राजस्थान यात्रा: भाग १

राजस्थान यात्रा (भाग -१)

पिछले साल सर्दियों, दिसंबर के तीसरे हफ्ते,  में राजस्थान, मेरा गृहराज्य जहां मैं रहा बहुत ही कम था, की यात्रा का प्लान बना था और हमारा रूट था:

कानपुर –> जयपुर –> पुष्कर –> बीकानेर  –> जयपुर –> कानपुर

ठीक इस समय राजस्थान पत्तर प्रदेश की सीमा पर गुर्जर आंदोलन शुरू हो गया जिससे हमको थोड़ा सा डर था लेकिन जब ओखली में सर डाला तो मूसल से क्या डरने वाला जज्बा लेकर निकल पड़े|

 

यात्रा कानपुर रेलवे स्टेशन से शुरू की और पहले सुबह सुबह जयपुर पहुंचे जहां हमको हमारे साथी गाड़ी के साथ मिलने वाले थे |

GandhiNagarगांधीनगर स्टेशन, जयपुर

फिर जयपुर में दोस्त के घर तैयार होकर और खाना जीमकर हम पुष्कर की तरफ रवाना हुए जिसका रास्ता अजमेर होकर है. जब तक हम चार लें वाले हाइवे पर रहे तब तक तो रास्ता बहुत ही बढ़िया था  लेकिन जैसे ही पुष्कर के लिए अजमेर के थोड़ा पहले दाहिने मुड़े (पश्चिम की तरफ), सड़क एक लाइन में बदल गयी और फिर जैसा कि हिन्दुस्तान में होता है, “जिसकी लाठी उसकी भैंस” कहावत का पालन करते करते चलते चले गए और शाम तक पुष्कर पहुँच गए|

Photobucketजयपुर से पुष्कर का रास्ता

पुष्कर

पुष्कर एक छोटा सा कस्बा है जहां राजस्थान में होने की वजह से धूल ज़्यादा है, हरियाली न के बराबर है और आबादी भी ज़्यादा नहीं है| जगह के बारे में किवदंती है कि ब्रह्मा ने राधा कृष्ण की झलक पाने के लियी साठ हजार साल लंबी तपस्या की थी और ये जगह अपनी झील या तालाब के लिए जानी जाती है| यहाँ देखने के लिए कई सारे मंदिर भी हैं जिनमें कि मेरी कुछ खास दिलचस्पी नहीं थी| पुष्कर पहुँचने के बाद होटल तक पहुँचने में थोड़ी मुश्किल हुयी, क्योंकि पहले हमको किसी ने उलटा रास्ता बता दिया  और हम पुष्कर के बाहर ही चले गए लेकिन फिर किसी भी तरह से पूछपाछ के होटल तक पहुंचे| होटल तक पहुँचने में शाम हो गयी थी और अंधेरा लगभग होने लगा था| होटल अच्छा था, पीछे एक पहाड़ी थी जिसको देखते ही मुझे तो तुरंत ही इस पर चढ़ने की तमन्ना हो गयी |

Photobucketहोटल

कमरे काटेजनुमा थे और साथ में बाथरूम भी था, वो भी गरम पानी के साथ जो कि सर्दी में अच्छा था|  पुष्कर जाते ही पहले हमने होटल में रात के अलाव का पता किया, जिसका जुगाड़ हो गया लेकिन चूंकि पुष्कर धार्मिक जगह है, इसलिए यहाँ पीने और मांस खाने पर सख्त मनाही थी इसलिए पीने का इंतज़ाम हमको छुप कर करना पड़ा, स्टील के गिलासों में|

शाम को हम कुछ लोग पुष्कर की गलियों में घूमने निकले| मज़े की बात ये थी कि वहाँ इज़रायली लोगों की तादाद काफी थी, और तो और कई जगह दुकानों पर हिब्रू में लिखा हुआ था| इसके अलावा कई छोटे मोटे रेस्टोरेंट थे जहां शुद्ध इटालियन पास्ता सर्व किये जाने का दावा किया जा रहा था| हमको कुछ स्थानीय लोगों ने बताया भी कि यहाँ पर इटालियन खाना बहुत अच्छा मिलता है, वजह कि कुछ लोगों ने लोकल औरतों से शादी करके वहीं होटल खोल लिए और कुछ ने लोकल रेस्टारेंट वालों को बनाना सिखा दिया| खैर हमने इसको चखने की कोशिश नहीं की क्योंकि रात काफी हो गयी थी| हम ज़्यादा नहीं घूमे क्योंकि एक तो रात हो गयी थी और दूसरे भूख भी लग रही थी और होटल में खाना तैयार था |

Photobucketपुष्कर का एक मंदिर

रात को होटल पहुंच कर पहले तो स्टाफ को पटा कर स्टील के गिलासों का इन्तजाम किया गया जिसमें सर्दी के मौसम में व्हिस्की पी गयी जो कि बहुत अच्छी भी लग रही थी| साथ में अलाव मौसम का मज़ा और भी दुगुना कर रहा था, लेकिन बहरहाल सुबह जल्दी उठ कर पहाड़ी पर चढ़ने जाना था, इसलिए जल्दी सो गए|

