Kedarnath

On the way to Kedarnath

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Srinagar received its name from Sri Yantra, a mythical giant rock, so evil that whoever set their eyes on it would immediately die. The rock was believed to have taken as many as thousand lives before Adi Shankaracharya, in the 8th century AD, as a part of an undertaking aimed to rejuvenate the Hindu religion across India, visited Srinagar and turned the Sri Yantra upside down and hurled it into the nearby river Alaknanda. To this day, this rock is believed to be lying docile in the underbelly of the river. That area is now known as Sri Yantra Tapu.

On the way to Srinagar we saw a broken bridge which was built recently across Alaknanda and damaged too during construction. Six labourers die during that time thereafter the construction was not restarted.
We all were enjoying our journey in our own ways as some were busy in clicking pictures of the natural beauty of Uttrakhand , some were sleeping as we got up early in the morning & kids were busy in singing and playing cards.

After 35 kms from Srinagar we reached Rudarprayag , named after Shiva (Rudra). Here Alaknanda river from Badrinath and Madakani river from Kedarnath meet.

From Rudarprayag the road separated for Kedarnath & Badrinath, left road goes to Kedarnath & right one towards Badrinath.

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गौरीकुंड- केदारनाथ- गौरीकुंड (भाग 3)

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जिस जगह से हम उतर रहे थे वहाँ बादल काफ़ी कम थे लेकिन नीचे की ओर गरुडचट्टी बादलों के कारण बिल्कुल दिखाई नहीं दे रही थी यानि की हम बादलों से भी उपर चल रहे थे। मुझे हिन्दी फ़िल्म का वो गाना याद आ गया ‘आज मैं उपर, आसमान नीचे…’ । थोड़ी ही देर बाद हम बादलों का सीना चीरते हुए गरुडचट्टी पहुँच गये और काफ़ी देर तक बादलों में चलने के बाद तेजी से नीचे की ओर उतरते गये। थोड़ा और नीचे उतरने के बाद फिर से मौसम साफ़ हो गया।

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ऋषिकेश – देवपर्याग – रुद्रप्रयाग – गौरीकुंड (भाग 2)

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ऋषिकेश से लेकर रुद्रप्रयाग तक के रास्ते में पहाडो पर काफ़ी कम हरियाली है और ये काफ़ी रेतीले लगते हैं लेकिन रुद्रप्रयाग से केदारनाथ की तरफ़ मुडते ही दृश्य एकदम बदल जाता है। चारों तरफ़ हरियाली ही हरियाली है ,घाटियॉ बहुत खुबसुरत हैं। हम इन खुबसुरत वादियों का आनंद लेते हुए अगस्त्यमुनि से होते हुए गुप्‍तकाशी पहुँच गये ।वहाँ गाड़ी रुकवा कर चाय पी और आस पास के सुन्दर नजारों को निहारने लगे। गुप्‍तकाशी से घाटी के दूसरी तरफ़ ऊखीमठ साफ़ दिखाई देता है।

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Solo Bike Trip to Deoriatal in Uttrakhand

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after this again i started journey soon i reached saari village which is the base camp for Deorital.here i got warm welcome from a person his name is rakesh singh negi owner of Rakesh tourist lodge saari village.even all people of saari village were very humble and nice all have praised me that i came from delhi by bike.after taking tea .rakesh singh negi called his friend(surender singh)owner of dhaba at Deorital for my tent arrangements.he showed me  the way to reach deorital which is 2.5km from saari village.i just parked my bike ..here parking is totally safe.

from here real fun and enjoyment of loneliness started.only one song i listen repeatedly  during 1 hour trekking which was SHOW ME THE MEANING OF BEING LONELY..that song seems to be totally  inextricably linked to the surrounding  environment .deoriatal is 70 degree steep climb from saari village.

After 1 hrs of hiking i finally reached the Tal. i was  stunned and speechless on reaching the top. The snow-capped mountain peaks surrounded the Tal….it was awesome, there’s no word which I can describe its beauty.here i found everything what i wanted from  nature.

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केदारनाथ से बद्रीनाथ

केदारनाथ से बद्रीनाथ

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मस्तक पर लगे हीरे को देख कर ऐसा लग रहा था की हरे रंग का ज़ीरो वाट का वल्व जल रहा हो हम लोग थोड़ी देर वहाँ एक टक निहारते रहे तभी एक दंपति वहाँ विशेष पूजा के लिए आए. रावल जी मंत्रोचार करने लगे.

