Parli Vaidyanath / परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन

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हम जब भी धार्मिक यात्रा पर जाते हैं तो हमारी हमेशा यही कोशिश रहती है की विश्राम स्थल मंदिर के जितना हो सके करीब हो, ताकि अपने प्रवास के दौरान हमारा जितनी बार मन करे उतनी बार हम भगवान् के दर्शन कर पायें, साथ ही साथ मन में यह संतुष्टि भी होती है की हम मंदिर के करीब रह रहे हैं, और हम मंदिर की सारी गतिविधियाँ देख पाते हैं.

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वृन्दावन – राधा कृष्ण की रासलीला स्थली………….

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पागल बाबा मंदिर दर्शन के बाद अब हम पहुंचे श्री कृष्ण प्रणाम परम धाम मंदिर में। यह भी बहुत सुन्दर मंदिर था तथा यहाँ पर सशुल्क यन्त्र चालित झांकियां भी थीं, हमने भी झांकियां देखीं, कृष्ण भगवान के जीवन पर आधारित ये झांकियां बड़ी ही मनमोहक थी, बच्चों को तो यह शो इतना पसंद आया की वे मंदिर से बाहर निकलने को राजी ही नहीं हो रहे थे। अब हम फिर अपने वाहन में सवार हो गए थे, ये दोनों मंदिर तो मथुरा के ही बाहरी इलाके में थे अतः मैं सोच रहा था की अब शायद मथुरा की सीमा समाप्त होगी और फिर कुछ देर के बाद वृन्दावन शुरु होगा, लेकिन मेरा सोचना गलत साबित हुआ, अभी मथुरा समाप्त ही नहीं हुआ था और ड्राईवर ने कहा की वृन्दावन आ गया। मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा था की ऐसे कैसे वृन्दावन आ गया।

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Shri Gajanan Maharaj Shegaon / शेगांव- श्री गजानन महाराज दर्शन भाग – 3 ( आनंद सागर उद्यान तथा ध्यान केंद्र दर्शन)

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आनंद सागर का नाम सर्वथा उपयूक्त है, ये सचमुच आनंद का सागर है | श्री गजानन महाराज के दर्शन करने के लिए आये उनके अनुयायी तथा भक्त स्वाभाविक रूप से इच्छुक होते है की वे यहाँ कुछ दिन रुके तथा संस्थान की धार्मिक, संस्कृतिक तथा शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लें, भक्तों की इस इच्छा को केंद्र में रखते हुए संस्थान ने उनके बचे हुए समय में उन्हें प्रकृति तथा अध्यात्म से जोड़ने के लिए एक उद्यान का विकास किया जिसे आनंद सागर नाम दिया गया और आज आनंद सागर का नाम देश के कुछ चुनिन्दा उद्यानों में शुमार है |

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Shri Gajanan Maharaj Shegaon / शेगांव- संत श्री गजानन महाराज दर्शन भाग 1 (स्थान परिचय एवं भौगोलिक स्थिति)

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पिछले वर्ष अक्टुबर में श्रीसैलम ज्योतिर्लिंग तथा तिरुपति बालाजी की यादगार यात्रा के बाद बहुत समय से किसी यात्रा का योग नहीं बना था, इधर एक लम्बे अरसे महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित संत श्री गजानन महाराज के पवित्र स्थान शेगांव के बारे में सुनते चले आ रहे थे और पिछले एक वर्ष से वहां जाने का मन बन रहा था, अंततः अपनी इस इच्छा को मूर्त रूप देने के प्रथम प्रयास के रूप में मैंने अपने परिवार के साथ शेगांव जाने के लिए अपने करीबी शहर महू से अकोला के लिए दिनांक 21 अक्टुबर का रेलवे का रिजर्वेशन करवा लिया।

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औरंगाबाद: अतीत के आईने में

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हम वहां के अत्यंत शांतिपूर्ण माहौल में पहुंचकर तथा औरंगजेब की कब्र के सामने खड़े होकर स्तब्ध तथा आश्चर्यचकित होकर आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहे थे और सोच रहे थे……एक समय हिन्दुस्तान पर राज़  करने वाले बादशाह की कब्र…….इतनी साधारण…….इतनी सादगी लिए……….ऊपर छत भी नही……….हमारी इस जिज्ञासा को शांत किया वहीँ पर खड़े एक मौलाना रूपी गाइड ने.

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हिमाचल से लौटते हुए………

हिमाचल से लौटते हुए………

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दोस्तों, घुमक्कड़ी की अपनी अतृप्त तथा अनियंत्रित तृष्णा को आभासी परिकल्पनाओं की उड़ान से शांत करने की गरज से गूगल पर घूमते घूमते कब…

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बिजली महादेव की यादगार पैदल यात्रा ……..

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सभी घुमक्कड साथियों को दशहरे की हार्दिक शुभकामनायें तथा आने वाली दिवाली की अग्रिम शुभकामनाएं. पिछली पोस्ट में मैने अपलोगों को हमारी रोहतांग की बर्फिली…

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रोहतांग की कठीन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी (भाग- 2)

रोहतांग की कठीन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी (भाग- 2)

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पिछली कड़ी में मैं आपसे जिक्र कर रहा था की किस तरह से मुसीबतों को पार करते हुए अंततः हम लोग रहाला फाल पहुंच ही गए, और फिर सिलसिला शुरू हुआ बर्फ में खेलने का, बर्फ में फिसलने का. उम्रदराज प्रौढ़ दम्पतियों को बच्चों की तरह बर्फ से खेलते हुए देखने में जो मज़ा आ रहा था उसका वर्णन करना मुश्किल है. लगभग सभी लोग बच्चे बने हुए थे, हर कोई इन यादगार पलों को जी लेना चाहता था. हम सब भी अपनी ही मस्ती में खोए हुए थे, किसी को किसी का होश नहीं था. बच्चे अपने तरीके से बर्फ से खेल रहे थे और बड़े अपने तरीके से, मकसद सबका एक था….आनंद आनंद और आनंद.

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रोहतांग की कठिन राह…..बर्फीले पहाड़ और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर सोलांग घाटी.

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दोस्तों, पिछली पोस्ट में आपने हमारी मणिकर्ण यात्रा के बारे में पढा और मुझे उम्मीद है की पोस्ट आप सबको बहुत पसंद आई होगी….

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