Ujjain

Hindu Mythology says that Ujjain was blessed with the nectar drops that fell when the devas and the asuras fought a fierce battle to gain possession of the nectar got from the churning of the ocean. Thus Ujjain and River Shipra that flows beside it are considered holy and a very important place of pilgrimage for Hindus. Situated in the Malwa plateau of Madhya Pradesh, Ujjain is also the holy land of Lord Makakaleshwar. There are numerous holy sites in the city including Mahakaleshwar Temple, Bade Ganeshji Ka Mandir and Bhartrihari Caves. Of historical interest are Durgadas Cenotaph and Kaliadeh Palace (built in Persian architectural style). This religious city is also a learning centre for the ancient language Sanskrit and for Astrology. Ujjain is accessible by railways and well built highways with other parts of the country, while the nearest airport is at Indore.
Best Time to Visit: November to March
Languages Spoken: Hindi
Climate: Hot summers, average monsoon, pleasant winters
Holy places: Mahakaleshwar Temple, Bade Ganeshji Ka Mandir, Bhartrihari Caves
Heritage sites: Durgadas Cenotaph, Kaliadeh Palace

The Water Symphony

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Omkareshwar , one the 12 revered Shiv temples ( Jyoteerling) is actually on an island called Mandhata in Narmada. On the south bank you will find the Mamaleshwar also among the 12. The town is similar to all temple towns all over India, full of small lanes packed with Pooja shops and hotels, a free passage to all living animals including humans, devotees and pestering priests and in addition there were flocks of flies as the monsoon special. Omkareshwar is a modern looking temple from the outside however we know the place is ancient and there are ornate pillars inside the temples which give a glimpse of the old temple. Everything inside the temple is to ensure that you should not feel peaceful. The ceramic tiles, the water abhishek mechanism where water goes in a tube and then gets poured on the shivlinga, the overbearing crowd of priests offering a menu card of abhishek in various types and costs. The only time you find solace is when you come out and look at the serene Narmada. That is the real ‘Darshan’ for me.

Mamaleshwar on the other bank is visible from this side with its ornate high shikhar and a red flag fluttering to show the location amongst the crowd of several other small temples and houses. All built in red sandstone, Mamaleshwar has that special quality of providing a devotional experience to the visitor. The temple is typical Nagar style with up-swinging Shikhar. There are many small and medium temple structures in the clean premise. The elaborate door frames and beautiful sculptures on the outer walls of temples are worth a watch. In the premise, we also find several pieces of temple structure strewn away. A lone ‘amalak’ the round top of the shikhar, some carvings and ‘chandrasheela’ – an ornate step to get into the Garbhagriha are all there stashed away, silently suffering the passage of time.

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जंतर मंतर / वेधशाला उज्जैन – (भाग 10)

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महाकाल के दर्शनो के बाद हम लोगों ने नाश्ता किया और नाश्ते के बाद हमने एक ऐसे ऑटो कि तलाश शुरू कि जो हमें जंतर मंतर , जिसे वेधशाला भी कहते हैं , ले जाए। हमारी गाडी का समय दोपहर का था और उसमे अभी काफी समय था इसलिए हम लोग जंतर मंतर घूमना चाहते थे । आज रंग पंचमी का दिन था और यहाँ काफी धूम धाम थी। जैसे हमारे उतर भारत में होली मनाई जाती है वैसे ही यहाँ रंग पंचमी। इसलिए ज्यादातर दुकाने बंद थी और जो खुली थी वो भी सिर्फ कुछ घंटो के लिए। आज रंग पंचमी होने के कारण ऑटो भी काफी कम थे। जो थे वो ज्यादा पैसे मांग रहे थे। आखिर कुछ मोलभाव के बाद एक ऑटोवाला हमें जंतर मंतर / वेधशाला होते हुए रेलवे स्टेशन जाने के लिए 150 रुपये में मान गया। हम ऑटो में सवार हो अपनी नयी मंजिल जंतर मंतर / वेधशाला की ओर चल दिए ।
ऑटो वाला हमें उज्जैन की कुछ सुनसान सडकों से घुमाता हुआ 15-20 मिनट में जंतर मंतर ले आया। सुनसान सडकों पर जाने का उसका उदेश्य केवल हमें व अपने नए ऑटो को रंग से बचाना था। हम उसे बाहर प्रतीक्षा करने को कह जंतर मंतर में प्रवेश कर गए। यह स्थान महाकालेश्वर से 3 किलोमीटर की दुरी पर चिंतामन रोड पर स्थित है जहाँ से रेलवे स्टेशन की दुरी मात्र 2 किलोमीटर है। यहाँ प्रति व्यक्ति 10 रूपये प्रवेश शुल्क है। जब हम वहाँ पहुंचे तो हमारे अलावा वहाँ कोई भी नहीं था। अंदर जाकर देखा तो एक व्यक्ति नजर आया जो वहाँ का केअर टेकर था । उसने आकर हमें टिकट दिए और छोटी सी फ़ीस पर खुद ही गाइड का काम करने लगा। उसने हर यंत्र के बारे में बताया जिसमे से हमें थोडा सा समझ आया बाकी सब कुछ सर के ऊपर से निकल गया। हमारे पहुँचने के थोड़ी देर बाद वहाँ कुछ लोग और आने लगे और वो केअर टेकर उनके साथ व्यस्त हो गया।

