पवित्र गुफा और हिमलिंग दर्शन (Part 4)

(अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे मैं अपने साथियों से अलग होकर, अकेला, भोले नाथ के दर्शनों की अभिलाषा लिए, गुफा के नजदीक सुरक्षा जांच केंद्र तक पहुँच गया। अब उससे आगे …)

प्रवेश द्वार पर सुरक्षा जांच केंद्र है। यहाँ से आगे परशाद के अलावा कुछ भी ले जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए सभी लोग अपना सारा सामान, कैमरा, फ़ोन आदि पहले ही दुकानो पर जमा करवा देते हैं। यहाँ सामान जमा करवाने लिए लॉकर की सुविधा उपलबध नहीं है, सभी कुछ यहाँ मौजूद परशाद की दुकानो पर ही रखना पड़ता है। इसके लिए वो आपसे कोई पैसे नहीं लेते बस आपको उनसे परशाद है। परशाद आप अपनी मर्जी से 51 से शुरु कर 501 तक ले सकते हैं।

यहाँ एक बार फिर पंजीकरण चेक किया गया और पंजीकरण चेक करने के बाद दो तीन बार मेरी अच्छी तरह से तलाशी ली गयी और अंदर जाने दिया। आज यहाँ ज्यादा भीड़ नहीं थी। कई बार मैंने यहाँ बहुत लम्बी लम्बी लाइने देखी हैं। यहाँ आकर सीढ़ियां देखकर एक बार तो चढ़ने में तक़लीफ़ होती है लेकिन अपने इष्ट देव के दर्शनों के अभिलाषा इस तक़लीफ़ पर भारी पड़ती है। मैं भी तेजी से सीढ़ियां चढ़ता हुआ ऊपर गुफा की तरफ जाने लगा। गुफा से थोड़ा सा पहले नन्दी की एक चांदी से बनी हुई विशाल प्रतिमा है जिसका मुख हर शिवालय की तरह गुफा की तरफ है। अब इसके चारो तरफ रेलिंग लगा दी गयी है जो पहले नहीं थी।

पवित्र गुफा के पहले दर्शन

पवित्र गुफा के पहले दर्शन

गुफा से पहले ग्लेशियर

गुफा से पहले ग्लेशियर

घोड़ा स्टैंड

घोड़ा स्टैंड

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गुफा के अंदर एक गेट बना हुआ है और चारों तरफ रेलिंग लगी हुई है कोई भी बिना गेट से गुजरे अंदर नहीं जा सकता। गुफा के अंदर एक दो पुजारी को छोड़ कर सारी व्यवस्था फौजियों के हाथों में है। जैसे ही मैं गेट पर पहुंचा तो वहां तैनात फौजी ने गेट बंद कर गया और बोला अंदर काफी भीड़ हो गयी है , खाली होने दो। लगभग पांच मिनट के बाद जब अंदर से भीड़ छंट गयी तो उसने गेट खोल दिया और मेरे साथ गेट के बाहर खड़े कई यात्री एकदम से बम बम भोले के जयकारे लगते हुए भवन में प्रवेश कर गए।

