उज्जैन यात्रा

नमस्कार सभी को मेरा नाम अनिमेष दास है और यह मेरी पहली पोस्ट है पिछले कुछ महीनो से मैं उज्जैन ओम्कारेस्वर का प्लान बना रहा था घुम्मकड़ में मेरे मुख्या प्रेरणा स्त्रोत रहे श्रीमान मुकेश भालसे और कविता भालसे जी, विशाल राठौड़ जी एवं श्रीमान हेमंत जी जिनके पोस्ट्स ने मेरी यात्रा को पूर्ण रूप से सुयोजित किया. मैंने सबसे पहले अप्रैल मध्य में घुम्मकड़ की पोस्ट पड़ी और इतने सूंदर उज्जैन वर्णन के बाद मैंने अपने चाचा के लड़के से इस बात की शुरुवात की.

श्रीमान अमित दास जो की बहुत ही शिव भक्त हैं तुरंत कार्यान्वित हो गए इस प्लान में और मई के अंतिम हफ्ते में हमने पूरी परिवार के साथ उज्जैन और ओम्कारेस्वर देखने की रेलवे टिकेट बुक करा ली, पर नरेश सहगल जी की बात पूरी सौ फि सदी सत्य निकली की जब तक बाबा का बुलावा न आये कितनी भी सॉलिड प्लानिंग हो आप जा नहीं सकेंगे, यही हुआ हमारे साथ अगस्त के मध्य में मेरे पिताजी को और मेरी बेटी को वायरल ज्वर हो गया और काफी कमज़ोर होने पर लगा की यात्रा न रुक जाए, पर मेरा मन पूरी तेरा से तैयार था की कुछ भी हो अकेला जाऊँगा बाबा के दर्शन के लिए , इधर बेटी और पिताजी ठीक हुए की मेरे चाचा जी को वायरल ने पकड़ा और उन्होंने मना ही कर दिया की मैं नहीं जा सकूंगा फिर मेरी चची जी ने भी मना कर दिया की चाचा के पास की को रहना है और उसी बीच मेरी कजिन बहन की डिलीवरी हो गयी और चाची जी का भी पूर्ण विराम लग गया, लेकिन मेरे भाई अमित दास और तुषार दास दोनों ने हिम्मत न हारी और मैंने और मेरी धर्मपत्नी जो की बहुत धर्मपरायण महिला हैं ने अंतिम टाइम तक ईश्वर की आस नहीं छोड़ी और बाबा ने हमारी मुराद पूरी कर ही दी

३१/८/२०१६ को जाने वाले दिन सब पूर्ण रूप से स्वस्थ थे पर बाबा ने यहाँ भी लीला दिखा दी पूरी दिल्ली एनसीआर क्षेत्र सुबह ५ बजे से चक्रवात तूफ़ान से प्रभावित हो गया और बारिश ऐसी की थमने का नाम ही नहीं मैंने मन ही मन भोले बाबा का ध्यान किया और कहा बाबा अंतिम क्षण हमारा साथ न छोड़ना, हमारी ट्रैन रात १० बजे की थी और शाम ५ बजे बारिश ख़तम हो गयी और सिटी जलमग्न हो गया था पर किस्मत से हमें एक ऑटोवाला मिल गया जो हमें मेट्रो स्टेशन तक पंहुचा के ले गया.

हमने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के लाउन्ज में वेट किया और भोजन के पश्चात गाड़ी में बैठ गए, फिर किस्मत ट्रैन अभी कुछ दूर चली ही थी की किसी ने शिवाजी ब्रिज स्टेशन पे चैन खींच दी, ट्रैन रुकी तो रुकी ४५ मिनट खड़ी रही कारण पता किया तो पता चला की कुछ लुटेरों ने पास के बोगी से मोबाइल चुरा लिया था और गुस्साए यात्रियों ने ट्रैन की चैन खीच दी , जो इच्छा शिव की इच्छा मान के हम वापस बैठ गए और इंतज़ार करते रहे गाडी करीब १ घंटे बाद चल पड़ी हमें लगा की गाड़ी लेट पहुचेगी और हम निद्रा की आगोश में सो गए .

