Family Trip to Mussoorie and Rishikesh (Part II)

By

We also took tickets for a round trip in boat. These tickets were valid for one hour for return journey. It means we had sufficient time to bath and roam at another side of Ganga Ji. The boat took us to another bank in just few minutes. As it was Baisakhi day, a lot of people were taking bath on Eastern Ghats. We also took bath in Holy Ganga ji.

Read More

Family Trip to Mussoorie and Rishikesh: Ambala to Mussoorie

By

Cycle Rickshaws are available from this point for Municipality Garden, Library Chowk, Kempty bus stand etc. These Rickshaws are not allowed in market area beyond this point .Horse riding is also available from this point and it was allowed in market area also. We took some snacks there and after spending some good time there we start returning to our hotel through same market again.

Read More

Disappointing ‘Wular’ – The largest fresh water lake in Asia

By

Each year during Amarnath Yatra we try to cover one new place of Kashmir excluding Srinagar. By this method we have covered Aru Valley, Betab Valley, Lidder valley, Pahalgam, Anant Nag, Avantipura, Verinag spring ( the chief source of the river Jhelum) Sonamarg, Gulmarg,  Mansabal lake etc. During 2009 Amarnath Yatra, we had planned to visit Wular Lake. After Darshan we started returned journey from Baltal towards Srinagar early in the morning.

Read More

हरिद्वार – अम्बाला – अमरनाथ यात्रा (भाग 8)

By

इधर पिछ्ले कई सालों से मेरी पत्नी मेरे साथ अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिये कह रही थी लेकिन बच्चे छोटे होने के कारण कभी जा नहीं पाई थी। बच्चे तो अभी भी छोटे ही थे और मेरी छोटी बिटिया उस समय सिर्फ़ चार साल की ही थी। मेरी पत्नी मुझे इस वर्ष अकेला जाते देख मेरे साथ चलने की जिद्द करने लगी, लेकिन मेरी पत्नी के मेरे साथ अमरनाथ यात्रा पर जाने में कुछ दिक्कतें थी। पहली, आज तक बच्चे कभी भी,कहीं भी मेरी पत्नी से अलग, अकेले नहीं रुके थे और दुसरी, हमारा उनके स्कूल खुलने से पहले लौटना भी जरुरी था। इसके अलावा एक दिक़्क़त मुझे थी्।

Read More
???? ????? ?? ???? ????

गोबिंद घाट – श्रीनगर -ऋषिकेश : (भाग 7)

By

गुरुद्वारा काफ़ी विशाल है और हेमकुन्ड आने-जाने वाले यात्रियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण विश्राम स्थल है। गुरुद्वारे में बहुत से हेमकुन्ड यात्री थे, कुछ लोग दर्शन को जा रहे थे और कुछ लोग दर्शन करने के बाद वापिस लौट रहे थे। हमने भी वहाँ लंगर छका (खाया) और फिर चाय पी। लगभग तीन बज चुके थे और हम ऋषिकेश की ओर निकल दिये। रास्ते में एक बार रुद्रप्रयाग में चाय के लिये गाड़ी रुक्वाई और फिर से यात्रा जारी रखी।

Read More
braham Kanwal1

घाघंरिया – हेमकुंड साहिब – गोबिंद घाट (भाग 6)

By

हेमकुंड संस्कृत (“बर्फ़”) हेम और कुंड (“कटोरा”) से व्युत्पन्न नाम है । हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा एक छोटे से स्टार के आकार का है तथा सिखों के अंतिम गुरू, गुरु गोबिंद सिंह जी, को समर्पित है। श्री हेमकुंट साहिब गुरूद्वारा के पास ही एक सरोवर है। इस पवित्र जगह को अमृतसरोवर (अमृत का तालाब) कहा जाता है। यह सरोवर लगभग 400 गज लंबा और 200 गज चौड़ा है। यह चारों तरफ़ से हिमालय की सात चोटियों से घिरा हुआ है। इन चोटियों का रंग वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार अपने आप बदल जाता है। कुछ समय वे बर्फ़ सी सफेद,कुछ समय सुनहरे रंग की, कभी लाल रंग की और कभी-कभी भूरे नीले रंग की दिखती हैं।

Read More
??????? ????

