Himachal Pradesh

In the lap of the great Himalayan Ranges lies this mesmerising state of Himachal Pradesh. Possessing an enviable diversity of natural beauty, Himachal Pradesh cradles snow capped mountains, snow fed rivers, dense deodar forests, cultivated terraces and apple orchards within itself. Fondly called as Devbhumi or land of the Gods, this land welcomes visitors to enjoy the natural splendour of Rajgarh Valley, Chail, Great Himalayan National Park and Pin Valley National Park. For a peek into the past, there are historical sites like Sujanpur Tihra and Kangra Fort.
Bird watchers would love the Maharana Pratap Sagar Lake Sanctuary, which attracts multitudes of migratory ducks from the Siberian region during winter months. Himachal Pradesh has pleasant summers and cold winters with snowfall in some places. Many favoured destinations for those who wish to get away from the heat of the plains are the hill stations of Simla, Dalhousie, Kasauli, Manali and Chail.

Baralacha-la pass at an altitude of 4890 meters

To Leh by road : Journey from Chandigarh – Srinagar – Kargil

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Had a lunch/prayer break at world’s second coldest inhabited place Drass (after Siberia). Winters in Drass are cold with average lows around −22 °C and as low as −45 °C at the peak of winter. The lowest temperature was recorded around −60 °C during 2005. We were told by some locals that everybody in mountain keeps at least 4 to 6 months food stock for emergencies.

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The best of KASOL and TOSH in winters

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Hill top of tosh was completely covered with snow, we took some pics and then we started looking for hotels to stay, there were many hotels like: pink floyd, hill top, blue diamond. We checked facilities and rates in each and finally we choose blue diamond to stay. There we got a big room with 5 beds which was sufficient for 6 people, we were all wet, as it was raining when we were trekking to hill top of tosh, so we decided to play in snow and then change. We locked our room and went down to play in snow, we were literally freezing in that temperature, and it was around -2 degree celcius at that time.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू

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स्थानीय लोगों के अनुसार आकाश से गिरने वाली जोरदार बिजली भगवान महादेव के इस मंदिर में विराजमान पवित्र शिवलिंग पर गिरती है, जो इस पवित्र शिवलिंग को टुकड़ों में बिखेर देती है। बिजली से खंडित हुए शिवलिंग के आसपास गिरे टुकड़ों को एकत्रित करके मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को फिर से शिवलिंग के आकर में जोड़ देते है. कुछ समय के पश्चात् चमत्कारी रूप से शिवलिंग अपने आप पहले की तरह पूर्ण रूप में परिवर्तित हो जाता है।

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Kasauli Chalein !!!!

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We ended our first day at the Gilbert’s Trail and headed towards our hotel. Though our hotel was a little away from the main town, but it had lovely location and views. We spent some quality time walking on the pathway leading to the main road, we did countless round of walking but none of us felt anything called tiredness, and at the passageway we made some moments which will be cherished throughout our lives.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — तोष, कसोल और छलाल

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कसोल से लगभग दो किलोमीटर दूर छलाल गांव तक इस पुल को पार करने के बाद केवल पैदल ही जाया जा सकता है. छलाल गांव में जाने वाला रास्ता पार्वती नदी के किनारे है. रास्ते के एक ओर पार्वती नदी के जल का मधुर स्वर पूरे रास्ते आपके कानों से टकराता रहता है. और दूसरी ओर ऊँचे पर्वत इस मार्ग को मनोहारी बना देते है. देवदार के घने वृक्षों से होकर छलाल गांव तक की पदयात्रा का अनुभव अपने आप में अनूठा है.
छलाल गांव में पहुँचने पर शाम हो चुकी थी. रात्रि विश्राम के लिए छलाल में रूककर अगले दिन आगे की यात्रा का निर्णय लिया.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा से वापसी

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नकथान में ग्रामवासियों को दैनिक जीवन के क्रिया कलापों को करते देखा जा सकता है. अपने आस-पास उपलब्ध दैनिक जीवन के सीमित सुविधा, संसाधनों से संतुष्ट यहाँ के लोग जीवन को वास्तविक रूप में जीते हैं. झरनों का बहता स्वच्छ-शुद्ध जल, पहाड़ों से होकर आती शीतल सुगन्धित वायु, पहाड़ों के बीच बहती पार्वती नदी, छोटे-छोटे खेत और बागों में उगने वाले फल, सब्जी और अन्न और साथ में रहने वाले सहयोगी पशु. जीवन को वास्तविक रूप में जीने के लिए बस इतना ही चाहिए इसके अतिरिक्त बाकी सब जीवन को और अधिक सुविधा-संपन्न बनाने की कभी न ख़त्म होने वाली लालसा ही है.

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Chandigarh to Mandi – The fast and furious highway ride

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It was a long long hill drive for sure and in such perfect conditions of roads that if I had any longing for hill drive then it should have been satisfied completely by now (Must have been 200 kms in hills in this journey). After having a bump free ride for at least 400-450 kms till now, finally I was to face reality.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा

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खीर गंगा का प्रमुख आकर्षण यहाँ बना हुआ प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड “पार्वती कुंड” है. प्राचीन मान्यता के अनुसार खीर गंगा में प्राचीन समय में खीर बहती थी जो पहाड़ों के बीच से होकर पार्वती कुंड में गिरती थी. वर्तमान में भी पार्वती कुंड के पानी का रंग सफ़ेद है और खीर की मलाई जैसे छोटे-छोटे कतरे पार्वती कुंड के पानी में देखे जा सकते है. इसी कारण से इसका नाम खीर गंगा पड़ा. पार्वती कुंड में नहाने से पहले कुंड की पवित्रता बनाये रखने के लिए कुंड के बाहर गिरते पानी में नहाना आवश्यक है.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — मणिकर्ण

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गुरुद्वारा श्री मणिकर्ण साहिब के अतिरिक्त यह स्थान अपने गर्म पानी के स्रोतों के लिए भी प्रसिद्ध है. खौलते पानी के स्रोत मणिकर्ण का सबसे अचरज भरा और विशिष्ट आकर्षण हैं. इन स्रोतों के गंधकयुक्त गर्म पानी में कुछ दिन स्नान करने से चर्म रोग या गठिया जैसे रोगों में विशेष लाभ मिलता है. इस पानी में गंधक के कारण अधिक देर तक नहाने से चक्कर भी आ सकते हैं. इन्हीं स्रोतों के गर्म पानी का उपयोग गुरुद्वारे के लंगर के लिए चाय बनाने, दाल व चावल पकाने के लिए किया जाता है. गर्म पानी के इन स्रोतों में पानी के तापमान का अनुमान नीचे दिया गए विडियो से लगाया जा सकता है.

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