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रोहतांग की कठीन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी (भाग- 2)

रोहतांग की कठीन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी (भाग- 2)

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पिछली कड़ी में मैं आपसे जिक्र कर रहा था की किस तरह से मुसीबतों को पार करते हुए अंततः हम लोग रहाला फाल पहुंच ही गए, और फिर सिलसिला शुरू हुआ बर्फ में खेलने का, बर्फ में फिसलने का. उम्रदराज प्रौढ़ दम्पतियों को बच्चों की तरह बर्फ से खेलते हुए देखने में जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन करना मुश्किल है. लगभग सभी लोग बच्चे बने हुए थे, हर कोई इन यादगार पलों को जी लेना चाहता था. हम सब भी अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे, किसी को किसी का होश नहीं था. बच्चे अपने तरीके से बर्फ से खेल रहे थे और बड़े अपने तरीके से, मकसद सबका एक था….आनंद आनंद और आनंद.

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Home Of Serenity – Chail, Himachal Pradesh

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After breakfast we proceeded to Chail Palace Hotel, once owned by Bhupinder Singh, Maharaja of Patiala. Well known for its architecture, the palace has now been converted to a heritage hotel. Many films have been shot here. You can also enjoy delicious food at their restaurant. Do try their cold coffee..it was yum!!! There is also a drinks bar for those who love to booze. We came back to the town after spending some time at this beautiful place and proceeded to Kali Ka Tibba temple. Kali Ka Tibba is a must visit place in Chail. Being located at a hill top it , you can enjoy mesmerized view of Chail valley and breathe cool and fresh air. The road leading to the place is very narrow and poor in condition making it quite an adventurous experience. It was around mid of the day and our next destination was Chail Cricket Ground. It is being used as a play ground of the Military school in Chail. We were disappointed with the place as entry to the playground is restricted to everyone except school staff and students. We came back to our resort after strolling for some time and buying wooden souvenirs from Chail Mall Road. Compared to Shimla’s crowded long Mall Road, Chail Mall Road only has a few shops and eating joints. There was nothing much to purchase in Chail but you know it is a custom in our homes that if any family member goes on a trip, they have to bring gifting specialties of that place.

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Chiller Chilling Summer Trip- Dharamsala & Dalhousie, Khajjiar

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The route was full of Danger & natural beauty. It is the most exotic and scenic beauty place around 22 Km from Dalhousie. Khajjiar is officially proclaimed the mini-Switzerland of India. At an altitude of 6450 ft, this saucer shaped green meadow, ringed by Devadar Trees has a lake in the middle complete with floating island. I liked horseback riding and strolling. It’s the best place to spend more time as compare to the other places. We spent around 2 hrs & enjoyed Horse riding there. We saw something that interested us. People were getting inside a big plastic ball, and being rolled till the lake. That was very interesting, something we haven’t seen before. We left in the late afternoon bidding goodbye to the charming glade of Khajjiar and our next destination was the town of Dalhousie.

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शिव और सावन – एक मनोरम स्मृति।

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सावन के महीने का आगमन दिल्ली में हो गया था किन्तु बारिश की बूंदो का इंतजार अब भी बाकि था, लग ही नहीं रहा था की इस बार दिल्ली में बारिश होगी भी या नहीं। आख़िरकार है तो यह दिल्ली ही न, रोजाना यहाँ वहां की खबरों को सुनते हुए यह पता चल जाता था की सलमान की एक-एक फिल्म 100 करोड़ कमा रही है किन्तु पूरी दिल्ली में 100 लीटर भी पानी बरस जाये तो गनीमत होगी।

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हिमाचल डायरी : दो पल के जीवन से… (Sirmour, Camp Rox)

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कुछ क्षण पहले तक जिस स्थान पर हमारे बीच मौन का साम्राज्य था वहाँ अब चुहलबाजी शुरू हो गयी है | जल में डूबे और उभरे पत्थरों पर बड़े ध्यान से पाँव जमा जमा कर, जगह बनाते बनाते तीनो इधर से उधर जा रहे है | नदी का ठंडा पानी, सुबह की शाँत, नीरव और पवित्र शान्ति और इस सबके बीच जिन्दगी की ख़ुशी और किलकारियाँ, शायद इससे बेहतर एक नये दिन की शुरुआत की परिकल्पना आप नही कर सकते !
कैम्प में लोग जाग रहे हैं, सुबह की चाय बन चुकी है, चाय की चुस्कियों के बीच टीवी पर समाचार चल रहे है कि यहाँ वहाँ पहाड़ो पर भारी बरसात जारी है और भूस्खलन से 50 से ज्यादा जाने जा चुकी हैं, तो उधर मैदानी क्षेत्रों में यही पानी बाढ़ का प्रकोप धारण कर तबाही मचा रहा है | इधर, इस हाल में जितने लोग हैं उनकी बातचीत का केंद्र भी यही परिस्थितीयां हैं | एक समूह इस बात से चिंतित है कि उन्हें आगे नारकंडा जाना था और कहीं अगर बीच राह में इस भूस्खलन की वजह से मार्ग ठप्प मिले तो ? बहरहाल, चाय के बाद अब समय है नहां धोकर तैयार होने का, जिससे दस बजे तक सब नाश्ते के लिये तैयार हो जायें | आज नाश्ते में आलू के परांठे, ब्रेड-जैम, उबले अंडे और चाय है | नाश्ते के बाद का समय एक्टिविटीज के लिए नियत है | ग्यारह बजे के लगभग, जो भी गेस्ट इसमे रुचि रखते हैं, एक नियत स्थान पर एकत्रित होना शुरू हो जाते हैं | जहाँ पहले सबको सुरक्षा उपकरणों पर एक डेमो दिया जाता है, और फिर एक के बाद एक पाँच ऐसी एक्टिविटीज हैं जिन से सभी प्रतिभागी गुजरते हैं, दो एक्टिविटीज शाम को चार बजे करवाई जायेंगी | एक्टिविटीज पूरी होने पर जलजीरा का पेय हाजिर है, जिसकी एक एनर्जी ड्रिंक के तौर पर सभी को बहुत आवश्यकता भी थी |

