सुहाना सफ़र और आप

घुमक्कड़ डोट कॉम के सभी पाठकों को मेरी और से सादर नमस्कार. मैंने घुमक्कड़ पर रूचि लेना अभी कुछ समय पहले ही शुरू किया है अतः आप लोग मुझे घुमक्कड़ परिवार की नयी सदस्य कह सकते हैं. मेरे हसबेंड श्री मुकेश भालसे इस अंतरजाल (वेबसाइट ) से पहले से ही यात्रा वृत्तान्त लेखक के रूप में जुड़े हैं एवं उनकी घुमक्कड़ डोट कॉम के प्रति प्रेम तथा निष्ठा देखकर मैं भी धीरे धीरे इस सम्मानजनक मंच से जुड़ गई तथा अब तो यह स्थिति है की पूजा पाठ के बाद दैनिक कार्यों की शुरुआत घुमक्कड़ के साथ ही होती है. अगर मैं यह कहूँ की घुमक्कड़ हमारे परिवार का एक चहेता सदस्य है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.
मैं आज अपनी इस पहली पोस्ट के साथ घुमक्कड़ पर लिखना शुरू कर रही हूँ तथा मुझे पूरा विश्वास है की मुझे अपने सभी घुमक्कड़ साथियों का आशीर्वाद तथा मार्गदर्शन अनवरत मिलता रहेगा.

मैं अपने परिवार के साथ वर्ष में एक या एक से अधिक बार (मुख्यतः धार्मिक स्थान पर) घुमक्कड़ी कर ही लेती हूँ, इन यात्राओं में हमें बहुत से खट्टे मीठे अनुभव होते हैं तथा हर यात्रा हमें कुछ नया सिखा जाती है, अपनी यात्राओं के इन्ही खट्टे मीठे अनुभवों से प्राप्त कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं को कलमबद्ध करके आज में आपलोगों को प्रस्तुत कर रही हूँ, आशा है की यह जानकारी साथी घुमक्कड़ों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी, अगर ऐसा होता है तो मैं समझूंगी की मेरा प्रयास अर्थपूर्ण रहा.
यात्रा शुरू करने से पहले यात्रा सम्बंधित निम्नलिखित सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर गौर कर लें ताकि आपका सफ़र उर्दू वाला सफ़र ही रहे, अंग्रेजी वाला सफ़र (suffer) न बन जाए.

1. सफ़र की योजना:
सफ़र (यात्रा) पर जाने से पहले हर पहलु को ध्यान में रखकर एक अच्छी योजना पर अवश्य कार्य कर लें जैसे:
सबसे पहले हमारे पास उपलब्ध दिनों की संख्या, यात्रा के साधनों की सुलभता आदि को ध्यान में रखकर एक यात्रा क्रम (Itinerary) बना लें, इस यात्रा क्रम को तैयार करने में अंतरजाल (Internet) बहुत सहायक होता है.

जहाँ तक संभव हो सके हमारे गंतव्य स्थान पर रात्रि विश्राम (Stay) के लिए उपयुक्त होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस आदि यात्रा से पहले ही (टेलीफोन/इन्टरनेट की मदद से) आरक्षित करवा लें ताकी आप नई जगह पर परेशान होने से बच सकें.

सही समय पर रेल/ हवाई जहाज/ बस आदि में अपनी सीट आरक्षित करवा लें ताकि आपको अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े.
गंतव्य स्थान (Destination) के मौसम की पूर्व जानकारी अवश्य ले लें तथा उसके अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनायें, यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब आपके साथ बच्चे या बुजुर्ग भी यात्रा में शामिल हैं.

यात्रा विवरण

2. सफ़र में आवश्यक सामान:
सफ़र पर निकलने से पहले अपनी तैयारी बहुत सोच समझकर तथा शान्ति से करें और सुनिश्चित करें की आप कुछ महत्वपूर्ण सामान रखना तो नहीं भूल रहे हैं जैसे – आपका केमेरा, केमेरा का चार्जर, केमरे के लिए अतिरिक्त मेमोरी कार्ड मोबाइल का चार्जर, आपके आरक्षण टिकटों की प्रतियाँ, फोटो आईडी, शेविंग किट, गंतव्य स्थान (Destination) से सम्बंधित मार्गदर्शिका (Guide), आवश्यक नक़्शे, अन्य रोजमर्रा की आवश्यकता के सामान जैसे तेल, साबुन, कंघा, क्रीम, टॉवेल आदि, मौसम के अनुरूप तथा कम से कम मात्रा में कपड़े, ATM कार्ड, क्रेडिट कार्ड, आपके बिजनेस कार्ड आदि.

