Corbett

Weekend trip to Corbett Tiger Reserve from Noida

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On 29-Jun 2014 morning, we took the bus at 6:30 am from Ramnagar bus stand and reached Nainital at 9:00 am. There were some taxiwalas standing for sightseeing packages but we denied them and thought to roam around on our own. So we walked on our foot till Tallital bus stand and hired a bike on rent for Rs. 1000 and Security Rs.2000. Then we have gone for boating in Mallital and Tallital Lake for Rs. 210. We have done our breakfast and shopping on Mall Road itself which is near to Tallital bus stand.

Then we moved ahead on bike for RajBhawan(Governor’s House). Wow it is a very beautiful place and the gardens, the sightseeing near it is really awesome. The guide there guided us and told us about the history of this place. Then we headed towards Himalayan view point, Lover’s point and Suicide point. Awesome the weather, the scenery, the clouds coming over the hills, just WOW:) And then monsoon 1st rainfall started :D so we moved back to Mall road for some shopping near Tallital bus stand. We returned our bike at 6:00 pm and got our Security money Rs. 2000 back. There were tourists and tourists only all around on the Mall road. No vehicles are allowed between 6:00 pm and 9:00 pm. The traffic management is very good. At 7:00 pm, we booked 2 seats in a Volvo bus. There were agents sitting in some shops on Mall road.

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Driving from Lucknow to Nainital and Corbett – Road Review

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The road upto Bareilly was generally good and but bad in a few patches. However, Bareilly to Lalkuan was a different story altogether. I believe there is a bypass outside of Bareilly but I couldn’t find it so I had to go through the city. If someone gets to know of the location of the bypass do inform. The number of trucks have to be seen to be believed. Coupled with bad roads it’s definitely a slow track. There’s some kinda factory before Lalkuan and trucks are lined up on both sides of the road. Where there are trucks, there are traffic jams and coupled with atrocious truck drivers the experience is tough. There is also extensive construction work on this sector.

The road improves dramatically from Lalkuan. A stop is advised before the climb from Kathghodham to Nainital. The Drive from this point on is smooth cos the roads are very good, maintained well and aren’t as steep as people would have you believe.

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In the Lap of Nature – Jim Corbett National Park

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At last we reached Dhikala. It was a cluster of small buildings at the edge of the trees and beginning of a vast grassland which reminded me of some African hamlet deep inside the jungle. The buildings are very much in tune with its surroundings and have appeared to be from the late 19th century. However, it is protected by electric fence. The complex is situated high above the banks of Ramganga but one is not allowed to venture out into the river for fear of crocodiles and other animals.

The view from the complex was simply awesome; to one side is the forest, the expanse of grassland on the other and on the third side stood blue mountains in a coat of mist far beyond the river bank. The breeze that flows brings in the fresh smell of the forest. Sitting under a huge tree, soaking in nature’s beauty all around, one simply is transported to another world, far from the madding crowd and toxic fumes – a world without worries.

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In Search of Tiger at Corbett Tiger Reserve

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The different zones offer varied landscapes with opportunities to sight different floras and faunas. The presence of animals varies in accordance with the landscape suitable to their habitats. The landscape of Jhirna is drier than in Dhikala and vegetation is mostly scrub. Jhirna was a farming village until 1994 when it was successfully relocated under Project Tiger. The abandoned farmland is gradually reverting to a wild state and is being managed to develop grassland habitat. The nearby terrain consists of numerous sots and narrow gorges running through typically Shiwalik landscape. The hills to the north of Jhirna are covered with dense patches of bamboo. Apart from being a good habitat for tiger, leopard and deer, the place hosts other interesting mammals like sloth bear and wild boar. A variety of birds can also be enjoyed here.

were informed that a male tiger is also reported wandering in the area during the early morning. There is a defined route for every visitor to follow from the entry gate which ends at the FRH inside the jungle. On the way there is a watch tower alongside the river for watching animals reaching at the stream for drinking water and bathing. We tried it but in vain. The spotted deer, peacocks, variety of birds including the sparrows were a delight to watch. Suddenly, the driver stopped the vehicle and we found some fresh pug marks of a tiger on the sand beside the road. After a few meters we spotted some scratch marks on a tree probably made in the past. These proofs however, evidenced the truth of story we were told by the nature guide about the male tiger visited the place early morning. Elephant herd might have walked away leaving signs of crushed bushes and flattened shrubs. The dream of sighting the mighty RBT remained a dream but it was good to see the evidence of their presence that retained the hope to see the king in future also.

