Himachal Yatra – स्वर्ग से वापसी, स्वर्ग की ओर

तो मित्रो आपने पढ़ा कि अपनी हिमाचल यात्रा हमने नैना देवी, ज्वालाजी, कांगड़ा, पालमपुर बैजनाथ होते हुए रिवालसर में समाप्त की।  अब समय आ गया था इस खूबसूरत जगह को छोड़ने का व अपनी वापसी यात्रा शुरु करने का.  ऩाश्ता करने के बाद हमने होटल का बिल चुकाया और जाने की तैयारी शुरु की.  रिवालसर में रहने के लिये, यदि आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो हिमाचल टूरिज़्म का होटल ही सबसे बेहतरीन जगह है.. किराया 900-2400 तक, खाना स्वादिष्ट व विनम्र सेवक। बेहतर रहेगा आने से पहले बुकिंग करा लें..क्योंकि कब बौद्धों का कोई त्योहार आ जाये और सब होटल भर जायें…

यदि मुंडे-मुंडे जा रहे हैं तो रूकने के सस्ते गैस्ट हाउस हैं जहां 300-500 में अच्छा कमरा मिल जायेगा । गुरुद्वारे में मुफ्त भी रहा जा सकता है ।

 

HPTDC, Rewalsar

HPTDC, Rewalsar

 

सुंदर रिवालसर झील

और एक बार फिर रिवालसर के नयनाभिराम दृष्यों को जी भर कर देखा…. और अपनी वापसी य़ात्रा शुरु की.

Entry to Rewalsar Lake

रिवालसर से निकल कर हम नेर चौक वाली सड़क पर चल दिये जो 25 किमी लम्बी है… ये रास्ता कुछ खास नही था वोहि छोटे-2 गांव व घुमावदार सड़कें. लगभग 1 घंटे बाद हम नेर चौक पंहुचे व वहां से मुख्य चंडीगढ़ – मनाली वाली सड़क पर पंहुच गये.  बांई ओर का रास्ता मनाली जा रहा था… हम दांयी ओर मुड़ कर कुछ ही देर में सुंदर नगर पंहुच गये.  सड़क के किनारे एक बहुत खूबसूरत व आधुनिक वेज-रेस्त्रां नजर आया व हम वहां रुके और गोभी मूली के परांठो के साथ नाश्ता किया.

Restaurant in Sunder Nagar

सुंदर नगर वाकई में एक सुंदर नगर है… छोटा सा शहर, सड़क के दोनो ओर ऊंचे-ऊचे देवदार के पेड़.   यहां से एक रास्ता तत्ता पानी होते हुए शिमला जाता है.. 1993 में हम छोटे बच्चो के साथ इस रास्ते पर गये पर रात को रास्ता भटक कर करसोग की तरफ पंहुच गये…वो एक खूबसूरत रास्ते की भयानक यात्रा थी जिसके बारे में कभी खट्टी-मीठी में लिखूंगा ।

Sunder Nagar

खैर नाश्ता करने के बाद हम लोग आगे चल दिये, कीरतपुर साहिब पहुंच कर हम बांयें चंडीगढ़ वाली सड़क पर पंहुच गये।

 

Kiratpur Sahib

इस बार इरादा चंडीगढ़ से होकर जाने का था, क्योंकि जब भी हम इस रास्ते से वापिस जाते हैं वैड़का कम्पलैक्स में ठंडे दूध का सेवन अवश्य करते हैं… क्योंकि जो दूध वो परोसते  है उसका स्वाद भी निराला है व पौष्टिकता भी खूब है, जो रास्ते की सारी थकावट को दूर कर देती है।

 

Verka complex, Chandigarh

वैड़का वालो ने तो इस बार कमाल ही कर दिया । कहां तो एक छोटा सा बूथ होता था जहां हम दूध पीते थे व पिन्नी व शुदध देसी घी घर के लिये ले जाते थे… और अब वैड़का वालों ने एक बहुत बड़ा बाग बना दिया जहां सुंदर मूर्तियों द्वारा पंजाब की संस्कृति की झलक मिलती है।