यात्रा की तैयारी

3. सफ़र के साथी:
यात्रा में आपके साथ जाने वाले सदस्यों की उम्र एक अति महत्वपूर्ण तथा विचारणीय पहलु है, अतः उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर ही यात्रा नियोजित करनी चाहिए.

यदि आपके साथ यात्रा में बुजुर्ग भी हैं और आपको रेल यात्रा करनी है तो आप उचित समय पर अपना रेल आरक्षण करवा लें ताकि आपको बुजुर्गों के लिए लोअर बर्थ मिल सके.

यात्रा के दौरान बुजुर्गों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी अति आवश्यक है, अतः अपनी यात्रा की योजना ऐसी बनायें की बुजुर्गों को पर्याप्त आराम मिल सके.
यात्रा से पहले बुजुर्गों का स्वास्थ्य परिक्षण अवश्य करवा लें तथा आवश्यक दवाई गोलियां साथ में लेकर जाएँ, उनके लिए यात्रा के दौरान भोजन स्वास्थ्यवर्धक हो यह भी सुनिश्चित कर लें.

कुछ बच्चे बहुत शरारती एवं चंचल होते हैं, अतः रेल यात्रा के दौरान उन्हें कोच के दरवाज़े के पास न जाने दें तथा अकेले न छोड़ें, बीच के स्टेशनों पर भी उन्हें निचे न उतरने दें. दर्शनों के दौरान भी बच्चों का पूरा ध्यान रखें तथा उन्हें अपने से दूर न जाने दें, बच्चों के भीड़ में खो जाने का डर होता है. बच्चों को अपने अभिभावक का मोबाइल नंबर अवश्य याद करवा दें. यदि बहुत ज्यादा भीड़ वाले धार्मिक स्थान पर जा रहे हों तो बच्चों के गले में आई डी कार्ड लटका दें.

सफ़र के साथी

4. सफ़र में खानपान:
सफ़र के दौरान खानपान का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है, क्योंकी बाहरी परिवेश में अस्वास्थ्यकर खाना आपको अस्वस्थ कर सकता है अतः आप यात्रा के दौरान अपने खानपान के रूटीन में ज्यादा बदलाव न लायें तथा बाहर का खाना एक सीमा में रहकर ही खाएं .

हम जिस जगह पर घुमने जा रहे हैं वहां अगर हमारी पसंद का भोजन मिलने की सम्भावना कम हो तो घर से ही खाने पीने का कुछ ऐसा सामान जो कई दिनों तक सुरक्षित रहता हो तथा जल्द ख़राब न हो जैसे डिब्बाबंद स्नेक्स, अचार, नमकीन, मिठाइयाँ तथा अन्य परिरक्षित (Preserved) खाद्य सामग्री पैक कर के रख लें.
फल, मुंगफली, प्रोटीन शेक, पोपकोर्न, जैसी चीजों से आप अपने आप को हल्का फुल्का भी महसूस करेंगे तथा इन्हें थोड़ी थोड़ी देर में लेने से कोई नुकसान भी नहीं होगा.

आप जहाँ जा रहे हैं वहां जाने से पहले ही तय कर लें की आपको कहाँ ठहरना है तथा आसपास में कौन से अच्छे रेस्त्रां हैं. जहाँ तक संभव हो सके यात्रा के दौरान नॉन वेज न खाएं क्योंकि यह गरिष्ठ होता है तथा आपका पेट अपसेट हो सकता है.

सफ़र में खानपान

5. सफ़र और स्वास्थ्य:
पर्यटन के दौरान आपका स्वस्थ होना सबसे आवश्यक है, यदि आप स्वस्थ ही नहीं होंगे तो आप यात्रा का आनंद नहीं उठा पाएंगे तथा आपकी वजह से आपके सफ़र के अन्य साथी भी मज़ा नहीं ले पायेंगे. सफ़र में कुछ बिमारियों और परेशानियों से बचा जाए तो घुमने फिरने का मजा दुगुना हो जाता है.

सफ़र में बैठने के लिए स्वच्छ एवं हवादार स्थान का चयन करें. सफ़र में स्वच्छ, आरामदायक तथा ढीले ढाले परिधान (कपड़े) पहनें. सफ़र में टाइम पास करने के लिए अपनी पसंद की कुछ पत्रिकाएं तथा संगीत सुनाने के लिए ईअर पीस भी रखें.

