Maharashtra

विश्व विपासना पैगोडा, मुंबई की यात्रा

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सुरक्षा-जाँच वाले कमरे की छत से जो रौशनी की बल्ब्स लटक रहे थे, उनकी डिजाईन देखने योग्य थी. जाँच के पश्चात पैगोडा की निचली मंजिल पर पहुंचे, जहाँ देखने के लिए कई स्थल थे. सीढ़ी के दोनों तरफ कलात्मक चबूतरे थे. एक चबूतरे पर बड़ा-सा घंटा लिए हुए मनुष्यों की प्रतिमाएं थीं और दुसरे चबूतरे पर घरियाल लिए हुए मनुष्यों की प्रतिमाएं थीं. इसलिए पहले को Bell-tower और दुसरे को Gong-tower कहा जाता था. यह दोनों स्थल लोगों में बहुत प्रिय थे क्योंकि इन पर चढ़ना मना नहीं था. लोग इन पर चढ़ कर अपनी सेल्फी ले सकते थे और साथ ही इन्हें बजा भी सकते थे.

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पंचवटी की यात्रा – भाग २

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पंचवटी का शाब्दिक अर्थ है, “पांच बड़/बरगद के वृक्षों से बना कुञ्ज”. अब हम उस स्थान में प्रवेश कर रहे थे, जहाँ रामायण काल में श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी ने निवास किया था. पर्णकुटी तो इतने दिनों तक अब शेष नहीं रह सकती. पर पांच वृक्षों से घिरा वह कुञ्ज आज भी शेष दिखाया जा रहा है. सभी पांच वृक्षों पर नंबर लगा दिए गए थे, ताकि लोग उन्हें देख कर गिन सकें. वर्तमान में उन पांच वृक्षों के कुंज के बीच से ही पक्का रास्ता भी बना हुआ था, जिस पर एक ऑटो-स्टैंड भी मौजूद था और साधारण यातायात चालू था. बरगद के वे वृक्ष काफी ऊँचे हो गए थे. श्रधालुओं ने उन वृक्षों की पूजन स्वरूप उनपर कच्चे धागे भी लपेटे थे. हमलोगों ने पहली बार पंचवटी से साक्षात्कार किया.

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पंचवटी की यात्रा – भाग १

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नारोशंकर मंदिर की छत अपने आप में स्थापत्य-कला के लिए प्रसिद्ध है. काफ़ी विदेशी पर्यटक इस मंदिर की छत का अध्धयन करने आते हैं. चट्टानों के नक्काशीदार टुकड़े सिर्फ उन टुकड़ों पर बने खांच में लग कर अभी तक खड़े है. मंदिर के अन्दर के सभा मंडप में एक नंदी और एक कछुए की मूर्ति है. कछुए की मूर्ति तो जमीन के सतह पर ही अंकित है. कुछ ऐसा-ही त्रैम्बकेश्वर मंदिर में भी देखने को मिलता है. मंदिर के बाहर के प्रांगन में भी कई कलात्मक आकृतियाँ हैं, जैसे की काल-सर्प की प्रतिमा. नारोशंकर मंदिर में कुछ समय बिताने के बाद हमलोग फिर से राम-तीर्थ की तरफ बढ़े.

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A Triad in Time – Gharapuri, Ambarnath and Pataleshwar

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The most important sculpture here is the Trimutri, 3 faces of Mahadev which have found its space on Maharashtra tourism logo as well. Nearly full length of wall, the faces are very skilfully carved. Point to note that this is not a sculpture of Trimurti – Brahma , Vishnu and Mahesh but these are faces of Shiva only. There has been tradition to carve faces on Shivling as well. And based on number of faces, the shivling gets the name from Ekmukhi to Panchmukhi.
Although the common man thinks these are 3 faces, the experts have always more to add. Stella Kramrisch is one such expert in Indian iconography. She has proven that these are not 3 but 5 faces. There are distinct names to each of the face and it really represents the attribute of colorful character of Shiva. Five faces of Shiva represent five elements, Ishana (sky), Tatpurusha (wind), Aghora (fire), Vamadeva (water) and Sadjoyata (earth) and together this depiction is called as Sadashiv as per iconography. We see three faces and there is one assumed to be behind and one on top.