 

Verka complex

 

Verka

साथ ही वहां अब छोटा सा रेस्त्रां बन गया जहां पंजाबी भोजन हर समय ताजा मिलता है, वो भी ठीक दामों में। तो हमने पहले लंच करने का फैसला लिया व अंदर बैठ कर मक्की की रोटी व सरसों का साग आर्डर किया । भोजन तुरंत गरम परोस दिया गया ..मक्की की रोटी बहुत पतली व नरम थी… सरसों का साग जैसा हर जगह मिलता है.

 

Makki di Roti te Saryon da saag

Verka Fast food

मिक्सी आने से सरसों के साग का स्वाद ही खत्म हो  गया है… मैने अपनी नानी व मां के हाथ का बना तथा कई बार पंजाब के गांवो में सरसों का साग खाया है… उसका स्वाद ही अलग था.. अब जितने होटलों व ढाबों में सरसों का साग मिलता है वो असली साग का पासंग भी नही है… अब  वो सरसों के साग को पालक के साथ मिला कर मिक्सी में पीस देते हैं व मेंहदी जैसा एक मिश्रण सरसों के साग के नाम पर परोसते हैं… जबकि असली पंजाबी साग में सरसो के साथ बथुआ मिला कर हाथ से मोटा मोटा घोटते  हैं तथा टमाटर व प्याज का तड़का दे कर सफेद मक्खन के साथ परोसा जाता है… नई पीढ़ी शायद कभी जान ही न पाये कि ये मेंहदी जैसी हरी चीज…सरसों के साग के नाम पर मजाक है… खैर घर जाकर दुबारा असली साग खाया व मुंह का जायका ठीक किया

 

Mohali Gurudwara

चंडीगढ़ पार करके, पुलिस से बचते बचाते हम दिल्ली रोड़ पर पंहुच गये । हम लोग कई बार चंडीगढ़ में चालान करवा चुके हैं…वहां पुलिस बड़ी मुस्तैद है व खास कर दिल्ली की गाड़ियों की ताक में रहती है.. वहां स्पीड लिमिट 55 की है व यदि 57-58 की गति भी हो तो चालान अवश्य होगा… कोई उनकी पुरानी पड़ी मशीन को चैलैज नही कर सकता…. हमारा पिछला चालान तो एक बहुत खूबसूरत पर मोटी ताजी, लम्बी चौड़ी पंजाबन पुलसिन ने किया था… जिससे बात करते भी डर लगता था कि न जाने क्या कर दे…LOL

 

Chandigarh Market – Challan prone area

खैर भाई रात होते -2 दिल्ली बार्डर पर पंहुचे… रास्ते में लक्षमण के लड़के ने फोन किया कि मुरथल के पास सुखदेव के ढाबे से दाल मखनी व नान जरुर लाना…ढाबा क्या था एक आलीशान रेस्त्रां था… सेक्योरिटी वाले गाड़ियां लगवा रहे थे…अंदर खचाखच भरा था… पर सर्विस तुरंत… लक्षमण ने फटाफट हिसाब लगाया कि कम से कम 1 लाख रु की रोज की शुद्ध बचत…यानी 30 लाख रु महीना… हमने अपनी पढ़ाई लिखाई को लानत दी और सुखदेव सिंह की तारीफ करते रहे कि हमारी तरह फिज़िक्स मैथ में समय न गवा वो  खाना बनाना सीख करोड़पति बन गया…  खैर उसका खाना वाकई लाजवाब था…दाल मखनी व बटर नान उसकी खास डिश है और दिल्ली से हजारो लोग शाम को वहां ये खाने आते हैं.