सफ़र में गरिष्ठ भोजन न करें, बिलकुल भूखे रहकर सफ़र करना भी ठीक नहीं है. नाश्ता हल्का ही करें, साथ में निम्बू, इलायची, लौंग, पुदीना सत तथा ओरेंज टोफियाँ रखें. पिने के पानी में कम मात्र में ग्लूकोज, पिपरमेंट आदि मिलाएं.

कुछ लोगों को कार, हवाई जहाज, बस, झूले आदि में चक्कर आने तथा उल्टी होने की शिकायत रहती है, उन्हें चाहिए की वे पर्यटन पर निकलने से पहले अपने चिकित्सक के परामर्श से दवाईयाँ आदि साथ कलेकर ही सफ़र के लिए निकलें.

दवाईयाँ

6. सफ़र और आपका सौंदर्य (महिलाओं के लिए):
पर्यटन तथा सफ़र के दौरान हमारे सौंदर्य की देखभाल भी अति आवश्यक है. अतः निम्न बिन्दुओं पर विशेष रूप से गौर फरमाएं.

सफ़र के दौरान पसीना अधिक आता है, अतः ऐसा मेकअप करें जो पसीने से ख़राब न हो. सफ़र में हल्का मेकअप करें तथा वेलवेट की बिंदी इस्तेमाल करें.
सफ़र के दौरान ट्रेन, बस में हवा की वजह से बाल उड़ते हैं और बिखर जाते हैं इसलिए हेयर स्प्रे लगा लेना ठीक रहता है. मेकअप किट हमेशा साथ रखें जिसमें सौंदर्य का आवश्यक सामान हो जैसे लिपस्टिक, आइब्रो पेंसिल, टेलकम पावडर, हेयर पिन, स्किन टोनर, टिशु पेपर, बिंदी, कंघा, कंडिशनर, क्लींजिंग मिल्क, मोइस्चराइजर, आदि.

सफ़र में बालों को खुला रखने के बजाये जुड़ा बना लें या चोटी कर लें, यदि बाल छते हों तो पोनी टेल भी कर सकती हैं.
मौसम के अनुरूप त्वचा की रक्षा के लिए सनस्क्रीन, कोल्ड क्रीम, लोशन आदि का उपयोग करें.

सौंदर्य प्रसाधन

7. सफ़र और आस्था:
यदि आप धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं तो निम्न पहलुओं पर अवश्य विचार करें.

सबसे महत्वपूर्ण बात है की आप जिस धर्म स्थल पर दर्शन के लिए जा रहे हों वहां से आपका विश्राम स्थल (होटल/धर्मशाला/गेस्ट हाउस) जितना हो सके नजदीक होना चाहिए, यह बड़ा सुविधाजनक होता है तथा आप चलने की थकान व परेशानी से बच जाते हैं. करीब रहने से हमें भगवान के दर्शन एक से अधिक बार करने का सौभाग्य मिल जाता है तथा हमें यह भी एहसास होता है की हम किसी सिद्ध जगह के इतने करीब रह रहे हैं. रात की तथा सुबह की आरतियों तथा पूजन, अभिषेक में भी बिना परेशानी के शामिल हुआ जा सकता है.

पूजा अर्चना के लिए आवश्यक सामान जैसे जाप के लिए माला, पढने के लिए पोथी, जल चढाने के लिए छोटा कलश आदि साथ लेकर जाएँ.
जहाँ तक संभव हो धार्मिक यात्रा पर निकलने से पहले मंदिर (धर्मस्थल) के ट्रस्ट/संस्थान की वेबसाइट को अच्छे से पढ़कर तथा विश्लेषण करके जाएँ जिससे आपको वहां पर होने वाले वार्षिक/मासिक/दैनिक कार्यक्रमों, उत्सवों एवं आयोजनों की पूर्व जानकारी हो जाये तथा आप भीड़ तथा परेशानी से बचे रहें तथा आपको दर्शन सरलता तथा सुलभता से हो जाएँ (जो आपका मुख्य उद्देश्य होता है). यदि आप उत्सवों में शामिल होना चाहते हैं तो भी पूर्व जानकारी आपके लिए अति आवश्यक है.
यदि आपका ध्येय ईश्वर के दर्शन करना ही है तो अपनी यात्रा की योजना तीज, त्यौहारों, विशिष्ठ दिनों आदि को छोड़कर करें और भीड़ परेशानी से बचकर संतोषजनक दर्शनों का लाभ लें.

