Udhampur to Nunwan Base Camp (Pahalgam)

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We reached Kud town at around 8 o’clock. Many shops were closed in the market at that time but only a few were open. We purchased 2KG Patisa from Prem sweets which is one of the oldest and famous shops at Kud.
“Kud, a place of extraordinary scenic beauty, is located on the Udhampur Srinagar Highway, Jammu and Kashmir, India. This popular resort is situated on the Jammu-Srinagar highway at an altitude of 1738 meters. It is 95 KM from Jammu and 37 KM from Udhampur city; it is just short of the tourist spot of Patni Top while driving to Patni top from Udhampur. Kud is famous for its sweet shops that make hot and fresh Patisa, which is very popular with the tourists.”

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AMARNATH Yatra starts: Ambala to Udhampur

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The Amarnath Yatra was starting on 30th June 2010.We had decided to leave on first week of July and was waiting for opening of online registrations which was due on 5th June. I was preparing but was not sure whether I will be able to go or not because my mother was ill for some period.
Recently she was diagnosed with stones in GB. She was already suffering from heart, asthma and BP. She felt severe pain many times due to stones and her condition was deteriorating day by day.

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Important information for the Yatra

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Situated in a narrow gorge at the farther end of Lidder Valley, Amarnath Shrine stands at 3,888 m, 46 Km from Pahalgam and 14 Kms from Baltal. Though the original pilgrimages subscribes that the Yatra (journey) be undertaken from Srinagar, the more common practice is to begin journey at Chandanwari, and cover the distance to Amarnathji. Pahalgam is 96 Kms from Srinagar. Amarnathji is considered to be one of the major Hindu Dhams. The holy cave is the abode of Lord Shiva. The guardian of the absolute, Lord Shiva, the destroyer, is enshrined in the form of an ice-lingam in this cave. This lingam is formed naturally, which is believed to wax and wane with the moon.

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Journey Tale of Both tracks (Pahalgam and Baltal)

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Dates (28th June to 21st Aug.) have been already announced for The Amarnath Yatra 2013 and duration has been extended to 55 Days. Yes, this is for first time in last 5 years, that Yatra Duration is set over 50 Days. Last time, it was only in 2008, the Duration of Yatra was 58 days. In 2012, Shri Amarnath ji Yatra was reduced to only 37 Days, for which the J&K State Government & Shri Amarnath Ji Shrine Board had faced a lot of heat from the various Social & Religious Organizations.

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Family Trip to Mussoorie and Rishikesh (Part II)

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We also took tickets for a round trip in boat. These tickets were valid for one hour for return journey. It means we had sufficient time to bath and roam at another side of Ganga Ji. The boat took us to another bank in just few minutes. As it was Baisakhi day, a lot of people were taking bath on Eastern Ghats. We also took bath in Holy Ganga ji.

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Family Trip to Mussoorie and Rishikesh: Ambala to Mussoorie

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Cycle Rickshaws are available from this point for Municipality Garden, Library Chowk, Kempty bus stand etc. These Rickshaws are not allowed in market area beyond this point .Horse riding is also available from this point and it was allowed in market area also. We took some snacks there and after spending some good time there we start returning to our hotel through same market again.

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Disappointing ‘Wular’ – The largest fresh water lake in Asia

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Each year during Amarnath Yatra we try to cover one new place of Kashmir excluding Srinagar. By this method we have covered Aru Valley, Betab Valley, Lidder valley, Pahalgam, Anant Nag, Avantipura, Verinag spring ( the chief source of the river Jhelum) Sonamarg, Gulmarg,  Mansabal lake etc. During 2009 Amarnath Yatra, we had planned to visit Wular Lake. After Darshan we started returned journey from Baltal towards Srinagar early in the morning.

