मोटरसाइकिल से दिल्ली – मंसूरी /धनोल्टी यात्रा

बाइक से यात्रा करना हमेशा से मुझे रोमांचित करता है, मुझे जब भी मौका मिलता है मैं कही न कही, कभी अकेले तो कभी किसी साथ घूमने के लिए निकल जाता हूँ। ऐसे ही एक दिन मई के महीने में ऑफिस मे बैठा था। दिल्ली में गर्मी खूब जोरो की पड़ रही थी और मेरा मन कही घूमने जाने के लिए ब्याकुल हो रहा था। मेरी पिछली बाइक यात्रा, दिल्ली से हाटु पीक नारकंडा की मार्च के महीने में हुई थी उसके बाद ऑफिस में ब्यस्त रहने के कारण कही जा नहीं पाया था।

मई महीने के शुरुआत में मेरे ऑफिस में एक दोस्त ने नई बजाज की एवेंजर 150 बाइक ख़रीदी। मैंने उसे बधाई दिया और बोला की तुम बाइक को कम से काम 500 किलोमीटर चला लो फिर पहली सर्विस कराके कही घूमने चलेंगे।

मेरे दोस्त ने एक सप्ताह में ही 500किलोमीटर चला के बाइक की सर्विसिंग करा लिया। मेरे पास भी बजाज की पल्सर 150 है और उसकी भी
सर्विसिंग मैंने पहले ही करा लिया था। अब दो बाइक पर हम चार लोग घूमने जाने के लिए तैयार हो गए।

मेरी बाइक पर मेरे साथ अज़ीम अहमद और फ़ारूक़ की बाइक पर उसके साथ अनिल कुमार जोकि साथ में ही काम करते है, घूमने जाने के लिए बिचार बनाये।

बाइक से घूमने जाने में दुर्घटना का थोड़ा डर तो लगा रहता है इसलिए मेरे घरवाले भी मना करते है लेकिन बाइक से घूमने के फायदे भी बहुँत है। जब जहाँ मन किया रुक गए, जब मन किया चल दिए, बाइक पर बड़े आराम से हर कच्चे-पक्के रास्ते के ऊपर आसानी से चला जा सकता है। जहा कार नहीं जा सकती वहां भी बाइक आसानी से चली जाती है, खर्चा भी कम आता है और पहाड़ी जगहों पर तो घूमने के लिए बाइक उत्तम साधन है, क्योंकि टैक्सी काफी महंगी पड़ती है और बस की सुविधा हर जगह समय पर उपलब्ध नहीं होती है।

पहले हमने नैनीताल जाने के लिए सोचा लेकिन छुट्टी सिर्फ दो दिनों की थी तो फिर यह तय हुआ की धनोल्टी घूमने चलते है।

शुक्रवार 13 मई 2016 को शाम के 7:30PM हमने अपनी यात्रा मोहन एस्टेट मथुरा रोड जोकि हमारा ऑफिस है, से शुरु किया। थोड़ा सा आगे बढ़ते ही सरिता विहार के परट्रोल पंप पर हमने अपनी बाइक की टंकी फुल करवा के नोएडा से होते हुए गाज़ियाबाद के लिए निकले।

मौसम बहुत ही गर्म था और ऑफिस से छुट्टी होने का समय होने के कारण हर तरफ जाम लगा हुआ था। किसी तरह जाम से निकल के अभी हम गाज़ियाबाद के थोड़ा पहले ही पहुचे थे की मेरी बाइक की हेडलाइट जलना बंद हो गयी।

चारो तरफ अँधेरा था, फ़ारूक़ और अनिल एवेंजर बाइक पर कही पीछे थे और मैं, अज़ीम के साथ बाइक रोड के किनारे खड़ी करके उन दोनों के आने का इंतजार करने लगे। थोड़ी देर बाद जब वो दोनों आ गए तो फ़ारूक़ की बाइक के हेडलाइट की रौशनी के सहारे हमने फिर से अपनी यात्रा आरम्भ किया।

