Kota

ऐसे पहुंचे हम मुंबई !

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हमें पश्चिम एक्सप्रेस पकड़नी थी जो रात्रि 10 बज कर 45 मिनट के लगभग नई दिल्ली स्टेशन पर अवतरित हुई। प्लेटफार्म पर लगे हुए चार्ट में पुष्टि करके हमने अपनी कोच में जाकर सामान वगैरा शायिका के नीचे ठीक से लगाया, रेलवे की हिदायत का अनुपालन करते हुए चेन से भी बांधा। मित्रों-संबंधियों को हार्दिक धन्यवाद देकर विदा किया, गाड़ी चलने पर वस़्त्रादि बदल कर लेट गये। बाहर अंधकार का साम्राज्य था, मिडिल बर्थ खोली जा चुकी थीं अतः नीचे वाली बर्थ पर सिर्फ लेटा ही जा सकता था, तब भी दोनों बच्चों को वही नीचे की बर्थ चाहिये थीं ताकि खिड़की से बाहर के दृश्य देखते रह सकें। पता नहीं दोनों कितनी देर तक खिड़की से बाहर अंधेरे में आंख गड़ाये बैठे रहे होंगे। अर्द्धरात्रि में चल टिकट परीक्षक ने दर्शन दिये। नींद से उठकर उनको स्थिति स्पष्ट की और एक टिकट के लिये बकाया किराये हेतु रसीद बनाने के लिये कहा। उन्होंने जुर्माने सहित जितनी राशि मांगी, दे दी। हमें नींद आ रही थी अतः फिर सो गये परन्तु इस शोषण को देखकर मन में एक असंतोष बना रहता है और जब भी ऐसा अवसर पुनः आता है, यही मनस्थिति होती है।

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Chambal Ki Ghati — Kota Gorge through the Hadoti Belt

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So far i had traversed to places having familiarity with the social mass but this time i thought of cherishing and exploring the obscurity of the Chambal Gorge, created by the mighty and the pristine Chambal River ,who oblivious of my encroachment is busy streaming and gushing.

December was the month back then two years ago ,when i thought of going down to the South Eastern frontier of Rajasthan surrounding Kota and Jhalawar, from Delhi. The region is situated on a tableland being a part of the Malwa Plateau which encapsulates the whole Northern Madhya Pradesh along with the Vindhyan Ranges and enscrapments.

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Journey To Rajasthan

Journey To Rajasthan

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After a long planning and endless discussions, our much awaited journey to Rajasthan finally started on November the 14th of 2009 (Children’s day). Plan…

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