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कफनी ग्लेशियर यात्रा- पांचवां दिन (द्वाली-कफनी-द्वाली-खाती)

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तभी सामने कुछ दूर सफेद सी आकृति दिखीं। सोचा गया कि वे तम्बू हैं। चलो, वहां तक चलते हैं। जाकर देखा तो तम्बू वम्बू कुछ नहीं था, बल्कि कुछ प्लास्टिक का मलबा सा पडा था। गौर से देखने पर पता चला कि यह फाइबर है यानी एक तरह का मजबूत प्लास्टिक। कम से कम सौ मीटर के घेरे में यहां वहां बिखरा पडा था यह मलबा। इसमें लकडी के दरवाजे भी थे जो आदमकद थे। दिमाग खूब चलाकर देख लिया कि यह बला क्या है। आखिरकार नतीजा निकला कि यहां कभी कोई हेलीकॉप्टर गिरा होगा, यह उसका मलबा है।

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पिण्डारी ग्लेशियर यात्रा- दिल्ली से धाकुडी

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बैजनाथ से आने वाली गोमती नदी के पुल को पार करके थोडा सा आगे जाने पर भराडी स्टैण्ड आता है। यहां से भराडी के लिये जीपें मिलती हैं। भराडी सौंग जाने वाली सडक पर कपकोट से करीब दो किलोमीटर आगे एक कस्बा है। भराडी में फिर दोबारा जीपों की बदली करके सौंग वाली जीप में जा बैठते हैं। जहां बागेश्वर से भराडी तक बढिया सडक बनी हुई है, वही भराडी से आगे सौंग तक महाबेकार सडक है। वैसे बागेश्वर से सीधे सौंग तक और उससे भी आगे लोहारखेत तक के लिये जीपें मिल जाती हैं

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