वेधशाला, उज्जैन:
उज्जैन शहर में दक्षिण की ओर क्षिप्रा के दाहिनी तरफ जयसिंहपुर नामक स्थान में बना यह प्रेक्षा गृह “जंतर महल’ के नाम से जाना जाता है। इसे जयपुर के महाराजा जयसिंह ने सन् 1733 ई. में बनवाया। उन दिनों वे मालवा के प्रशासन नियुक्त हुए थे। जैसा कि भारत के खगोलशास्री तथा भूगोलवेत्ता यह मानते आये हैं कि देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती है। अतः यहाँ के प्रेक्षागृह का भी विशेष महत्व रहा है।
यहाँ पांच यंत्र लगाये गये हैं — सम्राट यंत्र, नाडी वलय यंत्र, दिगंश यंत्र, भित्ति यंत्र एवं शंकु यंत्र है। इन यंत्रों का सन् 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया ने मरम्मत करवाया था।

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महाकालेश्वर दर्शन व पुन: दर्शन (भाग 9)

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महाकालेश्वर मंदिर एक परकोटे के भीतर स्थित है। गर्भगृह तक पहुँचने के लिए एक सीढ़ीदार रास्ता है। इसके ठीक उपर एक दूसरा कक्ष है जिसमें ओंकारेश्वर शिवलिंग स्थापित है। महाशिवरात्रि एवं श्रावण मास में हर सोमवार को इस मंदिर में अपार भीड़ होती है। मंदिर से लगा एक छोटा-सा जलस्रोत है जिसे कोटितीर्थ कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इल्तुत्मिश ने जब मंदिर को तुड़वाया तो शिवलिंग को इसी कोटितीर्थ में फिकवा दिया था।

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उज्जैन दर्शन: श्री सिद्धवट मंदिर, मंगलनाथ मंदिर और सान्दीपनि आश्रम (भाग 8)

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संदीपनी आश्रम परिसर में स्थित श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में 6000 वर्ष पुराना शिवलिंग स्थापित है । ऐसा माना जाता है कि इसे महर्षिसंदीपनी ने बिल्व पत्र से उत्पन्न किया था। इस शिवलिंग की जलाधारी में पत्थर के शेषनाग के दर्शन होते हैं जो प्रायः पुरे भारत वर्ष मेंदुर्लभ है। अधिकांश मंदिरों में नंदी की मूर्ति बैठी हुई अवस्था में ही होती है। इस शिवलिंग के सामने, मंदिर के बाहर खड़े हुए नंदी की एक छोटी सी दुर्लभ मूर्ति है।

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उज्जैन दर्शन: गढ़कालिका मंदिर और श्री काल-भैरव मन्दिर (भाग 7)