दिल्ली से उज्जैन की यात्रा

दिल्ली से उज्जैन की यात्रा

सुबह जब आँख खुली तो भोले बाबा का जाप करके नेट पे टाइम चेक किया और आश्चर्यचकित हो गया की गाडी सही समय से चल रही थी मन खुश हो गया और हम भोले बाबा का जाप करने लगे, कुछ दूर जाने पर गाड़ी नागदा जंक्शन पर रुकी और हमें MP का स्वाद चकने का मौका मिल गया, आप नागदा जंक्शन पे पोहा और साँची दूध के स्टाल से श्रीखंड चखना न भूले यह बहुत स्वाद वाली होती है.

खैर समय से नास्ते के पश्चात नयनाभिराम दृश्यों को देखते हुवे हम शिप्रा नदी के पुल पे पहुंचे तो मन आत्माभिवोर हो गया और देखा की हम अपनी मंज़िल श्री महाकाल के नगर उज्जयिनी पहुच चुके हैं

स्टेशन से हमने दो ऑटो किये जिन्होंने हमसे 150 रूपये लिए, आपको बता दे की स्टेशन से मैन चौराहा ४ किमी का है और १००-१५० रूपये जायज रेट हैं,पर ऑटोवाले २००-२५० रुपये बोलते है , जैसा की हमने होटल पहले ही बुक कर लिया था एक ६ कमरो वाला और एक दो कमरो वाला होटल वृन्दावन पैलेस महाकाल चौराहा के साथ मंदिर से केवल १००० मीटर की दूरी पर ,हालांकि उज्जैन में जैसा श्री विशाल राठौड़ ने वताया की वहां के लोग बहुत सहायक होते हैं मेरी माताजी को पैरों की बड़ी परेशानी होती हैं और हमारे कमरे द्वितिय तल पर थे हमारे होटल के मेनेजर श्री प्रांजल जी ने माताजी को देखते पुछा की क्या माताजी आपको पैरों की तकलीफ है और हाँ बोलने पर उन्होंने एक सुंदर कमरा भूतल पर हु उपलब्ध करवा दिया यस्तु बाबा की कृपा.

जैसे ही हम अपने कमरे में फ्रेश होने लगे इंद्रा देवता ने अपनी कृपा शुरू कर दी और हो गयी झमाझम बारिश. सब फिर सोचने लगे की शायद आज दर्शन देर से होंगे परंतु मेरी पत्नी ने कहा चलो आज कुछ भी हो भीगते हुए बाबा के दर्शन करेंगे,हेमंत जी के कहे अनुसार हम लाइन में लगने के लिए तैयार हो गए चुकी माताजी की वजह से दर्शन के लिए मैंने १५१/- की रसीदी टिकेट का व्यबस्था किया पर हमें बताया गया की सीनियर सिटीजन की एंट्री फ्री है.

हम १२.१० बजे पहुचे और यहाँ बाबा के कृपा के दर्शन हुए मेरी माता जी को पुलिस स्टाफ के आयुक्त ने देखा और कहा माताजी आप व्हीलचेयर के सुविधा लीजिये और पास खड़े वितरक को हमारे साथ भेज दिया

अस्तु माता जी और पिताजी दोनों पहले चले गए क्योंकि माताजी के साथ एक जन जा सकता था पिताजी पैदल उनके साथ हो लिए हम लोग भी रूद्र महिमा गाते हुए आगे बड़े, मैं विशाल राठौड़ जी के विशेष आभारी रहूँगा जिन्होंने मुझे बहुत टिप्स दिए थे और सच में उज्जैन महाकालेस्वर की मंदिर ब्यवस्था सबसे बढ़िया उच्चकोटि की है

फिर हम शीग्रदर्शन के लिए आगे बड़े और देखा आगे मात्रा गर्भगृह जाने के लिए बस १५ लोगो की लाइन है, मेरे भाई अमित दास जी को रुद्राभिषेक करवाना था तोह उन्होंने पंडित से बात की और ११०० रुपये में रुद्राभिषेक फिक्स हो गया, इधर लाइन खुली की मैंने और मेरी छोटी सी बिटिया ने ॐ नमः शिवाय की धूनी जमा दी, हम पहुच गए गर्भ गृह के अंदर और अहा क्या दर्शन हुए स्वयंभू शिव जी को सुन्दर जल अभिषेक करवाते हुए भक्तों का हुजूम था इधर अकस्मात मैं पुजारी जी ने हमारा हाथ पकड़ा और एक गुलाब का फूल देके कहा नाम गोत्र मन में लेके अपने जप के साथ अभिषेक करो हमने जल एव दुग्धाविषेक किया बाबा का वही खड़े बाबा को निहारते हुए पहुच गए बहार नंदी मंडप पे , इधर मेरी माताजी को व्हीलचेयर पे जो बंदा ले गया वह कहाँ से न जाने एक घड़ा पानी लेके मेरे पिता जी को दे गया और बोला बाबा को चढ़ा देना, मेरे माता पिता ने भी बड़ी सुंदरता से बाबा का जलाभिषेक किया, और मैंने और मेरी पत्नी ने रुद्राभिषेक और अपने गुरु मंत्र का जाप वही गणपति मंडप पर किया और ख़ुशी से बहार आये और दूसरे मंदिरों के दर्शन किये,