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रोहतांग की कठिन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी.

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दोस्तों, पिछली पोस्ट में आपने हमारी मणिकर्ण यात्रा के बारे में पढा और मुझे उम्मीद है की पोस्ट आप सबको बहुत पसंद आई होगी….

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हिमाचल डायरी : दो पल के जीवन से…  (Sirmour सिरमौर – भाग 2)

हिमाचल डायरी : दो पल के जीवन से… (Sirmour सिरमौर – भाग 2)

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शाम के छह साढ़े छह बजे का समय चाय का नियत है, कुछ मेहमानों के पास अपनी निजी, और कुछ कैम्प वालों के पास, कुल मिलकर इतनी छतरियां है कि सभी एक एक करके हाल में पहुँचते है | इस तरह के आयोजन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि आप केवल अपने खोल में ही सिमटे नही रहते बल्कि अजनबी लोगो से मुलाकात होती है, कुछ नए दोस्त बनते है मोबाइल नम्बर भी लिए दिए जाते है और फिर एक दुसरे के सम्पर्क में रहने के वादे इरादे भी! यूँ तो ज्यादातर लोग गुडगाँव और दिल्ली के ही है, शायद इन्ही जगहों पर सबसे अधिक रोजगार के साधनों का सृजन भी हुआ है जिसकी वजह से देश विदेश से हजारो लोग अपने परिवेश को छोड़ कर इन शहरों में आये है, जिसकी वजह से एक नवधनाढ्य मध्यम वर्ग का उदय हुआ है, जो 1990 से पहले की भारतीय अर्थव्यवस्था में अनुपस्थित था | और, फिर ऐसे छुट्टी के अवसर पर दो चार दिन अपने PG में पड़े रहने से, या माल में घूमने से बेहतर है कि इस तरह का पर्यटन ही कर लिया जाये | एक बड़ा सा ग्रुप ऐसे ही लडके लडकियों का है, मगर वो अपनी ही दुनया में मगन है, उन सब की काटेज आस पास ही है, सो उनका अड्डा वहीं जमा रहता है | अपने ही म्यूजिक सिस्टम पर वो गाने लगा लेते है और नाचते रहते है | अपनी गिटार भी है, कभी कभी उस पर भी खुद ही गुनगुनाते रहते हैं, लडके हों या लडकियाँ, सिगरेट और शराब के शौक़ीन है और कैम्प के सहयोग से उनकी अनवरत सप्लाई उनके लिए चालू है | एक दूसरा ग्रुप दस लोगों का, दिल्ली से है, जो एक ही स्कूल से सन नब्बे के पास आउट है, और अब सभी अलग अलग कार्य क्षेत्रों में सलिंप्त है | मगर उल्लेखनीय बात है कि वो आज भी एक दूसरे के सम्पर्क में है | और, कभी कभी उन साथ बिताये गये अपने उन गुजरे लम्हों को याद करने के लिए, अपने परिवारों से अलग ऐसे प्रोग्राम बनाते रहते है | दिल्ली से हैं, और अधिकतर पंजाबी हैं, सो शुरूआती संकोच के बाद जब खुलते हैं तो फिर इतना खुल जाते हैं कि आप उनकी शाम की महफ़िल में ही अपने आप को जाम उठाये पाते है |

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An Ode to Radhanagar Beach

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I had just arrived and a mere look at the beach is what made me fall with it! Let me describe what Radhanagar beach was like. The place was super clean and had a handful of tourists. Radhanagar beach was guarded by police officials who were also responsible for the safety of the tourists. Next to the beach was a famous hotel chain which provided accommodation in beautiful huts made of bamboos and natural products. The place was serene and calm.

The view of the blue sees was amazing and I had never seen such a beautiful shade of water. The sand was perfect and was near to white. Radhanagar beach also had tourist huts made completely of bamboos. Radhanagar beach is not for the ones who are looking for some action. The beach doesn’t have any facilities for snorkelling, scuba diving or boating.

