Manali

Manali is a popular resort for all seasons and for all travellers. It has temples, sightseeing spots and adventure activites. Situated near the end of Kullu valley on the National Highway leading to Leh, it is a favourite resort for trekkers going to Lahaul, Spiti, Bara Bhangal and Zanzkar Ranges. The Beas river meanders through Manali town while snow capped peaks, deodar and pine trees, tiny fields and fruit orchards make it a picturesque holiday spot.
Manali is popular destination for adventure sports seekers being a staging point for a number of treks to Beas Kund, Chandrakhani Pass and sports such as white-water rafting, skiing in winters. This town also offers sightseeing opportunities like the exquisite Hadimba Temple, Manu Temple, Buddhist and Tibetan monasteries.
Best time to visit: March to June, October to February
Languages spoken: Hindi, Pahari, English
Climate: Cool summers and cold winters with heavy snowfall
Holy Places: Hadimba Temple, Manu Temple, Vashista Temple, Old temples in Jagatsukh
Adventure Tourism: Trekking, White-water rafting, Skiing
Natural Wonders: Solang Valley, Rohtang Pass

Surya in Tent at Sarchu

Ladakh Calling… (Part 2) – Manali to Sarchu

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Next morning I was up @ 05:30 Hrs & dived out of bed to see some positive signs of relief but the scene was frustrating & heart breaking. The conditions were totally overcast with little rain. Few Peaks were not even visible & were fully covered under the mist. On the other side of Bhaga River some mountain tops received fresh snowfall in the night.

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The Great Himachal Circuit – Part 5 : Manali to Delhi Via Shimla

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With green mountains on one side and the beautiful Beas on the other side, we crossed beautiful places like Bhunter, Aut and Pandoh. We halted for sometime at the very beautiful Pandoh Dam on the river Beas. This is basically the end of Beas river with us and it diverts towards Punjab. From there on we reached Mandi in another 1 and half hours. Mandi is a plane area and is not very cold. The sun was really on its peak, but then it’s a lovely small town. There are numerous Dhabas enroute and in one such Dhaba we had our lunch.

Another 30 minutes and we reached Sundernagar. At Sundernagar, we took the Shimla Highway and dropped the excellent Manali Delhi Highway. Sundernagar is also a good small town. Around 4 PM, we had already entered the Shimla District. And again we started climbing up. The roads in Shimla off course not to explain are awesome. It was drizzling slightly and the fog was dense. That was one adventurous journey through the hills.

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Ladakh Calling… (Part 1) – Delhi to Manali

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We started from Shahbad @ around 14:30 Hrs & reached Chandigarh soon without any further break. It was 4:00 in the afternoon & we passed through lot of “Thekas” (Liquor Shops) on the Chandigarh bypass road. Finally, we succumbed to the temptation & stopped at a decent place. Deepak & I happily ordered chilled Beer while Surya, a bit apprehensive for beer-n-ride, was having fun with his chilled Limca. We dozed ourselves quickly & without wasting much time we soon crossed Ropar, Kiratpur Sahib & reached Swarghat. On the way we negotiated well with the heavy traffic spilling out diesel fumes & with all the dust & pollution on our bodies we reached Bilaspur @ 18:30 Hrs. The sun was about to set & we took a small room in the Hotel “LakeView” at Bilaspur. It was time to cheers for successfully completing the 1st day of our ride. Without wasting much time we took out our B.P bumper & sat in the balcony with the lake view. We had good round of discussion & comments on the riding styles & also planned for our next day’s target – Manali.

It was drizzling in the morning & we were keeping our fingers crossed for those high passes on our way. We got up early, dressed ourselves & without having any morning tea or breakfast, which was a regular routine for all of us, we started journey @ 07:00 Hrs.

On our way crossed Bilaspur city & NTPC Koldam site on river Sutlej. By 08:30 Hrs we were dying from hunger & we finally took a halt near a road side dhaba “Evergreen Hotel” for breakfast. We had the best of the possible breakfast available on this route “Gobhi/Aaloo Parantha + lot of Butter with hot tea”. We tanked up our stomachs & thanked the owner for making such tasty fresh “Paranthas” & promised him to come back on our return journey. On the way we crossed some recognized towns like Sundar Nagar, Mandi.