महाकाल के एंट्री के बाद गेट पर

महाकाल के एंट्री के बाद गेट पर

दर्शन के पश्चात हम खाना खाने मार्किट में आये पर जैसा की नरेश सहगल जी ने बताया था की इंदौर उज्जैन का खाना बहुत तीखा होता है हमारे बोलने बाबजूद नार्मल खाना भी तीखा था तो हमारा अनुभव थोड़ा ख़राब रहा, इधर बरसात बिलकुल थम गयी थी और हमने जाके रेस्ट किया , फिर शाम को मैं और अमित भाई निकल गए शयन आरती देखने के लिए ,हम फिर निकल गए VIP लाइन की और ९.५० पे और कहा की टिकेट सुबह ले लिया था |

पुलिस वाला बोला भाई एक जने की ले लो तो हम बोले की २० मिनट इंतज़ार कर लेते हैं आखिर में पुलिस वाला बोला जाओ कोई बात नहीं , प्रसन्नचित होकर आरती के लिए पहुचे तो देखा दरबार खुला है हम सिर्फ ८-१० लोग ही थे वहां पर ख़ुशी से बाबा के दीदार किया और पुष्प लेके मंडप पे बैठ गए करीब १० बजकर १५ मिनट पे दरबार बंद हुआ और बाबा का श्रृंगार और सफाई शुरू हुई, अब सिर्फ नंदी मंडप से बाबा को पुष्प चढ़ा सकते हैं भक्तगण, अस्तु १०:३० मिनट में बाबा का श्रृंगार ख़तम हुआ और भव्य आरती शुरू हुई , क्या समां बांध गया इतनी सुन्दर आरती ,और वह भी डमरू करतल और नगाड़ो के साथ आप थिरक उठेंगे रुद्र अष्टक को सुनकर |

मेरी भक्त जानो से यही अनुरोध है की एक बार बाबा की शयन आरती के दर्शन जरूर करे और यह भी बता देना चाहूंगा की ९:५० min से आप VIP लाइन गेट से फ्री जा सकते हैं और सीनियर सिटीजन के साथ आप निशुल्क जा सकते हैं ,

महाकाल के दरबार में पत्नी और मैं

महाकाल के दरबार में पत्नी और मैं

महाकालेश्वर में श्याम आरती के पश्चात

महाकालेश्वर में श्याम आरती के पश्चात

अंतिम भाग में मुझे नरेश जी की बात और मुकेश और कविता जी की बात की अगर भक्ति हो दृढ़ संकल्प हो तो बाबा दर्शन देते ही हैं क्योंकि यह बात अगले दिन सिद्ध हो गयी जब ३५० किमी की ओम्कारेस्वर यात्रा के दौरान मेरी पत्नी ने मेरे से कहा की वह भी बाबा के शयन आरती में सम्मिलित होना चाहती है तो बस फिर क्या हम निकल पड़े डिनर के बाद , इस बार हमने जनरल लाइन से जाना पसंद किया और नाम जाप करते हुए पहुच गए गर्भ गृह पे बाबा के और सूंदर दर्शन हुए और वहां जा के देखा की मेरे भाई और पिताजी भी VIP गेट से दर्शन करके बैठे हुए हैं अस्थु सूंदर समां में हम सब बाबा की आराधना में खो गए और राजाधिराज श्री महाकाल बाबा की आरती देख प्रसाद ग्रहण करके हम वापस पहुचे, ,

भाई और पिताजी के साथ पत्नी

भाई और पिताजी के साथ पत्नी

उस रात ही मेरे भाई श्री अमित दास जी भस्म आरती और अभिषेक हेतु रात्रि १२:१५ am निकल गए और बाबा की भस्मारती देखि

यहाँ मैं बता दू की बाबा भक्तों की इच्छा हमेशा पूरी करते हैं, और हमसे जो मिस हुआ वह था हेमंत जी के बताया हुआ बाबा का अन्नाखेस्त्र का प्रसाद क्योंकि में टोकन का काउंटर देख नहीं पाया दो दिनों तक और अपने आखरी दिन में अचानक प्रसादी हॉल के पास से गुजरा पर चूंकि मेरे पास टोकन नहीं था मैं प्रसाद का लाभ नहीं उठा पाया पर अब मैंने जगह देख ली है और प्रभु कृपा से अगले बार अबश्य जाऊंगा.