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हरिद्वार से केदारनाथ

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रुद्रप्रयाग से  9  किलोमीटर आगे  तिलवारा है यहाँ हम लोगो ने चाय पी.  10  मिनट का रेस्ट किया और फिर आगे  के लिए चल दिए. तिलवारा से  19  किलोमीटर आगे  अगस्तमुनि  है .  यहाँ अगस्तमुनि का आश्रम है.यहाँ पहुँचते हुए शाम ढलने लगी थी. हमारे बाईं ओर  मंदाकिनी सड़क के साथ साथ पत्थरो  के बीच अठखेलियाँ  करती हुई बह रही थी. बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक द्रशय था. सामने के पहाड़ो की चोटियो  पर सूर्यास्त की किरणे  पड़ने से सुनहरे रंग से चमक रही थी.मन तो कुछ समय यहाँ पर रुक कर प्राक्रतिक  सौंदर्य को  देखने को हो रहा था पर ड्राइवर को अपनी मंज़िल पहुँचने की थी. अगस्तमुनि  से  19  किलोमीटर आगे  कुंड है यहाँ पहुँचते हुए अँधेरा छा  गया था. अब ड्राइवर अँधेरे मे बस चला रहा था. गुप्त काशी  को पार  कर लगभग 8 बजे सोन प्रयाग  से 7 किलोमीटर पहले हम सीतापुर पहुँच गये. यहाँ ड्राइवर ने रात मे रुकने के लिए एक होटेल के सामने बस रोक दी और बोला रात यहीं रुकेंगे ,  आप लोग सामने होटेल मे जाकर अपने लिए कमरा    देख कर तय कर लो. यह होटेल बहुत ही साधारण था कमरो मे एक अजीब सी गंध आ रही थी. मन मे विचार आया ड्राइवर को यहाँ  से कमीशन  मिलता होगा तभी यहाँ रोका है. मैने अपने लड़के से नज़दीक के दूसरे होटेल देखकर आने को कहा और स्वयं दूसरी तरफ जाकर होटेल देखने लगा. मुझे इस होटेल से 100 गज पहले एक नया बना हुआ साफ सुथरा होटेल मिल गया. इस  समय सीजन ना होने के कारण बिल्कुल खाली था. इस  समय तक इतने बड़े होटेल मे हमारा ही परिवार था. हमे 400 रुपये के हिसाब से 2 डबल बेड का एक रूम मिल गया. मैने बस के दूसरे यात्रियों से भी बोला इस बेकार से होटेल मे ना ठहर कर मेरे वाले होटेल मे ठहरे.पर वह सारे उसी होटेल मे ही ठहरे. रात  मे जब हम खाना खाने बाहर निकले  ,  मेरे से  कुछ घोड़े वाले घोड़ा तय करने के लिए कहने लगे. पहले तो मैने यह सोंचा था कि  गौरी कुंड से एक-दो किलोमीटर पैदल चलने के बाद अगर नहीं चला जाएगा तो घोड़े कर लेंगे पर अब जब यह लोग जिस तरह की बाते कर रहे थे उससे लगा कि तय  ही कर लेना चाहिए. आने जाने के लिए 800 रुपये प्रति घोड़ा तय हुआ.

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Kali Mathh -काली मठ

Kali Mathh -काली मठ

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Kali Mathh is the only hindu temple, where they dont worship any pindi or any idol or photo.  It is only that hole which Kali caused, which is worshipped here.  All Shaktas at least once in their life, visit this place, specially Bengali Shakta followers. Even if you do not have deep religious appetite, the place is so beautiful, untouched by tourists and civilisation, that it would be a mistake not to have visited there by anybody loving Himalayas.

So in a wintery Feb,2010 I fixed programme with my childhood friends, Pradeep, Awasthi and Vijay to be ready for a surprise visit ! We started from Delhi early morning around 5 am and crossing the usually jammed roads, in the fastest way possible and reached Haridwar around 9.  Taking a quick dip in Ganges, we continued our journey uphill and next stop was at Devprayag.  You all know it is from Devprayag that the name Ganga starts, after Bhagirathi meets with Alaknanda.  We stopped for a while for “Pind-daan” of my father who died 2 months before.

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Devbhoomi Uttarakhand …..2

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….2      देवभूमी उत्तराखण्ड यात्रा – केदारनाथ-बद्रीनाथ स्वामीजी से अनुमति ले 23-अक्टूबर-2010 की सुबह मैं वहां से केदारनाथ के लिये रवाना हुआ। हलकी…

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Dev Bhoomi Uttarakhand

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मेरी चारधाम यात्रा – यमुनोत्री मेरी बहुत समय से उत्तराखण्ड-यात्रा की इच्छा थी और बीतते समय के साथ आशंका बलवती होती गई कि इस…

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