पूजन सामग्री

यदि इन छोटी छोटी बातों को आदत में शामिल कर लिया जाए तो आपका हर सफ़र सुहाना सफ़र होगा. आपके अगले सुहाने सफ़र के लिए मेरी और से ढेरों शुभकामनायें. बस अब मैं अपनी हिदायतों का सिलसिला अभी के लिए यहीं बंद करती हूँ तथा मिलती हूँ अगली बार मेरी अगली पोस्ट के साथ.

Parivar ka ek chayachitr

33 Comments

  • Silentsoul says:

    हमेशा की तरह सबसे पहले कमैंट मेरे :)

    धन्यवाद कविताजी… आशा है लोग आपका लेख पढ़ कर अपना सफर सुहाना कर लेंगे… हालांकि दोनो जाटों के लिये फिलहाल ये काम नहीं आयेगा… क्योंकि वो तो मस्त मलंग घुमक्कड़ हैं. .. व अकेले ही (बिना बच्चों व घराली के) सफर करते हैं… LOL

    और इस बार मात्रा की गलती देखने को नहीं मिली. मैं तो सीधा ही हिन्दी में मुद्रण कर लेता हूं क्योकि Windows में अगर हिन्दी Fonts activate कर लिये जायें तो सीधा बिना Transliteration के ही हिन्दी में टाइप किया जा सकता है, जिसमें शब्द बनाने आपके अपने हाथ में हो जाते हैं न कि गूगल के.

    मेरे पहले सफर में साथ थे (1977 में), होलडाल, बर्तन, स्टोव, दालें, चावल, कपड़े तथा ऐसे ही अन्य सामान….और मेरे 2010 के सफर में थे कार, टैन्ट, हाथ से चार्ज होने वाली टार्च, GPS वाला फोन, हाथ घड़ी जो तापमान, ऊंचाई, तथा वातावरणीय-दाब बताती है…बिजली से गरम होने वाला कंबल, तथा हवा भरने वाले बिस्तर व सिरहाने… वाकई जमाना बहुत बदल गया है.

    • Neeraj Jat says:

      सही कह रहे हो साइलेंट साहब। अपने तो इनमें से कुछ भी काम का नहीं है। लेकिन कविता जी, निराश मत होना कि आपने इतनी मेहनत से यह लेख लिखा है और इधर एक झटके में बेकाम का बता दिया। ऐसा नहीं है।
      असल में घुमक्कडी और पर्यटन दो अलग-अलग चीजें हैं। आपने जो बताया है, वो पर्यटकों के बेहद काम है। जाने से पहले तैयारी, सफर के मेम्बर, हर मेम्बर का उम्र के हिसाब से ख्याल, साथ ले जाने वाली चीजें सबकुछ पर्यटकों के काम की चीजें हैं। जबकि घुमक्कडों का स्वभाव थोडा अलग होता है। जब भी जिधर भी मुंह उठ जाये, वे निकल पडते हैं। वे नहीं देखते कि कहां जाना है, कैसे जाना है, कहां रुकना है, क्या खाना है।
      बेहतरीन प्रयास।

      • kavita Bhalse says:

        नीरज जी,
        सुबह से आपकी कमेन्ट का इंतज़ार हो रहा था. सुन्दर शब्दों में कमेन्ट तथा उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद. आपने बिलकुल सही फ़रमाया की ये सारे सुझाव हम जैसे पर्यटकों के लिए हैं, और आप ठहरे ठेठ घुमक्कड़, अलग अलग तरह की यात्राओं के लिए तैयारी भी अलग अलग तरह से करनी होती है. मेरी पिछली पोस्ट (यात्रा: कभी ख़ुशी कभी गम) को आपकी ओर से समीक्षा का इंतज़ार है.

        धन्यवाद.

    • kavita Bhalse says:

      साइलेंट सोल जी,
      हमें भी सबसे पहले आपकी ही कमेन्ट की उम्मीद रहती है. पोस्ट को पढने तथा पसंद करने के लिए धन्यवाद.

  • Mukesh Bhalse says:

    कविता,
    आपका यह प्रयास भी सराहनीय रहा. अपने सफ़र को सुहाना बनाने के लिए आपके सुझाव (टिप्स) साथी घुमक्कड़ों के लिए बड़े लाभकारी सिद्ध होंगे.
    धन्यवाद.

    • kavita Bhalse says:

      प्रिय मुकेश जी ,
      मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद .

  • Good one Kavita jee…………..

    These are necessary things we need to remember while travelling …………….