दिल्ली पंहुच कर कुछ दिन आराम किया व आगे उदयपुर का प्रोग्राम बनाने लगे… पर सारी ट्रेन फुल थी… मैने इस दौरान गरीब आदमी को काफी तलाशा पर मिला नही… सारे हवाई जहाज फुल… ट्रेने फुल… बसें फुल… होटल फुल…हमारी काम वाली ने भी AC और  LCD ले लिया… मुझे कम से कम दिल्ली में तो गरीब आदमी नही मिला..

अगले हफ्ते नंदन से मिलना तय हुआ… नीरज जाट से पहले ही मिल चुका था… एक शर्मीला छोटी सी आयू का बालक जो एक अस्त-व्यस्त से मैट्रो फ्लैट में रहता है व घूमने के अलावा कुछ नही सोचता…अच्छा बच्चा लगा..

नंदन भी समय पर घर पंहुच गया साथ में विभा भी थी ।  अवस्थी जी को जैसे पता लगा नंदन आने वाला है वो भी पंहुच गया व जेपी भी अचानक आ धमका…तो हमारी शाम रंगीन हो गयी। खूब बातें हुई.. .व नंदन व विभा ने काफी बाते कर के हमारा ज्ञान बढ़ाय़ा (ये  एक जोक है…. क्योंकि मुझे नही लगता मैने उन दोनो बिचारों को बोलने का मौका दिया हो…व अपनी ही धुन में उन्हे बोर करता रहा….LOL)

बातों ही बातों में मैने नंदन को अपने उदयपुर प्लान के बारे में बताया व रेल टिकट न मिलने की बात भी… नंदन ने अच्छी सलाह दी कि हम जयपुर हाउस से चलने वाली डीलक्स बस से भी जा सकते है जिसकी टिकट आराम से मिल जायेगी । सोमवार को हमने बस से उदय पुर जाने का प्रोग्राम पक्का कर दिया.. पर दिल्ली में तो आप जानते हैं We propose and Mosquitoes dispose..अगले ही दिन बुखार व शरीर में टूटन शुरू हो गयी… उदयपुर कैसिल व स्वाथ्य की देखभाल शुरु ।  और जब नाक से लहू बहने लगा तो डेगू का खतरा मंडराने लगा..खैर डाक्टरी जांच से डेगू तो नही निकला पर ठीक होने में 10 दिन लग गये और सारे प्रोग्राम की वाट लग गयी ।

पर फिर भी जो दिन हिमाचल में बिताये… व जो नयनाभिराम दृष्य देखे उन्हे याद करके तो एक ही बात मुंह से निकलती है – मेरा भारत महान….Incredible India !!!!!

मेरा भारत सुंदर

मेरा भारत सुंदर

 

अब वापसी की तैयारी शुरू… सूटकेस पैक व हवाई अड्डे की और प्रस्थान .. चैक इन किया व 2 घंटे एअर इंडिया के एम्बर लाऊंज में मुफ्त का माल खाते पीते रहे व ठीक समय पर विमान में सवार हुए..

 

A view from Ember Lounge IGI airpirt

.बड़ी किस्मत थी कि ये उड़ान एअर इंडिया के First Dreamliner(787) में थी…नये विमान का उदघाटन करते हुए विमान में प्रवेश किया और अपनी सीटो पर बैठ गये । बड़ी खुली सीटे जो एक बटन दबाने से पूरा बिस्तरा बन जाती थी…खिड़की के शीशे के पास उंगली दबाओ तो शीशा काला हो जायेगा…हर दबाव कालापन (या हरापन सा) बढ़ाता जायेगा व अंतत: शीशे से रोशनी आनी बंद। पूरा विमान ऐसे इलैकट्रानिक संसाधनो से युक्त कि लग रहा था कि नासा की चांद गाड़ी से यात्रा कर रहे हैं… एयर इंडिया से ऐसी उम्मीद नहीं थी…LOL.  एयर होस्टेस थोड़ी थकी हुइ बुडढी सी लगी पर वो काफी सेवाभावी थी व हर तरह से यात्रियों का ध्यान रख रही थी । सुंदर, जवान व अकड़ू होस्टेस जाने किस रुट पर थीं….

