कुर्ग या कोडागु – स्कॉटलैंड ऑफ़ साउथ इंडिया

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कोडगु या कुर्ग  कर्णाटक प्रान्त का एक जिला है। इसका मुख्यालय मडिकेरी में है। पश्चिमी घाट पर स्थित पहाड़ों और घाटियों का प्रदेश कुर्ग दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्यटक स्‍थल है। यह खूबसूरत पर्वतीय स्‍थल समुद्र तल से 1525 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां की यात्रा एक न भूलने वाला अनुभव है। कुर्ग के पहाड़, हरे-भरे जंगल, चाय और कॉफी के बागान मन को लुभाते हैं। कावेरी नदी का उदगम स्‍थान कुर्ग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा रिवर राफ्टिंग, हाइकिंग, क्रॉस कंट्री और ट्रेल्‍स के लिए भी मशहूर है।

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मेघालय – शिलोंग , स्कॉटलैंड ऑफ़ दी ईस्ट

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जब हमने सुना कि एशिया का सबसे स्वच्छ गांव का पुरस्कार भारत के एक गांव ने जीता है और वो मेघालय में है तो मैंने इसे अपने प्लान में शामिल किया । लीविंग रूट ब्रिज देखने के बाद हम इस इस गांव में पहुंचे जो कि लीविंग रूट ब्रिज वाले गांव से 2 किमी दूर स्थित है।गाँव को साफ़ कैसे रख पाते है जबकि सैलानी आते जाते रहते है रोज़ खूब सारे।

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स्तूप

अरुणाचल प्रदेश

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स्नानादि पश्च्यात 10 बजे शहर से लगभग 6 किमी की दूरी पर एक सुन्दर सी जगह है गंगा लेक( स्थानीय भाषा में Gyakar Sinyi )(झील के साथ एक मिथक जुड़ा हुआ है कि यह झील शापित है और रात के समय कोई भी इस स्थान पर जाने की हिम्मत नही करता) …एक पहाड़ ऊपर के अंतिम सिरे पर एक झील है जहा घुमावदार रास्तो से होके पंहुचा जाता है।

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लेह – लद्दाख

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आये इस सुचना के साथ कि सुरक्षा कारणों से आम जन के लिए नुब्रा वैली कुछ दिनों के लिए बंद है अत:खार्दुन्गला से वापस आना होगा।

ऊपर जाकर या रास्ते में कुछ भी नही मिलता भोजन के लिए तो पहले लंच किया और फिर थोड़ी हताशा के साथ चल पड़े विश्व की सबसे ऊँचे सड़क मार्ग पर जो की 18380 फुट (5602मी) की ऊंचाई पर स्थित है,बेहद संकरी उबड़ खाबड़ रोड जो लेह से 40 किमी दूर है, भूरे निर्जन वनस्पति शून्य इस मार्ग पर चार पहिया वाहन कम और दो पहिया ज्यादा होते है,मोटरसाइकिल और साइकिल चालको की ये प्रिय सड़क है और हमें अपनी गाडी इनसे बचते हुए चलानी थी,लेह से किराये पे मिलते है ये वाहन।

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दिल्ली से लेह-लद्दाख – सन्नाटे का सौन्दर्य

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इस सब जगहों का वर्णन शब्दों में संभव नही है,ये आप इस यात्रा के दौरान अनुभव करके ही जान सकते है।विमान से 4 दिन में लद्दाख भ्रमण आपको जगह देख लेने का संतोष तो दे सकता है किन्तु वास्तविक खूबसूरती का आनंद लेना हो तो सड़क मार्ग से ही जाईये।

केलोंग से धीरे धीरे सरचु पहुचे रास्ते पर और दिन काफी बचा था तो सोचा रात्रि विश्राम पांग में करेंगे,आगे विभिन्न रंग के पहाड़ हरे ,नीले ,पीले,भूरे ,लाल सभी रंगों में रंगे, अवर्णनीय सुन्दरता चारो और बिखरी पड़ी है और देखने वाले गिने चुने यात्री बस।

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आस्था और सुन्दरता का संगम – स्वर्ण मंदिर अमृतसर

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आप को बता दू की अगर बॉर्डर देखने का मन हो तो सुबह या 12/1 बजे तक भीड़ बढ़ने से पहले हो आये ताकि इत्मीनान से देख सके और हो सकता है पाकिस्तानी रेंजर आपको चाय पानी पूछ ले…साधारण दिनों में बॉर्डर पे आपसी भाईचारा और मित्रता का माहौल रहता है दोनों और के सैनिको के मध्य..बातचीत हंसी मजाक..चलता रहता है.

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वाह ताज – खूबसूरती और प्रेम का अनोखा संगम

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सुबह सुबह साड़े पांच बजे नींद खुल गयी एवं पत्नी का मूड एक बार फिर ताज देखने का हुआ…हलकी ठण्ड में पैदल ही पहुच गये और आश्चर्यचकित हो के देखते क्या है की सिर्फ हम गिने चुने दो चार भारतीय थे और लगभग पांच सात सौ की संख्या में विदेशी पर्यटक…हर देश के …कही से इंग्लिश भाषा सुनाई दे रही थी तो कही कोई गाइड स्पेनिश या जर्मन भाषा में इन पर्यटकों से बात कर रहा था…पता चला की लगभग सभी विदेशी सुबह ही यहाँ आते है भारतीय भीड़ से दूर और ये सुझाव उन्हें गाइड और होटल वाले देते है…पिछले दिन भी विदेशी पर्यटक काफी थे पर आज ऐसा लगा की हम लोग विदेश घुमने आये है …इतने अधिक विदेशी एक साथ एक ही जगह पे भारत में कही नही देखने को मिलते..

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नव वर्ष और गोवा

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यहाँ मैं ये अवश्य बताना चाहूँगा की यूथ हॉस्टल द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम इतना सुनियोजित सुसंगठित एवं व्यवस्थित होता है की इसमें आप किसी तरह की कमी नहीं निकाल सकते..स्वादिष्ट नाश्ता शुद्ध शाकाहारी भोजन…इतने न्यून राशि में नव वर्ष को गोवा जैसी अत्यंत महँगी जगह पे आना साधारण मध्य वर्गीय के लिए बहुत मुश्किल के किन्तु इस आयोजन में ये खर्च न्यून से भी न्यूनतम है..इसके लिए आयोजनकर्ता यूथ हॉस्टल वन्दनीय है जिसमे सभी कार्यकर्त्ता वोलेंटियर होते है जो अपने कार्यस्थल से छुट्टी ले के इस 20/25 दिन के आयोजन को सफल बनाते है.

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मेरी जैसलमेर यात्रा , यूथ हॉस्टल एसोसिएशन फॅमिली कैम्पिंग

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तनोट से 52 किमी दूर लोंगेवाला जाने का सौभाग्य मिला जिसका सर्वश्रेष्ठ फिल्मांकन “बॉर्डर” सिनेमा में देखा था
ये वही जगह है जहा मात्र 120 सैनिको के पाकिस्तान के 2000 की फ़ौज और 100 से अधिक टैंक को सारी रात रोका और फ़ौज को जैसलमेर तक पहुचने से रोका था,यहाँ उन वीरो का स्मारक भी बना है और जब्त किये पाक टैंक भी…देशभक्ति से दिल भर गया यहाँ आकर…उन वीरो को श्रद्धांजलि अर्पित कर वही साथ मिले लंच पैकेट से लंच कर हम लोग वापस कैंप में लौट आये.

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