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Amarnath Yatra :: Panchtarni to Holy Cave

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The test of faith on Lord Shiva continued all the way to Shrine. To reach there, it’s another kilometre through slippery snowy path by the side of river Amaravati, and when we reached below the cave, we saw long stairs to climb and a longer queue to follow. The cave is located at an elevation of 13,500 feet above the sea level and its opening is a large semi-circular hollow into a cliff.
It was about 60-70 stairs before the cave we saw the base hospital and a young man of 33-34 years. He could not make it to the cave and took his last breath there. I looked up inside the cave and the belief became firm again. To reach at Shiva’s feet, one must have his blessings; one must have got his calling.

I entered inside the cave with my two friends. The floor of the cave was extremely cold and wet. In deepest right corner of the cave, I saw Lord Shiva, in his unique shape of ice-lingam about 11-12 feet tall. I bent at his feet (the ice base) and offered Billa leaves. I stood quiet there for some time with folded hand but I forgot to seek anything from ‘Mahadeva’ and came out happily from the cave with a sense of fulfillment.

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पवित्र गुफा से बालटाल वापसी (Part 5)

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अमर नाथ यात्रा पर जाने के दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से। । पहलगाम से जाने वाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है लेकिन रास्ता लम्बा है और कुल दुरी 32 किलोमीटर है । बालटाल वाले रास्ते से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल 14 किलोमीटर है लेकिन यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है।

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Around London – Weymouth, Durdle Door and Lulworth Cove

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It’s been few months in UK (London) and was not sure what all things I can cover nearby outside London and I was constantly thinking about it. Few weeks back one after noon I along with my colleague somehow zeroed in on Weymouth which have few other places called Durdle Door & Lulworth Cove around it… I started exploring what all things we can cover in our three days trip and my colleague started exploring the options how to reach there … till evening we were all set to go on the Friday evening…

We boarded the train on Friday evening and were supposed to reach our Holiday Park in Weymouth by midnight and which we did after few delays….

Saturday Morning 1 st Day – exploring Weymouth — The view was awesome as the beach and the grasslands were visible from our Caravan and we were aware that it would be a long day walk ahead.  We spend couple of hours in our resort and headed towards the beach for which we came to Weymouth.  The sun was bright and penetrating and it took around 20 minutes to reach the sea shore. The moment we put our toes in the cold water all of us got refreshed… As it was a pebble beach there was no sticky feeling of sand and it was convenient going to and fro into the water …if you know what I meanJ. We spend few hours over there and then decided to walk along the shore which looks to be 3-4 miles

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हिमाचल डायरी : दो पल के जीवन से… (Sirmour सिरमौर – भाग 1)

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कांगो जोहड़ी में ही मुख्य सड़क से लगभग चार किमी नीचे की उतराई पर कैंप रोंक्स हमारी मंजिल है | हमे रास्ता दिखाने रिसोर्ट की तरफ से अपनी इनोवा गाड़ी लेकर सौरभ ( इस कैम्प के मालिक का बेटा} आया है और अब हमे इस कच्ची और पथरीली सडक पर बिना किसी सुरक्षा व वाले रास्ते पर जाना है | इस सडक पर गाड़ी बढ़ाते ही लैंसडाउन के हिल व्यू शांति राज रिसोर्ट की याद ताजा हो आई | बिलकुल वैसी ही सड़क मगर रास्ता उससे भी एक किमी और ज्यादा लम्बा, ऊपर से बारिश और गाड़ियों की लगातार आवाजाही के कारण बीच बीच में पानी के पोखर से बन गए हैं जिनमे से गुजरते डर लगता है कहीं आप की गाड़ी का पहिया न फँस जाये, मगर इसके सिवा कोई और चारा भी तो नही | नास्तिक पता नही कैसे इन लम्हों से पार पाते होंगे, मगर हम तो राम राम और वाहेगुरु वाहेगुरु करते और फिर से एक बार ये सोचते हुये कि  इस बार तो यहाँ आ गए अगली बार किसी ऐसी जगह नही आना, पिछले कुछ सालों से इसी तरह से अपने डर पर काबू पाते आ रहें है | रिसोर्ट की इनोवा आगे आगे चल रही है और पीछे पीछे हम मगर अभी तक तो रिसोर्ट का नामो निशाँ ही नही | मगर फिर दूर नीचे घाटी में पानी की कुछ टँकियां नजर आती है तो मन में आशा की एक नई लहर का संचार होता है जब इतना पहुँच गए तो वहाँ भी पहुँच ही जायेंगे और फिर हमसे आगे तो इनोवा है | हालांकि प्रकृति वही है और प्रकृति के नजारे भी, मगर अब जल्दी पहुँचने की हसरत में इसे भोगने का कोई इरादा नही, अन्यथा आप कहीं भी अपनी गाड़ी रोक कर यहाँ घंटो गुजार सकते हैं | परन्तु चाहत अब यही है कि बस अब ये रास्ता किसी तरह जल्दी से कट जाये |

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