Religious

Holi at Holy Place of Mathura-Vrindavan

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When you will reach Temple, you can see people doing arti at Temple gate, as inside of Temple was quite crowded. Then everyone was entering inside through bit random queue, Priests were throwing colors on crowd, even everyone was throwing colors inside temple to show their happiness in celebrating holi with Lord Krishna, It’s an unbelievable experience to be a part of this event. When you are there you can’t see everything but just feel the blessing of that divine environment.

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हस्तिनापुर के राजा परीक्षित का शुक्रताल: मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश

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यहाँ पहुँचने के लिए गूगल मैप्स के भरोसे ना रहें क्यूंकि मैप में शुक्रताल को लोकेट नहीं किया जा सकता. वैसे रास्ता बहुत सरल है और मुज़फ्फरनगर बाई पास से मात्र ३५ मिनट में सुगमतापूर्वक आप शुक्रताल पहुँच सकते हैं.

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शिव खोडी – SHIV KHODI

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भोले बाबा के दर्शन करके, नीचे रन्सू में आकर के भोजन करके तृप्त हुए और जम्मू की और चल दिए. बारिश और आंधी तूफ़ान बहुत तेज था. पहाड़ के एक मोड पर हमारी बस कि टक्कर एक ट्रेक्टर ट्राली से हो गयी. वह टक्कर लगते ही पलट गयी. बस पीछे की  और खिसकने लगी. पीछे सैकड़ों फीट गहरी खाई थी.

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The Living Stone

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It is a very small temple which has sixty four Yogini figures placed inside the circular wall. Each Yogini has a name and special characteristic such as one with lion face, one with a monkey face, one standing on a human head or one standing in fire and so on. There are a few Yogini temples all over India and all are circular in shape depicting the ‘Yoni’.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू

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स्थानीय लोगों के अनुसार आकाश से गिरने वाली जोरदार बिजली भगवान महादेव के इस मंदिर में विराजमान पवित्र शिवलिंग पर गिरती है, जो इस पवित्र शिवलिंग को टुकड़ों में बिखेर देती है। बिजली से खंडित हुए शिवलिंग के आसपास गिरे टुकड़ों को एकत्रित करके मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को फिर से शिवलिंग के आकर में जोड़ देते है. कुछ समय के पश्चात् चमत्कारी रूप से शिवलिंग अपने आप पहले की तरह पूर्ण रूप में परिवर्तित हो जाता है।

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Haridwar – Stairway to heaven revisited

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In the dead silence of the night, the gushing sound of the fast flowing river sounded like heavenly music. Soothing, mesmerizing and it deported you a heavenly bliss. It was like being hypnotized, lifting the spirits to incredible heights. I can’t recall when I went off to sleep; but when I got up early morning, I walked to the bank of the river and watched it flowing away gingerly. I have never forgotten that river sound since then.

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आस्था और सुन्दरता का संगम – स्वर्ण मंदिर अमृतसर

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आप को बता दू की अगर बॉर्डर देखने का मन हो तो सुबह या 12/1 बजे तक भीड़ बढ़ने से पहले हो आये ताकि इत्मीनान से देख सके और हो सकता है पाकिस्तानी रेंजर आपको चाय पानी पूछ ले…साधारण दिनों में बॉर्डर पे आपसी भाईचारा और मित्रता का माहौल रहता है दोनों और के सैनिको के मध्य..बातचीत हंसी मजाक..चलता रहता है.

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Mahabalipuram – ‘The Maha Destination’

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The boat jetty/flight of steps and the miniature shrine and the Varaha sculpture at the basement of the Shore Temple, which were discovered by the ASI between 1990 and 1993, were flooded. Controversies and debates among the archaeologists and historians still persist on the existence of similar structures, submerged into the sea.

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My Experience of Vaishno Devi, Ardhkumari Gufa and Shivkhori

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Just opposite to “Bhaint Shop”, there is cloak room 1. This is less crowded but a little far from bhawan. Due to less crowd, we preferred that and deposited all our luggage, belt and shoes in that cloak room. Would like to remind, you will need to show your yatra slip over here to obtain cloak room. Another 2 cloak rooms (2 and 3) are near bhawan but are overcrowded. There is not much distance between cloak room 1 and 2 & 3.

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पुष्कर की यात्रा : कबीरा मन निरमल भया….

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न्दिर से बाहर आ जायो तो ये शहर वही है, जिसका तिलिस्म आपको चुम्बक की तरह से अपनी और आकर्षित करता है | शहर की आबो-हवा मस्त, गलियाँ मस्त, जगह-जगह आवारा घूमती गायें मस्त और सबसे मस्त और फक्कड़ तबियत लिये हैं इस शहर के आम जन और साधू | हर मत, सम्प्रदाय के साधू आपको पुष्कर की गलियों में मिल जायेंगे, हाँ, ये बात अलग है कि असली कौन है और फर्जी कौन इसकी परख आसान नही | मोटे तौर पर सबकी निगाह फिरंगियों पर होती है और फिर फिरंगी भी बड़े मस्त भाव से महीनो इनके साथ ही घूमते रहते हैं, पता नही भारतीय दर्शन के बारे में कितना वो जान पाते होंगे या कितना ये बाबा लोग उन्हें समझा पाते होंगे पर इन्हें देखकर तो पहली नज़र में कुछ यूँ लगता है जैसे गुरु और भक्त दोनों ही भक्ति के किसी ऐसे रस में लींन हैं जिसकी थाह पाना आसान नही, जी हाँ पुष्कर इस के लिए भी जाना जाता है | वैसे, ये बाबा लोग अपने इन फिरंगी भक्तों पर अपना पूरा अधिकार रखते हैं और आपको इन से घुलने-मिलने नही देते |

इस शहर की धार्मिकता, और आध्यात्मिकता के इस बेझोड़ और आलौकिक रस में डूबे-डूबे से आप आगे बढ़तें हैं तो घाट के दूसरी तरफ ही गुरु नानक और गुरु गोबिंद सिंह जी की पुष्कर यात्रा की याद में बना ये शानदार गुरुद्वारा है, पुष्कर में आकर इस गुरूद्वारे के भी दर्शन ! और ऊपर से लंगर का समय ! लगता है ऊपर जरुर कोई मुस्करा कर अपना आशीर्वाद हम पर बरसा रहा है…ज़हे नसीब !!!

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा

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खीर गंगा का प्रमुख आकर्षण यहाँ बना हुआ प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड “पार्वती कुंड” है. प्राचीन मान्यता के अनुसार खीर गंगा में प्राचीन समय में खीर बहती थी जो पहाड़ों के बीच से होकर पार्वती कुंड में गिरती थी. वर्तमान में भी पार्वती कुंड के पानी का रंग सफ़ेद है और खीर की मलाई जैसे छोटे-छोटे कतरे पार्वती कुंड के पानी में देखे जा सकते है. इसी कारण से इसका नाम खीर गंगा पड़ा. पार्वती कुंड में नहाने से पहले कुंड की पवित्रता बनाये रखने के लिए कुंड के बाहर गिरते पानी में नहाना आवश्यक है.

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