 

एअर इंडिया का आधुनिकतम विमान - ड्रीम-लाईनर

एअर इंडिया का आधुनिकतम विमान – ड्रीम-लाईनर

तो ड्रीमलाइनर उड़ चला मस्त पंछी की तरह… खुदा का लाख लाख शुक्र है कि लीथियम बैट्रियों ने आग नही पकड़ी वरना ये लेख आप न पढ़ रहे होते । कुछ दिनों बाद ही एयर इंडिया को सारे नये विमान रोक देने पड़े क्योकि पता चला कि उनकी बैटरी खराब है व कभी भी आग पकड़ सकती हैं… एक बार ट्युनिस में छोटे विमान मे यात्रा करते हुए जब विमान नीचे उतरा तो उसका टायर फट गया… विमान बहुत छोटा था व पायलट ट्रेंड… अत् झूलते झालते विमान को उसने बिना कोई दुर्घटना हुए रोक दिया, पर हमें स्लाइड से उतरना पड़ा था ।  लिथीयम बैट्री का धन्यवाद कि वो हमारी यात्रा के समय विस्फोटक नही हुई नही तो नंदन भाई को GOY posthumously देना पड़ता ।

तो हम अफगानिस्तान के हिमाच्छादित पर्वत श्रंखलाओं से होते हुए फ्रैंकफुर्त जा पंहुचे

Flying over Afghanistan

Flying over Afghanistan

फ्रैंकफुर्त में हमें कुछ करना तो था नही, सिर्फ होटल में एक रात रुकना था व अगले दिन आईसलैंड का विमान पकड़ना था ।  एअरपोर्ट पर चैकइन काउंटर व बाद में सुरक्षा कर्मियों की रंगभेद बदतमीजियों को झेलते हम आखिर आईसलैंड के विमान में बैठ गये

Frankfurt

3 घंटे बाद विमान आईसलैंड के हवाई अड्डे पर उतरा…. हमारा वाहन चालक इंतजार कर रहा था और हम चल दिये अपने घर की ओर… हिमाचल की पूरी यात्रा में न तो ठंड मिली न बरफ… पर यहां आईसलैंड में सब कुछ था….

बरफ, ठंड तथा उत्तर-ध्रुवीय रोशनियां (Aurora Borealis ) हमारा इंतजार कर रही थी…. आसमान हरे रंग से सजा था, नीचे सब सफेद ही सफेद था… .

.एक स्वर्ग (हिमाचल) से दूसरे स्वर्ग (आईसलैंड) की य़ात्रा … मजेदार रही… आपको कैसी लगी ????????????

Iceland

Going home from airport

 

 

 

Norther Lights seen near airport

Northern Lights seen near airport

 

 

 

43 Comments

  • Wow Wow Wow!!!
    Sirji, so this long journey came to a blunt end.
    Mountains, Temples, Dhabas and all; but you traveled a lot in this time.

    So where next?

  • parveen kr says:

    kamaal dhamaal maalamal yatra. aapki yatra achhi hi lag sakti hai. last photo is mind-blowing.

  • Saurabh Gupta says:

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  • SilentSoul says:

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  • Ritesh Gupta says:

    S.S. Ji….

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    • SilentSoul says:

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  • saroj sharma says:

    swarg se swarg ki yatra ka atyant rochak aur sajeev chitran. ghar baithe yatra ki sukhad anubhuti prdan karne ke liye dhanyvad

  • Rakesh Bawa says:

    SilentSoul Ji,
    Mazaa aa gaya ye safarnama pad kar. iske aage kya kahun……..