फ़ारूक़ मेरी परेशानी का पूरा फायदा उठा रहा था और कभी कभी वो अपनी बाइक की लाइट बंद कर देता जिससे मैं पूरी तरह से अँधेरे में डूब जाता।

कुछ दूर चलने के बाद एक जगह रास्ते पर स्ट्रीट लाइट जल रही थी तो मैंने बाइक की हेडलाइट की जाँच करने के लिए रोका। हेडलाइट की जाँच करने से पता चला की एक तार उसका ढीला था तो मैंने उसे सही किया और फिर हम अपनी मंजिल की तरफ चल दिये।

रात में मुज्जफरनगर के पास चीतल ग्रैंड रेस्टोरेंट में हमने रुक कर खाना खाया और थोड़ी देर आराम किया फिर देहरादून के लिए चल दिए। अभी हम थोड़ा ही दूर चले थे की अचानक बारिश की बुँदे गिरने लगी, एक तो गर्मी का समय ऊपर से ये बारिश की बुँदे, ऐसा लग रहा था जैसे गर्म पानी ऊपर से गिर रहा हो।

तभी सड़क के किनारे हमे एक बंद दुकान दिखी तो हमने बाइक को किनारे लगाके के उस दुकान के बरामदे में चले गए. थोड़ी देर बाद जब बारिश बंद हो गयी तो फिर हमने अपनी यात्रा शुरू किया. रात के 1 बज रहे थे जब हम छुटमलपुर पहुचे और सड़क के किनारे एक चाय की दुकान पर रुके. हमने चार चाय का आर्डर दिया और आपस में बात करने लगे तभी एक पुलिस की गाड़ी वहाँ से गुजरी। पुलिस वाले गाड़ी से उतरके हमारे पास आये और हमसे पूछना शुरू किया की कौन हो, रात में कहा घूम रहे हो आदि। हमने बताया की हम दिल्ली से घूमने के लिए निकले है और देहरादून जा रहे है तब वो हमारे पास से चले गए.

थोड़ी देर आराम करने के बाद हमने देहरादून के लिए प्रश्थान किया. सुबह के 4 बज रहे थे जब हम देहरादून पहुँचे। वहाँ पर हमनें एक होटल में 800 रूपये में कमरा लिया और फ्रेश होके थोड़ी देर के लिए सो गए.

सुबह के 8 बज रहे थे जब हमने होटल का रूम छोड़ा और सहस्त्रधारा के लिए निकले।

“सहस्त्रधारा एक खूबसूरत और लोकप्रिय स्थान है, जो देहरादून से लगभग 11 किमी की दूरी पर स्थित है। सहस्त्रधारा का शाब्दिक अर्थ ‘हजार गुना वसंत’ है। सुंदर झरना लगभग 9 मीटर गहरा है। बाल्दी नदी और उसके आसपास के क्षेत्र में स्थित गुफायें, इस जगह की सुंदरता को जोड़ती हैं, और इसे एक आदर्श पिकनिक स्थल बनाती हैं। जगह की अद्भुत आभा मानसून के दौरान कई गुना बढ़ जाती है, यहां बहता हुए पानी की धारा जीवन शक्ति और ऊर्जा के साथ प्रतिध्वनित होती है। ऐसा कहा जाता है कि, सल्फर की उपस्थिति के कारण इस झरने के पानी में औषधीय गुण हैं। त्वचा रोगों से पीड़ित लोग इस जगह पर जाएँ, अपने रोगों के इलाज के लिए झरने में स्नान करें। सल्फर के अलावा, पानी में चूना भी शामिल है, जिसकी वजह से गुफाएं बन जाती हैं।” साभार इन्टरनेट.

