Wagah Border

Wagah is the only road border crossing between Pakistan and India, and lies on the Grand Trunk Road between the cities of Amritsar in India and Lahore in Pakistan. Wagah itself is a village through which the Radcliffe Line was drawn that divided the village in 1947. Today, the eastern half of the village remains in the Republic of India while the western half is in Pakistan.
It is particularly known for the elaborate Wagah border ceremony that happens at the border before sunset each day. The Army checkpost at the Wagah Border has now become a popular site for tourists, who come to see the change of guards, lowering of flags and retreat of troops at sundown. The drill, choreographed with aggressive posturing and sabre-rattling, draws loud cheers from spectators on both sides. Wagah Border can be reached from the city of Amritsar by road which itself is well connected by air, road and railways.
Best time to visit: November to March
Languages spoken: Punjabi, Hindi
Climate: Hot and dry summers and a cold sometimes freezing winter.
Activities: Watching the Wagah Border Ceremony

आस्था और सुन्दरता का संगम – स्वर्ण मंदिर अमृतसर

By

आप को बता दू की अगर बॉर्डर देखने का मन हो तो सुबह या 12/1 बजे तक भीड़ बढ़ने से पहले हो आये ताकि इत्मीनान से देख सके और हो सकता है पाकिस्तानी रेंजर आपको चाय पानी पूछ ले…साधारण दिनों में बॉर्डर पे आपसी भाईचारा और मित्रता का माहौल रहता है दोनों और के सैनिको के मध्य..बातचीत हंसी मजाक..चलता रहता है.

Read More

रंगीला पंजाब – परिवार सहित अमृतसर यात्रा

By

तभी ट्रैन चलने की घोषणा हुई और जल्दी ही ट्रैन रेंगने लगी।  वाइफ और बेटा खिड़की से बाहर देखते रहे और मैं आँखें बंद कर दिन भर की प्लानिंग करने लगा।  कुछ देर में शताब्दी की सेवाएं शुरू हुई.  पानी की बोतल, अखबार और फिर चाय, इन सबके  सोचा की थोड़ा सो लेंगे।  पर तभी टीटी जी आ पहुंचे।  उनको टिकट देखा कर निबटे तो देखा कि बेटा सो गया था।  हमने भी आधा घंटा नींद ली की तभी ब्रेकफास्ट आ गया।  पंजाब  की यात्रा हो तो छोले कुल्चे से बेहतर कुछ नहीं इसलिए हमने भी वही खाया।  हिलती हुई ट्रैन में चाय का कप भी हिल रहा था और बेटा इसे देख देख हंस रहा था।  ब्रेकफास्ट कर के सोचा कि कुछ और सोया जाये पर ऐसा हुआ नहीं. ट्रैन अम्बाला पहुंची और छोटे साहब के प्रश्न फिर शुरू हुए।  यहाँ से ट्रैन चलने के बाद मेरी कमेंटरी भी शुरू हुई. क्यूंकि बाकी दोनों का पहला ट्रिप था, इसलिए मैंने अपना ज्ञान भर भर के बंट. राजपुरा से पंजाब शुरू होने के बाद तो ये ज्ञान और बढ़ा. NH 1  साथ दौड़ती ट्रैन, दोनों और गेंहूँ से भरे हुई खेत और बादलों की लुकाछिपी, सचमुच बहुत ही अच्छा सफर था. कुछ देर में ट्रैन लुधिअना पहुंची। यहाँ भूख लगने लगी थी तो हमने अपने साथ लए हुई स्नैक्स की तरफ ध्यान दिया. लुधिअना से चलने के बाद सतलुज नदी का चौड़ा पाट आया. वाइफ हैरान थीं की इस नदी का पानी इतना सफ़ेद कैसे है जबकि यमुना तो बिलकुल अलग है।  इसके बाद फगवाड़ा और फिर जलांधर आया. जालंधर पर ट्रैन काफी खाली हो गए थी।  क्यूंकि अब बेटा फिर ऊँघने लगा था तो उसे एक ३ वाली खाली  सीट पर लिटा दिया और वह जल्दी सो भी गया।  हम दोनों भी १  झपकी लेने लगे. ब्यास पहुँचने से पहले ब्यास नदी के दर्शन हुए. खेतों में हरियाली बढ़ चुकी थी. अपने तय समय से २० मिनट लेट, ट्रैन अमृतसर पहुंची. स्टेशन पर टूरिस्ट्स और ख़ास तौर पर स्कूल ग्रुप्स की बहुत भीड़ थी।  हमने टैक्सी बुक की हुई थी जो हमें वाघा बॉर्डर घुमा कर वापस होटल छोड़ने वाली थी।

Read More

A trip to Amritsar

By

We crossed the short stretch of paved no-man’s land, dividing 140 million Pakistanis from more than one billion Indians . We enjoyed every bit and tried to capture our emotions: – A proud Indian. Citizens of both the countries were just walking in and crossing the borders (of course after thorough security check). It had an amazing experience for us, though we missed the main ceremony. But never mind what we had experienced few minutes back was just beyond our dreams as we saw something which otherwise was not possible for us a common man/visitors. That day we felt, power gives priority. After greeting and giving vote of thanks to our Major Saab, we headed back towards the Golden Temple .

