Religious

केदारनाथ से बद्रीनाथ

केदारनाथ से बद्रीनाथ

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मस्तक पर लगे हीरे को देख कर ऐसा लग रहा था की हरे रंग का ज़ीरो वाट का वल्व जल रहा हो हम लोग थोड़ी देर वहाँ एक टक निहारते रहे तभी एक दंपति वहाँ विशेष पूजा के लिए आए. रावल जी मंत्रोचार करने लगे.

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महेश्वर – एक दिन देवी अहिल्या की नगरी में : भाग 1

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ये तो था एक संक्षिप्त परिचय महेश्वर से और अब हम चलते हैं अपने यात्रा वर्णन की ओर. बारिश का मौसम, सुबह सुबह का समय, अपना वाहन और इस सबसे बढ़कर सुहावना मौसम सब कुछ बड़ा ही अच्छा लग रहा था. रास्ते में बाहर जहाँ जहाँ तक निगाह जा रही थी सब दूर हरियाली ही हरियाली दिखाई दे रही थी. हम सभी को बारिश का मौसम बहुत ज्यादा पसंद है, खासकर मुकेश को. जैसे ही मानसून आता है, एक दो बार बारिश होती है बस इनका मन घुमने जाने के लिए मचल उठता है, और हमारे ज्यादातर टूर बारिश के मौसम में ही प्लान किये जाते हैं.

मन में बहुत सारा उत्साह बहुत सारी उमंगें लिए हम बढे जा रहे थे अपनी मंजिल की ओर की तभी ऊपर आसमान में बादलों का मिजाज़ बिगड़ने लगा काले काले बादल घिर आये थे और बिजली की कडकडाहट के साथ तेज बारिश शुरू हो गई. मौसम की सुन्दरता एवं बारिश का आनंद हम कर में बैठ कर तो भरपूर उठा रहे थे लेकिन अब हमें चिंता होने लगी थी की यदि बारिश बंद नहीं हुई तो हम महेश्वर में घुमक्कड़ी तथा फोटोग्राफी का आनंद नहीं उठा पायेंगे और मन ही मन भगवान् से प्रार्थना करने लगे की हमें महेश्वर में बारिश न मिले. ईश्वर ने हमारी प्रार्थना स्वीकार कर ली थी और कुछ ही देर में मौसम खुल गया और पहले से और ज्यादा खुशगवार हो गया. सड़क के दोनों ओर कुछ देर के अंतराल पर भुट्टे सेंकनेवालों की छोटी छोटी दुकाने मिल रही थी, एक जगह से हमने भी भुट्टे ख़रीदे जो की बड़े ही स्वादिष्ट थे.