सहस्त्रधारा में अंदर घुसते ही 10 रूपये/बाइक एंट्री फीस लगती है जो हमने दिया और अंदर चले गए. वहाँ जाकर हमने बाइक को एक दुकान के आगे खड़ा किया और दुकान वाले से दो लॉकर किराये पर लिया (50 रूपये एक लाकर ). अपना बैग और सामान लाकर के अंदर रखने के बाद हमने दुकान वाले को चाय नाश्ता के लिए बोला और पानी में नहाने के लिए चले गए.

अंदर पानी बहुत ही ठंडा था और वहाँ पर स्थानीय लोगो ने जगह-जगह दिवार बनायी थी इसलिए वह किसी स्विमिंग पूल की तरह दिख रहा था.
थोड़ी देर नहाने के बाद हम लोगो ने सहस्त्रधारा किनारे बैठ के चाय और परांठे खाये। वहाँ करीब एक घंटे और नहाने के बाद हमलोग वहाँ से गुच्चूपानी जोकि रॉबर्स केव के नाम से भी जाना जाता है, के लिए निकले।

गुच्चूपानी पहुचने के बाद हमने अपनी बाइक को पार्किंग में खड़ा किया और अंदर की तरफ चल दिए। आगे एक दुकान पर लॉकर और चप्पल (चप्पल पानी के अंदर पहन कर जाने के लिए, लाकर 50 रूपये और चप्पल 10 रूपये) किराये पर लिया और अपना सारा सामान उसके अंदर रख कर दुकान के सामने की तरफ चल दिए।

गुच्चूपानी पानी से एकदम ठंडा पानी बहता हुआ बाहर की तरफ निकल रहा था और उसमे दुकानदारो ने कुर्सी और मेज डाला हुआ था. हम भी जाकर एक जगह कुर्सी पर बैठ गए और दुकानदार को मैग्गी बनाने को बोल दिया।

Maggie at Guchupani

Maggie at Guchupani

हम कुर्सी पर बैठे थे, और निचे घुटनो तक ठंडा पानी बह रहा था, ऊपर से गरमा-गरम मैग्गी खाने का आनंद को शब्दो में बताना बहुत ही मुश्किल है, उसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है. थोड़ा समय वहाँ बिताने के बाद हम लोग अंदर गुफा की तरफ चलने लगे. जैसे-जैसे हम अंदर जा रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे हम अपनी शहरोँ की दुनिया को छोड़ के एकदम वीराने में आ गए हो. अंतिम में जाकर हमे एक साफ पानी का झरना मिला जो की बहुत ही सुन्दर था.

Guchupani Cave

Guchupani Cave

A Small Waterfall in End inside Guchupani

A Small Waterfall in End inside Guchupani

थोड़ी देर गुच्चूपानी में रुकने के बाद हम लोग मंसूरी के लिए निकल पड़े. बाइक से पहाड़ी रास्तो पर चलने में बहुत ही आनद आ रहा था, रास्ते में एक जगह बहुत ही भयंकर जाम लगा हुआ था लेकिन बाइक पर होने के नाते हमे कोई दिक्कत नहीं हुए और हम उसे आराम से पार कर गए. बीच में ही एक जगह और रुक के हमने कुछ खाया-पिया और बाइक में परट्रोल डलवाया.

मंसूरी पहुचने के बाद हम सीधे कैम्पटी फाल्स की तरफ चले गए. चारो तरफ जाम ही जाम लगा हुआ था लेकिन बाइक पर होने की वजह से हम आसानी से कैम्पटी फाल्स पहुचे. वहाँ हमने बाइक को रोड के किनारे पार्किंग में खड़ा किया और कैम्पटी फाल्स की तरफ जाने के लिए रास्ता देखने लगे.

मुख्य रास्ते से कैम्पटी फाल्स जाने के लिए दो तरीके है, पहला ऊपर रोड से लेकर फाल्स तक सीढिंया बनी हुई है और दूसरा रोपवे से जाया जा सकता है.