सुबह करीब पांच बजे उठकर फटाफट तैयार होकर हम पहाड़ी की  तरफ चले, पहाड़ी के नीचे एक मंदिर था जहां कई सारे लंगूर थे| लंगूर हम लोगों को ऐसे देख रहे थे कि जैसे हम कोई अजूबे हों, जो कि शायद सही भी है|

Photobucketहोटल से पहाड़ी का रास्ता

Photobucketपहाड़ी (पीछे की तरफ)

और फिर पथरीली पहाड़ी की चढ़ाई शुरू| चढ़ाई थोड़ी मुश्किल सी थी क्योंकि कई सारे कंटीले झाड़ भी थे जिनको पार करना थोड़ी मशक्कत का काम था लेकिन, फिर भी एक बच्ची और  सारे बड़े सब बिना किसी मुश्किल के चढ़ गए| इस पहाड़ी पर पूरा चढ़ना हो सकता था लेकिन समय की कमी की वजह से हम आधा ही चढ़े, उसके आगे रास्ता इतना आसान भी नहीं था और सब लोग चढ़ भी नहीं पाते| इसलिए हम वहीं रुके और वहां से पुष्कर का नजार काफी खूबसूरत था| कुछ तस्वीरें खींची गयीं और फिर नीचे उतरने का का कार्यक्रम शुरू क्यों कि फिर हमको पुष्कर का तालाब देख कर बीकानेर की तरफ जाना था|

Photobucketएक छोटा मंदिर, पहाड़ी के नीचे

Photobucketमंदिर का एक हिस्सा

Photobucketलंगूर

Photobucketपहाड़ी से पुष्कर का नज़ारा

Photobucketपहाड़ी झाडियाँ और हमारे मित्र

Photobucketपुष्कर का एक और दृश्य

Photobucketपहाड़ी से दिखता पुष्कर का महल

उतरते उतरते लगभग नौ बज गया और फिर होटल वापस आकर बढ़िया आलू के पराठों के साथ नाश्ता किया गया और फिर फटाफट तैयार होकर निकल पड़े झील  की तरफ| झील का रास्ता तंग गलियों से होकर था जिसमें गाड़ी चलाने में काफी मुश्किल थी लेकिन बचते बचाते तालाब तक पहुँच ही गए| झील का रास्ता एक गली से जिसमें कि कई सारे खाने पीने के ठिकाने हैं और सबमें ताजा खाना बन रहा होता है| झील का खुद का नज़ारा काफी ख़ूबसूरत है| एक तरफ इसके महल है जो कि काफी सुन्दर है|  हम यहाँ कुछ घंटे रुके और बाहर निकलकर बढ़िया बाजरे की रोटी, चूरमा, उडद की डाल और मिर्च से भरपूर कोई सब्जी खाई जिसको खाकर नाजा गया लेकिन कान भी गरम हो गए| पुष्कर के बाज़ार भी काफी रंगबिरंगे हैं, जिसमें गहरे लाल की बहुतायत है, गलियों में तरह के कपड़े और आभूषण मिल रहे थे जिनमें कि स्थानीय कला का काफी प्रभाव दिखाई दे रहा था|

Photobucketपुष्कर की गलियाँ

Photobucketएक दुकान

Photobucketखाने की दुकान

हालांकि दिसंबर का महीना था लेकिन दिन फिर भी ठीक ठाक गर्म था| फिर करीब १-२ बजे के करीब हम बीकानेर की तरफ रवाना हुए|

पुष्कर-बीकानेर

बीकानेर का रास्ता नागौर होकर है जो कि अजमेर के उत्तर-पश्चिम में है| रास्ते में गाड़ी चलाने में भी मस्त मज़ा आ रहा था, ट्रैफिक कुछ खास नहीं था और मौसम लाजबाब, और क्या चाहिए ऐसे में|  रास्ते में जमीन बदल रही थी, हम रेगिस्तानी इलाके में घुसते जा रहे थे क्योंकि बालू बढती जा रही थी, और बीकानेर के कुछ पचास एक किमी पहले तो रेगिस्तान सा शुरू हो ही जाता है|

Photobucketरास्ते में एक सजा हुआ ऑटो रिक्शा

Photobucketरास्ते में मिले कुछ अजीबोगरीब पेड़

Photobucketएक और पेड़

Photobucketबीकानेर के थोड़ा पहले रेगिस्तान की शुरुआत और सूरज के डूबने का समय

आगे की यात्रा दूसरे भाग में जो कि बीकानेर और उसके आस पास की जगहों की है और उसके बाद जयपुर और वहाँ से लौटते हुए हम कैसे फंसे गुर्जर आन्दोलन के बीच में और हमको कौन सा रास्ता अख्तियार करना पड़ा|

तस्वीरें देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

आगे का वृत्तांत दूसरे भाग में

4 Comments

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  • Mahesh Semwal says:

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  • AUROJIT says:

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    Auro.

  • Ashish says:

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