गंगटोक सिक्किम Part-2

अब दुसरे दिन का प्रोग्राम बनाना था। सभी को बोल दिया की सुबह 5 बजे उठ जाना तभी कंचनजंगा का खुबसूरत नजारा देख पाओगे। परन्तु यह क्या, रात भर हल्की – हल्की बारिश होती रही। सुबह उठे तो दूर – दूर तक बादलो के सिवा कुछ भी नहीं दिख रहा था।

सुवह के समय होटल से बाहर गंगटोक शहर का दृश्य

सुवह के समय होटल से बाहर गंगटोक शहर का दृश्य

अब सभी सुबह आठ बजे तैयार होकर गंगटोक के अन्य दर्शनीय स्थलों के लिए निकले। नाश्ता वगैरह करते हुए टैक्सी तय करने में 9 बज गए। टैक्सी वाले मनमाने रेट मांग रहे थे। हमने 8 घंटे के 1000/- रूपये के हिसाब से 4 टैक्सी तय की। उसमे यह था कि रूमटेक मानेस्टी जो कि 23 किलोमीटर है उसे छोड़ कर बाकि सभी जगह ले जायेगे। जैसा की मै पहले लिख चूका हूँ कि शहर के अन्दर छोटी कार ही टैक्सी के रूप में चलती हैं और इसमें 4 से ज्यादा सवारी वह लोग नहीं बैठाते हैं। एक सिस्टम बना हुआ है और उसे वह लोग नहीं तोड़ते हैं। हम 14 लोग थे पर हमें 4 टैक्सी ही करनी पड़ी।
सबसे पहले हम लोगो को फ्लावर शो ले गए। यहाँ पर कई तरह के फ्लावर थे वैसे यहाँ दिल्ली में नहीं दिखाई पड़ते।

फ्लावर शो

फ्लावर शो

फ्लावर शो में फव्वारा

फ्लावर शो में फव्वारा

वहां पर 10 – 15 मिनट के बाद ही हम नए व्यू पॉइंट के लिए चल दिए। अब हम Enchey Monestory के लिए चल दिए। जैसा कि मैंने पढ़ा था यह 200 वर्ष पुरानी मोनेस्टी है . यह गंगटोक T V स्टेशन के पास है। यहाँ पर आकर हमें पता लगा कि गंगटोक का सही उच्चारण गंगतोक है जबकि हम लोग गंगटोक बोलते हैं, इस समय यहाँ लामा लोग पाठ कर रहे थे।

Enchey Monestory

Enchey Monestory

Enchey Monestory

Enchey Monestory

थोड़ी देर यहाँ रुकने के बाद अब हम लोगो को ड्राइवर हनुमान टोक ले गए।

हनुमान टोक

हनुमान टोक

बादलो से ढका हनुमान टोक  मंदिर

बादलो से ढका हनुमान टोक मंदिर

बादलो से ढका हनुमान टोक  मंदिर

बादलो से ढका हनुमान टोक मंदिर

हनुमान टोक गंगटोक से लगभग 9 किलोमीटर दूर 7200 फिट की ऊंचाई पर है। इस समय यहाँ पर धुंध और बादलो का कोहरा छाया हुआ था। दूर का कुछ भी स्पष्ट नहीं दिख रहा था। यहाँ पर मंदिर में प्रवेश करने से पहले एक छोटा सा चारो तरफ से खुला हुआ बहुत ही सुन्दर कमरा बना था जहाँ पर बैठ कर आप अपने जूते – चप्पल उतार कर रैक में रख सकते है और बाद में बैठ कर पहन सकते हैं। इतनी सुन्दर व्यवस्था मैंने अभी तक कहीं नहीं देखी। मंदिर में पुजारी मूर्ति से दूर बैठे पाठ कर रहे थे, आप की श्रधा है तो दान पात्र में कुछ डाले अन्यथा प्रसाद ग्रहण करके चले आये। यहाँ पर हनुमान जी का मंदिर तो है ही साथ में राम , लछमण , जानकी जी का भी मंदिर है।