A very busy and rush Sunday, we saw a big queue for entry to main Hari Mandir Sahib Ji. Our other accompanied denied to stand in a queue and ready to back, because it would take more time. But we said we came here and without bow down our head, we will not back. So, we stand in a queue. A Sardar Ji came and advised us that Deepti, my wife and child can seat there until I reached near the entrance of the Sahib ji.

Read More

Golden Trip to Sri Harmandir Sahab, Amritsar

By

The entire ambience is soothing and spiritual with kirtans being sung by the gurus sitting inside the temple. Even though the entire journey from the start of the line till one enters the actual temple where the Guru Granth sahib is kept and Gurbani is recited takes about three hours, thousands of people from all castes, creeds and ethnicities throng the Golden temple every day. The temple is open all through the day and night except from 12am to 3pm when the routine cleaning takes place. Awaiting their turns to enter the holy chamber the “Ekonkar” mantra is chanted by all the devotees. The environment is extremely divine. Despite of the rush, a true believer in God can easily connect with the creator here. The actual darshan is even more mystical. One feels as if one has attained the ultimate peace.

Making our way out of the chamber, we looked into the sarovar which is house to a multitude of orange and black fishes. We managed to make our way out and sat for a long time in the premises of the temple overlooking the sarovar.

Read More

Wagah border beating retreat ceremony

By

Not sure if there’re any celebrations when the flags are hoisted in the morning. As we came out, a bunch of people had blocked the road and were protesting against something.

It was a memorable event to witness. A better seating and proper visitor management would have made it even great. To quote an example, world trade centre memorial in New York has an online pass system. Only specific number of people are let in every day at designated timing.

To conclude: Evening ceremony at Wagah is a must visit experience if you’re going to Punjab. If possible, get a  VIP pass. If that doesn’t work out, give the camera to women in your team- they will have better visibility and can take better pics. Water and refreshments are available inside, but when the ceremony is in progress you may not be able to walk out and buy something. Post ceremony you can refresh yourself. Photos, DVDs, souvenirs are all available for sale. Mobiles will NOT work in the border. So if your loved ones are separated from you because of gender or crowd, you need to have a meeting place pre-decided- like in front of the washroom or near the car etc, to avoid confusion and panic.

Read More
??????? ????? ???? ????????

स्वर्ण मंदिर – लंगर और रामबाग पैलेस

By

लंगर से बाहर निकल कर पुनः वही प्रश्नचिह्न सम्मुख आ खड़ा हुआ – “अब क्या?“ अचानक मुझे याद आया कि एक मित्र ने रामबाग समर पैलेस यानि, महाराजा रणजीत सिंह के महल का ज़िक्र किया था और कहा था कि मैं उसे अवश्य देख कर आऊं। रिक्शे वालों से पूछना शुरु किया तो सबने 30 रुपये बताये। मुझे लगा कि अमृतसर के रिक्शे वालों को तीस का आंकड़ा कुछ ज्यादा ही पसन्द है। रामबाग पैलेस चलने के लिये एक रिक्शा कर लिया। स्वर्ण मंदिर में हर किसी को कार सेवा में तन्मयता से लगे हुए देखते देखते, मुझे लग रहा था कि यह रिक्शावाला भी तो इस विशाल समाज के लिये एक अत्यन्त उपयोगी कार सेवा ही कर रहा है। अतः उसके प्रति सम्मान की भावना रखते हुए मैं रिक्शे में ऐसे सिमट कर बैठा जैसे मेरे सिमट कर बैठने मात्र से मेरा 82 किलो वज़न घट कर 60 किलो रह जायेगा। मेरा वज़न घटे या न घटे ये तो वाहेगुरु जी की इच्छा पर निर्भर है, पर मुझे उम्मीद है कि उन्होंने मेरी भावनाओं को तो अवश्य ही समझ लिया होगा।

Read More
?????? ????? ????? ?? ??????? ?????? ???? !

