Maharashtra

Matheran Magic

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Matheran is our favorite nearby destination which we have been visiting regularly from July to February each year since 2007. It is a small…

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Satara Surprise

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This is my first post here at Ghumakkar.   It is about our recent visits to Satara.  Satara is a nondescript small town at approx….

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औरंगाबाद में दूसरा दिन

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औरंगाबाद में बिताये पहले दिन का यात्रा-संस्मरण आप इस कड़ी के पहले भाग में पढ़ चुके हैं. एल्लोरा की विश्वप्रसिद्ध गुफाएँ तथा कई अन्य पर्यटन स्थल हम देख चुके थे. अब दूसरे दिन की यात्रा “अजंता की गुफ़ाओं” को समर्पित थी. औरंगाबाद शहर से अजंता की गुफाएँ लगभग १०० किलोमीटर दूर हैं. यदि गाड़ी संतुलित और उसका ड्राईवर कुशल हो, यह दूरी लगभग २ घंटे में पूरी की जा सकती है. चूँकि गुफाएँ प्रातः ९ बजे खुलतीं हैं, इसीलिए औरंगाबाद से हमलोग

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औरंगाबाद में प्रथम दिन

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औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में, अगर आपका सिर्फ दो दिनों का प्रवास हो, तो आप वो दो दिन कैसे बिताएंगे? यदि घुमक्कड़ी पसंद हो, तो आपके लिए मैं अपने अनुभव प्रस्तुत करता हूँ. उस समय मार्च-अप्रैल का महीना चल रहा था. गर्मी के महीने अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुए होंगे कि औरंगाबाद में गर्मी बढ चली थी.  टोपी और सन-स्क्रीन फायदेमंद थे. लगता है कि यहाँ बरसात के मौसम में आना चाहिए. शायद बरसात में गीले और हरे हो चुके वनस्पतियों के बीच यह शहर और यहाँ की वादियाँ और भी सुन्दर लगतीं. यात्रा-मार्ग की दिशा व दूरी और गंतव्य पर पहुचने की सुविधा के ख्याल से प्रथम दिवस को हमलोगों ने “ग्रिश्नेश्वरमंदिर – एल्लोरा गुफा”, “भद्र मारुती मंदिर – औरंगजेब का मक़बरा” तथा “पनचक्की – बीबी का मकबरा” देखने का निश्चय किया. आप चाहें तो इसी यात्रा मार्ग पर “दौलताबाद का किला” भी जा सकते हैं.

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Parli Vaidyanath / परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन

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हम जब भी धार्मिक यात्रा पर जाते हैं तो हमारी हमेशा यही कोशिश रहती है की विश्राम स्थल मंदिर के जितना हो सके करीब हो, ताकि अपने प्रवास के दौरान हमारा जितनी बार मन करे उतनी बार हम भगवान् के दर्शन कर पायें, साथ ही साथ मन में यह संतुष्टि भी होती है की हम मंदिर के करीब रह रहे हैं, और हम मंदिर की सारी गतिविधियाँ देख पाते हैं.

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Matheran Musings

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There is a barricade at the brink of the ‘sunset point’ hill, lest people fall in the valley, mad by the red in the sky. There is ample space to enjoy the sunset for all: men, women, children, horses and monkeys. Everyone has more or less a chance of finding a good corner to sit but in solitude. It so happens that monkeys decide to practice acrobatics at the barricade and thus occupy the prime position, sending all the humans back.

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Weekend Trip to Kihim – Alibaug

Weekend Trip to Kihim – Alibaug

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Fort surrounded by sea water at a little distance from the shore. When tide is low one can go there on foot. Otherwise there are speed boats for tourists to go there. These boats also take tourists on short rides on sea, just near the shore

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पांडव लेनी (गुफा), नासिक की पदयात्रा

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नामकरण के किस्सों को जानने के पश्चात् मैं इन्हें देखने के लिए और लालायित हो उठा. कदम तेजी से बढ़ने लगे और मैं गुफा-वृन्द के गेट पर आ गया. वहां २४ लाजवाब गुफाएं थीं. पुरातत्व विभाग द्वारा एक बोर्ड भी लगा हुआ था, जिसमें बताया गया की वे गुफाएं लगभग २०० वर्षों में बनीं थीं. कई गुफाएं तत्कालीन सम्राटों और धनिक-सम्मानित लोगों के द्वारा दान में दी गयी राशि से बनाई गयीं थीं और बौद्ध धर्म के हीनयान सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा उपयोग में लाई जातीं थीं.

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