Kampty Fall

Kampty Fall

हम लोगो ने सीढ़ियों वाला रास्ता लिया और कैम्पटी फाल्स जा पहुचे. वहाँ का नजारा तो बहुत ही अच्छा था लेकिन चारो तरफ गंदगी फैली हुए थी, पानी भी बहुत गन्दा हो रखा था इसलिए हमलोग नहाने की हिम्मत नहीं कर पाए और थोड़ी देर घूमने के बाद वापस अपनी बाइक के पास आ गए.

ऊपर आकर हमने देखा की यहां फिर से बहुत ही भारी जाम लगा हुआ है, चारो तरफ सिर्फ गाड़ियों के इंजन और हॉर्न की आवाजे आ रही थी. हम लोग भी वहाँ करीब एक घंटे तक फॅसे रहे फिर किसी तरह वहाँ से बाहर निकल पायें. वापस मंसूरी शहर में आने के बाद, हमने कुछ और जगहो को घूमा।

अब शाम हो चुकी थी और समय था रात में कही रुकने के लिए होटल खोजने का. एक तो गर्मी का समय ऊपर से लंबा सप्ताहांत होने के कारण, या तो होटल भरे हुए थे या फिर किराया बहुत ज्यादा था. फिर हमने कुछ स्थानीय लोगो से पूछा तो उन्होंने हमे एक जगह होटल बताया. जब हम वहाँ पहुचे तो एक बड़ा कमरा खाली था जिसमे दो डबल बेड लगे हुए थे. हमने 1200 रूपये में वो कमरा किराये पर ले लिया और अंदर जाकर आराम करने के लिए थोड़ी देर बिस्तर पर लेट गए।

View from Hotel to Mussoorie

View from Hotel to Mussoorie

रात के 9 बज रहे थे जब वेटर ने दरवाजा खटखटाया और रात के भोजन के लिए पूछा, चूँकि होटल में नॉन-वेज नहीं बनता था इसलिए हमने होटल में खाना खाने के लिया मना कर दिया और सोचा की बाहर खाना खायँगे।

दिन भर घूमने और बाइक चलाने के कारण हम सभी थक गए थे इसलिए अज़ीम और फ़ारूक़ ने बाहर जाने से मना कर दिया इसलिए मैं और अनिल माल रोड पर खाना लेने के लिए चले गए. माल रोड पर हर समय बहुत ही चहल -पहल रहती है इसलिए हमलोग भी थोड़ी देर वहाँ पर घूमे फिर एक खाने की दुकान से हमने नॉन-वेज खाना पैक करवाया और होटल चले आये.

यहाँ अज़ीम और फ़ारूक़ सोये हुए थे तो हमने उन्हें उठाया और हाथ-मुँह धोके सब लोग खाने के लिए बैठ गए. खाना बहुत ही स्वादिष्ट था और इतनी थकावट के बाद खाना खाने का मजा आ गया।

थोड़ी देर आपस में बातचीत करने के बाद सुबह जल्दी उठने का सोच के हम लोग सो गए.

अगले दिन सुबह के 6 बजे हमने होटल छोड़ दिया और धनोल्टी के लिए निकल गए. मंसूरी शहर को पार करने के बाद एक जगह सड़क के किनारे हम नाश्ते के लिए रुके. हमने दुकानदार को परांठे और चाय बनाने के लिए बोला और ढाबे के छत पर चले नज़ारे देखने के लिए गए. ढाबे की छत से बाहर का दृश्य बहुत ही सुन्दर था, चारो तरफ तक दूर दूर तक फैली हुई पहाड़िया थी और हमारा मन तो यही कर रहा था की यही रुक जाये। थोड़ी देर बाद जब परांठे तैयार हो गए तो हम नीचे आए और परांठे का नाश्ता किया. परांठा बहुत ही स्वादिष्ट था और साथ में दही और अचार के साथ तो मजा ही आ गया.