    But still after so much planning also when the trip actually takes places,
    its actually totally different ……………………………

    • kavita Bhalse says:

      विशाल जी,
      लेख को पढने तथा पसंद करने के लिए आभार. मैं भी आपसे सहमत हूँ की योजना और क्रियान्वयन में बहुत फर्क होता है. एक अच्छी योजना के बावजूद भी कई बार हम कुछ अति महत्वपूर्ण चीजें भूल जाते हैं.
      धन्यवाद.

  • Ritesh Gupta says:

    कविता जी ,
    मैंने अक्सर देखा की सफर में जाने पहले कितनी भी तैयारी कर लो फिर भी कुछ न कुछ रह ही जाता हैं, और फिर बाद में परेशानी भी उठानी पढ़ती हैं …लेख के माध्यम से जरुरी और महत्तवपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के अच्छी कोशिश रही आपकी
    धन्यवाद….

  • उपयोगी लेख है कविता जी । जैसा कि नीरज जी ने कहा कि पर्यटको के लिये ज्यादा उपयोगी है हमें तो अगर कोई कहे कि अभी इसी वक्त चलना है तो चल देंगे । पर हां दवाईयां मै नही भूलता और दवाईयो में विशेषकर बीटाडीन की टयूब और पटटी । छोटा सा सामान है पर जरूरत पडने पर अनमोल

    • kavita Bhalse says:

      Manu ji,
      Thanks for liking the write up, and yes I admit that my write up does not suits to the great ghumakkars like Neeraj ji, Sandeep ji and yourself.

      Thanks.

  • D.L.Narayan says:

    कविता जी

    आप का लेख बहुत पसंद आया l As an efficient homemaker, you put in a lot of effort to ensure that your family is not inconvenienced during your travels. Not surprising that Mukeshji does not like to travel alone :-)

    I would like to add two things:

    1. A good hand sanitiser / pack of wet wipes is a must because it is easy to pick up an infections while travelling.

    2. A few empty plastic bags for storing wastes like food wrappers, disposable cups and empty mineral water bottles. Most of the tourists spots in India lack dust bins and it is important to avoid littering such places. We must retain litter in plastic bags till we find a suitable place to dispose it.

    • kavita Bhalse says:

      Narayan ji,

      Thank you very much for such detailed comment, and we all at ghumakkar like your style of commenting in details. Your suggestion of keeping empty poly bags is really worthwhile.

      Thanks.

    • SilentSoul says:

      narayanji, I really liked yr suggestion of keeping empty bags for collecting trash. This is a very small … but very important thing… to keep the places clean.

      This is in line with my request to all Ghumakkars to take a vow to keep the tourist places clean.

  • ashok sharma says:

    Quite useful things for a tour.

  • Nandan says:

    कविता जी की ये दूसरी पोस्ट है जो प्रकाशित हुई है , हालांकि ये लिखी पहले गए थी, उसी प्रकार से जैसे आपकी पहली फिलिम कोई और होती है और रिलीज़ कोई और होती है पहले :-)
    मुझे दो बातें बहुत अच्छी लगें, पहली रेल आरक्षण और लोअर बर्थ वाली और दूसरी सौंदर्य वाली :-), अभी तक महिला ब्रिगेड में किसी का कमेन्ट नहीं आया , आशा करता हूँ की सौन्दर्य सेक्शन में कुछ और बढ़ोतरी होगी. :-)

    अब थोडा प्रचार हो जाए, यानी के एक ad -break

    घुमाक्कर पर हर २२ तारीख को हम एक अंतर्दृष्टि , “Insights” , पोस्ट प्रकाशित होती है. पिछली पोस्ट्स के लिंक डाल रहा हूँ यहाँ |
    https://www.ghumakkar.com/2011/12/22/what-is-on-your-mind-and-what-goes-into-your-bag/
    https://www.ghumakkar.com/2012/01/22/camera-derie/

    अगर आप कोई ऐसा लेख लिखना चाहते हैं तो मुझसे या संपादिका जी से संपर्क करें |

    • SilentSoul says:

      “अगर आप कोई ऐसा लेख लिखना चाहते हैं तो मुझसे या संपादिका जी से संपर्क करें |”

      Tks Nandan, but how to contact ? through telepathy ?

      You should have given the contact mail or phone number…. not everybody knows it.

      • Nandan says:

        Please mail at info AT Ghumakkar.com for this. We have been re-iterating it in our monthly newsletters. This has started from November only in a ‘formalized form’ and as of now, we are limiting this to ‘one per month’ but as it generated more traction, we would review our plans.

