Weekend-Kolkata

सिक्किम, गंगटोक part-1

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सिक्किम में प्रवेश करते ही हमारे दोनों तरफ ही पांच – छह मंजिलो के मकानों की कतारे नजर आने लगी। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि हम हिल स्टेशन पर हैं। सुन्दर साफ – सुथरा क़स्बा था। पहाड़ो के घुमावदार रास्तो से होते हुए लगभग 4.30 बजे हम गंगटोक पहुँच गए।
अब हमें शहर के अन्दर होटल डेन्जोंग जाना था पर पता लगा कि यह बड़ी टैक्सी शहर के अन्दर नहीं जा सकती। वहां पर जाने के लिए छोटी टैक्सी से ही जाना होगा और उसमे भी 4 लोगो से ज्यादा नहीं बैठ सकते। हाँ सुबह आठ बजे से पहले अवश्य यह टैक्सी वहां जा सकती हैं। शहर की परिवहन व्यवस्था इन छोटी टैक्सी पर ही टिकी हुई है। लोग या तो अपने वाहन से चलते है अन्यथा इन टैक्सी पर ही निर्भर रहते हैं। यहाँ पर ऑटो , टेम्पो , ग्रामीण सेवा आदि नहीं चलते हैं। सिर्फ छोटी कार वाली टैक्सी। इन छोटी टैक्सी का किराया भी ज्यादा नहीं है। पंद्रह रूपये सवारी के हिसाब से लोग सफर करते हैं।

हमें लाल बाजार, डेन्जोंग सिनेमा के साथ लगे हुए डेन्जोंग होटल जाना था , टूरिस्ट समझ कर हम लोगो से वहां पर टैक्सी वाले 150/- रूपये प्रति टैक्सी मांगने लगे। मैंने होटल फोन कर जानकारी ले लेना उचित समझा कि यह लोग ज्यादा पैसे तो नहीं मांग रहे हैं। होटल वाले ने बताया कि 90 – 100 रूपये से ज्यादा नहीं लगता है। आप लोग टैक्सी स्टैंड से बाहर आकर टैक्सी कर लो। टैक्सी स्टैंड से बाहर सड़क पर आये तो एक ने 100/- रूपये मांगे तो हमें लगा सही भाडा मांग रहा है उससे 4 लोग होटल रवाना हो गए दुसरे ने 80/- मांगे उसके बाद दो टैक्सी वाले 60/- रूपये में ही चल दिए। मतलब यह कि अगर आप मोल -भाव करना नहीं जानते या स्थानीय लोगो से नहीं पूछेंगे तो आपकी जेब ज्यादा हल्की हो जाएगी।

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Kolkata-Sikkim-Darjeeling trip

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After all this, the last thing on our list was a visit to some tea estate in Darjeeling. To go there was one part of the pleasure and the next best part was to sip a hot n nice cup of tea there! It was really a divine experience and I had about 3-4 cups of tea- each of a different variety!

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The mysterious Naga Sadhus and humbling return journey

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Very soon the faint evening glow, which was prevalent in the sky, vanished. The vessel did not have any light in the upper deck area. All the lights we had, was only the cosmic glow in the sky. I could not see anything ahead. The person sitting next to me was a mere silhouette. Up above there were innumerable stars and glowing planets travelling with us and below there was infinite quantum of water through which we were moving.

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Gangasagar

Being one of the 12 Lac++ pilgrims to Gangasagar Mela

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Sagar mela is held every year at the same place drawing huge turnout irrespective of caste, colour, creed and age. Last year the turnout was 12 Lakh and this year the Govt. of WB made all the arrangements for an expected turnout of 20 Lakh. The holy dip is observed on the day of Makar Sankranti, the day when the Sun makes a transition to Capricorn from Sagittarius.

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जिंदगी के कुछ शान्त पल – बकखाली के समुद्रतट पर

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बकखाली में ढेरों होटल, रिसोर्ट और लॉज है, जो यहाँ आनेवाले सैलानियों की संख्या के हिसाब से कुछ ज्यादा लगती है. हाँ, समुद्र-तट के सामने वाले होटलों में भीड़ ज्यादा मिलती है. बकखाली का मौसम गर्म है. यहाँ आने का सबसे अच्छा समय नवम्बर से मार्च के बीच होता है, क्योंकि इस वक़्त गर्मी कम रहती है और भीड़ भी ज्यादा होती है. होटल में खाना खाने के बाद हमलोगों ने थोड़ी देर आराम किया और लगभग 4 बजे समुद्र-तट पहुंचे. तट पर पहले से काफी चहल-पहल थी. बकखाली के समुद्र-तट से सूर्योदय और सूर्यास्त देखना दोनों ही समान मनोरम अनुभव देता है.

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