ब्रज भूमि भ्रमण : मथुरा-वृंदावन के कुछ दर्शनीय स्थल
निधिवन में विचरने के पश्चात् अभी भी मंदिरों के द्वार खुलने में पर्याप्त समय था. वृंदावन में आकर वृंदावनी लस्सी का मजा अगर नहीं लिया तो वृंदावन का भ्रमण अधूरा ही है. भूख भी लगी हुए थी तो कुछ खाने-पीने के साथ वृंदावनी लस्सी का मज़ा उठाने का यही सही समय था. बाकि बचे समय को श्री यमुना जी का तट पर व्यतीत करने का विचार कर पग यमुना तट की ओर चल पड़े. श्री यमुनाजी भगवान् श्रीकृष्ण की अनेक लीलाओं की साक्षी है. श्री यमुनाजी के तट पर बैठकर भगवन की चीर-हरण, कालिया-दमन आदि अनेक लीलाओं के दृश्य आँखों के सामने तैरने लगते हैं. श्री यमुना जी कि रेत में बच्चे क्रीड़ा करते हुए गीले रेत में सराबोर होकर आनंद के खजाने को खोदने लगे. और धीरे-धीरे समय मंदिरों के द्वार खुलने का हो गया.
सबसे पहले वृंदावन के प्राचीन श्री बांके बिहारी जी मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर द्वार पर द्वार खुलने की प्रतीक्षा करने लगे. बांके बिहारी मंदिर भारत के प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। बांके बिहारी कृष्ण का ही एक रूप है जो इसमें प्रदर्शित किया गया है। इसका निर्माण सन 1864 में स्वामी हरिदास ने करवाया था. वृंदावन में आने वाला प्रत्येक दर्शनार्थी इस मंदिर में श्री बांके बिहारी जी के दर्शन अवश्य करके अपने यात्रा को सफल करने का प्रयत्न करता है.
अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में कृष्ण बलराम मंदिर (इस्कॉन टेम्पल) जो कि अंग्रेजों का मंदिर नाम से भी प्रसिद्द है. ISCON के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद जी के आदेशानुसार इस मंदिर का निर्माण सन 1975 में करवाया गया. विश्वभर के प्रसिद्द इस्कॉन मंदिरों में से एक वृंदावन का ये एक अतिप्रसिद्ध मंदिर है. वर्षभर इस मंदिर में पूरे विश्व के कृष्ण-भक्तों का यहाँ आना-जाना लगा रहता है. मंदिर में प्रवेश करते ही स्वामी प्रभुपाद जी के महामंत्र (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे. हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे) का मानसिक जाप स्वतः ही प्रारम्भ हो जाता है. मंदिर में सतत चलने वाला महामंत्र का संकीर्तन आगंतुकों को मंत्रमुग्ध कर दर्शन के साथ नर्तन करने को विवश कर देता है.
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