  • Kavita Bhalse says:

    नंदन जी,
    आपने बिलकुल सही कहा, फिल्म बनी पहले कोई और थी और रिलीज़ कोई और हो गई. हमारा घुमक्कड़ का संसार भी कुछ कुछ बौलीवूड की तरह ही है, पोस्ट को साथी घुमक्कड़ों की ओर से खूब प्रशंसा मिली तो हम कहते हैं की पोस्ट हिट हो गई, और कम रिस्पोंस मिला तो कहते हैं की ये पोस्ट तो फ्लॉप हो गई.
    घुमक्कड़ की महिला ब्रिगेड पिछले कई दिनों से निष्क्रिय दिखाई दे रही है. देवस्मिता, विभा, जयश्री, नवीना, अर्चना, मयूरी, स्मिता…etc सब की सब ऐसे गायब हो गईं हैं जैसे कछुआ छाप के जलने से मच्छर गायब हो जाते हैं . नंदन जी प्लीज़ बुलाइए इन्हें वरना मेरे लेख के सौंदर्य से सम्बंधित सेक्शन का क्या होगा? कम से कम संपादिका महोदया (विभा जी) तो नज़रे इनायत कर ही सकती हैं.

  • कविता जी पहले तो आपको जाट वाली जोरदार राम-राम, आपने बहुत ही अच्छा लेख लिखा है, वैसे आप सोच रही होंगी कि जाट देवता संदीप पवाँर कहाँ गायब हो गये जो आपके लेख पढने नहीं आये, बीते एक सप्ताह से अपना गुजरात का भ्रमण हो रहा था। अत: फ़ुर्सत मिली तो अपनी हाजिरी लग गयी, हाँ कल एक कमैंट जरुर किया था त्यागी भाई की पोस्ट पर। आपने जितना भी लिखा है वो सब ना सही लेकिन उसमें से ज्यादातर भाग लगभग सभी के काम आयेगा, कुछ दो-चार उल्टी खोपडी के प्राणी( दो सिरफ़िरे जाट+ एक त्यागी+ एक पण्डित) भी इस दुनिया में है उनके भले ही यह लेख काम ना आये कोई बात नहीं अपवाद हर चीज का होता है। मुझे लगता है कि शान्त आत्मा जी रिकार्ड बीच-बीच में तोडता रहना पडेगा। जैसा कि त्यागी भाई ने कहा कि दवाई साथ होनी चाहिए, अपुन को तो वो भी याद नहीं रहती है। कविता जी लगता है कि महिला टीम का चुपचाप रहना रहस्मयी है?

  • Kavita Bhalse says:

    संदीप जी,
    आपको भी राम राम. आपने बिलकुल ठीक कहा, मैं सोच ही रही थी की जाट देवता आजकल किस लोक में भ्रमण कर रहे हैं. फिर सोचा की आप घुमक्कड़ पर नहीं हो इसका मतलब है की आप घुमक्कड़ी पर हो, और मेरा अंदाजा बिलकुल सही निकला, आप सोमनाथ, द्वारका जी के दर्शन के लिए निकले थे. आशा है आपकी यात्रा हमेशा की तरह यादगार रही होगी.

    वैसे कहा जाता है की महिलाएं चुप नहीं रहतीं, लेकिन घुमक्कड़ ऐसी विचित्र जगह है जहाँ महिलाएं हमेशा चुप ही रहती हैं. मैं यहाँ अपवाद बनकर अवतरित हुई हूँ.

    मेरी यह पोस्ट आपके टाइप के घुमक्कड़ के लिए सूटेबल नहीं है, फिर भी आपने पसंद किया उसके लिए एक बार फिर से धन्यवाद.

    • SilentSoul says:

      “मुझे लगता है कि शान्त आत्मा जी रिकार्ड बीच-बीच में तोडता रहना पडेगा।” – भाई मेरा कौनसा रिकार्ड तोड़ोगे..??
      .
      .
      .
      “वैसे कहा जाता है की महिलाएं चुप नहीं रहतीं, लेकिन घुमक्कड़ ऐसी विचित्र जगह है जहाँ महिलाएं हमेशा चुप ही रहती हैं. मैं यहाँ अपवाद बनकर अवतरित हुई हूँ.”

