Jaipur

One of the most popular cities of India on the International Tourism map is the heritage city of Jaipur. It is the capital of Rajasthan, the state reminiscent of royalty and exuding a regal aura even in the modern times. Jaipur is also known as the ‘Pink City’ because Maharaja Man Singh II ordered his city painted a pretty pink in honour of the visiting Prince of Wales in 1876. The city abounds in heritage sites and provides a plethora of shopping opportunities.
City Palace, Hawa Mahal, Jantar Mantar, Nahargarh Fort, Jaigarh Fort, Amber Fort, Sisodia Palace and Garden and Jal Mahal Palace are some fascinating monuments that offer a walk through time. Birla Temple, Govind Devji Temple, Jai Niwas Bagh, Ram Niwas Garden and zoo, Government Central Museum, Dolls Museum and Wonderland Amusement Park are other places of interest. A visit to Chokhi Dhani an ethnic village resort is a unique experience and takes one through the rich and vivid culture of the state including bullock cart rides, puppet shows, parrot fortune teller, Kalbeliya Dance, and not to forget the authentic Rajasthani culinary dishes.
Boating at Ramgarh Lake, hot air ballooning, sky diving and camel and elephant safaris are also some activities that can be experienced in Jaipur. The pink city is well connected by air, rail and road.
Best time to visit: October to March
Languages spoken: Dhundhari, Hindi, English
Climate: Hot and dry summers and a cold sometimes freezing winter.
Heritage Sites: City Palace, Hawa Mahal, Jantar Mantar, Nahargarh Fort, Jaigarh Fort, Amber Fort, Sisodia Palace and Garden, Jal Mahal Palace
Fun places and Knowledge centres: Chokhi Dhani, Jai Niwas Bagh, Ram Niwas Garden and zoo, Government Central Museum, Dolls Museum, Wonderland Amusement Park
Holy places: Birla Temple, Govind Devji Temple
Activities and Adventure Tourism: Boating at Ramgarh Lake, hot air ballooning, sky diving, camel safari, elephant safari

Getting lost in Sambhar Lake

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On the way back, we drove the entire distance over lake only. Trying to absorb more of that dry-dusty frame. We also learned that ‘Jodha Akbar’ was shot here and apparently they created the entire war set here. Another movie, this time of junior Bacchan was shot in the main town. We dropped the Sambhar Salts gentleman back after thanking him for all his help and started back.

As we were driving back, I was thinking that how long the lake would remain like that. Probably 50 years down the line, this story would look like a legend. May be the area would get habituated, the land would be reclaimed to build SEZs and factories or may be the new Jaipur Airport. Who can imagine a 230 sq KM dry lake which is open for driving. You tell that to your grandkid and he would laugh it off. Go and look at it before it vanishes.

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आमेर दुर्ग : चल खुसरो घर आपने….

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राजस्थान पर्यटन विभाग की तरफ से यहाँ आपको सपेरे, शहनाई वादक और सारंगी वादक बजाने वाले, कई लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते भी मिल जायेंगे, हालांकि पहली नज़र में आपको ऐसा लग सकता है, कि यह सब पर्यटकों के मनोरंजन और उन्हें आकर्षित करने के लिये है, और इस से राजस्थान की संस्कृति झलकती है, लेकिन यदि आप जरा गौर से सोचें तो आपको इसके पीछे की सोच और मानसिकता पर हैरानी ही होगी | मेरी अपनी समझ से, इस सबका कुल मनोरथ यहाँ आने वाले उन यूरोपियन पर्यटकों के दिलों में बसी हिन्दुस्तान की उस छवि को पुख्ता भर करने से ज्यादा और कुछ नही है, जिसके वशीभूत वो आज भी हिन्दुस्तान को सपेरों, जादूगरों और मदारियों का देश ही समझते हैं, उनकी इन मान्यतायों और पूर्वाग्रहों को सच साबित करने के लिये ही, ऐसे कलाकार यहाँ बैठाये जाते हैं, जिनके साथ आप फोटो खिचँवा कर जब वापिस अपने देश पहुँचते हैं तो वहाँ के समाज को ऐसे चित्र दिखा कर साबित कर सकते हैं कि वास्तव में ही भारत आज भी उस दौर में ही है, जैसा कभी हमारे पूर्वज छोड़ कर आये थे ! इन सबके अलावा, इस दुर्ग में ही अलग-अलग दिशायों में खुलने वाले प्रवेश द्वारों में से त्रिपोलिया दरवाज़ा सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, क्यूंकि यहाँ से तीन जगहों के लिये रास्ता निकलता है, जिनमे से एक रास्ता आमेर शहर की तरफ भी है |