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ढेला (कॉर्बेट) से मरचुला की मस्ती का सफ़र (भाग – 2)

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पानी इतना साफ़ था की नीचे के पत्थर साफ़ चमक रहे थे। इतनी छोटी सी जगह पर इतना आनंद भी लिया जा सकता है, सोचा न था। धूप धीरे धीरे हलकी हो रही थी और पानी भी अब ज्यादा ठंडा लगने लगा था इसलिए सोचा कि अब यहा से चलना चाहिए। इसी बीच मनमोहन दो तीन बार पानी से निकला तो हर बार एक मच्छर उसको काटता था और वो चिल्लाता था और गालिया देता था। हम सब हँसते थे कि मच्छर को गोरी चमड़ी पसंद आ रही है लेकिन अब जैसे ही हम सभी पानी से बाहर निकले तो उस मच्छर ने मेरे पैर मे बहुत तेज काटा, अब चिल्लाने की बारी मेरी थी और हसने की मनमोहन की। खैर हमने जल्दी जल्दी कपड़े पहने और वहा से बाहर की और चल दिए।

पानी मे इतनी देर रहने के बाद अब काफी थकान महसूस हो रही थी इसलिए प्रदीप को भी बोला कि अब सीधे गेस्ट हाउस चले लेकिन उसने रास्ते मे गाड़ी एक लम्बे से ब्रिज के सामने रोक दी। जगह अच्छी थी लेकिन अब रुकने के मन ही नहीं था लेकिन फिर भी उतर गए की कुछ फोटो ही खीच ले। उतरने पर देखा कि वो केंद्रीय जल आयोग से सम्बंधित था। हम वहा पाँच दस मिनट ही रुके और फिर वापिस चल दिए। वापिस आते हुए हम मोहान से थोड़ा आगे ही निकले थे कि देखा वहा बहुत भीड़ थी, हम भी गाड़ी से बाहर आ गए तो पता चला कि हाथी का बच्चा झाड़ियो मे उलझ गया है, सड़क के एक तरफ जंगल ही था और उसमे थोड़ा सा अन्दर ही वो बच्चा फसा हुआ था और उसके पास हाथियों का पूरा झुण्ड था, उनको देखने के लिए ही वहा भीड़ जमा थी। लोग हाथियों को परेशान कर रहे थे और बार बार अन्दर जा रहे थे जो कि खतरनाक था अगर एक बार हाथी पीछे भाग लेते तो भगदड़ मच जाती। हाथियों ने बच्चे को झाड़ियो से छुड़ा लिया था लेकिन वो वही थे। हम लोगो ने वहा से निकलना ही सही समझा। रास्ते मे हमने रामनगर से जरूरी सामान ख़रीदा और वापिस गेस्ट हाउस की और चल दिए।

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ढेला (कॉर्बेट) की मस्ती और रोमांच

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हमें घुमते हुए वहा के गार्ड ने बोला कि सर यहाँ से बाहर मत जाइएगा, इस चारदीवारी की अन्दर ही रहना और पीछे के रास्ते से तो बाहर निकलना ही मत। हमने पुछा कि यहाँ भी डर है क्या तो उसने बोला साहब जी एक शेर तो रोज ही पीछे वाले रास्ते से जाता था और हाथी तो कई बार इन खेतो मे घुस चुके है। जोश मे तो थे ही तभी सोच लिया कि खाना खाकर एक चक्कर तो लगायेगे बाहर का। हम जल्दी से डाइनिंग रूम मे पहुचे, खाना तैयार था, दाजू ने तुरंत लड़को को परोसने का आदेश कर दिया। खाना मजेदार था। खाना खाकर हम वापिस कमरों मे आ गए और दाजू को भी अन्दर आने के लिए बोला। अन्दर आने पर हमने पूछा कि बाहर कहा तक जाया जा सकता है। वो पक्ष मे नहीं थे लेकिन हमने भी बोला कि हम अन्दर जंगल मे नहीं जायेगे सिर्फ बाहर सड़क तक तो जा सकते है और वैसे भी गाड़ी से बाहर तो निकलना नहीं था। । तब जाकर वो तैयार हुआ।

