उज्जैन यात्रा

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फिर अगले दिन हमने उज्जैन दर्शन किया महाकाल एरिया के पास आपको बहुत से ड्राइवर अपना कार्ड देंगे जिसमे घूमने की जगहों के नाम होंगे आप उसमे खुद अपनी इच्छा से नाम जोड़ और हटा सकते हैं हमारा ड्राइवर जो खुद एक मुस्लिम था पर उसकी भक्ति और ज्ञान देखकर हम बहुत प्रभाभित हुए, उसने हमें एक एक जगह का महत्व बताया और अच्छे से दर्शन करवाये, आप यदि उसका नंबर चाहते हैं तो नोट कर लीजिये नाम : ज़ाकिर ०८३४९८२५२०७ और गाड़ी थी मारुती वैन I

हमने शुरुआत की श्री रामकृष्ण आश्रम उज्जैन से जो की मानव सेवा में लगा हुआ है यहाँ पर एक सुंदर फिजियोथेरेपी क्लिनिक है जो गरीबो की सेवा करती है, हमने आश्रम की सुंदरता निहारते हुए जप किया और मंदिर के दर्शन किये I आश्रम में दान दिया और प्रसाद ग्रहण किया

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Atla and Nalateswari

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Next day we have time in hand so we decided to visit a Shakti peetha called “Nalhateswari Devi” According to the mythologies it is here where the “nala” or throat of goddess Shakti had fallen and so the shrine came to be known as the Maa Nalateswari. It is located in Nalhati, a municipality in Birbhum District of West Bengal near the West Bengal – Jharkhand border.

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The legendary Tarapith temple

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 In next 30 mins we were at Rampurhat station, for going to Tarapith one needs to take means of transport from here only. There are numerous mode of transport starting from e-rickshaws, Van-rickshaws, Autos and maruti omni.We hired an  Auto rickshaw for INR 300 and dumping our luggage we sat in bliss and waiting to reach our destination as soon as possible. The entire way towards Tarapith is now becoming commercialized day by day due to increasing number of devotees and mostly its now a weekend getaway as it serves both spiritual and fun peaceful sojourn for travelers.

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शिंगणापुर यात्रा – जहाँ शनि देव विराजते हैं

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आपको फिर बताना चाहूंगा की साई आश्रम में दर्शन की बायोमेट्रिक सिस्टम है जो में स्तिथ है और रिसेप्शन से सुविधा मिल जाती है ताकि अगर आपने ऑनलाइन पर्ची नहीं ली तो आप आश्रम में ही बॉयोमीट्रिक्स करवा के शाम या सुबह की मंदिर प्रवेश की पर्ची प्राप्त कर सकते हैं । इससे यह सुविधा मिलती है की आपको फिर मंदिर के गेट १ & २ के सामने लाइन से पर्ची लेने में जो समय लगेगा वह समय बच जायेगा और एक बार प्रसादालय से प्रसाद ज़रूर पाए, यह एक डिवाइन अनुभव होगा ।

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शिरडी , जहाँ साई बसते हैं

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आपको बता दूँ की ऑनलाइन पर्ची वालों के लिए गेट नंबर ३ या शनि गेट से एंट्री होती है जलपान होने के बाद हमने मंदिर संसथान के सामने ऑटो करने का फैसला किया पर सामने तांगेवाले को देख के मन ललचा गया और बुक करके मंदिर की और चल पड़े, मंदिर संसथान से १ किमी दूर है और १००० मीटर आपको पैदल चलना होगा रस्ते में दुकान वाले आपको चादर और प्रसादी के लिए बोलेंगे पर आप सिर्फ चादर और गुलाब का फूल लीजियेगा क्योंकि बाबा को प्रसाद बाहर का नहीं चढ़ता सिर्फ फूल और चादर चढ़ती है,

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Sultanpur Bird Sanctuary – The Green and Serene spot of Haryana

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After some time we reached the watch-tower and beneath the same we were lucky to spot a barking deer and we were quick to click a picture of the same. Then from the watch towers we spotted the beautiful sightings of the migratory birds.

Common Teal, Common Greenshank, Ruff, Black-winged Stilt, Northern Pintail, White Wagtail, Northern Shoveler, Yellow Wagtail, Rosy Pelican, Spot-billed Pelican, Gadwall, Wood Sandpiper, Spotted Sandpiper,

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A Tour to Kolkata’s Top Kali Puja Pandals

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The next destination for parikrama was the worship of Shri Krishna Kaali where the Maa is depicted as Lord Krishna. According to legends in Vrindavana, when Radha rani came to worship Lord Krishna, radharani’s mother in law Kutilaa compained to Radha’s husband Ayan that she is worshipping Krishna. When Ayan himself went to verify the same , Lord Krishna took the form of Kali in Krishna Kaali roopa and henceforth this sweet incarnation came to be known as Krishna Kali.

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