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Indolent weekend in the Charismatic Chokhi Dhani

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How can a Jaipur trip be concluded without some shopping? We grabbed a local cab (can be booked from the resort reception only) and requested him to get to a single good place where most of the things are available. Unlike many of the Indian tourist places, drivers and guides in Rajasthan are still unbiased and reliable. He took us to a factory outlet, where they produce staff at the two levels of basement and have three floors of retail and wholesale shop. Got a good bargain of various stuff there. Some of the materials are also available in the resort itself, but as you can imagine those are unreasonably costly and very small collections as compared to the outside outlets.

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चोखी-ढाणी, पुलिया और राम-राम सा का देस: जयपुर

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बात जब सड़क की हो रही है तो ट्रेफ्फिक और पुलिस की भी कर लें, यूँ लगता है जैसे जयपुर का सारा पुलिस अमला केवल परिवहन की व्यवस्था के लिए ही जिम्मेदार हो ! और ऐसे में यदि आपकी गाडी की नम्बर-प्लेट हरियाणा की है तो सावधान रहिये ! सीट-बेल्ट, मोबाइल पर बात करना, रेड लाइट पार कर जाना… भले ही आपके आस-पास से राजस्थान की अनेक गाड़ियाँ निकल जाएँ पर रोका केवल आपको ही जाएगा ! जयपुर में ऐसे बहुत से खट्टे-मीठे अनुभव हुए और कई बार तो ना चाहते हुए कुछ समझौते भी करने पड़े, एक तो पराया शहर, ऊपर से गाड़ी किसी और की… अपना शहर हो तो झेल भी लें पर यहाँ… समय की भी बंदिश है, परिवार भी साथ है, और इस कमज़ोर नस को हमारे भाई लोग भी बखूबी पहचानते हैं… एक बार तो थक हार कर एक हवलदार से तंज़ भी करना पड़ा, यूँ तो कहते हो ‘पधारो म्हारे देस’ और जब कोई सचमुच पधार ही जाये तो सारे मिलकर उसे लूटने में ही लग जाते हो…. बहरहाल ये बातें तो देश के हर हिस्से में हर किसी के साथ घटती ही रहती हैं, तो आइये अब आगे बढ़ते हैं…

चलिए ऐसा करते हैं, ज़रा शुरू से शुरुआत करते हैं, सोमेश एक छोटे भाई के अलावा एक बेहतरीन मेहमान नवाज़ भी निकला और साफ़ कह दिया कि बिना नाश्ते के नही जाना, दो-दो भाभियाँ हैं मिलकर बना लेंगी बाकी दिन भर आप जो मर्जी खाते रहना और फिर उसने हमे एक कागज़ पर घूमने की जगहों के अलावा उन सभी मशहूर जगहों और खान-पान के ठिकानों का पता भी दे दिया जो जयपुर में अपनी विशिष्टता रखते हैं ! इनमे से सबसे बेहतरीन था ‘स्टेचू सर्कल’ पर रात को क़ाफ़ी पीते हुये ‘हैंग आउट’ करना, जिसे आप जयपुर का मिनी इंडिया-गेट भी कह सकते हैं | सवाई जय सिंह का बुत लगा यह चौक स्थानीय तथा पर्यटकों के लिये एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है |

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विराट नगर – पांडव अज्ञातवास का साक्षी, बौद्ध साक्षात्कार का बीजक और एक झांकता मुग़ल कालीन झरोखा

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जयपुर से विराट नगर के लिए सुबह सात बजे वाली बस मैं बैठकर 9 बजे पहुँच गया। विराट नगर जाने का मेरा केवल एक ही उद्देश्य था और वो था बीजक की पहाड़ी पर बना हुआ करीब 2500 हज़ार साल पुराना बोद्ध स्तूप। यह एतिहासिक स्मारक विराट नगर बस स्टैंड से करीब ३ कि .मी की दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी के ऊपर बने एक समतल धरातल पर स्थित है। इस पहाड़ी पर तीन समतल धरातल है। सबसे पहले वाले पर एक विशाल शिला प्राकृतिक रूप से विद्यमान है जिसका स्वरूप एक डायनासोर की तरह प्रतीत होता है।

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