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ब्रह्मगिरी की पदयात्रा , त्रैम्बकेश्वर

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सीढ़ियों ने अब बहुत ऊँचाई ले ली थी. विशाल चट्टान-नुमा ब्रह्मगिरी पर्वत अपने सम्पूर्ण विशालता को ले कर हमारे सामने था. उस ऊँचाई से त्रैम्बकेश्वर शहर कितना बौना और मनोहर लग रहा था. सीढियां पर्वत की सपाट सतहों से लग गयी थीं. इन सीढ़ियों में घाटी की तरफ लोहे की रेलिंग्स भी लगे हुए थे ताकि कोई फिसल कर घाटियों में न गिर जाये. उस पर अब बन्दर सामने आ गए. पहाड़ की ऊँची खड़ी सपाट सतह पर भी ये बन्दर चीखते-चिल्लाते ऐसे दौड़ते थे की मानो समतल धरती पर दौड़ रहे हों. कूद कर अचानक किसी पदयात्री के सामने आ जाना और उनके हाथ से खाना छीन लेने में इन बंदरों को महारत हासिल थी. पर अनुभवी यात्री अपने साथ इनके लिए भी कुछ खाद्य सामग्री ले कर चलते है. श्री दानी ने भी ऐसा ही किया था. उसने अपने थैले से बिस्कुट निकाला और बंदरों को निश्चिंतता से खिलाया. और इधर हम तीनों अनुभव-हीन यात्री अपनी छड़ियाँ पकड़े बंदरों से बच कर आगे चलते रहे.

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सप्त्श्रींगी देवी, नाशिक-त्रैम्बकेश्वर , की यात्रा

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जैसे ही मैं अंतिम सीढ़ी से उतरा, मेरे ध्यान स्थानीय लोगों की एक टोली पर गया, जो निचली सीढ़ी पर अजीबो-गरीब हरकतें कर रहे थे. मेरी पत्नी तो आगे बढ़ गयीं, पर मैं अपनी जिज्ञासा शांत करने हेतु उस टोली की ताराग चला गया. वहां एक स्त्री, जिसके बाल बिखरे हुए थे, बड़े जोरों से चिल्ला रही थी. वह हांफ भी रही थी और बड़ी बेचैन लग रही थी. वहीँ खड़े लोगों ने मुझे बताया कि उस स्त्री पर देवी आ गयीं हैं और वह तब-तक ठीक नहीं होगी, जब तक इस मंदिर के सामने उसकी पूजा न की जाये. उसके घरवाले भी वहीँ मौजूद थे. कोई ओझा उसकी तथाकथित पूजा कर रहा था. इस पूजा की पूजन सामग्री कोई भिन्न नहीं थी. वही अगरबत्ती, नारियल, फूल, मिठाई इत्यादि. पर एक बकरा भी वहीँ खड़ा था,

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हाजी अली दरगाह का बाज़ार , मुम्बई

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“बालू-शाही”, “गुड़पारा” तथा “बूंदी के लड्डू” भी दिखे. इनमें गुड़पारा ही विशेष था. बालूशाही और बूंदी के लड्डू तो अब तक जाने कितनी बार और कितने जगहों पर खा चुका था कि अब वहां चखने में तो कोई दिलचस्पी थी नहीं. दिमाग तो तब भी शकरपारा में ही दौड़ रहा था. आखिर इतना शक्कर और गुड़ इस प्रदेश में आता कहाँ से है? याद करने की कोशिश की तो याद आया शिर्डी से शनि सिग्नापुर का वो रास्ता, जिसके दोनों तरफ ईख के बड़े बड़े खेत देखे थे. गाँव वालों ने सडकों के दोनों तरफ ईख-के-रस की दुकानें लगायीं थीं. हर दुकान का नाम चाहे कुछ भी हो, पर टाइटल एक ही था..”रसवंती”.

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The Waghdoh Male: The largest male tiger in India

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We clicked her at a short distance while she oblivious to the attention she was getting continued with her innocent play.  Then we heard some grunts form the bushes behind her and the cub vanished behind them, probably her mother was hiding in the bushes and called her back. Next visit we saw the mother and cubs again from a short distance and the cub entered the waters to cool down in the April heat while the mother lurked from the bushes behind her.

All this while I was longing to see the ruler of this kingdom, the Wagdoh male who  is considered the largest male tiger in India. Though I wonder who would have dared to go and measure his size or of other tigers to compare them ? When I enquired with Mangesh our guide for all the safaris, if we will get a chance to see the Wagdhoh male he simply said, “Sir, he is the king of this jungle he holds durbar only once in a week, so you can see him only if he wants you to see him”. On further query we learned that the elusive king was last seen almost 8 days ago, so we had a good chance to see him.

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Mumbai

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For long time I was thinking of visiting Mumbai properly. It isn’t that I haven’t been to Mumbai but it was mostly a day…

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KAAS Pathar

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KAAS Pathar (means Plateau) is an area in Satara district of Maharastra famous for flowers which bloom during monsoon around August-September. The place is around…

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