Photography : Using Light to Your Advantage

Table of contents for Photography Insight

  1. Getting the most out of your camera
  2. Photography – Lighting
  3. Photography : Using Light to Your Advantage
  4. Photography : Practical Tips and Tricks

प्रिय मित्रों,

Modern digital cameras perform their best in low light.

Modern digital cameras perform their best in low light.

अगर आपको फोटोग्राफी विषय पर मेरी पिछली दो पोस्ट पढ़ने का ’सौभाग्य’ मिला है तो आप अब तक न केवल कैमरे के विभिन्न कंट्रोल्स के बारे में कुछ तकनीकी बातें पढ़ चुके हैं बल्कि प्रकाश के बारे में भी ऐसी कुछ बातें जिनका संबंध फोटोग्राफी से है, जान चुके हैं।  फोटोग्राफी चूंकि प्रकाश के अंकन का ही ग्रीक नाम है, अतः प्रकाश के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने का मन कर रहा है जो आपके काम की हो सकती हैं।  यदि आपको ये सारी बातें पहले से ही पता होंगी तब तो घुमक्कड़ डॉट कॉम की कुछ सर्वर स्पेस, समझो, बरबाद हो गई और अगर इस विषय पर आपकी किंचित्‌ भी ज्ञानवृद्धि हो गई तो मुझे कुछ न कुछ पुण्यलाभ अवश्य ही मिलेगा।  तो, शुरु करते हैं !

एक फोटोग्राफर का प्रकाश के जिन पहलुओं से जन्म – जन्म का रिश्ता होता है, वे हैं – प्रकाश का कोण (angle of light) प्रकाश की दिशा (direction of light),  प्रकाश की मात्रा (luminosity या  brightness),  तीव्रता (intensity), और कंट्रास्ट (contrast)!   सबसे पहले प्रकाश के कोण की बात करें तो हम कह सकते हैं कि हम सब प्रकाश को ऊपर से नीचे की ओर आते हुए देखने के अभ्यस्त हैं।   सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक हमें सूर्य धरती के ऊपर से ही धरती पर प्रकाश बिखेरता हुआ नज़र आता है।  हमारे काम आये या न आये, चन्द्रमा का प्रकाश भी ऊपर से नीचे की ओर आता प्रतीत होता है।   हमारे ठीक सामने से प्रकाश आये ऐसा शायद वाहनों की हैड लाइट के मामले में ही देखने में आता है। कैमरे में लगी हुई फ्लैशलाइट भी प्रकाश सामने से हमारे चेहरे पर फेंकती है।  चूंकि हम जन्म से लेकर अपने अंतिम दिन तक प्रकाश को ऊपर से नीचे की ओर आते हुए देखा करते हैं अतः घरों में भी हम बल्ब और ट्यूब छत के आस – पास ही लगवाते हैं, न कि फर्श के आसपास।  फोटोग्राफर भी अपने स्टूडियो में लाइटें मॉडल के सिर के लेवल से ऊपर ही फिट करते हैं, नीचे नहीं ! प्रकाश का स्रोत अगर धरती के आस पास हो तो कैसा लगेगा, यह देखना हो तो कुछ हॉरर फिल्में देख डालिये ! ठोडी, होंठ, नाक, आंख आदि की छाया जब नीचे के बजाय ऊपर की ओर बनेंगी तो अपनी अर्द्धांगिनी की शक्ल देख कर एक बारगी तो डर ही जायेंगे।

A dance sequence

A dance sequence

Light can create drama

Light can create drama

Stark overhead Sun creates hollow sockets in place of eyes. Pls avoid it.

Stark overhead Sun creates hollow sockets in place of eyes. Avoid it.

Light may strike our subject from any direction creating different effects. Please experiment with it.

Light may strike our subject from any direction creating different effects. Please experiment with it.

