ इंडिया कहा था। वहाँ उन्होने अपना आश्रम भी बनाया परन्तु चोपटा की सुंदरता के आगे कोसानी कहीं नही टिकता है। जो भी चोपटा आता है वह यहाँ की खूबसूरती को भूल नही सकता। यहाँ पर हम लोग लगभग आधा घंटा रुक कर आस पास के नज़ारे देखते रहे। यहाँ की सुंदरता देख कर बार-बार सब कहने लगे बहुत अच्छा किया जो हम इस रास्ते से आए वरना हमे पता ही नही चलता कि कितनी खूबसूरत यह जगह है।

Read More

On the way to Kedarnath

By

Srinagar received its name from Sri Yantra, a mythical giant rock, so evil that whoever set their eyes on it would immediately die. The rock was believed to have taken as many as thousand lives before Adi Shankaracharya, in the 8th century AD, as a part of an undertaking aimed to rejuvenate the Hindu religion across India, visited Srinagar and turned the Sri Yantra upside down and hurled it into the nearby river Alaknanda. To this day, this rock is believed to be lying docile in the underbelly of the river. That area is now known as Sri Yantra Tapu.

On the way to Srinagar we saw a broken bridge which was built recently across Alaknanda and damaged too during construction. Six labourers die during that time thereafter the construction was not restarted.
We all were enjoying our journey in our own ways as some were busy in clicking pictures of the natural beauty of Uttrakhand , some were sleeping as we got up early in the morning & kids were busy in singing and playing cards.

After 35 kms from Srinagar we reached Rudarprayag , named after Shiva (Rudra). Here Alaknanda river from Badrinath and Madakani river from Kedarnath meet.

From Rudarprayag the road separated for Kedarnath & Badrinath, left road goes to Kedarnath & right one towards Badrinath.

Read More
?????? ?? ???? ??? ?????????

गौरीकुंड- केदारनाथ- गौरीकुंड (भाग 3)

By

जिस जगह से हम उतर रहे थे वहाँ बादल काफ़ी कम थे लेकिन नीचे की ओर गरुडचट्टी बादलों के कारण बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी यानि की हम बादलों से भी उपर चल रहे थे। मुझे हिन्दी फ़िल्म का वो गाना याद आ गया ‘आज मैं उपर, आसमान नीचे…’ । थोड़ी ही देर बाद हम बादलों का सीना चीरते हुए गरुडचट्टी पहुँच गये और काफ़ी देर तक बादलों में चलने के बाद तेजी से नीचे की ओर उतरते गये। थोड़ा और नीचे उतरने के बाद फिर से मौसम साफ़ हो गया।

Read More

लेह लद्दाख – मनाली – केलोंग – दार्चा – बरालाचा ला – लाचुलुंग ला – पैंग – 3

By

यहाँ पर बहुत से सरकारी दफ्तर और सेवाएँ है। एक बड़ा बाज़ार और सड़क से दाएं ओर नीचे बस स्टैंड भी है। यहाँ पर रुकने का पूरा इंतजाम है कई रेस्ट हाउस, सरकारी बंगलो और होटल भी है। केलोंग मे गाड़ी का हवा-पानी टिप-टॉप करने के बाद हम बिना रुके “जिस्पा”, “दार्च” होते हुए “zingzingbar” पहुँच गए। एक बात बता दूं की “zingzingbar” मे भी रात को रुकने का इंतजाम है। अभी दोपहर का समय था तो हमने रुकना ठीक नहीं समझा। ये हमारी बहुत बड़ी भूल थी। इसका ज़िक्र आगे चल कर दूंगा। “zingzingbar” से आगे खड़ी चढाई पार करने के बाद हमने “बारालाचा ला दर्रा” दर्रा पार कर लिया था। इस दर्रे की ऊंचाई 5030 मीटर या 16500 फीट है। यहाँ से लगातार उतरने के बाद हम लोग “भरतपुर” होते हुए “सार्चू” पहुँच गए।

“सार्चू” मे हिमाचल प्रदेश की सीमा समाप्त हो जाती है और जम्मू-कश्मीर की लाद्द्खी सीमा शुरू हो जाती है। यहाँ पर भारतीय सेना का बेस कैंप है और एक पुलिस चेक पोस्ट भी है। चेक पोस्ट पर गाड़ी सड़क के किनारे रोक दी गई। हमारा परमिट चेक किया और रजिस्टर मे दर्ज कर लिया गया। “सार्चू” मे सड़क एक दम सीधी है और गाड़ी की रफ़्तार आराम से 100-120km/h तक पहुँच जाती है। यहाँ पर गाड़ियाँ फर्राटे से दौड़ रहीं थी। तभी क्या देखा एक फिरंगी महिला साइकिल(आजकल तो bike बोलते हैं) पर सवार होते हुए चली आ रही थी। मुझे सड़क पर लेटा हुआ देख वो साइकिल से नीचे उतर गई और पैदल चलने लगी।