बादलो से ढका राम-जानकी मंदिर ,हनुमान टोक

बादलो से ढका राम-जानकी मंदिर ,हनुमान टोक

यहाँ से वापस लौटते हुए Bakthang Waterfalls पर रुके। यहाँ पर हमारी टीम ने खूब एन्जॉय किया। यहाँ पर रोप स्लाइडिंग की जा रही थी। जिसके चार्जेज 100 /- थे और मुश्किल से 100 फिट की दुरी वह लोग तय करवाते थे। कुछ लोगो ने इसका लुत्फ़ लिया। करीब एक घंटे से ज्यादा हम लोग रुके रहे क्योकि एक – एक कर यह लोग रोप स्लाइडिंग कर रहे थे।

Flowers near Bakthang Waterfalls

Flowers near Bakthang Waterfalls

Bakthang Waterfalls

Bakthang Waterfalls

near Bakthang Waterfalls

near Bakthang Waterfalls

Bakthang Waterfalls

Bakthang Waterfalls

Enjoying rope slider at Bakthang Waterfalls

Enjoying rope slider at Bakthang Waterfalls

यहाँ से आगे बढ़ने पर एक छोटा सा वाटरफाल और मिला। यह वाटर फाल अभी व्यू पॉइंट में नहीं आता है। फिर भी थोड़ी देर के लिए रुके , फिर आगे बढे।

वाटरफाल

वाटरफाल

अब हम लोग गणेश टोक के लिए चल दिए। यह भी एक हिल पर गंगटोक से 7 किलोमीटर पर है। यहाँ से गंगटोक शहर का व्यू काफी ऊंचाई से दिखता है। अगर साफ़ मौसम हो तो यहाँ से कंचनजंघा एवं अन्य पर्वत श्रंखलाये बहुत सुन्दर दिखती हैं। लेकिन कल रात बारिश होने के कारण अभी तक बादल छाये हुए थे। गणेश टोक के बाहर कुछ स्थानीय निवासी वहां की ड्रेस किराये पर दे कर फोटो खिचवाने के लिए कह रहे थे।

गणेश टोक व्यू पॉइंट

गणेश टोक व्यू पॉइंट

यहाँ से आगे चले तो हमें ड्राइवर ताशी व्यू पॉइंट पर ले गये। यह भी बहुत खूब सूरत जगह है। यहाँ पर चारो तरफ की हिल्स , कंचनजंगा स्पष्ट दिखता है अगर मौसम साफ़ हो। यहाँ पर जापानी ड्रेस पहन कर कई लोग फोटो खिंचवा रहे थे। यादे संजो कर अपने साथ ले जाने के लिए।

ताशी  व्यू पॉइंट

ताशी व्यू पॉइंट

मुझे मालूम था की हमें निराशा ही हाथ लगेगी, क्योकि जाने से पहले ही हमने जब गूगल पर गंगटोक के मौसम के बारे में जानना चाहा तो गंगटोक में बादल और बारिश ही बता रहा था और यहाँ पर आकर लगा कि ज्यादातर इस तरह की भविष्यवाणी सही ही होती है।
ताशी व्यू पॉइंट से ड्राइवर हमें क्राफ्ट मेले में ले जाना चाहता था पर जब हम लोगो ने देखा दोपहर के ढाई बज रहे हैं तो मैंने कहा, क्राफ्ट मेले में जाने से और समय ख़राब होगा बेहतर है रोप वे चलते हैं। अभी कई पॉइंट जाना था पर समय कम बचा था। सभी को ज्यादा से ज्यादा घुमने का विचार था। यहाँ पर ड्राइवर ने बताया, 4 बजे के बाद सब कुछ बंद हो जाता है या तो आप लोग रोपवे से घूम लो वहां पर दो पॉइंट और हैं वह भी घूम लेना अन्यथा Bonjhakari Water Falls घूम सकते हैं। वाटर फाल रास्ते में दो – तीन देख चुके थे इसलिए रोपवे के लिए चल दिए।