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प्रकाश ऊपर से नीचे आये, यहां तक तो ठीक है पर इसका अर्थ ये मत लगा लीजियेगा कि प्रकाश जितने ऊपर से आये, उतना ही कोई व्यक्ति खूबसूरत लगेगा।  अति सर्वत्र वर्जयेत्‌ !  प्रकाश का कोण 15 से 60 डिग्री तक हो तो चेहरे पर जो छाया बनेंगी, वह अच्छी लगेंगी।  पर अगर प्रकाश सिर के ठीक ऊपर से यानि 90 डिग्री से आयेगा तो आंखों की जगह काले गढ्ढे दिखाई देंगे, और अगर दोपहर में सूर्य अपने पूरे विकराल रूप में हुआ तो आप की आंखें वैसे भी मिचमिचाती रहेंगी, चेहरे पर ऐसे भाव आयेंगे जैसे अभी` – अभी कच्ची इमली खाई हो।

अब बारी आई प्रकाश की दिशा की !   किसी भी चित्र की खूबसूरती सबसे अधिक शायद इसी बात पर निर्भर करती है कि प्रकाश किस दिशा से आ रहा था – फोटोग्राफर के ठीक पीछे से, दायें से, बायें से या सामने से !  देख लीजिये, प्रकाश किस कोण से आ रहा है, इस मामले में तो पूरे 360 डिग्री होते ही हैं पर किस दिशा से आ रहा है इस मामले में भी 360 डिग्री ही होते हैं। अन्तर है तो सिर्फ इतना कि पहले हम vertical circle बना कर कोण देख रहे थे और दिशा देखने के लिये हमने horizontal circle बनाया है जिसके केन्द्र में हमारा मॉडल मौजूद है।  कैमरे की फ्लैश से आरहा प्रकाश 0 डिग्री से आरहा मान लें तो मॉडल के ठीक पीछे से आने वाला प्रकाश 180 डिग्री से आ रहा माना जायेगा। इसे backlighting भी कह सकते हैं।  अगर आप इतना ध्यान रख सकें कि 180 डिग्री से आने वाला प्रकाश सीधे आपके कैमरे के लेंस में प्रवेश न कर जाये तो बहुत मस्त फोटो खींच सकेंगे।

Compare this with overhead sunlight scene above.

Compare this with overhead sunlight scene above.

Light striking the subject from 90 degree accentuates relief and textural details.

Light striking the subject from 90 degree accentuates relief and textural details.

Light striking from behind the subject adds to the charm.

Light striking from behind the subject adds to the charm.

Extreme Contrast - Details of white clothing are lost.

Extreme Contrast – Details of white clothing are lost.

Very soft, directional light creates a pleasing roundness on the face.

Very soft i.e. diffused, directional light creates a pleasing roundness on the face.

आप सब जैसे समझदार लोगों को प्रकाश की मात्रा समझाने का प्रयास करना ऐसा ही है जैसे हिमालय को आइसक्रीम खिलाने का प्रयास करना। वैसे भी, प्रकाश की मात्रा को नापने के लिये आपके कैमरे के अन्दर एक्सपोज़र मीटर दिया हुआ है जो प्रकाश की मात्रा को बिल्कुल सही माप कर जितना एपरचर व शटर तय करना हो, यदि आटो मोड हो तो, स्वयं ही तय कर लेता है।  डिजिटल कैमरे में तो अक्सर हरे रंग का कैमरा आइकन बना हुआ होता है जो Full Auto setting की पहचान है। इस सैटिंग पर सब कुछ आटोमैटिक हो जाता है – एपरचर और शटर ही नहीं, बल्कि ISO setting भी!   अगर आपके कैमरे में Manual (M) मोड भी दिया हुआ है तो एक्सपोज़र मीटर बेचारा मनमोहन सिंह हो जाता है।  सिर्फ यह देख सकता है कि सब कुछ गलत – सलत हो रहा है, पर बेचारा मज़बूर होता है, आपका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता।

Underexposed picture and yet, part of it is overexposed. Extreme contrast.

Underexposed picture and yet, part of it is overexposed. Extreme contrast.

मेरा मतलब ये है कि मैनुअल मोड में एक्सपोज़र मीटर यह तो बताता है कि उपलब्ध प्रकाश के हिसाब से सही एक्सपोज़र कितना होगा पर अगर आप अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने पर उतारू हों यानि overexposure या underexposure फोटो ले रहे हों तो आपका कैमरा आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकता।  आपने शायद सुना हो कि कुछ कैमरे zero lux पर शूटिंग कर सकते हैं।  इसका अर्थ है कि ये कैमरे बिल्कुल अन्धेरे में भी फोटो खींच सकते हैं।  lux  प्रकाश की luminosity को नापने की इकाई है। अगर आपका इरादा स्टिंग आपरेशन करने का हो तो zero lux कैमरा शायद आपके काम आये।

Against light pics are always pleasing to me.

Against light pics are always pleasing to me.