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हरिद्वार – अम्बाला – अमरनाथ यात्रा (भाग 8)

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इधर पिछ्ले कई सालों से मेरी पत्नी मेरे साथ अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिये कह रही थी लेकिन बच्चे छोटे होने के कारण कभी जा नहीं पाई थी। बच्चे तो अभी भी छोटे ही थे और मेरी छोटी बिटिया उस समय सिर्फ़ चार साल की ही थी। मेरी पत्नी मुझे इस वर्ष अकेला जाते देख मेरे साथ चलने की जिद्द करने लगी, लेकिन मेरी पत्नी के मेरे साथ अमरनाथ यात्रा पर जाने में कुछ दिक्कतें थी। पहली, आज तक बच्चे कभी भी,कहीं भी मेरी पत्नी से अलग, अकेले नहीं रुके थे और दुसरी, हमारा उनके स्कूल खुलने से पहले लौटना भी जरुरी था। इसके अलावा एक दिक़्क़त मुझे थी्।

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गोबिंद घाट – श्रीनगर -ऋषिकेश : (भाग 7)

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गुरुद्वारा काफ़ी विशाल है और हेमकुन्ड आने-जाने वाले यात्रियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण विश्राम स्थल है। गुरुद्वारे में बहुत से हेमकुन्ड यात्री थे, कुछ लोग दर्शन को जा रहे थे और कुछ लोग दर्शन करने के बाद वापिस लौट रहे थे। हमने भी वहाँ लंगर छका (खाया) और फिर चाय पी। लगभग तीन बज चुके थे और हम ऋषिकेश की ओर निकल दिये। रास्ते में एक बार रुद्रप्रयाग में चाय के लिये गाड़ी रुक्वाई और फिर से यात्रा जारी रखी।

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घाघंरिया – हेमकुंड साहिब – गोबिंद घाट (भाग 6)

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हेमकुंड संस्कृत (“बर्फ़”) हेम और कुंड (“कटोरा”) से व्युत्पन्न नाम है । हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा एक छोटे से स्टार के आकार का है तथा सिखों के अंतिम गुरू, गुरु गोबिंद सिंह जी, को समर्पित है। श्री हेमकुंट साहिब गुरूद्वारा के पास ही एक सरोवर है। इस पवित्र जगह को अमृतसरोवर (अमृत का तालाब) कहा जाता है। यह सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। यह चारों तरफ़ से हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ है। इन चोटियों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदल जाता है। कुछ समय वे बर्फ़ सी सफेद,कुछ समय सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं।

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बद्रीनाथ – गोबिंद घाट – घाघंरिया (गोबिंद धाम) : भाग 5

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जब भगवान विष्णु योग ध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत ही ज्यादा हिम पात होने लगा। भगवान विष्णु बर्फ में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का ह्रदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर(बद्री) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगी। भगवान विष्णु को धुप वर्षा और हिम से बचाने लगी। कई वर्षों बाद जब भगवान् विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा की माता लक्ष्मी बर्फ से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा की हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा। और क्यूंकि तुमने मेरी रक्षा बद्री रूप में की है सो आज से मुझे बद्री के नाथ-बद्रीनाथ के नाम से जाना जायेगा।

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गौरीकुंड – चोपटा – जोशीमठ – बद्रीनाथ (भाग 4)

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कोई शक नही हिन्दुस्तान मे चोपटा की प्राक्रतिक सुंदरता नायाब है। कोसानी के बारे मे महात्मा गाँधी ने स्विट्ज़रलैंड ऑफ इंडिया कहा था। वहाँ उन्होने अपना आश्रम भी बनाया परन्तु चोपटा की सुंदरता के आगे कोसानी कहीं नही टिकता है। जो भी चोपटा आता है वह यहाँ की खूबसूरती को भूल नही सकता। यहाँ पर हम लोग लगभग आधा घंटा रुक कर आस पास के नज़ारे देखते रहे। यहाँ की सुंदरता देख कर बार-बार सब कहने लगे बहुत अच्छा किया जो हम इस रास्ते से आए वरना हमे पता ही नही चलता कि कितनी खूबसूरत यह जगह है।

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