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The Great Himachal Circuit – Part 4 : Kaza to Manali

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Chattru at a height of around 13000 ft, around 17 KM from Gramphu, 32 KM from Rohtang top, and we started around 4:30 from there. Next was Gramphu on way and because of the pebbled roads another 1 hour to reach Gramphu. And lots of small as well as big waterfalls. And lots of nullahs. As we approach towards Rohtang top, greenery starts to appear and the dryness starts to disappear. Lovely view of small waterfalls in distant mountains on the opposite side, makes the journey lovely. In one such waterfall, Lekhram stopped the cab and washed it, while we enjoyed the view of the waterfall, the chilled water and the amazing view.

Once Gramphu is crossed, then starts the steep rise to Rohtang Pass. And oh man, the view is something one can never forget. Just before getting up, there is a route that joins the route we were into. This route is coming directly from Ladakh, the well know Leh-Manali highway. As one rise up, there may be numerous landslide clearances. And stoppages and long traffic snarls can eat up few hours. But all these clearances are very enjoyable.

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लेह लद्दाख – मनाली – केलोंग – दार्चा – बरालाचा ला – लाचुलुंग ला – पैंग – 3

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यहाँ पर बहुत से सरकारी दफ्तर और सेवाएँ है। एक बड़ा बाज़ार और सड़क से दाएं ओर नीचे बस स्टैंड भी है। यहाँ पर रुकने का पूरा इंतजाम है कई रेस्ट हाउस, सरकारी बंगलो और होटल भी है। केलोंग मे गाड़ी का हवा-पानी टिप-टॉप करने के बाद हम बिना रुके “जिस्पा”, “दार्च” होते हुए “zingzingbar” पहुँच गए। एक बात बता दूं की “zingzingbar” मे भी रात को रुकने का इंतजाम है। अभी दोपहर का समय था तो हमने रुकना ठीक नहीं समझा। ये हमारी बहुत बड़ी भूल थी। इसका ज़िक्र आगे चल कर दूंगा। “zingzingbar” से आगे खड़ी चढाई पार करने के बाद हमने “बारालाचा ला दर्रा” दर्रा पार कर लिया था। इस दर्रे की ऊंचाई 5030 मीटर या 16500 फीट है। यहाँ से लगातार उतरने के बाद हम लोग “भरतपुर” होते हुए “सार्चू” पहुँच गए।

“सार्चू” मे हिमाचल प्रदेश की सीमा समाप्त हो जाती है और जम्मू-कश्मीर की लाद्द्खी सीमा शुरू हो जाती है। यहाँ पर भारतीय सेना का बेस कैंप है और एक पुलिस चेक पोस्ट भी है। चेक पोस्ट पर गाड़ी सड़क के किनारे रोक दी गई। हमारा परमिट चेक किया और रजिस्टर मे दर्ज कर लिया गया। “सार्चू” मे सड़क एक दम सीधी है और गाड़ी की रफ़्तार आराम से 100-120km/h तक पहुँच जाती है। यहाँ पर गाड़ियाँ फर्राटे से दौड़ रहीं थी। तभी क्या देखा एक फिरंगी महिला साइकिल(आजकल तो bike बोलते हैं) पर सवार होते हुए चली आ रही थी। मुझे सड़क पर लेटा हुआ देख वो साइकिल से नीचे उतर गई और पैदल चलने लगी।

हम सब उसको देख कर हैरान हो गए। शायद हरी ने उससे पुछा की अकेले जा रही हो तो risk है। उसने बताया की उसके साथ के और लोग भी पीछे आ रहे हैं। वो और उसके साथी मनाली से लेह साइकिल से ही जाने वाले थे। और उसको आज “सार्चू” मे ही रुकना था। इतने दुर्गम, पथरीले, टूटे-फूटे, चढाई-उतराई, अनिश्चिताओ से भरपूर इलाके मे जहाँ 2.6L की Xylo का भी दम निकल जाता था ये फिरंगी इसको साइकिल से ही पार करने वाले थे। इनके जज़्बे और हिम्मत की तारीफ़ की गई और इनको सलाम बोल कर भोजन की तलाश मे चल दिए।