जैसा की खाने की बात हो रही है तोह मैं आप सबको एक राय देना चाहूंगा की अगर एक बार आप अच्छा भोजन चाहते हो तो डमरूवाला नामक रेस्टुराँ में अबश्य जाएँ वहां आपको सुंदर जैन थाली मिलेगी जो बहुत सुंदर तरीके से पकाया एबं परोसा गया है थाली में आपको दाल, कड़ी की सब्ज़ी, २ सूखी सब्ज़ी , रोटियां, चावल , सलाद, रायता और हलवा मिलेगा, साथ में अचार और चटनी यह सब मात्रा १२०/- प्रति व्यक्ति I हमने बहुत आत्मतृप्ति के साथ भोजन का आनंद लिया I आप भी एक बार अबश्य जाइएगा

डमरुवाले की थाली

डमरुवाले की थाली

फिर अगले दिन हमने उज्जैन दर्शन किया महाकाल एरिया के पास आपको बहुत से ड्राइवर अपना कार्ड देंगे जिसमे घूमने की जगहों के नाम होंगे आप उसमे खुद अपनी इच्छा से नाम जोड़ और हटा सकते हैं हमारा ड्राइवर जो खुद एक मुस्लिम था पर उसकी भक्ति और ज्ञान देखकर हम बहुत प्रभाभित हुए, उसने हमें एक एक जगह का महत्व बताया और अच्छे से दर्शन करवाये, आप यदि उसका नंबर चाहते हैं तो नोट कर लीजिये नाम : ज़ाकिर ०८३४९८२५२०७ और गाड़ी थी मारुती वैन I

हमने शुरुआत की श्री रामकृष्ण आश्रम उज्जैन से जो की मानव सेवा में लगा हुआ है यहाँ पर एक सुंदर फिजियोथेरेपी क्लिनिक है जो गरीबो की सेवा करती है, हमने आश्रम की सुंदरता निहारते हुए जप किया और मंदिर के दर्शन किये I आश्रम में दान दिया और प्रसाद ग्रहण किया

उसके बाद ज़ाकिर ने हमें निम्नलिखित जगहों के दर्शन करवाये

१. हरसिद्धि माता २. बड़े गणेश जी ३.चिंतेश्वर गणेश जी ४.विक्रमादित्य का मंदिर ५.शिप्रा घाट ६. भृतहरि गुफा ७.मंगलनाथ ८.गढ़कालिका देवी ९.सिद्धवट १०.काल भैरव जी ११. चौबीस खम्बा माता एवं संदीपनी आश्रम , गोमती कुण्ड ,सर्वेश्वर महादेव आदि

चौबीस खम्बा , माता मंदिर

चौबीस खम्बा , माता मंदिर

बड़े गणेश जी

बड़े गणेश जी

राजा विक्रमादित्य मंदिर

राजा विक्रमादित्य मंदिर

हरसिद्धि माता

हरसिद्धि माता

चिंतेश्वर गणेश

चिंतेश्वर गणेश

गढकालिका

गढकालिका

उसके बाद भोजन करके हम स्टेशन की और निकल गए , ज़ाकिर ने सब मिला के कुल ७५०/- किराया लिया

यह बात सिद्ध है की महाकाल ही उज्जैन के राजा हैं और उनकी आरती भी राजोचित होती अहा क्या शांति सुखमय बाताबरण है, यह सिद्ध है

आकाशे तारकं लिंगम, पाताले हाटकेश्वरम
भूलोके च महाकाल, लिंगत्रय नमोस्तुते

अर्थात, आकाश में तारक लिंग है, पाताल में हाटकेश्वर लिंग हैं तथा प्रथ्वी पर महाकाल लिंग है यह तीनो लिंग ही अति पावन तथा मान्य हैं अतः तीनों लिंगों को नमन

यह मेरा पहला पोस्ट है अत: कोई भूल हुई हो तोह कृपा करके संशोधन कीजियेगा. आप लोगों के फीडबैक का उत्साही

अनिमेष दास

10 Comments

  • Arun Singh says:

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