बद्रीनाथ – गोबिंद घाट – घाघंरिया (गोबिंद धाम) : भाग 5

By

जब भगवान विष्णु योग ध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत ही ज्यादा हिम पात होने लगा। भगवान विष्णु बर्फ में पूरी तरह डूब चुके थे। उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का ह्रदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर(बद्री) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगी। भगवान विष्णु को धुप वर्षा और हिम से बचाने लगी। कई वर्षों बाद जब भगवान् विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा की माता लक्ष्मी बर्फ से ढकी पड़ी हैं। तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा की हे देवी! तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा। और क्यूंकि तुमने मेरी रक्षा बद्री रूप में की है सो आज से मुझे बद्री के नाथ-बद्रीनाथ के नाम से जाना जायेगा।

Read More
??????? ??? 2

गौरीकुंड – चोपटा – जोशीमठ – बद्रीनाथ (भाग 4)

By

कोई शक नही हिन्दुस्तान मे चोपटा की प्राक्रतिक सुंदरता नायाब है। कोसानी के बारे मे महात्मा गाँधी ने स्विट्ज़रलैंड ऑफ इंडिया कहा था। वहाँ उन्होने अपना आश्रम भी बनाया परन्तु चोपटा की सुंदरता के आगे कोसानी कहीं नही टिकता है। जो भी चोपटा आता है वह यहाँ की खूबसूरती को भूल नही सकता। यहाँ पर हम लोग लगभग आधा घंटा रुक कर आस पास के नज़ारे देखते रहे। यहाँ की सुंदरता देख कर बार-बार सब कहने लगे बहुत अच्छा किया जो हम इस रास्ते से आए वरना हमे पता ही नही चलता कि कितनी खूबसूरत यह जगह है।

Read More
?????? ?? ???? ??? ?????????

गौरीकुंड- केदारनाथ- गौरीकुंड (भाग 3)

By

जिस जगह से हम उतर रहे थे वहाँ बादल काफ़ी कम थे लेकिन नीचे की ओर गरुडचट्टी बादलों के कारण बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी यानि की हम बादलों से भी उपर चल रहे थे। मुझे हिन्दी फ़िल्म का वो गाना याद आ गया ‘आज मैं उपर, आसमान नीचे…’ । थोड़ी ही देर बाद हम बादलों का सीना चीरते हुए गरुडचट्टी पहुँच गये और काफ़ी देर तक बादलों में चलने के बाद तेजी से नीचे की ओर उतरते गये। थोड़ा और नीचे उतरने के बाद फिर से मौसम साफ़ हो गया।

Read More

ऋषिकेश – देवपर्याग – रुद्रप्रयाग – गौरीकुंड (भाग 2)

By

ऋषिकेश से लेकर रुद्रप्रयाग तक के रास्ते में पहाडो पर काफ़ी कम हरियाली है और ये काफ़ी रेतीले लगते हैं लेकिन रुद्रप्रयाग से केदारनाथ की तरफ़ मुडते ही दृश्य एकदम बदल जाता है। चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है ,घाटियॉ बहुत खुबसुरत हैं। हम इन खुबसुरत वादियों का आनंद लेते हुए अगस्त्यमुनि से होते हुए गुप्‍तकाशी पहुँच गये ।वहाँ गाड़ी रुकवा कर चाय पी और आस पास के सुन्दर नजारों को निहारने लगे। गुप्‍तकाशी से घाटी के दूसरी तरफ़ ऊखीमठ साफ़ दिखाई देता है।

Read More

केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब यात्रा तथा दर्शन रिपोर्ट – भाग 1 : अम्बाला- ऋषिकेश