ठीक से याद नहीं है पर दोपहर के करीब 3 बज रहे थे और भूख लग चुकी थी। यह जगह एक बहुत बड़े समतल मैदान जैसी है। यहाँ पर भी रुकने के लिए बहुत सारे टेंट लगे हुए थे। ये सब देख कर समझ आ गया था की यहाँ के लोग काफी मेहनती है। साल के 6 महीने ही मनाली-लेह हाईवे खुलता है। इन्ही 6 महीनों मे इनकी कमाई होती है और बाकि के 6 महीने तो बर्फ पड़ी रहती है। यहाँ पर लगे एक टेंट खाने का इंतजाम था। हमसे पहले और लोग भी थे तो हमको 10-15 मिनट बाद का टाइम दे दिया गया। इस टाइम का हमने पूरा उपयोग करके फोटो session कर डाला। “सार्चू” मे ली गई कुछ फोटो। जानकारी के लिए बता दूँ यहाँ पर ली गई सारी फोटो मैंने नहीं बल्कि मनोज, हरी और राहुल ने खीचीं हैं।

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लद्दाख यात्रा – > नोएडा – बिलासपुर – मंडी – मनाली

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खेर बहुत बड़ी बला टली और 5 मिनट चलने के बाद “Haveli” आ गयी और हमने गाड़ी पार्किंग में लगा दी। अंकल के साथ गाड़ी का बाहरी निरक्षण किया गया एक भी खरोंच नहीं थी, ऐसा लगा की सारा झटका Xylo के शौकर और कमानियों ने झेल लिया था। अंकल ने कहा की अगर इंजन मे कोई लीकेज होगी तो पता चल जाएगा क्योंकि हम वहां पर 30 मिनट के लिए रुकने वाले थे। हम चारों “Haveli” के अंदर चल दिए, पर अंकल अभी भी गाड़ी के निरक्षण मे लगे हुए थे। इस घटना को याद करते तो पहले तो हम सहम से जाते पर कुछ समय के बाद ये एक मज़ाक का विषय बन चुका था। इसका जिक्र आते ही ज़ोरों की हंसी आती थी क्योंकि अभी तो ट्रिप शुरू ही हुई थी और अंकल तो इसका अंत करने ही वाले थे। आगे के पूरे रास्ते हम यही सोच कर बहुत हँसे थे। हमने यहाँ पर कुछ नहीं खाया। सब फ्रेश होकर गाड़ी के ओर चल पड़े और अंकल से कहा कि अब सीधे रात्री मे भोजन ही करेंगे।

यह सोच कर हम आगे निकल पड़े। अम्बाला से कुछ दूर पहले ही नज़र “Liquor” शॉप पर जा पड़ी। गाड़ी को रुकने का आदेश दिया गया और “Haveli” से पहले हुए कांड का अफ़सोस मनाते हुए मूड बनाया गया। यहीं पर अंकल की एक खासियत का पता चला, ट्रांसपोर्ट लाइन मे होने के बावजूद वो मदिरा का सेवन नहीं करते थे और सुद्ध साकाहारी थे। ये सुनकर हम लोगों की खुशी दुगनी हो गई और हम अपनी बाकि बची हुई यात्रा को लेकर निश्चिंत हो गए थे। आजकल ऐसे ड्राईवर कम ही मिला करते हैं। यहाँ पर थोड़ा टाइम बिताने के बाद हम लोग अम्बाला से पहले ही अंकल ने एक U-Turn ले लिया और बोले की हम जाटवर, बरवाला, रामगढ़ होते हुए पिंजौर पहुँच जाएँगे। हम सबने कहा जैसी आपकी इच्छा “अंकल”। रात के 10 बज चुके थे हमने पिंजौर में रुक कर खाना खाया, अंकल को बोला की गाड़ी मे जो pizza पड़ा है वो ले आओ। अंकल बोले बेटा वो तो मैंने खा लिया है। अंकल के सामने किसी ने कोई आपत्ती नहीं जताई। लेकिन बाद में ये भी एक joke बनके रह गया क्यूंकि अंकल ने बड़े शान से कहा था “में pizza नहीं खाता, हम तो सादी रोटी खाने वाले इंसान हैं”। हम आगे बद्दी, बिलासपुर, सुंदरनगर, मंडी, कुल्लू होते हुए मनाली जाने वाले थे और अंदाजन दोपहर के 12 या 1 बजे तक पहुँचने वाले थे। खाने के सबने सोचा की यहीं रूम लेकर सो जाते हैं। दो-दो का ग्रुप बना कर हम लोग रूम देखने चले गए। रूम रेंट यहाँ पर बहुत ज्यादा था। सिर्फ 5-6 घंटे की ही तो बात थी। क्यूंकि हम अगली सुबह जल्दी ही निकलने वाले थे। होता वही है जो होना होता है, सबने बिना रुके आगे चलने का फ़ैसला किया। यहाँ से थोड़ी देर बाद हम बद्दी पहुँच गए। नालागढ़ के आस-पास ही गाड़ी रुकवा कर चाय पी। अभी भी हमे 255km आगे मनाली तक जा कर 10-सितम्बर की रात वहीं बितानी थी। बद्दी के बाद हम चारों गहरी नींद मे चले गए।