सभी दुकाने और लंगर बर्फ पर ही हैं

सभी दुकाने और लंगर बर्फ पर ही हैं

इस के नीचे नदी बह रही है

इस के नीचे नदी बह रही है

दर्शन से पहले स्नान करते लोग

दर्शन से पहले स्नान करते लोग

अमर गंगा

अमर गंगा

बिल्ली के आकार का पहाड़ी चूहा

बिल्ली के आकार का पहाड़ी चूहा

जिस जगह पर हिमलिंग बनता है वो जगह 5-6 फ़ीट ऊँची है और उसके समानांतर पहुँचाने के लिए 7-8 सीडियां बनी हुई है। इस वर्ष हिमलिंग का आकर लगभग 10 फ़ीट था और हम नीचे खड़े हुए भी आराम से दर्शन कर रहे थे। धीरे -धीरे लाइन में चलते हुए मैं बाबा अमरनाथ के एकदम सामने जा पहुंचा। जी भर कर दर्शन किये और परशाद अर्पण किया और वहां बैठे पुजारी से परशाद लिया। फौजी यहाँ रुकने नहीं देते और सारे काम चलते -चलते ही करने पड़ते है। मैं चलते -चलते प्लेटफॉर्म के दूसरे सिरे से नीचे उतर गया। और यहाँ भी फौजियों ने किसी को रुकने नहीं दिया और गुफा के दूसरे गेट से सबको बाहर करते रहे। यह जरुरी भी है जब तक लोग जल्दी से बाहर नहीं आएंगे तो बाकि लोग अंदर प्रवेश कैसे करेंगे।

अमरनाथ गुफा का पौराणिक महत्व :

“ अमरनाथ हिन्दुओ का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 किलोमीटर दूर समुद्रतल से 13,600 फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊँची है।अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखो लोग यहां आते है। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूँदों से कई फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं।

अमरनाथ गुफा का सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गडरिए को चला था। आज भी एक चौथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है।

किंवदंतियों के अनुसार माता पार्वती ने एक बार भगवान शंकर से अनुरोध किया कि वह मानव को अमरता प्रदान बनाने वाला मंत्र उन्हें सिखाएं। शिवजी नहीं चाहते थे कि उस ज्ञान को पार्वती के सिवा कोई अन्य नश्वर प्राणी सुने, पर वह पार्वती का अनुरोध भी टाल नहीं सकते थे। इसलिए उन्होंने पार्वती को वह मंत्र बताने के लिए हिमालय में एक निर्जन गुप्त स्थल चुना। मान्यता है कि पवित्र अमरनाथ गुफा वही गुप्त स्थल है। भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, नंदी बैल को बैलगाम में जो बिगड़ कर अब पहलगाम बन गया है, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग और पंचतत्वों को पंचतरणी नामक स्थल पर छोड़ा था। ये तमाम स्थल अब भी अमरनाथ यात्रा में आते हैं।

जनश्रुति प्रचलित है कि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव ने अमरकथा सुनाई थी कथा सुनते-सुनते माता पार्वती तो सो गईं, पर कबूतर के दो अंडे, जो वहां पहले से विद्यमान थे, उस अमर मंत्र को सुनते सुनते वयस्क होकर अमरत्व पा गए। गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा इस पवित्र गुफा में दिखाई दे जाता है, जिन्हें श्रद्धालु अमर पक्षी बताते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखों लोग यहां आते हैं।”

पवित्र गुफा

पवित्र गुफा

पवित्र गुफा के आस पास बर्फ

पवित्र गुफा के आस पास बर्फ

पवित्र गुफा के आस पास बर्फ

पवित्र गुफा के आस पास बर्फ

courtesy www.amarnathyatra.org

courtesy www.amarnathyatra.org

दर्शन के बाद मेरी तस्वीर

दर्शन के बाद मेरी तस्वीर

गुफा पर पहुंचने पर असीम शांति का अनुभव होता है। सब कुछ इतना सम्मोहित करने वाला है की प्रार्थना करना भी याद नहीं रहता। नजरें टकटकी लगाये कुदरत के इस नज़ारे को देखने में ही लगी रहती हैं। भोले नाथ के दर्शनों से शरीर का रोम रोम पुलकित हो जाता है और पल भर के लिए सब कुछ भूल जाता है। लगता है भोले के दरबार में मोह माया का प्रवेश निषिद है। यहाँ आप अपनी सारी थकावट ,दुःख दर्द भूल जाते हैं और सिर्फ भोले नाथ को ही देखने का जी चाहता है। हिमलिंग के पास में ही माँ पार्वती, गणेश व नंदी की पिण्डी, बर्फ से स्वयम्भू बनती हैं। पवित्र गुफा में होने वाली अनुभूति को शब्दों में वर्णन करना मेरे जैसी नाचीज़ के लिए संभव नहीं है।