बारह से ज्यादा का समय हो रहा था और हम बाहर गाड़ी मे बैठे थे। आधा घंटा हम सड़को पर गाड़ी दौड़ाते रहे। वहा पेड़ो के बीच कच्चा रास्ता था जो दिन मे शोर्टकट के रूप में प्रयोग होता था, उस रास्ते से जब निकले तो रोंगटे खड़े हो गए बिलकुल सुनसान, सड़क भी कच्ची, डर लग रहा था कि अगर गाड़ी फस गयी तो निकालनी मुश्किल हो जायेगी क्योकि छोटी गाड़ी थी, अँधेरे मे हिरनों के झुण्ड भी दिखे जिनकी सिर्फ आखे चमक रही थी। वो अभी तक के सबसे यादगार और रोमांचक क्षण थे, शायद ऐसा रोमांच कभी जंगल मे भी नहीं आया था। प्रदीप का मन तो वापिस आने के लिए कर ही नहीं रहा था। एक बजे हम वापिस आये तो थोड़ी देर कमरों के बाहर ही बैठ गए कि कल कहा जाए। जिम कॉर्बेट के बिजरानी गेट से तो प्रवेश मिल सकता था लेकिन जो जानवर अन्दर दिखते थे वो बाहर ही दिख गए थे फिर ऐसा रोमांच भी हो गया था। इसलिए चार हजार रूपये खर्च करना अक्लमंदी नहीं लगी। प्रदीप ने बोला कि सर कल मे आपको मरचुला लेकर चलूगा, आपको जगह पसंद आएगी। मरचुला के बारे मे हमने कभी सुना नहीं था लेकिन कही तो जाना था इसलिए वही सही। जगह पक्की हो गयी तो हम भी अपने कमरों मे आ गए सोने के लिए।

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जिम कॉर्बेट का जंगल, बाघ और हम – २

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वापिस गेट पर परमिट दिखाया तो वहा के एक गार्ड ने नम्रता से बोला कि सर गलती से गेस्ट हाउस पर आपसे छ चाय के पैसे नहीं लिए तो हमने वो पैसे उनको दिए और गेट के बाहर आ गए। रास्ते मे मोनू त्यागी को उसके होटल पर उतारा और दिल्ली की सड़क पकड़ ली। गेट से बाहर निकलते ही मैंने अपनी धर्मपत्नी को फ़ोन लगाया और अपनी समस्या बताई लेकिन वो नाराज थी ऊपर से मेरा चार साल का भतीजा जो बार बार उनको डरा रहा था कि चाचा जंगल गए है उनको शेर खा गया होगा।

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जिम कॉर्बेट का जंगल , बाघ और हम

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महावत बोल, साहब वो शेर है, वो डरता नहीं है, यही कही झाड़ियो मे होगा, किस्मत हुई तो फिर दिख जाएगा आप कैमरे हाथ मे रखिये, तब हमें होश आया की फोटो लिए या नहीं, उस वक्त कैमरा मनोज के पास था हम सभी उसके पीछे पड़ गए की उसने फोटो क्यों नहीं लिए, वो बोला, शुक्र मनाओ कि मैंने कैमरा नीचे नहीं फेक दिया, वहां अपना होश नहीं था और आप लोगो को फोटो की पड़ी है।

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जिम कॉर्बेट पार्क – गर्जिया देवी का मंदिर और कॉर्बेट जल प्रपात

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गर्जिया देवी का मंदिर रामनगर से रानीखेत जाने वाली सड़क पर रामनगर से 15 किलोमीटर दूर है.यह मंदिर कोसी नदी के किनारे एक पहाड़ी के शीर्ष पर बना हुआ है. यह नैनीताल जिले का एक मुख्य मंदिर है जहाँ हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर हजारो श्रदालु माता के दर्शनों के लिए आते है. वसंत पंचमी पर भी यहाँ भक्तों की भीड़ जुटती है. यह मंदिर माता पार्वती को समर्पित है.

मंदिर की दूरी सिर्फ 15 किमी ही थी परन्तु पहाड़ी रास्तों पर इन 15 किमी की दूरी तय करने में अच्छा खासा समय लग जाता है. हमे भी पहुँचते पहुँचते अँधेरा हो गया था. मंदिर के रास्ते में पड़ने वाली दुकाने भी बंद होने लगी थी. हमने एक दुकानदार से पूछा कि क्या मंदिर खुला होगा उसने सकारात्मक उत्तर दिया. मंदिर तक पहुँचने के लिए कोसी नदी पर बने एक पुल पर से गुजरना होता है. शाम हो चुकी थी इसलिए मंदिर का रास्ता भी सुनसान सा ही था. मंदिर एक पहाड़ के शिखर पर स्थित है. जहाँ सीढ़ियों पर चढ़कर जाना होता है. मंदिर काफी उंचाई पर है. मंदिर पहुँच कर प्रसाद चढ़ाया और माता का आशीर्वाद लिया. मंदिर से वापस होटल पहुंचे. जहाँ रात्रि भोजन कर कल की सफारी की कल्पनायों में खो गए.

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Another slice of Corbett

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I have seen jungles in real and watched wildlife on National Geography and Discovery channels. But none could match the impressions of that moment. Dear reader, it all happened in our very neighborhood:  Corbett which till then (to me) meant Dhikala, Bijrani, jhirna and nth number of resorts. It all happened in its Sitavani area which is a buffer zone of Corbett.

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