Religious

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा

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खीर गंगा का प्रमुख आकर्षण यहाँ बना हुआ प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड “पार्वती कुंड” है. प्राचीन मान्यता के अनुसार खीर गंगा में प्राचीन समय में खीर बहती थी जो पहाड़ों के बीच से होकर पार्वती कुंड में गिरती थी. वर्तमान में भी पार्वती कुंड के पानी का रंग सफ़ेद है और खीर की मलाई जैसे छोटे-छोटे कतरे पार्वती कुंड के पानी में देखे जा सकते है. इसी कारण से इसका नाम खीर गंगा पड़ा. पार्वती कुंड में नहाने से पहले कुंड की पवित्रता बनाये रखने के लिए कुंड के बाहर गिरते पानी में नहाना आवश्यक है.

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हरिद्वार से यमनोत्री

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मंदिर पहुँच कर  गर्म कुंड मे स्नान किया. यहाँ पर काफ़ी भीड़ थी. पर स्नान मे कोई दिक्कत नही हुई. कुंड का  जल ज़्यादा गर्म ना हो इसलिए ठंडे पानी की  पतली धार कुंड मे गिर रही थी. और यह ज़रूरी भी था क्योकि इस कुंड से उपर दिव्य शिला पर जो कुंड है उसमे तो इतना गर्म पानी है कि सभी लोग पूजा के चावल उसमे पकाते है. जैसा कि  मैने पढ़ा था की दर्शन से पहले मंदिर के बाहर दिव्या शिला का पूजन करते है उसके बाद दर्शन के लिए जाते है. गर्म कुंड मे स्नान कर के कपड़े बदल ही रहा था कि  तभी पंडा लोग आ कर पूजा करने का आग्रह करने लगे. पूजा तो करनी ही थी मैने पूजा से पहले  पंडा से पूछ  लिया की कितने पैसे लोगे पर सभी कह रहे थे आप अपनी श्रधा  से दे देना. कई लोगो ने डरा दिया था की यहाँ पंडा लोग बहुत पैसे  ले लेते है. इसलिए मैने पहले ठहरा लेना उचित समझा. जब वह श्रधा  की बात करने लगे तो मैने कहा 201 रुपये दूँगा. वह बोले ठीक है अब हम अपने परिवार के साथ उनके  मंदिर के पास बने प्लेटफोर्म पर पहुचे. यहाँ पर बहुत सारे लोगो को पंडा लोग पूजा करवा रहे थे एक जगह बैठा कर पूजा करनी शुरू की. मै  समझा करता था कि   कोई शिला  होगी पर शिला तो कोई नज़र नही आई तब मैने पंडा जी से पूछा तो उन्होने बताया की जिस स्थान पर बैठे है यही दिव्या शिला है. पूजा के बाद पंडा जी ने कहा, अब आप लोग माँ  यमुना जी के दर्शन कर लो जब तक आपके चावल भी पक जाएँग. यमञोत्री मे प्रसाद  के रूप मे चावल गर्म कुंड मे पका कर यात्री ले जाते है. मंदिर मे ज़्यादा भीड़ नही थी माँ यमुना की मूर्ति काले पत्थर की  बनी है उनके साथ माँ  गंगा की भी मूर्ति स्थापित है. दर्शन कर  के बाहर आया तब तक पंडा गर्म कुंड मे पके हुए चावल की पोटली ले कर आ गये. मैने कही पढ़ा था की यहाँ एक ऋषि रहते थे जो रोज गंगा नहाने पहाड़ पार कर के गंगोत्री जाते थे जब वह काफ़ी उम्र  के हो गये और पहाड़ पार  कर जाना संभव नही हुआ तब माँ  गंगा से उन्होने प्राथना की तब गंगा वही प्रकट हो गई . कहते है यहाँ यमनोत्री मे एक धारा गंगा की भी  बहती है. मैने जब इस बारे मे पंडा जी से पूछा तब उन्होने अनभीग्यता प्रकट की. अब मैने सोचा की यहाँ तक आए है तो यमुना जी का जल तो ले चलना चाहिए. मंदिर के साथ से ही यमुना जी बह रही है. 1-2 लोग वहाँ पर जल ले रहे थे मैने भी एक बोतल मे जल भरा,  पत्नी और बच्चो को भी बुला कर यमुना जी के दर्शन कराए. एक तरह से यहाँ पर यमुना जी पहले दर्शन होते है. यमुना जी का जल एक दम स्वच्छ  पारदर्शी है और पीने मे बहुत अच्छा लगा यही जल दिल्ली पहुच कर किस अवस्था मे हम कर देते है यह तो दिल्ली वाले ही जानते है. जल इतना ठंडा था कि   बड़ी मुश्किल से बोतल मे भर पाया.

