Alwar

Alwar in Rajasthan is a city with a rich culture and historical past. It is adorned with the glory of the magnificent forts and palaces, the beauty of innumerable lakes, the grandeur of its former Rajput havelis along with stately hunting lodges and lush green surroundings. The Vinay Vilas Palace is a beautiful garden palace, which was once the summer residence of Maharaja Vinay Singh. The 18th century building designed in Mughal and Rajasthani styles today houses Government offices and a State Museum. The Tomb of Fateh Jung is a spectacular five storied tomb with a massive dome that reflects a fine blend of Hindu and Islamic architectural styles. Government Museum that boasts of a fine collection of Mughal and Rajput paintings and miniature writings, Bharathari Mandir, the magnificent Bala Quila and Maharani ki Chhatri are notable places to visit.
Alwar is well connected by road and by an efficient railway network to major cities in India. The nearest airport is in Jaipur.
Best time to visit: September to March
Languages spoken: Mewati, Hindi
Climate: Scorching hot summers and cold winters
Heritage sites: Vinay Vilas Palace, Tomb of Fateh Jung, Government Museum, Bharathari Mandir, Bala Quila, Maharani ki Chhatri

Sariska Tiger Reserve and Siliserh Lake in Rajasthan

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So it was decided to do the journey by car as there were lot of things to be done in next 2 days. We all pooled in Rs 2500 / head which is supposed to cover everything. Alto full tank in approx 2200 Rs. Sariska is approx240 kms from Delhi. Packed our woolen clothes and other accessories we started our journey at 6 am on 10th of December 2011. As soon as reached NH8 , we have to face huge traffic of trucks. Now cruising at a speed of 70-80 kms on NH8 we reached Dharuhera, took left from there for state highway of Bhiwadi to Alwar. This SH was great to drive, good smooth road with very less traffic and great views of aravlis.

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Bhangarh : India’s most haunted place

Bhangarh : India’s most haunted place

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It all started with an idea to visit some off-beat destination around Delhi. Google search leads to an image of Bhangarh ruins that claims to be India’s most haunted place…
…Now we started our introspection to each and every ruin to find something roguish, but didn’t get anything of that short. Although a negative energy was there in the environment. Probably they shifted somewhere else due to increasing foot-falls.

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Sariska: Nature with Adventure

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After driving 40 more minutes, we took a sharp left from main Delhi-Jaipur Highway to Viraat Nagar State highway. Viraat Nagar is famous for the Mahabharata times as this is the place where pandava’s completed 1 year of secret exile.  Our resort (Gulmohar Sariska Resort) was situated on connecting road just 2KMS before the main city. It was a big resort with some spacious rooms with a big garden area which is room facing and a swimming pool too which is not quite big but good for group of 5-10 people.

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Getaway to Fort Kesroli, Alwar

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I loved the peaceful moonlit night, the pool was looking all the more beautiful and water looked more of green than blue at that point of time ☺ With our feet dipped in the pool, we chatted for a good long time and realized it was almost 12 am.

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सरिस्का के जंगल से भानगढ़ के रहस्यमय किले तक का सफ़र

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गाइड से पूछने पर पता चला की हाल फिलहाल तो शेर की कोई हलचल वहा नहीं दिखी है, अब हम इतनी बार जंगल जा चुके है कि एक विशेषज्ञ की तरह ही गाइड और ड्राईवर से बात करते है। तभी हमारे ड्राईवर लकी ने १-२ बिस्कुट जीप से बाहर हिरनों की तरफ फ़ेंक दिए तो हमने तुरंत उसको डांटा, वो बोला सर कोई गलत चीज़ नहीं फेंकी है, इससे क्या नुकसान होगा। हमने बोला भाई वो प्राकृतिक चीज़े खाते है उनको ये गन्दी आदत मत डालो, अगर बाद मे उनकी इच्छा फिर से ये खाने की हुई तो कहा से लायेगे, किसी हिरन की मादा ने फरमाइश कर दी कि वही वाले बिस्कुट चाहिए तो उस बेचारे हिरन की गृहस्थी ही टूट जायेगी। वैसे मजाक अपनी जगह है लेकिन जंगल मे इस तरह से कुछ भी फेंकना गलत ही है। जैसी की उम्मीद थी कि कोई शेर नहीं दिखा इसलिए हमने ड्राईवर को भी बोल दिया कि वो बाहर चल सकता है और वैसे भी समय हो ही गया था। इस समय हमारे मन मे भानगढ़ जाने की प्रबल इच्छा थी क्योकि इतना कुछ सुन रखा था इन किलो के बारे मे कि अब इन्तजार नहीं हो रहा था। बाहर आते ही हमने जिप्सी ड्राईवर को बचे हुए २० ० ० रूपये दिए और अपनी गाड़ी मे बैठ गए और लकी को भी इशारा कर दिया कि जल्दी से भानगढ़ की तरफ चले।

भानगढ़ और सरिस्का के बीच की दूरी लगभग ७०-८० किलोमीटर है, सरिस्का से आगे थानागाजी, अजबगढ़ होते हुए भानगढ़ जाया जा सकता है। अभी कुछ भी खाने की इच्छा नहीं थी इसलिए हमने पहले भानगढ़ जाने का ही निश्चय किया फिर वहा से वापिस आने के बाद ही खाने के बारे मे कुछ सोचेगे वैसे भी ७०-८० किलोमीटर ही दूरी थी तो सोचा कि एक सवा घंटा ही लगेगा पहुचने मे लेकिन थोड़ी देर मे ही अच्छी सड़क का रास्ता खत्म हो गया और ख़राब रास्ता शुरू जो योजना थी उससे दुगना समय लगा पहुचने मे।
भानगढ़ के बारे मे कहा जाता है कि वहा की राजकुमार रत्नावती बहुत खूबसूरत थी और लोग उसके रूप के दीवाने थे, वही एक साधू भी था जो रत्नावती को बहुत चाहता था, वो साधू काले जादू मे माहिर था। एक बार राजकुमार बाजार मे इत्र खरीद रही थी तो उस साधू ने उस इत्र पर मंत्र पढ़ दिए जिससे कि वो इत्र लगाते ही राजकुमारी उसकी दीवानी हो जाए लेकिन राजकुमार इत्र देखते ही उसकी चाल समझ गयी और उसने वो इत्र की शीशी एक पत्थर पर पटक दी,

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विराट नगर – पांडव अज्ञातवास का साक्षी, बौद्ध साक्षात्कार का बीजक और एक झांकता मुग़ल कालीन झरोखा

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जयपुर से विराट नगर के लिए सुबह सात बजे वाली बस मैं बैठकर 9 बजे पहुँच गया। विराट नगर जाने का मेरा केवल एक ही उद्देश्य था और वो था बीजक की पहाड़ी पर बना हुआ करीब 2500 हज़ार साल पुराना बोद्ध स्तूप। यह एतिहासिक स्मारक विराट नगर बस स्टैंड से करीब ३ कि .मी की दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी के ऊपर बने एक समतल धरातल पर स्थित है। इस पहाड़ी पर तीन समतल धरातल है। सबसे पहले वाले पर एक विशाल शिला प्राकृतिक रूप से विद्यमान है जिसका स्वरूप एक डायनासोर की तरह प्रतीत होता है।

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