      Yes the Mahila Brigade must participate fully… but seems they only need “Vah-Vah” for their own posts.

      also other Editors should comment and welcome newcomers….. by far I have seen only Nandan doing this…

  • Vibha says:

    आप सही कह रहें हैं साइलेंट जी। सारे एडिटर्स को कमेन्ट करना चाहिये। पर यकीन करिये, यह अनिच्छा की वजह से नहीं है। हम कमेन्ट करने में बेहतर होने की कोशिश करेंगे।

    कविता जी, पहले तो घुमक्क्ङ पर आपका स्वागत है। और फिर देर से कमेन्ट करने के लिये मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।

    आपकी इन्साइट्ज़ पोस्ट बहुत महत्वपूर्ण टिप्स से परिपूर्ण है। सभी घुमक्कङों के लिये काफ़ी सहायक होगी।
    सौन्दर्य प्रसाधनो में मैं अपने साथ ज़्यादा कुछ नहीं ले जाती सफ़र के समय। एक डियोडरेंट, लिपगार्ड, आईलाइनर, मौयस्चराइज़र, और वेट टिशूज़ ज़रूर रखना पसन्द करती हूँ।

    मगर सभी की अपनी अपनी ज़रूरतें होती हैं। वैसे रोज़ के मेक-अप के समान के अलावा ज़्यादा कुछ काम नहीं आता सफ़र में। मगर मैं ऐसे लोगों को भी जानती हूँ जो हेयर-ड्रायर और हेयर-प्रेस भी साथ रखते हैं। :)

  • Kavita Bhalse says:

    विभा जी,
    इन सुन्दर शब्दों में उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय से धन्यवाद, देर से आये लेकिन दुरुस्त आये. सफ़र के दौरान सौंदर्य प्रसाधनों के मामले में आपकी पसंद मुझे बड़ी अच्छी लगी.
    जहाँ तक कमेंट्स का सवाल है, यह मेरा व्यक्तिगत द्रष्टिकोण है की अपनी पोस्ट प्रकाशित होने के बाद हर लेखक को अगर किसी चीज़ का इंतज़ार होता है तो वो होता है पाठकों की प्रतिक्रिया का, पाठकों की पतिक्रियाओं से ही लेखकों को अपने लेखन में निरंतर सुधार और निखार लेन की प्रेरणा मिलती है.

    लेकिन मुझे इस बात का दुःख है की घुमक्कड़ पर पाठकों की संख्या तो बहुत है लेकिन लेखकों के कार्य को सराहने वालों यानी कमेन्ट करने वालों की संख्या बहुत कम है, सिर्फ आठ या दस लोग ही नियमित रूप से कमेन्ट करते हैं. उन आठ दस कमेंटरों के अलावा जितने भी अन्य लेखक हैं वे अपनी पोस्ट प्रकाशित होने के बाद कुछ दिनों तक कमेंट्स का जवाब देने के लिए (वाह वाही बटोरने के लिए) ही घुमक्कड़ पर सक्रीय रहते हैं, और फिर ऐसे गायब होते हैं जैसे गधे के सर से सींग, फिर वे दुबारा घुमक्कड़ पर तभी सक्रीय होते हैं जब उनकी अगली पोस्ट प्रकाशित होती है.

    ऐसे लोगों की पोस्ट पर हमारी भी कमेन्ट करने की इच्छा नहीं होती है. आशा है मेरी इस टिप्पणी के बाद इस श्रेणी के लोगों के व्यव्हार में कुछ बदलाव आये.
    धन्यवाद.

  • Nandan says:

    I can speak for myself and what I do is that I try to read a story well and then try to comment on it in the best way possible. I personally think that this is what I owe to the Author for the great work he has done. I have full control on myself and I can strive to better my ‘aacharan’ but I must understand that I have no control on others’ time and intention, so I should never judge others. If someone is doing something or not doing something, it would be for a reason.

    For last 5 years, I have seen folks who have been very very supportive, encouraging and have always left valuable comments on almost every story. But as you grow, sometimes you acquire new responsibilities (marriage, parenthood, difficult job, relocation to a new place etc) and it gets difficult to spend as much as time as you would want to. I have never doubted their intention and that keeps me going.

    कर्मन्यावाधिकरास्ते माँ फलेषु कदाचन: :-).