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पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — मणिकर्ण

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गुरुद्वारा श्री मणिकर्ण साहिब के अतिरिक्त यह स्थान अपने गर्म पानी के स्रोतों के लिए भी प्रसिद्ध है. खौलते पानी के स्रोत मणिकर्ण का सबसे अचरज भरा और विशिष्ट आकर्षण हैं. इन स्रोतों के गंधकयुक्त गर्म पानी में कुछ दिन स्नान करने से चर्म रोग या गठिया जैसे रोगों में विशेष लाभ मिलता है. इस पानी में गंधक के कारण अधिक देर तक नहाने से चक्कर भी आ सकते हैं. इन्हीं स्रोतों के गर्म पानी का उपयोग गुरुद्वारे के लंगर के लिए चाय बनाने, दाल व चावल पकाने के लिए किया जाता है. गर्म पानी के इन स्रोतों में पानी के तापमान का अनुमान नीचे दिया गए विडियो से लगाया जा सकता है.

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A Tour to Kolkata’s Top Kali Puja Pandals

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The next destination for parikrama was the worship of Shri Krishna Kaali where the Maa is depicted as Lord Krishna. According to legends in Vrindavana, when Radha rani came to worship Lord Krishna, radharani’s mother in law Kutilaa compained to Radha’s husband Ayan that she is worshipping Krishna. When Ayan himself went to verify the same , Lord Krishna took the form of Kali in Krishna Kaali roopa and henceforth this sweet incarnation came to be known as Krishna Kali.

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Shrikhand Mahadev – Unexplored Himachal

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Himachal is an interesting place. Isn’t it? I would like to post my writings on unexplored Himachal to give a off the road view and a different Himachal to let you all see. Shrikhand Mahadev is one such place. Its hidden. Its unexplored. Not many people know it or visit here. Its purely natural. No hick ups. Best place for people who enjoy trekking. Actually i love to go to such places.

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वज्रेश्वरी के गर्म पानी के स्रोतों का आश्चर्य

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एक-दूसरे पर जल के छीटें फेंकना, हंसी-मज़ाक करना, पानी के बीच अपनी फोटो खिंचवाना इत्यादि जल-क्रियाओं से लोग खुशियाँ मना रहे थे. तैरना जानने वाले लोग तो उस नदी के बीचो-बीच तैर रहे थे. कुछ स्त्रीयां नदी के तट पर बैठ कर अपनी-अपनी अंजुलियों में किनारे पर आई हुईं छोटी-छोटी मछलियों को पकड़ने की चेष्टा कर रहीं थीं.

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माता वैष्णो देवी की यात्रा – मैया रानी का प्यार मुझे भी मिला अबकी बार

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लगभग दो घंटो की प्रतीक्षा के बाद अंततः वो समय आ ही गया जब मे माता जी किी पिंडियो के दर्शन करने हेतु पवित्र गुफा मे प्रवेश कर रहा था. गुफा की दीवारों से रिस्ता हुआ प्राकृतिक जल जब आपके शरीर पर पड़ता है तो मानो अंतर-आत्मा तक को भीगा डालता है और जिस सच की अनुभुउति होती है वह तो अतुलनीया है. धीरे-2 मैं माता किी पिंडियो तक भी पहुँच गया जिनके दर्शन करते ही नेत्रो मे सुकुउन और मन को आराम मिल जाता है. ऐसी अदभुत शक्ति का आचमन मात्रा ही कुछ पलों के लिए हमारे मन से ईर्ष्या, राग और द्वेष जैसे दोषो को समाप्त कर देता है और बदन एक उन्मुक्त पंछी की भाँति सुख के खुले आकाश मे हृदय रूपी पंख फैलाकर हर उस अनुभूति का स्वागत करने लगता है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नही की थी. मुझे स्वयं भी यह आभास हो रहा था की पवित्र गुफा के प्रवेश द्वार पर मेरा चंचल चित्त कहीं पीछे ही छूट चुका है और निकास मार्ग तक पहुँचते-2 वो अब काफ़ी शांत व गंभीर हो गया है, लगता है मानो कुछ पा लिया हो.