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हरिद्वार से केदारनाथ

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रुद्रप्रयाग से  9  किलोमीटर आगे  तिलवारा है यहाँ हम लोगो ने चाय पी.  10  मिनट का रेस्ट किया और फिर आगे  के लिए चल दिए. तिलवारा से  19  किलोमीटर आगे  अगस्तमुनि  है .  यहाँ अगस्तमुनि का आश्रम है.यहाँ पहुँचते हुए शाम ढलने लगी थी. हमारे बाईं ओर  मंदाकिनी सड़क के साथ साथ पत्थरो  के बीच अठखेलियाँ  करती हुई बह रही थी. बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक द्रशय था. सामने के पहाड़ो की चोटियो  पर सूर्यास्त की किरणे  पड़ने से सुनहरे रंग से चमक रही थी.मन तो कुछ समय यहाँ पर रुक कर प्राक्रतिक  सौंदर्य को  देखने को हो रहा था पर ड्राइवर को अपनी मंज़िल पहुँचने की थी. अगस्तमुनि  से  19  किलोमीटर आगे  कुंड है यहाँ पहुँचते हुए अँधेरा छा  गया था. अब ड्राइवर अँधेरे मे बस चला रहा था. गुप्त काशी  को पार  कर लगभग 8 बजे सोन प्रयाग  से 7 किलोमीटर पहले हम सीतापुर पहुँच गये. यहाँ ड्राइवर ने रात मे रुकने के लिए एक होटेल के सामने बस रोक दी और बोला रात यहीं रुकेंगे ,  आप लोग सामने होटेल मे जाकर अपने लिए कमरा    देख कर तय कर लो. यह होटेल बहुत ही साधारण था कमरो मे एक अजीब सी गंध आ रही थी. मन मे विचार आया ड्राइवर को यहाँ  से कमीशन  मिलता होगा तभी यहाँ रोका है. मैने अपने लड़के से नज़दीक के दूसरे होटेल देखकर आने को कहा और स्वयं दूसरी तरफ जाकर होटेल देखने लगा. मुझे इस होटेल से 100 गज पहले एक नया बना हुआ साफ सुथरा होटेल मिल गया. इस  समय सीजन ना होने के कारण बिल्कुल खाली था. इस  समय तक इतने बड़े होटेल मे हमारा ही परिवार था. हमे 400 रुपये के हिसाब से 2 डबल बेड का एक रूम मिल गया. मैने बस के दूसरे यात्रियों से भी बोला इस बेकार से होटेल मे ना ठहर कर मेरे वाले होटेल मे ठहरे.पर वह सारे उसी होटेल मे ही ठहरे. रात  मे जब हम खाना खाने बाहर निकले  ,  मेरे से  कुछ घोड़े वाले घोड़ा तय करने के लिए कहने लगे. पहले तो मैने यह सोंचा था कि  गौरी कुंड से एक-दो किलोमीटर पैदल चलने के बाद अगर नहीं चला जाएगा तो घोड़े कर लेंगे पर अब जब यह लोग जिस तरह की बाते कर रहे थे उससे लगा कि तय  ही कर लेना चाहिए. आने जाने के लिए 800 रुपये प्रति घोड़ा तय हुआ.

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A weekend pilgrimage to Rayagada

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While transiting through southern Odisha on our way to Chhattisgarh last year, my wife expressed a desire to visit the famous Maa Majhighariani Mandir in Rayagada. I told her that it meant a detour of over 200 kms over bad roads and promised to take her there some other time. She wasn’t happy but had no choice in the matter. A few days later, there was a minor collision with a truck which my wife viewed as a divine warning. Recently, I changed my car and my wife was insistent that we go and seek the forgiveness and blessings of the Goddess.

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A memorable trip on bike to rediscover myself in the foothills of Himalayas – Part I

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Life is full of joy and sorrow, happiness and disappointments, ups and down and Life can also throw unexpected surprises – I was taught in my school and I am also explaining the meaning to my son now. But, at that point of time those are only “THE WORDS” for me and nothing else. Remember ‘3 Idiots’ – “Jab dost fail ho to dukh hota hai, lekin jab dost top kare to aur bhi dukh hota hai”

What else would you do in my place, when the requester is the CEO of your Company? Do you have any other option? I know some who might still have some other options, but fortunately or unfortunately, I am not so impulsive in nature and the other option to fly – was an unthinkable proposition for me that time.

I have a great respect for Mr. Ram S. Ramasundar, the then CEO of Electrolux India, who is like a God Father for me, I had no other option but to say “Yes Sir, I will”.

It was already 11 in the morning and I had an i-ticket. I asked permission to go to the counter to cancel the ticket, to get 50% refund for the cancellation. Who says money doesn’t matter.

“Do one thing, prepare a voucher – it will be reimbursed fully from accounts, I will approve the same.” So, one of my worry had been taken care of…but what about the disappointments.

From a very beautiful morning, all of a sudden it became one of the worst day for me. With a heavy heart, I called up home to inform that I won’t be able to come. Durga Puja was over by the time I hang up the phone for me, as well as for them, even before the first sound of Dhak.