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Road to Leh – Kanpur to Manali (Part 1)

Road to Leh – Kanpur to Manali (Part 1)

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Next day, our plan was to reach Manali, another 450-500 km or so drive, but there were two routes: either via Chandigarh-Mandi-Manali or via Panota sahib-Nahan-Dharampur(Solan)-Sabhathu-Arki-Barmana-Mandi-Manali. These two routes meet near Surendernagar, but the first leg is what makes difference. We thought we wont travel through the plains and avoid the rush so we decided to go via Nahan. We started at about 9.30 which was a bit late, but nevertheless.. I don’t know whether it was a mistake: the road was bad for quite a bit but traffic wasn’t much with sparsely populated places and the scenes were gorgeous. Soon after Panota Sahib, the beauty of mountains started and we started working, busy with the our cameras or busy looking at the nature. Worst was to be the person driving the vehicle in this situation, for whom it was an excitement as it  was his first real mountain driving experience and he did very well, 100/100. We reached Dharampur after driving for about 4-5 hours at about 2.30 pm and after covering about 175 km. Dharampur is a junction for people going towards Solan or Shimla from plains or Chandigarh/Delhi, so we faced a bit of crowd there. Had our lunch and then proceeded towards Sabathu and Arki. The roads in this stretch were basically state or district roads, traffic wasn’t much but roads weren’t good either. We couldn’t drive fast enough, and by the time we reached Darlaghat, to join NH-88, it was quite late, about 6 pm and we hadn’t traveled enough, almost 70km in about 3 hours. We realized that it would be tough to make it to Manali on the same day in good time. We then switched over and I started to drive, my first real experience of driving on mountains. However, the road towards Manali was good as except at some places, so not much of an issue. We could not much of scenery as it was getting dark, except the visible forest fire at certain places on the high hills.

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Getting Leh’d in ten days – Part 1

Getting Leh’d in ten days – Part 1

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Whenever I read about someone’s excursion to Leh, it’s a heroic story all about grit and determination. It’s about a man, his machine and the mountain. It’s about how one faces the vagaries of nature, the treacherous roads and the numbing cold. It’s like an action movie with a heavy metal background score. In stark comparison, my narration will be like a Karan Johar flick. All scenes will be in soft focus, everything will be beautiful, there will be drama and intrigue, all set to a melodious tune.

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Picturesque Manali

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Manali, a picturesque hill station situated at a height of 6308 ft lies at the northern end of Himachal Pradesh and is undoubtedly one of the best Hill stations India has. At a distance of 550 km from the capital city of Delhi, Manali is the most sought out holiday destination for travelers. The snow-clad hill tops and amazing scenic beauty captures every person’s heart and offers an immense yet an extraordinary experience, no matter how many times you visit the place….. For me, it’s my favorite destination to let loose and embrace what life has to offer…along with a calmness that soothes the soul… so last winter’s we set of for a wintry holiday to Manali to celebrate a white Christmas!!
Distance from Delhi: 550 Km

Travel Time: 12-14 hours with 2-3 breaks in between

Best Time to Visit: Anytime, however to view snow…Late Dec-early March

Driving Directions and Map: http://bit.ly/vq3jL9

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