Yamunotri

यमनोत्री से गंगोत्री

यमनोत्री से गंगोत्री

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देखा मंदिर के पास से ही भागीरथी बह रही है. यहाँ पर भागीरथ का छोटा सा मंदिर है. हम लोग भी भागीरथी के किनारे खड़े ही कर निहार रहे थे. सुबह के 7 बाज रहे थे धूप खिली हुई थी. आस पास का वातावरण बहुत सुंदर लग रहा था . कुछ लोग इस ठंडे मौसम मे भागीरथी मे स्नान कर रहे थे. मैने पत्नी से नहाने को कहा पर उनकी तो हिम्मत नही हुई.

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दो धाम की यात्रा – यमुनोत्री और गंगोत्री

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तीसरे दिन हम लोग सुबह 6 बजे सोकर उठ गए अब हमारा अगला लक्ष्य यमुनोत्री पहुँचने का था . बरकोट से जानकी चट्टी की दूरी 41 किलोमीटर है. हमारा कार्य क्रम कुछ इस प्रकार का था की हम लोगों यमुनोत्री दर्शन कर शाम तक पुन बरकोट लौट आये. ताकि अगले दिन हम यहाँ से सीधे गंगोत्री के लिए प्रस्थान कर सके. इन बातो को ध्यान में रखते हुए हमने सुबह सात बजे ही बरकोट से रवानगी कर डाली. बरकोट से निकलते ही रास्ता बहुत ही ख़राब है क्योंकि यहाँ भी सड़क के चौडीकरण का काम चल रहा है. बरकोट से 15 किमी दूर गंगोनी नामक स्थान पर हमने सुबह का नाश्ता कर अपनी यात्रा जारी रखी. बरकोट से जानकी चट्टी का रास्ता बहुत अच्छा नहीं. एक तो रास्ता ख़राब दुसरे चढाई इसलिए समय भी ज्यादा लग रहा था. चारधाम यात्रा के चलते ट्रेफिक भी ज्यादा था. सयाना चट्टी पहुँचने से पहले हमें जाम में भी फँसना पड़ा. लगभग 1 घंटा जाम में हम लोग खड़े रहे. उत्तराखंड पुलिस यहाँ पर भी जाम क्लीअर करने में मुस्तैदी से लगी हुई थी. सयाना चट्टी पार करने के बाद राणा चट्टी नामक जगह आती यहाँ पर भी जाम लगा हुआ था. यहाँ से जैसे तैसे आगे बढे की हनुमान चट्टी में फिर जाम से रूबरू होना पड़ा.   सारे जामों से जूझते हुए लगभग दो बजे के आस पास हम जानकी चट्टी पहुँच गए. जानकी चट्टी यमुनोत्री मंदिर जाने के लिए बसे कैंप है. यहाँ तक बसें, कारें आती है. बरकोट से यमुनोत्री के रास्ते में निम्नलिखित स्थान पड़ते है.

गंगनाणी (15 किमी), कुथूर (3 किमी), पाल गाड (9 किमी), सयानी चट्टी (5 किमी), राणाचट्टी (3 किमी), हुनमानचट्ट (3 किमी), बनास (2 किमी), फूलचट्टी (3 किमी पैदल चढ़ाई), जानकी चट्टी (5 किमी पैदल चढ़ाई), यमुनोत्री

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यमुनोत्री में ट्रेकिंग

यमुनोत्री में ट्रेकिंग

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वो मेरी पहली ट्रेकिंग थी। पहली बार समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊंचाई पार की थी। पहली बार इतने बडे-बडे पत्थरों को लांघता हुआ चल रहा था। जिन्दगी में यह सब पहली बार देख रहा था मैं। मुझे इन सब चीजों और बातों का कोई आइडिया नहीं था।

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यमुनोत्री में ग्लेशियर

यमुनोत्री में ग्लेशियर

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यमुनोत्री में उस शाम केवल मैं ही अकेला पर्यटक था, समुद्र तल से 3200 मीटर से भी ऊपर। मेरे अलावा वहां कुछ मरम्मत का काम करने वाले मजदूर, एक चौकीदार और एक महाराज जी थे।महाराज जी के साथ दो-तीन चेले-चपाटे भी थे। मैने रात में ठहरने के लिये चौकीदार के यहां जुगाड कर लिया। चौकीदार के साथ दो जने और भी रहते थे, एक उसका लडका और एक नेपाली मजदूर।

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