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Kolkata- Fun and Food Capital- “Aami Shotti Bolchi”

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I came of out the memorial premises and after sipping a local tea for 3 bucks, I also wanted to feel like a Chancellor. I hired a chariot car drawn by 2 white horses for my Royal Evening Stroll. I guess, the chariot driver murmured faintly (in English).. “Your Highness, step up please”. I was almost in seventh’s heaven by then, but when I looked at him, I could figure out his speechless angry face almost saying (in Hindi)..

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Gwalior- Weekend Gateway to “Hindustan Ka Dil”

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However, booked one Cab (Tata Indica) for a 7 hr journey, which would take me to the Gwalior Fort(Man Mandir Palace, Sas-Bahu Temple, Gujjari Mahal, Suraj Kind, Teli ka Mandir), Jai Vilas Palace (aka Jiwaji Rao Scindia Museum), Sun temple, Mohd. Ghauz Monument, Tansen Monument, Gwalior Zoo for 700 bucks. It was decided that the cab would be there by 9 am. I had another 1 hr. 30 mins in hand.

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Trip to Darbar Sahib-Where self meets the soul…-I

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There is this railway crossing on the Dinanagar-Gurdaspur stretch of NH-15 which lies miraculously at the centre of a leftward curve. Most of the drivers usually get caught unaware at this crossing. I was familiar with the notoriety of this curve and hence was attentive to its arrival. Just after crossing over the railway line, we stopped near a fruit-seller to fill our empty stomachs and sat on the nearby tube-well to chat. Our jokes and pranks didn’t seem to end anytime soon but we realised that we should pull ahead. Back to the car, we hit the road again and entered Gurdaspur city after 10 kms. There is a bypass which you can take to avoid the traffic and congestion at the Gurdaspur town but since it was a national holiday (2nd Oct), the traffic was sparse and we drove through the city. Looking around for some nice place to have a proper breakfast, all four of us had our necks craned out of the window. However, any place proposed by one was put down by the rest…a big disadvantage of traveling in an all-guys-group i think. Suddenly, I saw a turbanated policeman signalling us to stop. I just wanted to zip ahead as we were on the right side of law in every respect (thats what I believed till then) but Jaspreet insisted that we should stop as the Punjab Police cops chase such cars which dont stop and then harrass you even more…the job they are best at. Stopping a few metres ahead, I asked everyone to relax and not to get out of the car…a mistake that cost us 200 bucks!!! The Sardarji policeman came upto our car…positioned his elbows on the window and asked where we were from. We replied in Punjabi that we are from Jammu and heading towards The Harmandir Sahib. The Sardarji smiled at us and asked us why we had not fastened our seat belts…..HOLY SHIT… We realised that after we started driving from our last stop where we had fruits, we had just forgot to fasten our seat-belts.

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अमरनाथ यात्रा ( शेषनाग – पंचतर्णी – अमरनाथ गुफा – पहलगाम)

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शाम को हम लोग एक रेस्टौरेंट मे बैठे थे, मैने देखा एक पुलिस ऑफीसर भी वहाँ रेफ्रेशमेंट ले रहा है, तभी एक और ऑफीसर भी उसके पास आ कर बात  करने लगा, मेरी नज़र उस पर टिक गयी मॅ  देखना चाहता था की यहाँ होटेल वाले को खाने-पीने का बिल पेमेंट करते है या नही, थोड़ी देर मे देखा दोनो ऑफीसर  होटेल वाले के पास गये और पर्स निकाल कर पेमेंट करने लगे.ऐसे ही मार्केट मे टहलते हुए मैने देखा 2-4 खोँछे वाले सड़क किनारे खड़े है, यह यहाँ के मूल निवासी नही थे, यात्रा पर रोज़गार के चक्कर मे यहाँ पहुच गये थे, जिगयसा वश मैने उनसे पूछा  क्या यहाँ खड़े होने पर यहाँ की पुलिस तो नही परेशान करती है, उन लोगो ने  बताया  की म्युनिसिपल बोर्ड वाले डेली . 20 रुपये की रसीद काट देते है और कोई परेशान नही करता है.  सोचने लगा देहली और उसके आस-पास के शहरो मे सरकार को तो इन खोँछे वालो से कुछ मिलता नही है  हाँ पुलिस वालो की ज़रूर जेब गर्म हो जाती है. यहाँ आकर इस बात का अहसास होता है की अमरनाथ  की यात्रा के दौरान लोखो कश्मीरियो को रोज़गार मिलता है, स्टेट की इनकम बदती है,  हम 7 लोगो का घोड़े का खर्च 37500/- हुआ था जबकि कई स्थानो पर हम पैदल भी चले थे. इसके अलावा टॅक्सी , टेंट, होटेल, आदि कितने खर्चे. हम लोगो का प्रति व्यक्ति लगभग 8000 से 10000 खर्च आया था. एक तरह से यह यात्रा कितने कश्मीरियो के लिए आय का बड़ा साधन है,  परंतु फिर भी कुछ कश्मीरी लीडर वहाँ की जनता को गुमराह करके यात्रा के खिलाफ भाषण वाजी , विरोध प्रदर्शन करवाते रहते है. बहुत तकलीफ़ होती है जब इंसान अपने स्वार्थ के कारण दूसरो की रोज़ी रोटी  पर लात  मारता है.