हम सब उसको देख कर हैरान हो गए। शायद हरी ने उससे पुछा की अकेले जा रही हो तो risk है। उसने बताया की उसके साथ के और लोग भी पीछे आ रहे हैं। वो और उसके साथी मनाली से लेह साइकिल से ही जाने वाले थे। और उसको आज “सार्चू” मे ही रुकना था। इतने दुर्गम, पथरीले, टूटे-फूटे, चढाई-उतराई, अनिश्चिताओ से भरपूर इलाके मे जहाँ 2.6L की Xylo का भी दम निकल जाता था ये फिरंगी इसको साइकिल से ही पार करने वाले थे। इनके जज़्बे और हिम्मत की तारीफ़ की गई और इनको सलाम बोल कर भोजन की तलाश मे चल दिए।

ठीक से याद नहीं है पर दोपहर के करीब 3 बज रहे थे और भूख लग चुकी थी। यह जगह एक बहुत बड़े समतल मैदान जैसी है। यहाँ पर भी रुकने के लिए बहुत सारे टेंट लगे हुए थे। ये सब देख कर समझ आ गया था की यहाँ के लोग काफी मेहनती है। साल के 6 महीने ही मनाली-लेह हाईवे खुलता है। इन्ही 6 महीनों मे इनकी कमाई होती है और बाकि के 6 महीने तो बर्फ पड़ी रहती है। यहाँ पर लगे एक टेंट खाने का इंतजाम था। हमसे पहले और लोग भी थे तो हमको 10-15 मिनट बाद का टाइम दे दिया गया। इस टाइम का हमने पूरा उपयोग करके फोटो session कर डाला। “सार्चू” मे ली गई कुछ फोटो। जानकारी के लिए बता दूँ यहाँ पर ली गई सारी फोटो मैंने नहीं बल्कि मनोज, हरी और राहुल ने खीचीं हैं।

Read More

ऋषिकेश – देवपर्याग – रुद्रप्रयाग – गौरीकुंड (भाग 2)

By

ऋषिकेश से लेकर रुद्रप्रयाग तक के रास्ते में पहाडो पर काफ़ी कम हरियाली है और ये काफ़ी रेतीले लगते हैं लेकिन रुद्रप्रयाग से केदारनाथ की तरफ़ मुडते ही दृश्य एकदम बदल जाता है। चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है ,घाटियॉ बहुत खुबसुरत हैं। हम इन खुबसुरत वादियों का आनंद लेते हुए अगस्त्यमुनि से होते हुए गुप्‍तकाशी पहुँच गये ।वहाँ गाड़ी रुकवा कर चाय पी और आस पास के सुन्दर नजारों को निहारने लगे। गुप्‍तकाशी से घाटी के दूसरी तरफ़ ऊखीमठ साफ़ दिखाई देता है।

Read More

केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा तथा दर्शन रिपोर्ट – भाग 1 : अम्बाला- ऋषिकेश