गुफा से बाहर निकलते ही मोह माया फिर से आपको जकड़ लेती है। मैं भी जैसे ही गुफा से बाहर आया तो मुझे भी अपने साथियों की याद आई. जाने वो कहाँ रह गए? यह सोचता हुआ और भोले नाथ से अगले वर्ष फिर बुलाने की प्रार्थना करता हुआ सीडियां उतरने लगा। जूताघर से से अपने जूते लिए । उस समय ठीक 2:30 बज रहे थे यानि की मैं किसी भी हिसाब से लेट नहीं था। नीचे उतर कर एक लंगर से बेसन का एक पुड़ा मीठी चटनी के साथ खाया और दूसरे से एक कटोरी खीर। तीसरे लंगर से गरम चाय पी और फिर से तरोताजा हो वापसी शुरू कर दी।

“एक बात तो मैं आपसे साँझा करना भूल गया। आज 8 जुलाई को मेरा जन्म दिन था। अपने जन्म दिन के दिन भोले नाथ के दर्शन हो गए। इससे बढ़िया तोहफ़ा तो मुझे आज तक कभी नहीं मिला था।”

बाकि अगले भाग में जल्दी ही….

17 Comments

  • Mukesh Bhalse says:

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  • Dear Naresh Ji

    Beautiful is the word for description, photographs, presentations and everything. I had also the same feeling as you while in the cave. As you said, “?? ??? ???? ???????? ???? ???? ?? ?? ????????? ???? ?? ??? ???? ?????” I too had the same experience.

    Now coming to your one photo “?????? ?? ???? ?? ????? ????” is actually “The Himalayan Marmot”. Marmot found in the Himalayan regions .Marmots are a group of large ground squirrels. :)

    Will wait for next part….hope it will publish soon.

    Thanks

    • Thanks Anupam ,
      Thanks for sharing the name The Himalayan Marmot otherwise I would have keep on calling it as ?????? ?? ???? ?? ????? ????.
      I too waiting for your next post on SheshNag..

  • Awesome post with beautiful photos.

  • Arun says:

    Naresh Ji,

    Your devotion to lord shiva clearly reflects in your writing. Again I would say perfect post with picture perfect locations. One more thing to share with you that I have also been blessed by lord shiva this year by giving me an opportunity to visit Neelkanth Mahadev Temple on my birthday i.e. 12 of July.

    Keep sharing…..
    Arun

  • Thanks Arun.
    Surprisingly , my friend and companion of this Yatra, Sushil’s burthday is also on 12th of July.
    It makes special to have darshan of your Lord on your Birthday.

  • Anil Sharma says:

    Once again nice post. Pictures are very beautiful. Thanks for sharing.

  • Avtar Singh says:

    Hi Naresh ji

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  • Thanks Avtar jee, for your continuous encouraging and motivating comments.

  • Nandan Jha says:

    The photo of Amarnath Gufa from top gives a great perspective of the total size of the Gufa. I would imagine that such big caves are not a normal thing to find. May be along with the the fact about Himlinga would have made the place very special.

    Thank you Naresh for continuing to share your Amaranath sojourns with us. You are a veteran now. I have no good ideas but there must be a efficient way to provide free consulting on all issues around Amarnath. You have the gift of articulation, experience of being at Amarnath umpteen times and access to internet. May be a smart phone app or something. Pls think about it if it doesn’t sound like a crazy idea. I am up for any help I could provide to shape it up further. Wishes.

    • Thanks Nandan Ji..
      It will be my pleasure to help any body who wants to take this Yatra . I can answer the queries with best of my knowledge but do not know how to develop smart phone app or something which will serve the purpose. but if it can happen and I get query by mail or by SMS I will definitely reply.
      Thanks

  • Read your whole Yatra . Awesome Narration and Wonderful pictures. Keep it up Dude.

  • Ravi Agrawal says:

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