By

हमारा पहली रात ऋषिकेश में रुकने का प्रोग्राम था जो अम्बाला से सीधे सिर्फ 200 किलोमीटर है। यानि की हमारे पास काफी समय था और इसलिए हमने रास्ते में जाते हुए पोंटा साहिब और मसूरी में केम्पटी फॉल जाने का निश्चय किया।इस रास्ते से ऋषिकेश 50 -60 किलोमीटर ज्यादा पड़ रहा था लेकिन दो महत्वपूर्ण स्थान भी कवर हो रहे थे ।सभी लोगों से कहा गया की पहले दिन का लंच घर से लेकर आयें ,इसके अलावा हमने काफी बिस्कुट और स्नैक रास्ते के लिए खरीद लिए ।और आखिरकार 11 जून 2011 , दिन शनिवार आ ही गया । सभी लोग तैयार होकर पहले से निश्चित स्थान पर मिलते रहे और गाड़ी में सवार होते गए .लेकिन अभी सीटी साहेब नहीं पहुचे थे । हमने गाड़ी को महेश नगर में रुकवा कर उसका इन्तज़ार शुरु किया। हम पिछले एक घन्टे से उसे फोन कर रहे थे ताकि वो लेट ना हो जाये और अब तो उसने फोन उठाना भी बन्द कर दिया, घर पर फोन किया तो बताया कि चले गये हैं, लेकिन गाड़ी पर नहीं पहुचे जबकि सिर्फ़ 3-4 मिनट का रास्ता था । हमें ( मुझे और सुशील को ) मालूम था कि अभी वो तैयार नहीं हुआ होगा क्योंकि वो हमारा बचपन से दोस्त है और हम उसकी रग रग से वाकिफ़ हैं। हम सबको काफ़ी गुस्सा आ रहा था, अरे जब सात लोग एक आठवें की काफ़ी देर इन्तज़ार करेंगें तो गुस्सा आयेगा ही। हमने यह निर्णय लिया कि यदि वो 8:30 तक नहीं आया तो हम उसे छोड़ कर चले जायेंगे और वो पठठा पूरे 8:28 पर वहाँ पहुँच गया और वो भी अकेले नहीं ,साथ में अपने 9-10 साल के बेटे को भी यात्रा के लिये ले आया। हम उसका स्वागत गालियों से करने को तैयार बैठे थे लेकिन उसके बेटे के कारण वैसा ना कर पाये। लेकिन फिर भी उसका ‘यथायोग्य’ स्वागत किया गया।

लगभग सुबह 8:30 पर हम अम्बाला से पोंटा साहिब के लिए निकल गए। अम्बाला से पोंटा साहिब की दुरी 100 किलोमीटर है और हम मौज मस्ती करते हुए 10 :30 तक पोंटा साहिब पहुँच गए ।

(पांवटा साहिब हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के दक्षिण में एक सुंदर शहर है।राष्ट्रीय राजमार्ग 72 इस शहर के मध्य से चला जाता है।यह सिखों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल और एक औद्योगिक शहर है। गुरुद्वारा पौंटा साहिब, पौंटा साहिब में प्रख्यात गुरुद्वारा है।सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी की स्मृति में पौंटा साहिब के गुरुद्वारे को बनाया गया था। दशम ग्रंथ, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा यहीं लिखा गया था। इस तथ्य की वजह से इस गुरुद्वारे को विश्व भर में सिख धर्म के अनुयायियों के बीच ऐतिहासिक और बहुत ही उच्च धार्मिक महत्व प्राप्त है। )

Read More
My 12th Amarnath Yatra – Trip Report and Pictures , Part 2

My 12th Amarnath Yatra – Trip Report and Pictures , Part 2

By

We get up at 5.30 AM. It was very cold outside. Around 6 AM we came out of tent to proceed further to Holy Cave. We took a bucket of hot water for Rs.50 from Tentwala and wash our face and hands etc. We did not take bath as we were so tired and weather was very cold. We took a cup of tea and stood in the line for Darshan. After Aarti, Darshan started at 7:30AM. Around 8.15 AM we reached in holy cave .All the atmosphere was filled with the Jaikare of Bam Bam Bhole. We forget all our tiredness and body pain after Darshan. We were feeling so energetic. I got very emotional after Darshan. A full size ice lingam was in front of my eyes. As I already mention that this was my 12th Yatra to Holy cave but this year ice lingam size was the biggest I have ever seen. We spent around 40 minutes in the Holy cave and offered some rituals. We came down from the cave. As we had not taken lunch and dinner yesterday, we were very hungry. We took one prantha each and tea from the Bhandara and started journey towards Baltal. It was around 9.30 AM. There were frequent traffic jam on the ways due to heavy rush. At 3:45 PM we reached at Domel and went to Barfani sewa mandal Bhandara. We took lunch there and rested for night at there.

Read More