By

हमारा पहली रात ऋषिकेश में रुकने का प्रोग्राम था जो अम्बाला से सीधे सिर्फ 200 किलोमीटर है। यानि की हमारे पास काफी समय था और इसलिए हमने रास्ते में जाते हुए पोंटा साहिब और मसूरी में केम्पटी फॉल जाने का निश्चय किया।इस रास्ते से ऋषिकेश 50 -60 किलोमीटर ज्यादा पड़ रहा था लेकिन दो महत्वपूर्ण स्थान भी कवर हो रहे थे ।सभी लोगों से कहा गया की पहले दिन का लंच घर से लेकर आयें ,इसके अलावा हमने काफी बिस्कुट और स्नैक रास्ते के लिए खरीद लिए ।और आखिरकार 11 जून 2011 , दिन शनिवार आ ही गया । सभी लोग तैयार होकर पहले से निश्चित स्थान पर मिलते रहे और गाड़ी में सवार होते गए .लेकिन अभी सीटी साहेब नहीं पहुचे थे । हमने गाड़ी को महेश नगर में रुकवा कर उसका इन्तज़ार शुरु किया। हम पिछले एक घन्टे से उसे फोन कर रहे थे ताकि वो लेट ना हो जाये और अब तो उसने फोन उठाना भी बन्द कर दिया, घर पर फोन किया तो बताया कि चले गये हैं, लेकिन गाड़ी पर नहीं पहुचे जबकि सिर्फ़ 3-4 मिनट का रास्ता था । हमें ( मुझे और सुशील को ) मालूम था कि अभी वो तैयार नहीं हुआ होगा क्योंकि वो हमारा बचपन से दोस्त है और हम उसकी रग रग से वाकिफ़ हैं। हम सबको काफ़ी गुस्सा आ रहा था, अरे जब सात लोग एक आठवें की काफ़ी देर इन्तज़ार करेंगें तो गुस्सा आयेगा ही। हमने यह निर्णय लिया कि यदि वो 8:30 तक नहीं आया तो हम उसे छोड़ कर चले जायेंगे और वो पठठा पूरे 8:28 पर वहाँ पहुँच गया और वो भी अकेले नहीं ,साथ में अपने 9-10 साल के बेटे को भी यात्रा के लिये ले आया। हम उसका स्वागत गालियों से करने को तैयार बैठे थे लेकिन उसके बेटे के कारण वैसा ना कर पाये। लेकिन फिर भी उसका ‘यथायोग्य’ स्वागत किया गया।

लगभग सुबह 8:30 पर हम अम्बाला से पोंटा साहिब के लिए निकल गए। अम्बाला से पोंटा साहिब की दुरी 100 किलोमीटर है और हम मौज मस्ती करते हुए 10 :30 तक पोंटा साहिब पहुँच गए ।

(पांवटा साहिब हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के दक्षिण में एक सुंदर शहर है।राष्ट्रीय राजमार्ग 72 इस शहर के मध्य से चला जाता है।यह सिखों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और एक औद्योगिक शहर है। गुरुद्वारा पौंटा साहिब, पौंटा साहिब में प्रख्यात गुरुद्वारा है।सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की स्मृति में पौंटा साहिब के गुरुद्वारे को बनाया गया था। दशम ग्रंथ, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा यहीं लिखा गया था। इस तथ्य की वजह से इस गुरुद्वारे को विश्व भर में सिख धर्म के अनुयायियों के बीच ऐतिहासिक और बहुत ही उच्च धार्मिक महत्व प्राप्त है। )

Read More

Mussorie – My best ever economical trip Day 2

By

This place is located nearly 1364 Meter above the sea level . The Kempty Falls, surrounded by high mountain ranges and located at a high altitude of 4500 feet, is a good place for picnic or for spending a couple of hours listening to the music of water in the midst of the Greenery which cover the surroundings This waterfall attracts many tourists particularly from plain areas. Located at a distance of 15 KM from Mussoorie town , it can be visited by conducted tour or by taking a shared taxi near Gandhi chowk taxi stand. We opted for shared taxi.

Read More

Mussorie – My best ever economical trip day 1

By

We were really not sure what 6000 ft actually means, so after every 10-15 minutes we used to think Mussorie has come. But we were still not at Mussorie. Then at one particular point we saw a board Mussorie welcomes you and after sometime we reached at a place where there was number of taxi and it was the last point i.e. Mussorie. Weather was now little cold. We had covered our son with sweater and shawl and got down from taxi. We asked for the route to our hotel and a taxi person guided us to a staircase and then to the road. We paid charges to Taxi and was carrying our luggage.

Read More
माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग -६ (जम्मू – JAMMU – १)

माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग -६ (जम्मू – JAMMU – १)

By

मुबारक मंडी पैलेस

मुबारक मंडी महल की वास्तुकला में राजस्थानी , मुग़ल और यूरोपीयन शैली का समन्वय देखा जा सकता है। इस महल का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। यह महल डोगरा राजाओं का शाही आवास था। इस स्थान पर हम लोग समय अभाव के कारण जा नहीं पाए थे. यह फोटो मैंने दूर से बागे बाहू से लिया था. 

बाहू के किले में माता के दर्शन करने के बाद, वंहा से निकल कर यंहा से नीचे की और बने मछली घर और बागे बाहू गार्डन की और आ जाते हैं. मछलीघर एक शानदार एक्वेरियम बना हुआ हैं. जो की जमीन के नीचे हैं.  इसका प्रवेश द्वार एक बड़ी मछली  के रूप में बना हुआ हैं. यंहा पर दुनिया में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मछलियों को प्रदर्शित किया गया हैं. यंहा पर भी फोटो खींचना निषेध हैं.

Read More