Hills

लेह – लद्दाख

By

आये इस सुचना के साथ कि सुरक्षा कारणों से आम जन के लिए नुब्रा वैली कुछ दिनों के लिए बंद है अत:खार्दुन्गला से वापस आना होगा।

ऊपर जाकर या रास्ते में कुछ भी नही मिलता भोजन के लिए तो पहले लंच किया और फिर थोड़ी हताशा के साथ चल पड़े विश्व की सबसे ऊँचे सड़क मार्ग पर जो की 18380 फुट (5602मी) की ऊंचाई पर स्थित है,बेहद संकरी उबड़ खाबड़ रोड जो लेह से 40 किमी दूर है, भूरे निर्जन वनस्पति शून्य इस मार्ग पर चार पहिया वाहन कम और दो पहिया ज्यादा होते है,मोटरसाइकिल और साइकिल चालको की ये प्रिय सड़क है और हमें अपनी गाडी इनसे बचते हुए चलानी थी,लेह से किराये पे मिलते है ये वाहन।

Read More

दिल्ली से लेह-लद्दाख – सन्नाटे का सौन्दर्य

By

इस सब जगहों का वर्णन शब्दों में संभव नही है,ये आप इस यात्रा के दौरान अनुभव करके ही जान सकते है।विमान से 4 दिन में लद्दाख भ्रमण आपको जगह देख लेने का संतोष तो दे सकता है किन्तु वास्तविक खूबसूरती का आनंद लेना हो तो सड़क मार्ग से ही जाईये।

केलोंग से धीरे धीरे सरचु पहुचे रास्ते पर और दिन काफी बचा था तो सोचा रात्रि विश्राम पांग में करेंगे,आगे विभिन्न रंग के पहाड़ हरे ,नीले ,पीले,भूरे ,लाल सभी रंगों में रंगे, अवर्णनीय सुन्दरता चारो और बिखरी पड़ी है और देखने वाले गिने चुने यात्री बस।

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — बिजली महादेव मंदिर, कुल्लू

By

स्थानीय लोगों के अनुसार आकाश से गिरने वाली जोरदार बिजली भगवान महादेव के इस मंदिर में विराजमान पवित्र शिवलिंग पर गिरती है, जो इस पवित्र शिवलिंग को टुकड़ों में बिखेर देती है। बिजली से खंडित हुए शिवलिंग के आसपास गिरे टुकड़ों को एकत्रित करके मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को फिर से शिवलिंग के आकर में जोड़ देते है. कुछ समय के पश्चात् चमत्कारी रूप से शिवलिंग अपने आप पहले की तरह पूर्ण रूप में परिवर्तित हो जाता है।

Read More

Kasauli Chalein !!!!

By

We ended our first day at the Gilbert’s Trail and headed towards our hotel. Though our hotel was a little away from the main town, but it had lovely location and views. We spent some quality time walking on the pathway leading to the main road, we did countless round of walking but none of us felt anything called tiredness, and at the passageway we made some moments which will be cherished throughout our lives.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — तोष, कसोल और छलाल

By

कसोल से लगभग दो किलोमीटर दूर छलाल गांव तक इस पुल को पार करने के बाद केवल पैदल ही जाया जा सकता है. छलाल गांव में जाने वाला रास्ता पार्वती नदी के किनारे है. रास्ते के एक ओर पार्वती नदी के जल का मधुर स्वर पूरे रास्ते आपके कानों से टकराता रहता है. और दूसरी ओर ऊँचे पर्वत इस मार्ग को मनोहारी बना देते है. देवदार के घने वृक्षों से होकर छलाल गांव तक की पदयात्रा का अनुभव अपने आप में अनूठा है.
छलाल गांव में पहुँचने पर शाम हो चुकी थी. रात्रि विश्राम के लिए छलाल में रूककर अगले दिन आगे की यात्रा का निर्णय लिया.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा से वापसी

By

नकथान में ग्रामवासियों को दैनिक जीवन के क्रिया कलापों को करते देखा जा सकता है. अपने आस-पास उपलब्ध दैनिक जीवन के सीमित सुविधा, संसाधनों से संतुष्ट यहाँ के लोग जीवन को वास्तविक रूप में जीते हैं. झरनों का बहता स्वच्छ-शुद्ध जल, पहाड़ों से होकर आती शीतल सुगन्धित वायु, पहाड़ों के बीच बहती पार्वती नदी, छोटे-छोटे खेत और बागों में उगने वाले फल, सब्जी और अन्न और साथ में रहने वाले सहयोगी पशु. जीवन को वास्तविक रूप में जीने के लिए बस इतना ही चाहिए इसके अतिरिक्त बाकी सब जीवन को और अधिक सुविधा-संपन्न बनाने की कभी न ख़त्म होने वाली लालसा ही है.

Read More

Chandigarh to Mandi – The fast and furious highway ride

By

It was a long long hill drive for sure and in such perfect conditions of roads that if I had any longing for hill drive then it should have been satisfied completely by now (Must have been 200 kms in hills in this journey). After having a bump free ride for at least 400-450 kms till now, finally I was to face reality.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा

By

खीर गंगा का प्रमुख आकर्षण यहाँ बना हुआ प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड “पार्वती कुंड” है. प्राचीन मान्यता के अनुसार खीर गंगा में प्राचीन समय में खीर बहती थी जो पहाड़ों के बीच से होकर पार्वती कुंड में गिरती थी. वर्तमान में भी पार्वती कुंड के पानी का रंग सफ़ेद है और खीर की मलाई जैसे छोटे-छोटे कतरे पार्वती कुंड के पानी में देखे जा सकते है. इसी कारण से इसका नाम खीर गंगा पड़ा. पार्वती कुंड में नहाने से पहले कुंड की पवित्रता बनाये रखने के लिए कुंड के बाहर गिरते पानी में नहाना आवश्यक है.

Read More