On the way to Dhanaulti

On the way to Dhanaulti

मंसूरी से धनोल्टी गाड़ी चलना बहुत ही रोमांचक था, टेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ियों के बीच बाइक को सरपट चलना हमे रोमांच से भर देता था, रास्ते के नज़ारे हर कदम पर बदल रहे थे और हम हर दो – चार किलोमीटर चलने के बाद रुककर नजारो का दीदार कर रहे थे. इसी के बीच में एक जगह रुक कर हमने थोड़ी दूर तक ट्रेकिंग भी किया.

Small Trekking Near Dhanaulti

Small Trekking Near Dhanaulti

इस तरह से चलते-चलते सुबह के 9:00AM हम लोग धनोल्टी पहुँचे. मौसम वहाँ का बहुत ही खूबसूरत था. थोड़ी देर इधर-उधर घूमने के बाद हमलोग इको पार्क पहुचे. बाइक हमने पार्क के सामने खड़ा किया और टिकट लेकर अंदर चले गए.

ECO Park

ECO Park

पार्क के अंदर घूमने के लिए कुछ खास नहीं था लेकिन वहाँ से धनोल्टी के नज़ारे बहुत अच्छे दिख रहे थे. चारो तरफ हरियाली थी और ठंडी हवा गर्मी के मौसम में अमृत की तरह लग रही थी.

View from ECO Park

View from ECO Park

Way to Tapovan

Way to Tapovan

पार्क में हम लोगो ने करीब 2 घंटे गुजारे, दिन के 11 बज रहे थे और अब हमे दिल्ली के लिए निकलना था. पहले सोचा की चम्बा – नरेंद्रनगर – ऋषिकेश होते चलते है लेकिन समय का अभाव होने के नाते हमने देहरादून – सहारनपुर- शामली – बागपत- दिल्ली का रास्ता पकड़ा.

देहरादून से निकलते ही एक जगह रास्ते में सुरंग के दोनों तरफ बहुत ही लंबा जाम लगा हुआ था, 5 -6 किलोमीटर तक दोनों तरफ गाड़िया रुकी हुए थी लेकिन बाइक पर होने के नाते हम लोग वहाँ से आसानी से बाहर निकल आये.

उसके बाद हमने सहारनपुर- शामली – बागपत- दिल्ली का रास्ता पकड़ा, एक-दो जगहों को छोड़ के सड़क बहुत ही अच्छी थी और गाड़ियों की आवा-जाही भी कम थी. हम लोग आराम से 80-90 KMPH के रफ़्तार से चल रहे थे. रास्ते में हर थोड़ी देर पर 15 मिनट के रुकते और निर्जलीकरण (Dehydration) से बचने के लिए समय-समय पर पानी पी रहे थे.

शाम होते-होते हम लोग बागपत पहुँचे, अब थोड़ी-थोड़ी भूख भी लग रही थी लेकिन कुछ खाने का मन नहीं कर रहा था. तभी हमे सड़क के किनारे एक जगह तरबूज बिकता दिखा. हमने गाड़ी रोकी और एक 5 किलो का तरबूज खरीद लिया. थोड़ा और आगे चलने पर एक जगह बाग में पानी का ट्यूबेल चल रहा था तो हमने गाड़ी फिर रोका, हाथ-मुँह धोये और बाग़ के किनारे बैठ के तरबूज खाया. उस गर्मी में तरबूज ने हमे बहुत ही आराम पहुचाया और उसके बाद सीधे बिना कही रुके हम दिल्ली के लिए चल दिए.

रात के 8 बजे के आस-पास हम सब अपने-अपने घर पहुच गए. इस पूरी यात्रा में एक-एक ब्यक्ति का दिल्ली से दिल्ली तक 2 हजार रूपये खर्चा हुआ.

4 Comments

  • Uday Baxi says:

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  • Sangam Mishra says:

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  • Nandan Jha says:

    I had similar thoughts as Uday. One should take additional precaution when one is on a two wheeler.

    Seems like you and your friends had good fun. Wishing you many more travels.

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