  • शान्ताआत्मा जी आपका रिकार्ड है कि आप ज्यादातर लेख पर सबसे पहले अपना कमैंट दे दिया करते है, लेकिन जैसे ही मैंने आपका रिकार्ड बीच-बीच में तोडते रहने के बारे में कहा तो पता नहीं आप कहाँ शान्त होकर धरने पर बैठ गये है? जो कि नजर नहीं आ रहे है।

    कविता जी आपने एक बात सबसे अच्छी कही है कि जब किसी कि अरे मैं तो कहता हूँ कि बल्कि ज्यादातर लेखकों की ही यही आदत हो चुकी है कि उनका अपना लेख आने से एक दो दिन पहले ही व एक दो दिन बाद तक ही कमैंट करने का कार्य करने की खानापूर्ति कर दी जाती है, उसके बाद 10-15 दिन तक और शायद महीनों तक भी उन लेखकों के दर्शन भी नहीं होते है यह परिपाटी बहुत ही गलत है, जैसे यदि मैं उसे कमैंट दूँगा तो वो मुझे कमैंट देगा। इस कार्य को अपने ब्लॉग की दुनिया में कहते है कि तु मेरी पीठ खुजा मैं तेरी पीठ खुजाऊ। बिल्कुल बन्दरों की तरह। अरे भाईयों और अपने भाईयों की बहनों(मेरी कोई बहन नहीं है) उठो अपने स्तर से थोडा ऊपर उठो, जहाँ दो तीन दिन में कोई लेख पढने वाले 500 से ज्यादा होते है वहाँ कम से कम अलग-अलग पाठक मिलाकर 50 का आंकडा तो हर हालात में पार होना ही चाहिए, जरुरी नहीं कि शाबासी दी जाये, लेख में कमी सलाह आदि बहुत से विषय होते है,

    बस……………. अगर मैं जारी रहा तो यह कमैंट ना रहकर एक पोस्ट का रुप ले लेगा। पढे लिखे समझदारों को ईशारा ही काफ़ी होता है।

  • Giriraj Shekhawat says:

    काविता जी नमस्कार,
    आज आपका इनसाइट पढ़ा मैंने ,आपने काफ़ी ज्ञानवर्धक विषयों पर अच्छी चर्चा कि है …. कैमरा में मेमोरी और दवाएँ ले जाना ये उचित सलाह है ……… लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि घुमक्कड़ी का असली मजा तो उस जगह पर पहुँचकर ही सारे इंतेज़ाम करने में आता है …. बिना किसी नक्शे के , ….. वहाँ के निवासियों से बात करके , पैदल चल कर …. छोटी छोटी चीजों को समझकर …. जगह जगह रुक कर वहाँ के चित्र खींच कर …….. कई बार ऐसा भी होता है कि हमे वहाँ के निवासियों से ऐसी ऐसी सुंदर जगहों के बारे में पता चलता है कि हमारा प्लान वहीं बदल जाता है …….. इसलिए ट्रैवल प्लान करने में घुमक्कड़ी का असली मज़ा नहीं है
    लेकिन अगर कोई अपने पूरे परिवार के साथ जाना चाहता है तो आपका ये लेख अत्यन्त ही लाभकारी साबित होता है.

    और एक जरूरी बात ……… हमेशा एक 500 रु का नोट अपने जुराबो में रखना ना भूले …….. अगर कोई आपको लूट भी ले तो कोई गम नही ……. आप सुरक्षित घर तो पहुँच सकते है……

    • kavita Bhalse says:

      गिरिराज जी,
      पोस्ट को पढने, पसंद करने तथा कमेन्ट करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. आपकी बात बिलकुल सही है, उन्मुक्त घुमक्कड़ी करने का मज़ा ही कुछ और है, बिना प्लान के बिना तैयारी के, लेकिन यह सब पारिवारिक घुमक्कड़ी के मामले में ठीक नहीं होता, क्योंकि बच्चे साथ होते हैं और ढेर सारा सामान भी साथ होता है.

      आपका जुराब में रुपये छुपाने का आइडिया बड़ा अच्छा लगा, लेकिन जब मुसीबत आनी होती है तो सारी तैयारी धरी की धरी रह जाती है.

      धन्यवाद.

  • This is really a very very helpful article for travellers. I am in travel trade and I suggest this page to my clients when they ask me what to carry during the trip. Thanks for this very very good article, it makes my work easy :).

  • Kavita Bhalse says:

    Koustubh ji,

    I am very glad to hear that my post is assisting you in your trade. It gave me immense pleasure. Thank you very much for your lovely words.

    Thnx.

  • आपने काफी व्यवहारिक आलेख लिखा है। आपकी सोमनाथ द्वारका वाली पोस्ट हमारी गुजरात यात्रा के दौरान काम आई। हालांकि द्वारका के बारे कुछ जानकारियों में अंतर था। मैं पर्यटन पर ब्लाग लिखता हूं। http://www.daanapaani.blogspot.in मुझसे मेल पर संपर्क करें vidyutm@yahoo.com

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