Beautiful sub-way near rope way

Beautiful sub-way near rope way

रोप वे से गंगटोक शहर का विहंगम दृश्य

रोप वे से गंगटोक शहर का विहंगम दृश्य

रोप वे से गंगटोक शहर का विहंगम दृश्य

रोप वे से गंगटोक शहर का विहंगम दृश्य

रोपवे 70 /- रूपये किराया था एक बार में करीब 20 से 25 लोग इसमें सफ़र कर सकते थे। इसमें बैठने की व्यवस्था नहीं है इसमें खड़े होकर आस-पास और नीचे का व्यू देखते हैं। एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा था साथ ही साथ जब बस नीचे को तेजी से उतर रही होती है तब हल्का सा डर भी लगता है।

रोपवे की यात्रा के बाद सीढियों से नीचे उतरते हुए एक रेस्टोरेंट है। इस समय तक भूख जोरो की लग रही थी सभी यहाँ पर खाना खाने के लिए रुक गए। यहाँ पर हम लोगो को आधे घंटे से ज्यादा समय लग गया और अब 4 बजने वाले थे। ड्राइवर जल्दी से पास में ही Namgyal Institute of Tibetiology ले गया। जो 4 बजे बंद हो जाती है अभी हम अन्दर घुसे मुश्किल से एक मिनट ही हुआ था कि केयर टेकर ने लाइट बंद कर दी बोला टाइम ओवर।

Namgyal Institute  of Tibetiology

Namgyal Institute of Tibetiology

वहां से बाहर आये सामने ही चढ़ाई पर Do Drul Chorten स्तूप है। यहाँ से वापस होटल के लिए चल दिए।

Do Drul Chorten स्तूप

Do Drul Chorten स्तूप

अब तक शाम ढल चुकी थी सडको पर और मार्किट में लाइटे जगमगा रही थीं। परन्तु सारे दिन की भाग दौड़ के बाद शारीर इतना थक चूका था कि लग रहा था कि अब कुछ देर आराम किया जाय। आठ घंटे से ज्यादा समय घूमते हुए हो गया था।
एक बात और हम लोग इतने सारे व्यू पॉइंट पर गए पर कहीं भी कोई टिकेट वगैरह नहीं चार्ज किया जा रहा था। हाँ कुछ एक जगह टैक्सी स्टैंड वाले जरुर 10 /- रूपये प्रति कार चार्ज कर रहे थे।

M .G Road

M .G Road

रात में बारिश में भीगी M .G .Road  का नजारा

रात में बारिश में भीगी M .G .Road का नजारा

सभी लोग अपने – अपने कमरों में आराम करने पहुँच गए। तय हुआ एक घंटे के रेस्ट के बाद लालबाजार , M .G Road घुमने चलेंगे। आखिर आज की शाम ही बची थी कल हमें वापस लौटना था।