माता जी के दर्शानो के उपरांत समीप ही स्थित शिव गुफा मे भी मत्था टेकने और पवित्र गुफा मे बहते अमृत जल का आचमन करने के बाद मैं बहुत देर तक माता के भवन को निहारता ही रहा और इसकी सुंदरता भी देखते ही बनती थी, शायद नवरात्रि के उपलक्षय मे इसे विशेष रूप से सजाया गया था. यह वो पल थे जब मैने स्वयं को उस गूगे के समान्तर पाया जो मीठे फल का आनंद तो ले सकता है किंतु चाहकर भी उसका व्याख्यान नही कर सकता.

तत्पश्चात मैने समीप ही स्थित सागर रत्ना मे रात्रि का डिन्नर करने के पश्चात एक दूसरे ढाबे से सुजी का हलवा लिया और एक खुले स्थान पर जाकर माता के भवन की तरफ मुख करके खड़ा हो उसे खाने लगा. यहाँ यह ज़रूर बता देना चाहूँगा की मात्र रु 20 का यह हलवा कम से कम रु 250 के भोजन से स्वादिष्ट था जो मैने सागर रत्ना मे खाया था. इस वक्त तक शाम पूरी तरह से घिर आई थी और तेज सर्द हवाओं का दौर शुरू हो चुका था. माता जी का भवन जग-मग रोशनी मे नहा रहा था और मेरा मन उन तेज हवाओं मे भी यहीं टीके रहने को आतुर था और यहाँ खड़े-2 मे जल्दी ही एक डोना गर्मागर्म हलवा और एक कप कॉफी हजम कर चुका था.

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Soul of Kolkata – Festivals, Food, and Sports

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Calcutta also known as the city of festivals almost remains enlightened all through the year with various festivals every now and then. Whether it’s Durga Puja, Kali Puja, Laxmi Puja, Kartik Puja, Vishwakarma Puja, Holi, Diwali, Christmas or whatever, the city enjoys them all with full celebration. Durga Puja is ideally the biggest festival of Calcutta (and West Bengal). The city of Calcutta has a completely different look.

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उज्जैन यात्रा

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फिर अगले दिन हमने उज्जैन दर्शन किया महाकाल एरिया के पास आपको बहुत से ड्राइवर अपना कार्ड देंगे जिसमे घूमने की जगहों के नाम होंगे आप उसमे खुद अपनी इच्छा से नाम जोड़ और हटा सकते हैं हमारा ड्राइवर जो खुद एक मुस्लिम था पर उसकी भक्ति और ज्ञान देखकर हम बहुत प्रभाभित हुए, उसने हमें एक एक जगह का महत्व बताया और अच्छे से दर्शन करवाये, आप यदि उसका नंबर चाहते हैं तो नोट कर लीजिये नाम : ज़ाकिर ०८३४९८२५२०७ और गाड़ी थी मारुती वैन I

हमने शुरुआत की श्री रामकृष्ण आश्रम उज्जैन से जो की मानव सेवा में लगा हुआ है यहाँ पर एक सुंदर फिजियोथेरेपी क्लिनिक है जो गरीबो की सेवा करती है, हमने आश्रम की सुंदरता निहारते हुए जप किया और मंदिर के दर्शन किये I आश्रम में दान दिया और प्रसाद ग्रहण किया

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मुंबई की गुफाएँ – जोगेश्वरी देवी की खोज में

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इतने में कुछ विदेशी पर्यटक आ गए. बड़े-बड़े कैमरों के साथ. वे भी हनुमान मंदिर की तरफ जा रहे थे. मैं भी उनके पीछे चल पड़ा. वो रास्ता एक बड़े-से आँगन से हो कर जाता था, जिसके दोनों तरफ गुफ़ाएँ बनीं हुईं थीं. मेरे पुरोहित ने बताया था कि वर्तमान का वो आँगन पूर्व-काल में गुफ़ा ही था, जिसकी छत कालांतर में गिर चुकी थी. अगर वह गुफा का हिस्सा था, तब तो एक जमाने में वह गुफा बहुत-ही विशाल रही होगी. खैर आँगन से गुजर कर हम हनुमान-मंदिर पहुँचे और वहां दर्शन किया. मंदिर एक गुफा में बना हुआ था. कोई ज्यादा लोग नहीं थे. वहां से तुरंत ही सभी निकल पड़े और फिर गणेश मंदिर तक आये. वह नजदीक ही था. वह भी एक गुफा में बना हुआ था.

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