11 Nov

चम्बा के चीड़ से धनौल्टी के देवदार तक

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धनौल्टी देवदार के पेड़ों के बीच बसा हुआ है | इस छोटे से हिल स्टेशन के हर ओर के विहंगम दृश्य आपके मन को निश्चय ही मोह लेंगे है | पूरा पार्क देवदार के पेड़ों से आच्छादित है जिसके बीच से चलने के लिए लकड़ी से रास्ते बनाये गये हैं | हम लोग उन टेढ़े मेढ़े रास्तों से होते हुए आगे बढ़ने लगे और साथ ही साथ आने वाले हर एक मनमोहक दृश्यों का आनंद उठाते रहे |

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Cherishing Shekhawati Cuisine: Food Tour

Cherishing Shekhawati Cuisine: Food Tour

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The all-India favourite dish called “पानीपूरी” (a flatbread filled with water) was also prevalent in Shekhawati. It has retained its charm over the masses because of its tangy taste and mouth-watering recipe. Many a times, this street food had to face the wrath of the puritans

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लखनऊ में हैं गर तो इमामबाड़ा देखना ना भूलियेगा जनाब !

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लखनऊ में हैं आप और बड़ा इमामबाड़ा नहीं देखा तो ऐसा ही है जैसे आगरा जाकर ताजमहल ना देख पाए हों या दिल्ली में होकर भी इंडिया गेट नहीं देख पाये.

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Family trip to Jodhpur – Must do things

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We had hot Pyaj ki Kachauri, Mirchi Bada & Anjeer Shake. Specially, my son liked the shake very much. Although, our plan has been just for snacks, but food was so rich that it gave us feeling of lunch. Total expense was just Rs. 120 for 2 & half people.

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ऋषिकेश में रिवर राफ्टिंग

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‘जय गंगा मैया’ की ध्वनि के साथ हम लोग राफ्ट लेकर चल पड़े | राफ्टिंग में सर्वाधिक आनंद पर्वतों के बीच से बहती तेज नदी के बीच एक छोटे से राफ्ट से बड़े बड़े हरे-हरे पर्वतों को देख कर होता है | ऐसा लगता है मानो मनुष्य न जाने क्यों गर्व करता है प्रकृति के सामने उसकी कोई सत्ता नहीं है | बड़े बड़े खड़े पर्वत किसी साधना में लीन साधु की तरह लग रहे थे | उनके ऊपर उगे पेड़ झाड़ियाँ उनके बढ़ी हुई दाढ़ी की तरह और चोटियाँ सर के चोटी की तरह प्रतीत हो रही थी | यही शांत, सुखमय वातावरण मानसिक और आतंरिक रूप से संतुष्टि प्रदान करता है | अक्सर चारों ओर देखने में, मैं एक दो पल के लिए भूल भी जाता था; की राफ्टिंग कर रहा हूँ | होश तब आता जब हमारे कमांडर आगे आने वाले रैपिड के लिए आगाह करते | शिवपुरी से राम झुला तक लगभग 16km की राफ्टिंग में कुल नौ रैपिड आते हैं जिन्हें एक से लेकर 5 डिग्री तक चिन्हित किया गया है | आगे आने वाले रैपिड का नाम रोलर कोस्टर था जो 5 डिग्री का था इसमे राफ्ट बाहर से घूमकर अन्दर की ओर तेजी से आती है | हम सभी लोग तेज से चिल्लाये | उत्साह दिखाने के लिए सबके अपने अपने चिल्लाने के तरीके होते हैं | वैसे कमांडर ने रैपिड के बीच में शोर से मना किया था ताकि उसके द्वारा दिए गये कमांड को हम लोग सुन सके |

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लखनऊ का इमामबाड़ा और शाही बावली की घुम्मकड़ी

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इमामबाड़े की दूर तक फैली सीढ़ियां तथा बाईं ओर शाही बावली और दाईं और नायाब मस्जिद के चित्र तत्कालीन वास्तुकला की भव्यता का सजीव चित्रण कर रहे थे. मैंने जूते उतारकर इमामबाड़े …

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ब्रह्माकुमारी  आश्रम  की यात्रा व आध्यात्मिक ज्ञान  के पल….!

ब्रह्माकुमारी आश्रम की यात्रा व आध्यात्मिक ज्ञान के पल….!

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अब मैं मध्य बर्थ पर था और पत्नी लोअर बर्थ पर. वह महिला जिससे बर्थ एक्सचेंज की थी वह ट्रेन चलते ही ऐसी निंद्रा में लीं हुई कि सवेरे चाय- नाश्ता की आवाजों के कोलाहल और चलकदमी से ही जागी. जैसी मुझे चिंता रहती है मिडिल या अपर बर्थ की ऐसी कोई दिक्कत तो नहीं हुई क्यूंकि एक बार सोने के लिए बेड पर जाने के बाद फिर तो मैं सवेरे ही उठता हूँ चाहे नींद न भी आये. बस बर्थ में शरीर को घुसाना और फिर स्वयं को समेटना– इन दो क्रियाओं के खतरों के कारण मैं लोअर बर्थ को बेहतर मानता हूं। यदि पत्नी के सहमति नहीं होती तो मैं उन महिला को उपकृत करने वाला नहीं थ. लगभग एक महीना पहले बुकिंग कराओ, लोअर सीट के लिए, और एक क्षण में एक आग्रह पर वह बर्थ आप किसी और को सौंप दें, यह तो कोई बात नहीं हुई. हालांकि पत्नी का सोचना इसके विपरीत है, चूँकि वह भी समय-समय पर अपनी यात्रा में लोअर बर्थ को हथियाने में निपुण है, तो उसके लॉजिक के अनुसार उस बर्थ पर किसी महिला को सोने देने में कुछ भी असहजता नहीं है. और यह कि लोअर बर्थ पर महिलाओं का पहला अधिकार नैसर्गिक रूप से बनता है (रेलवे के नियम चाहे जो कुछ हों).

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Joychandi Pahar – a Recollection

Joychandi Pahar – a Recollection

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“We are from Calcutta, you have got a beautiful place here”

“Ki je bolen babu, ki ache ekhane… khaowar jal parjyonto nai…” (what are you saying sir, nothing is here… not even water to drink…)

“Lok ashena ekhane ghurte?” (Don’t you get people visiting this place?)

“Ho, ashen bote. Majhe majhe chele puler dol ashe. Tabu lagiye thake oi okhane lake-er pare. Aar dori-dora niye pahar-e uthe. Pura jayga nogra kore diye jai” (Yes, indeed some group of youngsters come. Stay in tents near that lake. Do some rock climbing on the hill. And finally leave transforming the whole place as dustbins) certainly true, that is.

His petty house was behind his pettier shop. But his heart was bigger than anything. Since his shop was not ready to supply anything yet, he ordered something from his home – and we were served with a good meal. And more notably, we had to forcefully pay him.

“Babu-ra sokalbela khali pete aaichen, aapnader kach thika khaowar taka kemne lomu?” (Sir, you have come here so hungry in the morning, how can I take money from you for this food?) where have those people gone today?

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