अमृतसर में अटारी – वाघा बार्डर

By

हम जब शाम को पांच बजे स्वर्ण जयंती द्वार पर पहुंचे तो सारी बैंच पूरी तरह से ठसाठस भरी हुई थीं।  जब मैने द्वार पर खड़े बी.एस.एफ. के अधिकारी को प्रेस पास दिखाया और कहा कि मुझे आगे जाने दें तो उन्होंने वी.आई.पी. लाउंज के लिये प्रवेश द्वार 3 की ओर इंगित किया और कहा कि आप वहां कोशिश करें।  मैं उधर भागा पर वहां कोई सुनवाई नहीं हुई !  वहां विदेशियों और कुछ वी.आई.पी. महिलाओं, युवतियों और बच्चों को जाने दिया जा रहा था।  अतः फिर वापिस भागा और स्वर्ण जयंती द्वार की सीढ़ियां चढ़ कर वहां पहुंचा जहां पहले ही मानों पूरा हिन्दुस्तान आकर सीटों पर जमा हुआ था।  अपने कैमरे के लिये मुझे जो सर्वश्रेष्ठ स्थान उपलब्ध हो सका वहां जाकर मैं खड़ा होगया।  बड़ा ही मजेदार दृश्य सामने था।  स्वर्ण जयंती द्वार से लेकर पाकिस्तान वाले द्वार तक तिरंगा झंडा हाथ में लेकर भागते हुए जाने और वापिस आने के लिये महिलाओं की लाइन लगी हुई थी।  उनको बी.एस.एफ. के इस अभियान के संयोजक एक अधिकारी तिरंगे झंडे देते थे और भागने का इशारा करते थे।  युवा, प्रौढ़ और यहां तक कि वृद्ध महिलाएं भी बड़े उत्साह से तिरंगा हाथ में लेकर पाकिस्तान की सीमा तक भागती हुई जाती थीं और फिर वापस आती थीं।  हज़ारों की संख्या में दर्शक गण भारत माता की जय, वंदे मातरम्‌,  हर-हर, बम-बम नारे लगा कर उनका उत्साह-वर्धन कर रहे थे।  दर्शकों के उत्साह का आलम कुछ ऐसा था मानों वह वृद्ध महिला नहीं बल्कि पाकिस्तान के बैट्समैन को आउट करने के लिये भारतीय क्रिकेट टीम का बॉलर दौड़ रहा हो। पन्द्रह मिनट तक यह कार्यक्रम चलता रहा फिर महिलाएं, युवतियां और स्कूली बच्चे डांस करने के लिये अपनी अपनी सीट छोड़ कर सड़क पर उतर आये।  पन्द्रह मिनट तक धुआंधार कमर मटकाई गईं और जनता गला फाड़ – फाड़ कर अपने उत्साह का प्रदर्शन करती रही।  सबसे मजेदार बात ये थी कि पाकिस्तान वाले गेट के उस पार भी एक स्टेडियम नज़र आ रहा था जहां तीस-चालीस दर्शक बैठे हुए दिखाई दे रहे थे।  इस ओर हज़ारों दर्शकों का अदम्य उत्साह, नारेबाजी और कान के पर्दे फाड़ देने लायक शोर और उधर केवल मात्र तीस – चालीस दर्शक! अब अगर ऐसे में पाकिस्तानी हुक्मरान डिप्रेशन का शिकार न हों तो क्या हों? मुझे तो लग रहा था कि पाकिस्तान वाली साइड में बैठे दर्शकों का भी मन कर रहा होगा कि हिन्दुस्तान वाला कार्यक्रम देखें पर अनुमति न होने के कारण मन मसोस कर रह जाते होंगे।

Read More

A visit to Jallianwala Bagh, Golden Temple & Wagha Border

By

Today India is a vibrant Nation. However, we tend to take many things for granted. In our normal day to day, routine life we hardly remember them who sacrificed their life to free our motherland. On our 66th years of Independence, let’s make a resolution to make India beautiful and fight against terrorism, anti-social elements, corruptions…each one of us can make a difference.

Read More

Trip to Darbar Sahib-Where self meets the soul…-I

By

There is this railway crossing on the Dinanagar-Gurdaspur stretch of NH-15 which lies miraculously at the centre of a leftward curve. Most of the drivers usually get caught unaware at this crossing. I was familiar with the notoriety of this curve and hence was attentive to its arrival. Just after crossing over the railway line, we stopped near a fruit-seller to fill our empty stomachs and sat on the nearby tube-well to chat. Our jokes and pranks didn’t seem to end anytime soon but we realised that we should pull ahead. Back to the car, we hit the road again and entered Gurdaspur city after 10 kms. There is a bypass which you can take to avoid the traffic and congestion at the Gurdaspur town but since it was a national holiday (2nd Oct), the traffic was sparse and we drove through the city. Looking around for some nice place to have a proper breakfast, all four of us had our necks craned out of the window. However, any place proposed by one was put down by the rest…a big disadvantage of traveling in an all-guys-group i think. Suddenly, I saw a turbanated policeman signalling us to stop. I just wanted to zip ahead as we were on the right side of law in every respect (thats what I believed till then) but Jaspreet insisted that we should stop as the Punjab Police cops chase such cars which dont stop and then harrass you even more…the job they are best at. Stopping a few metres ahead, I asked everyone to relax and not to get out of the car…a mistake that cost us 200 bucks!!! The Sardarji policeman came upto our car…positioned his elbows on the window and asked where we were from. We replied in Punjabi that we are from Jammu and heading towards The Harmandir Sahib. The Sardarji smiled at us and asked us why we had not fastened our seat belts…..HOLY SHIT… We realised that after we started driving from our last stop where we had fruits, we had just forgot to fasten our seat-belts.

Read More

Balle Balle To Amritsar!

By

We got more proof of people’s devotion when we saw children happily mopping the marble steps as people left or entered the hall. Then there were volunteers who were continuously cleaning candle wax from the marble pavement, even as new visitors kept lighting more candles.

Read More