Uttarakhand

अन्नू भाई चला चकराता – पम्म पम्म पम्म – लाखामंडल

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कभी गाडी से इधर झांक, कभी उधर झांक | देखते के कुछ समझ आ जाए , क्यूंकि आगे तो हम लगातार देखे ही रहें थे आख्ने फाड़ें ,    हा हा हा …वहां गाड़ी की हेड लाइट की रोशनी में जो कुछ एक दो मीटर तक दिख रहा था बस समझो उस समय वही हमारी दुनिया थी बाकी तो कुछ दिख ही नहीं रहा था,थोड़ी देर बाद हमें खुद मालुम नहीं की कब कहाँ दो चार मकानो के बीच से होकर हमारी वो पथरीली सड़क गुजर रही थी (अँधेरा होने के कारण ) तब गाड़ी रोकी … वहीँ एक दो आदमी मिले। एक सज्जन से परिचय होने पर उन्होने बताया के वो रहने वाले तो बड़ोत (UP) के ही हैं।   यहाँ उनकी  पुरानी जमींन है, सो यहाँ भी रहते हैं।  वहीँ एक घर में भी बनी छोटी सी दूकान से दर्जनों  “पारले जी ” की बिस्कुट के पैकेट खरीद अन्नू और प्रवीण बाबू तो बिजी हो गए …..मै  वैसे भी भी बिस्कुट नहीं खाता और गाडी भी चला रहा था।  सो उन साहब से बातचीत कर आगे का हाल चाल और रास्ते का ब्यौरा ले चल पड़ा।

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गढ़वाल घुमक्कडी: कर्णप्रयाग – विष्णुप्रयाग – बद्रीनाथ

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चूँकि आज हमे सिर्फ़ बद्रीनाथ ही पहुँचना था (जो की यहाँ से मात्र 125 किमी ही है), इसलिए हम संगम पर काफ़ी देर बैठे मस्ती करते रहे. संगम का आनंद लेकर और दोनो नदियों के जल से विशुद्धि व उर्जा पाकर हम लोग आगे की यात्रा पर निकलने को तैय्यार थे. ढाबे पर नाश्ता करने के बाद, हम लोग सीधे बद्रीनाथ की बस लेने आ पहुँचे. थोड़ी देर इंतेज़ार के बाद, एकाध बसें आई पर सब खचाखच भारी हुई, पाँव रखने तक की जगह नही थी, यात्रा सीज़न मे ये एक आम नज़ारा है.

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यमनोत्री से गंगोत्री

यमनोत्री से गंगोत्री

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देखा मंदिर के पास से ही भागीरथी बह रही है. यहाँ पर भागीरथ का छोटा सा मंदिर है. हम लोग भी भागीरथी के किनारे खड़े ही कर निहार रहे थे. सुबह के 7 बाज रहे थे धूप खिली हुई थी. आस पास का वातावरण बहुत सुंदर लग रहा था . कुछ लोग इस ठंडे मौसम मे भागीरथी मे स्नान कर रहे थे. मैने पत्नी से नहाने को कहा पर उनकी तो हिम्मत नही हुई.

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श्री बद्रीधाम की अविस्मरणीय यात्रा। (भाग – 2)

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मेरे घुमक्कड़ सदस्यों, पिछले भाग में मैंने आपके साथ अपनी दिल्ली से कीर्तिनगर तक की यात्रा के खट्टे मीठे अनुभव साँझा किये थे, ठीक उसी प्रकार अब हम अपनी कीर्तिनगर से श्री बद्रीधाम तक की यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।  तो दिनांक छब्बीस जून दो हजार अठारह को प्रातः नौ बजे नाश्ता करने के बाद हम लोगों ने अपना सामान उठाया और रिवरसाइड रिसोर्ट को अलविदा कहते हुए अपने ड्राइवर साब से गाड़ी श्री बद्रीधाम की तरफ बढ़ाने को कहा।

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श्री बद्रीधाम की अविस्मरणीय यात्रा। (भाग – 1)

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 ऋतू का आगमन यूँ तो प्रत्येक वर्ष ही होता है, जिसके फलस्वरूप अक्सर हम सभी फिर से वापिस  अपने बचपन की उन यादों को जी लेते हैं जिनमे सिवाय मौज-मस्ती और सैर-सपाटा  के कुछ नहीं होता था। लगभग पूरे दो महीने तक स्कूल की छुट्टी और चारो तरफ बच्चों का शोरगुल आरम्भ।   सांप-सीढ़ी, कैरम-बोर्ड, पकड़म पकड़ाई, खो-खो, कबड्डी, पहला-दुग्गो आदि जैसे खेलों को खेलते हुए दिन कैसे बीत जाते थे कुछ पता ही नहीं चलता था।

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Munsyari: The story retold

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If you decide to meet your destiny, God will help to achieve this, I had gone through this face, my childhood dream was to drive on hills on a grand Royal Enfield machine, my dream comes true on 20th June 2018 when we five friends me Mohammad Saleem Haider, Rakesh Kumar Singh, Praveen Kumar Aswal all three riders of their Royal Enfield Classic 350, with pillion on Rakesh and Praveen’s bike is Vijay Sharma and Mohit Srivastava,

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The Underground World of GOD

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Patal Bhuvneshwari was one of the most exciting tours for us. Before starting for Nainital ( Nainital is a Himalayan town in the Kumaon region of India’s Uttarakhand state, at an altitude  of around 2,000m. ) I explored about nearby places in Nainital. I do not want to explore the lake and another most visited place of Nainital.

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RAVISH RIVER RAFTING- RISHIKESH

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So the five of us zoomed out of Delhi by a cab on a Saturday morning by 6 am. It is recommended to leave Delhi early morning, else you get stuck in the traffic which will be tiresome. After crossing Meerut, we halted for breakfast as everyone was feeling ravenously hungry. Believe me, nothing meets the taste of Parathas & chai at the roadside dhabas during such trips. We filled our belly and then the journey resumed.

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