  • Harish Bhatt says:

    SS Ji… the entire series was wonderful and I thoroughly enjoyed. Thank you for sharing and will eagerly wait for your next travel story Jai hind

    • SilentSoul says:

      Kahan ho Bhatt sahab aajkal… bade kam dikhte ho…. Kahan ki ghumakkari mein lage ho ?

      tks for your time to read the story and to comment…

      • Harish Bhatt says:

        SS Ji.. filhaal to Dilli me hi hoon… Abhi kuch din pehle hi Deori tal, badrinath, Mana aur vasudhara ghoom ke aaya hoon… par likhne me aalas ata hai…shayad ye mere bas ki baat nahi.. aap logon ke post pad kar hi santusti ho jaati hai…

  • laxman bhatia says:

    Thanks for all posts of. himachal. Very good described

  • Nandan Jha says:

    SS – Here come my vote of thanks for this post. For the the hotel pic and the tip for staying there. It looks good. I guess after this series a lot of new folks are going to discover Rewalsar. Thanks.

    Just like Verka, there is another one close to Karnal (I am missing the name), similar format and a great place for milk lovers. I so agree with your thoughts around using food-processor. It just kills the whole thing. My attempts of not using the mixer has seen a mixed success, so good to hear that there are more like me . hehe.

    Getting out of CHD is an act of bravery. With the new bypass (Kharar) at least one can avoid it. The traffic cops are just on the look-out and if it is non punjab vehicle, you have it.

    I am so glad that we not only could meet but actually could spend time together. It was one of very focused meeting with all of us around the table and a lot of discussions. If you remember it rained a bit and it was just the perfect weather for getting a bit high. I know it was a shame on us to not have clicked a single pic. he he. I look forward to meet you again, here or Iceland or Kumaon hills. :-)

    Very sad to hear about sickness, it sort of makes one feel very bad. Hopefully Udaipur would happen in a greater grandeur soon.

    Thanks for dreamliner details :-) and the flat seats. I return next week and the larger leg is of about 16 hours, all in economy. Good thing is that the carrier is an Asian. I have found them to be much more nice than the rang-bhedi european or dis-interested American carriers. I avoid them. I have take China, Japan, Emirates, Sg, Cathay and all of them have been nice. AA, BA, Luft… always have unpleasant stories, anyway, lets not get digressed.

    And finally many thanks for sharing northern lights.

    Wishing you another large bout of travel very soon. Take Care.

    • SilentSoul says:

      Tks Nandan for such ??? ?? ???? comment. Dekho Udaipur kab banta hai.

      your looooong comment compensated the absense of DL,Sushant, Bhalses and Vishal :)..LOL

  • A great series ends with a hope for another beginning…

    Hope you have recovered well by the time you left
    I too surprised to see the post first, thought I clicked Hindi option by an oversight…not a problem though…was busy at work and also worked for my post, whenever I find some time.
    You must have a gala time with everyone in Delhi.

    So, what’s next for us…story from another heaven, I believe…look forward to your next

    Take care,

    • SilentSoul says:

      Yes Ammitabh bhai… I deliberately ended the series in Hindi.. to heighten the morale of Hindi guys…and I am sure my friends like you, DL & Gita would not mind it.

      Next is uncertain… I went to Madrid without any program.. .. future is pregnant with billions of possibilities..so let us enjoy the present… shouldn’t we ?

  • Abhee K says:

    Hello SS Ji,

    Very nice series. Rewalsar is new for me so thanks for introduction.

    Sorry to hear about your health and cancellation of Udaipur tour.

    By the way, thanks for sharing Sarson ka saag without mixer recipie :)

    Good to know about dreamliner. Northern light pic and flying over Afganistan pics are beautiful.

    Agle swarg se aage ki stories ke intezaar me.

    Keep travelling, keep writing

    • SilentSoul says:

      Abhee thanks for your comments…. sarson ka saag should never be prepared in a mixie. boil the saag and grind it with hands… since it is hard work, ask your servant to do it..if you dont have a servant follow my wife’s footsteps who uses her hubby to grind the saag by hands with a “Mathani” made of wood. it must have a rugged look of a leaves and stems in a rough way to satisfy the heart…not the eyes

      I love to get comments……and to give comments

      waiting for your next story

  • D.L.Narayan says:

    Sorry, SS, for the delay in reading this post but I was sort of busy and had to travel to the UAE too, so I was not able to log in for many days.