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अमरनाथ यात्रा (पहलगाम – चंदनवाड़ी – शेषनाग )

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पिस्सू टॉप की चढ़ाई वास्तव मे एक  कठिन चढ़ाई   है. घोड़े  पर बैठे हुए डर  लग रहा था. इससे  पिछले  वर्ष हम केदारनाथ यात्रा पर गये थे , वाहा 14 किलोमीटर की चढ़ाई  है, हम उस रास्ते को देख कर सोचते  थे कि कितना कठिन रास्ता है परंतु यहा तो रास्ता ही नही था रास्ते के नाम पर उबड़ -खाबड़ पगडंडी है, कई जगह पर तो ऐसा लगा की अब गिरे तो तब गिरे. सबसे बरी दिक्कत तो तब होती है जब घोड़ा पहाड़ से नीचे को उतरता  है.ऐसा लगता है , कई लोग गिर भी जाते है, पिस्सू टॉप से शेषनाग के बीच एक बहुत सुंदर झरना गिर रहा है उसके थोड़ा पहले हमे घोड़े  वाले ने उतार दिया और बताया यहाँ से लगभग 1 किलोमीटर . आगे तक पैदल चलना होगा क्योकि घोड़े  से जाने का रास्ता नही है. अब हम पैदल आगे चल दिए, रास्ते  मे वर्फ़ के  ग्लेसियार के बाद  खूबसूरत झरना बह रहा था, 

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इंदौर – मध्य प्रदेश का कोहिनूर / ट्रेज़र आईलेंड में सैर सपाटा

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ट्रेज़र आईलेंड के मुख्य आकर्षणों में Max Retail, PVR, McDonalds, Pizza Hut आदि हैं, और ये सब मध्य प्रदेश में सबसे पहले यहीं यानी इंदौर के ट्रेज़र आईलेंड में ही शुरू हुए. हर बजट को सूट करती हुई शौपिंग के लिए इंदौर में ट्रेज़र आईलेंड से बढ़कर और कोई जगह नहीं है. इंदौर के युवाओं की तो यह जगह पहली पसंद है. लैंडमार्क ग्रुप ने भारत में अपने पहले रिटेल स्टोर की शुरुआत ट्रेज़र आईलेंड इंदौर से ही की थी. यह मॉल नॉएडा तथा गुडगाँव के मॉल्स की टक्कर का है. सभी उम्दा ब्रांड्स के शोरूम्स से सजे धजे इस मॉल में स्टेट ऑफ़ आर्ट एस्केलेटर्स भी लगे हैं. यह इंदौर ही नहीं समूचे मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा मॉल है. इंदौर के लोगों के लिए तो ट्रेज़र आईलेंड किसी टूरिस्ट स्पॉट से कम नहीं है.

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