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उज्जैन की केन्द्रीय जेल के सामने से होते हुए हम लोग श्रीकाल भैरव मन्दिर जा पहुँचे। मंदिर के बाहर सजी दुकानों पर हमें फूल, प्रसाद के साथ-साथ मदिरा की छोटी-छोटी बोतलें भी सजी नजर आईं। यहाँ कुछ श्रद्धालु प्रसाद के साथ-साथ मदिरा की बोतलें भी खरीदते हैं। ऐसी ही एक दुकान पर हम परसाद लेने के लिए रुके तो दुकानदार हमसे मंदिर में भैरों बाबा को पिलाने के लिए मदिरा लेने की जिद्द करने लगा। यहाँ पर लगभग हर ब्रांड की शराब उपलब्ध थी लेकिन शराब का रेट काफी तेज था, लगभग दुगना।

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उज्जैन दर्शन: श्री बड़ा गणेश मंदिर, क्षिप्रा घाट, चारधाम मंदिर व श्री राम मंदिर (भाग 6)

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भारत के हर कोने में भगवान गणेश जी के मंदिरों को देखा जा सकता है और उनके प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है, बडे गणेश जी का मंदिर, जो उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के निकट हरसिध्दि मार्ग पर स्थित है। इस मंदिर में भगवान गणेश जी को बडे गणेश जी के नाम से जाना जाता है।

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हरसिद्धि शक्तिपीठ दर्शन (भाग 4)

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शिव पुराण के मान्यता के अनुसार जब सती बिन बुलाए अपने पिता के घर गई और वहां पर राजा दक्ष के द्वारा अपने पति का अपमान सह न सकने पर उन्होंने अपनी काया को अपने ही तेज से भस्म कर दिया। भगवान शंकर यह शोक सह नहीं पाए और उनका तीसरा नेत्र खुल गया। जिससे तबाही मच गई। भगवान शंकर ने माता सती के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठा लिया और जब शिव अपनी पत्नी सती की जलती पार्थिव देह को दक्ष प्रजापति की यज्ञ वेदी से उठाकर ले जा रहे थे श्री विष्णु ने सती के अंगों को बावन भागों में बांट दिया । यहाँ सती की कोहनी का पतन हुआ था। अतः वहाँ कोहनी की पूजा होती है। यहाँ की शक्ति ‘मंगल चण्डिका’ तथा भैरव ‘मांगल्य कपिलांबर हैं

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ममलेश्वर दर्शन (भाग 3)

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इसका सही नाम अमरेश्वर मंदिर है। ममलेश्वर मंदिर नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर 10 वीं सदी में बनाया गया था। यह मंदिरों का एक छोटा सा समूह है। अपने सुनहरे दिनों में इसमें दो मुख्य मंदिर थे लेकिन आजकल केवल एक बड़े मंदिर को ही भक्तों के लिए खोला जाता है। मंदिरों का यह समूह एक संरक्षित प्राचीन स्मारक है।

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अम्बाला से ओंकारेश्वर (भाग 1)

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मैं तो जाने के लिये एकदम तैयार था लेकिन कुछ समस्यायें थी। एक तो कार्यलय से इतनी लम्बी छुट़्टी मिलनी आसान नहीं थी और दूसरा घर से सहमति (अनुमति) लेना भी जरुरी था। मुझे पहला काम ज्यादा मुश्किल लगा और शुरुआत वहीं से की। बॉस ने कुछ ना नुकर के बाद कहा, ठीक है , अवकाश के लिये आवेदन कर दो देख लेंगे ।

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इन्दौर पहुंच गये हम!

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खाना खाने के बाद मैने तो लंबी तान ली और ये तीनों महिलाएं न जाने क्या – क्या गपशप करती रहीं। राजा की मंडी (आगरा) स्टेशन आया तो अपने घुमक्कड़ भाई रितेश गुप्ता की याद आई। उनसे सच्ची-मुच्ची वाली मुलाकात तो आज तक नहीं हो पाई पर फेसबुक पर गप-शप अक्सर ही होती रहती है। मैने उनको इस ट्रेन से जाने के बारे में सूचना नहीं दी हुई थी पर फिर भी न जाने किस आशा में, प्लेटफार्म पर उतरा, कुछ पल चहल-कदमी की और फिर वापिस ट्रेन में आ बैठा। बाहर अंधेरा होने लगा था और खिड़की से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, अतः सामने वालों पर ही ध्यान केन्द्रित किया। सोचा, बच्चों को कुछ ज्ञान की बातें बताई जायें। घुमक्कड़ का ज़िक्र शुरु कर दिया और बताया कि अगर उन्होंने वह वेबसाइट नहीं देखी तो समझो ज़िन्दगी में कुछ नहीं देखा। वहीं बैठे – बैठे रितेश, मनु, जाट देवता, डी.एल. अमितव, नन्दन, मुकेश-कविता भालसे, प्रवीण वाधवा आदि-आदि सब का परिचय दे डाला। रेलवे को भी कोसा कि लैपटॉप नहीं चल पा रहा है, वरना उनको घुमक्कड़ साइट भी दिखा डालता।