    A fitting finale to a very enchanting series. From Heaven 1 to Heaven 2 and back to Heaven 1 (with an Aurora Borealis welcoming you), it has been an awesome journey. Your GF3 has been outstanding and the pictures have come out very well. I especially liked the picture of Afghanistan, highlighting its rugged landscape. Also have come to know that you are an accomplished cook too, going by your description of the right way of preparing sarson ka saag. I am sure that in spite of having studied Mathematics and Physics, you can also make crores like Shri Sukhdev Singh if at all you choose to start a restaurant. The ability to cook extremely well is the most prized of talents.

    Sad that you missed out on a visit to Udaipur because of a lowly mosquito; great that you were able to recover from the illness in time to fly back to Iceland. The get together with Nandan and Vibha must surely have been one of the highlights of this visit for you.

    Congratulation for flying on the inaugural AI dreamliner flight and relieved that you did not have any problem with the Lithium batteries on your flight. Thankfully, no disasters have taken place anywhere and hope that the dreamliners start flying once again. Looks like you have traveled Business Class or is economy class that good in a 787?

    • SilentSoul says:

      DL tks for your late comments… I always miss your wise comments…they actually complement my post.

      I would love to show my fotos by GF3, but the format of Ghumakkar doesnt allow adding fotos and the EDITORS do not allow photo-logs (You know how much trouble I took for my post “Iceland- Snow Saga” )….

      I have posted my latest photos on Iceland on BCM Touring… you can see there and feel the difference.

      I travelled in business class .. but the economy seats in Dreamliner were better than Business class in other planes.

  • Stone says:

    Last photograph left me spellbound, there is something magical about it which cannot be explained.

    End of another brilliant series, though I found the end little rushed or it’s just me. Or may be I don’t like partings which involve airports :-(

    Looking forward to the your next one sir, hopefully it will come soon.

    Regards

    • SilentSoul says:

      Bhaskarji tks for your comments. I replied earlier but it was lost. Yupp the Aurora is hypnotising… specially when you see them with naked eyes.

      A colored ribbon unfolds and a streak of different colors like pink, violet and yellow moves in the sky, leaving green patches behind.

      Hope one day you see this magical fire works of Mother Nature

  • Surinder Sharma says:

    Dear SS,

    Nice writing and good photos. Frankfurt Airport, I don’t think someone speak good English there. I saw a security person calling to visitors with their shirt color, and every passenger has to go with security check whether he is just transfer his flight. May be German has to learn customer service yet.

    Regards

    • SilentSoul says:

      tks sharmaji…. i felt Germans are racist..they know very well the customer service but it depends upon skin color of the customer

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    • SilentSoul says:

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  • Mukesh Bhalse says:

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    • SilentSoul says:

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  • Gita AM says:

    Silent Soul, the last two pics are absolute stunners! Oh Whaattey View, whew …….. You must post an Iceland blog now, I recently learnt that you live in Iceland.

    “Sarson da saag, Makki di roti” yummmm, I enjoyed that a month back at a dhaba in Delhi, it was really good.

  • AUROJIT says:

    Hi SS,

    Great post. The valuable information about the trip including hotel/stay options and of course, great utility of Verca is captivating.

    Dreamliner dream has apparently gone a bit sour since then :-(

    Secrets of Sarson saag recipe is worth noting down!

    Pics of Himachal trip capped by Northern lights…..it aptly conveys the expanse of your Ghumakkari.

    Enjoyed really,

    Auro.

  • SilentSoul says:

    Thanks Aurojit.. Himachal if you translate become Him (Ice) anchal (land)

    so the meaning of Himachal in English would be Iceland :)

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