आज बारिश नहीं हुई पर शाम के समय मौसम में काफी ठंडक थी सभी लोग स्वेटर या जैकट पहने हुए थे। आज मार्किट में काफी गहमागहमी थी। दो – तीन घंटे घूमने और छोटी – मोटी खरीदारी के बाद वहीँ खाना खाकर 9 बजे तक सभी वापस होटल पहुँच गए।
इस बीच में मैंने वापस जाने के बारे में जानकारी प्राप्त कर ली। पता लगा अगर सुबह 7 बजे हम लोग नई जलपाई गुडी के लिए निकलते हैं तब बड़ी गाडी या बस हमें होटल के पास ही मिल जाएगी। लेकिन साढ़े सात के बाद हमें यहाँ से वापस उसी जगह जाना होगा जहाँ से बड़ी टैक्सी कार बन कर चलती हैं। मै सुबह सात बजे से पहले ही पास के टैक्सी स्टैंड पर पहुँच गया।
काफी मोल भाव के बाद टैक्सी स्टैंड पर इन टैक्सी वालो के लीडर ने 4000 /- में दो बड़ी टैक्सी कार के लिए हाँ की। शायद इन लोगो की अपनी टैक्सी चलती हैं इसलिए इनमे से कोई एक ही तय करता है। काफी शिष्ट और अच्छे ढंग से यह लोग बात करते हैं। उसने तुरंत ही टैक्सी स्टैंड अपने मोबाइल से फोन करके दो गाड़ी भेजने के लिए बोला और मेरे से कहा आप लोग अपना सामान होटल से नीचे ले आये। क्योकि बड़ी टैक्सी वहां पर ज्यादा समय रुक नहीं रह सकती।
अब तक 7.30 हो गए थे हमारे साथी लोग अपना सामान तो नीचे ले आये पर कुछ लोगो को सुबह – सुबह ही भूख लग आती है इसलिए नाश्ता करने एक दूकान में घुस गए।
अब तक टैक्सी आ चुकी थी सबने अपना – अपना सामान रखवाया तभी वही लीडर आकर मुझसे टैक्सी का भाडा मांगने लगा। मैंने उसे 2000 /- रूपये दिए और कहा बाकी नई जलपाई गुडी पहुँच कर दूंगा। वह मुझसे पुरे 4000 /- रूपये मांग रहा था। मैंने कहा कि अभी तो हम गंगटोक में ही है और तुम पूरे पैसे मांग रहे हो यह तो गलत बात है।
तब वह बड़े गर्व से बोला, साहब यहाँ गंगटोक में आपको कोई भिखारी नहीं मिलेगा और कभी कोई चीट नहीं करेगा। चीट करने वाली बात तो मै नहीं जानता कि कितनी सच थी पर यह बात उसकी सच मिली कि यहाँ पर इतने मंदिर हो आये कई व्यू पॉइंट घूम लिए , मार्किट घूम लिए पर कहीं भी कोई भिखारी नहीं दिखा। मैंने सलाम किया उसकी इस बात को और 2000 /- रूपये देने लगा पर उसने 1000 /- रूपये लेकर बोला 1000/- रूपये आप वहां पहुँच कर दे देना।
उसकी गर्व से कही यह बात रास्ते भर कानो में गूंजती रही। रास्ते में मैंने टैक्सी ड्राइवर से पूछा यह तुम्हारे लीडर का इसमें कितना कमीशन है। ड्राइवर बोला नहीं साहब यहाँ पर कमीशन नहीं चलता। हम लोग आपस में एक दूसरे की मदद कर देते हैं। ताज्जुब हुआ कि एक आदमी मुझसे इतना मोल-भाव कर रहा है अपने मोबाईल से फोन करके टैक्सी बुलवा रहा है , वहां खड़े पुलिस वाले को समझा रहा है और उसका कोई कमीशन नहीं ? मैंने फिर पूछा तो कुछ एन्ट्री फ़ीस वगैरह देते होगे लेकिन उसका उत्तर फिर वही , नहीं यहाँ पर कोई एन्ट्री नहीं देनी पड़ती। मेरा मन नहीं माना , मैंने फिर पूछा कि कुछ दादा टाइप के या पुलिस के चमचे तो वसूलते होंगे , वह बोला नहीं यहाँ पर ऐसा कुछ नहीं है।

सुनकर ताज्जुब हुआ यहाँ दिल्ली, NCR में वैगैर एंट्री दिए मजाल है कोई ऑटो रिक्शा, टैक्सी, टेम्पो चला कर दिखाए। लोग गीत गाते हैं दिल्ली है शान भारत की
वापस लोटते समय विचार आ रहा था कि अब अगर आना हुआ तो कम से कम तीन- चार दिन के लिए आयेंगे। एक तरह से हम अधूरी यात्रा से वापस लौट रहे थे।
रास्ते में एक जगह चाय – पानी के लिए रुके और हम लोग लगभग 1 बजे नई जलपाई गुडी रेलवे स्टेशन पहुँच गये। प्लेटफार्म पर जाने पर पता लगा ट्रेन आधे घंटे लेट है। दिल्ली पहुँचते – पहुँचते हमारी ट्रेन करीब 4 .30 घंटे लेट हो गई थी। जबकि इस ट्रेन के रास्ते में केवल तीन स्टापेज कटिहार , इलाहाबाद और कानपूर हैं। जब हम लोग दिल्ली के लिए नई जलपाई गुडी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर थे तभी पता लगा दिल्ली से आने वाली नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस 6 घंटे लेट है। सोंचने लगा आजकल सर्दी का मौसम नहीं है , कोहरा नहीं पड़ रहा है तब तो ट्रेनों का यह हाल है जब कोहरा पड़ने लगेगा तब क्या होगा। सरकार अच्छी ट्रेन सुविधाओ को देने के नाम पर रेल किराया तो बढा देती है पर एक बार किराया बढाया फिर भूल जाती है कि उसकी कोई जिम्मेदारी या जबाबदेही है।
गंगटोक जाने के लिए कुछ जानकारियां