रात हुई, खाना खाया, कुछ देर किताब पढ़ी, फिर सामान को ठीक से लॉक करके और कैमरे वाले बैग को अपनी छाती से लगा कर सो गया। ग्वालियर में उतर कर अंधेरे में अपने मोबाइल से एक-दो फोटो खींचने का भी प्रयत्न किया पर कुछ बात कुछ बनी नहीं। सुबह पांच बजे आंख खुली और ट्रेन लगभग 7 बजे इन्दौर स्टेशन पर आ पहुंची।

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उज्जैन यात्रा

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अपने प्रसाद पुष्प जल को आरती के समय अपने पास ही रखे कई बार लोग पंडित और पुलिस वालो के कहने पे बहार ही चदा देते है ! हमसे भी यही गलती हुई थी लेकिन आप लोगो को सचेत करना जरुरी समझता हु !

बाबा के दर्शन करने के लिए सिर्फ २-३ मिनिट का समय मिलता है ! बाबा के दर्शन के बाद आप मंदिर के अन्दर ही बने कई और मंदिरों के दर्शन अवस्य करे ! और जिस प्रकार वैष्णु माता के लंगर में प्रसाद मिलता है उसी प्रकार महाकाल के मंदिर में भी प्रसाद के लिए एक टोकन मंदिर के अन्दर ही मिलता है एक सदस्य को सिर्फ एक टोकन ,बाबा का प्रसाद इतना स्वादिस्ट और लाजवाब होता है की बस पूछिए ही मत ! और वयवस्था तो इतनी शानदार है की तारीफे काबिल है टोकन ११ बजे से रात ८ बजे तक ही मिलता है प्रसाद में कभी रोटी ,कढी,चावल,सब्जी, मीठे चावल आदि !

मैं आप लोगो से स्पेसल आग्रह करना चाहूँगा की एक बार बाबा का प्रसाद अवस्य ग्रहण करे !

बाबा के दर्शन के बाद हम लोगो ने उज्जैन के दर्शनीय स्थलों को देखने का फैसला किया उसके लिए यहाँ कई साधन है जैसे की ऑटो , बस, वाहिनी, वेन आदि अपनी सुविधा के हिसाब से आप इनमे से कोई एक बुक कर सकते है ऑटो आपको ३०० रुपे में बुक हो जायेगा और वाहिनी और वन तक़रीबन ७०० रुपे लेंगे और बस ५० पर सवारी|

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Musical trip to Mahakal Nagri via Mecca Madina – 1

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So we entered in General coach. The train was full at 0715 hrs. First section was full of daily goers, some were reading news paper, few were sleeping and few were talking. There were few students also who were studying. The second section was full of ladies. I requested one of the ladies if she can shift and adjust us in one seat. They have shifted. So we got approximately 1.25 seat to accommodate 2.5 of us (me , my husband and my kid). Then I just turn around and was taking a glimpse of a train. It looked like as If I have rewinded my life and I had reached 10 years back when you are actually comfortable travelling in General coach. All beautiful ladies with beautiful bangles , nicely cladded saree or salwar suits , beautiful payal , toe rings etc etc. All were looking so beautiful and I was feeling jealous as my two gold bangles was nothing in front of colorful bangles. Being at Chennai Gold always means a lot here. But at Indore I was attracted towards those beautiful colorful glass bangles. Suddenly, I heard a song.

“Dheere Dheere se meri zindagi me aana, Dheere dheere se dil ko churana “..

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