रेल से गंगटोक जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन नई जलपाई गुडी है कुछ ट्रेन सिलीगुड़ी रेलवे स्टेशन भी रूकती हैं। स्टेशन के बाहर से ही टैक्सी मिल जाती जोकि इस समय रूपये 250/- प्रति व्यक्ति चार्ज करते हैं। बड़ी टैक्सी जिसमे 8 से 10 लोग बैठते हैं का किराया 2100 /- से 2200 /- रूपये लगभग है। सिलीगुड़ी से बस भी गंगटोक जाने के लिए मिलती हैं पर उसके लिए पहले नई जलपाई गुडी से सिलीगुड़ी जाना होगा। वहां जाने के लिए थ्री व्हीलर मिलते हैं। बसे सुबह 11 बजे तक ही सिलीगुड़ी से गंगटोक के लिए चलती हैं। हवाई जहाज से जाने के लिए बागडोगरा निकटतम हवाई अड्डा है। वहां से भी गंगटोक लगभग 125 किलोमीटर है।
नई जलपाई गुडी से गंगटोक तक की दुरी लगभग 125 किलोमीटर है। टैक्सी से 4 से 5 घंटे लगते हैं।
एक विशेष बात यह कि यहाँ पर आप मार्किट में या सड़क पर सिगरेट नहीं पी सकते। जगह – जगह पर वार्निंग के साइन बोर्ड लगे हुए हैं।

22 Comments

  • bhupendra singh raghuwanshi says:

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    • Dear Bhupendra Singh
      thanks a lot for sharing your view however
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  • Dear Nandan
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    http://rastogi-yatra.blogspot.in/

  • SilentSoul says:

    Rastogi ji this is a beautiful and interesting travelogue about a lesser known place. You have added some places which were missed by many travelers.

  • o. p. laddha says:

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      • rajesh priya says:

        bilkkul sahi,jab bhi aap nikle to hotel rent wahan ke resturent aadi ka kharch jarur bataye taaki hum jaise sadharan ghumakkar ko wahan aasani ho,ye jaruri nahi ki dilliwale hee hotel ke peechhe pare sabko jankaari honi chahiye.

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  • Ashok Sharma says:

    nice and interesting post.the photo of that waterfall is beautiful.

  • Rastogi Ji,
    Very nice post with beautiful photographs. Specially the photographs which are taken from height are looking awesome. You have explored a different location (Eastern India). I have never got a chance to visit this part of India, but through your post it is looking awesome and pushing me to visit this part of india as well. Thanks a lot for sharing your travel experience.

  • dear pradeep
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  • Once again nice Post with good detailed description. Thanks for sharing..

  • rajesh priya says:

    kafi achchha laga aapka gangtok ka ye 2nd part,ek baat main batana chahunga halanki aapko bhi ye malum hoga par shayad aap mention karna bhul gaye,,hanuman tonk kafi achchha laga aapko kyunki is mandir ka managment militry walo ka hai. saath hee yahan sai baba ka bhi ek taraf photo laga hai. tashi view point par shayad ticket lagta hai.gangtok sabse sundar november mahine me dikhta hai,kanchanjaga ek dum paas me dikhega.

    • Dear Rajesh

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  • Nandan Jha says:

    Thank you Rastogi jee for a whirl-wind tour of Gangtok. It seems that there are some new attraction in the city like Ropeway, Flower show etc. When I visited Gangtok (in 2004) I do not remember these places. I understand that you had less time else one should try to visit Rumtek.

    Some new edits have been done. I have also emailed with your more details.

    • Dear Nandan
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  • Nirdesh Singh says:

    Hi Kamlanshji,

    Sikkim is indeed beautiful. Now I remember, Lonely Planet has declared Sikkim as the top destination in India. Getting the top spot before Kerala is commendable and probably the reason things are organised for tourists.

    Thanks for sharing!

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