और अंत में ज़िक्र आता है – contrast का ! यह प्रकाश की तीव्रता (intensity) और प्रकाश के स्रोत के आकार और दूरी पर निर्भर करता है।  जब प्रकाश की किरणें स्रोत से सीधे हमारे दृश्य पर पड़ती हैं तो बिल्कुल स्पष्ट छाया बनाती हैं। ऐसे में contrast अधिक हो जाता है। कह सकते हैं कि Contrast का हमारे लिये अर्थ है प्रकाश और अंधकार (highlights and shadows)  में अन्तर !  यदि हमारे मॉडल के आधे चेहरे पर सीधे प्रकाश पड़ रहा है और आधा भाग अंधेरे में हो तो माना जायेगा कि contrast बहुत अधिक है।  हम अपनी आंखों से जब देखते हैं तो प्रकाशित और अंधकार (छाया) वाले हिस्से को काफी सही ढंग से देख लेते हैं पर कैमरे की मज़बूरी ये है कि वह बहुत अधिक contrast वाले दृश्य को पूरी ईमानदारी से फिल्म या मैमोरी कार्ड पर रिकार्ड नहीं कर सकता। अगर Well lighted area की details अच्छी आयेंगी तो dark area की details गायब हो जायेंगी और सब कुछ काला होकर रह जायेगा ।  इसके विपरीत, यदि आप dark areas की details चित्र में अंकित करना चाहेंगे तो highlights की details बिल्कुल ही गायब हो जायेंगी, सब कुछ धुला – पुंछा नज़र आयेगा!   बहुत तेज़ धूप में लिये गये चित्रों में सबसे बड़ी समस्या यही आती है।  यदि आप बहुत तेज़ धूप में ही चित्र लेने के लिये मज़बूर हैं तो इतना तो कर ही सकते हैं कि कैमरे पर लगी हुई फ्लैशलाइट को भी on कर लें।  यह फ्लैश आपके दृश्य के उन हिस्सों में भी प्रकाश फेंकती है जहां पर अंधकार अनुभव हो रहा था।  पर आपका चित्र स्वाभाविक नज़र आये इसके लिये यह आवश्यक है कि highlighted parts and shadow parts में यदि 8:1 का अनुपात था तो आप फ्लैश के सहारे उसे 8:4 या  8:6 तक ले आयें।  अगर 8:8 का अनुपात होगया तो बड़ा विचित्र लगेगा।

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      ??????? ! ????? ?????? ??? ????? ?? ???? ??? ?? ??? ?????? ????? ??? – 1) No Flash ???????? ????? ???? ????? ! 2) Auto Flash – ????? ?? ?????? ?????? ?? ????? ??? ????? ????? ??? ?? ????? ??????? ???? ???? ! ???? ???? ??? ?? ????? ?? ????? 3) Forced Flash ?? Flash Always On – ???? ???? ????? ????? ?? ???????? ???? ???? ??????? ?? ????? ? ???? ????? ?? ??? ??? ??, ????? ?? ????? ?? ?????? 4) Red Eye Reduction Mode – ???? ????? ???? ?? ???? ???? ??? ??????? ???? ?? ????? ????? ?? ?? ?? ???? ??? ?????? ?? ???? ????? ??? ?? ????? ???? ???? ?? ????? ???? ??? ????? ??? ??? ?????? ??? ???? ??? ??? ??? ?? ?????? ???? ???? ?? ?? ????? ?? ????? ????? ?????? ?? ???? ?? ????? ????? ??? red eye effect ???? ?? ???? ?? ?? ???? ???? ???? ???

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  • Great work, you took extra pain to illustrate all these points in a simple way…

    Very nice tips throughout all three posts and will definitely help all aspiring amateur photographers…with whatever camera you possess. One should also have sense of photography and when you combine these tips and your photographic sense, you will just love your shots.

    Finally, for all other friends in Ghumakkar, even if you think photos are not good, may be you will still like them once you revisit them few years down the line…all such not good pictures will surely bring back some memories…and memories are always sweet.

    So, what’s next!

    • Thank you Amitava,

      Let’s do some shooting together. Can there be more ghumakkars together in next two-three days?

      Sushant Singhal

    • 100% agree with you Amitava. Photos please us more and more as they become old because they refer to a time in our life which can’t be brought back. My photos which I never liked some 20 years ago, are my favourite because I can’t bring back the hair on my head now. :)

      So, even when a photo of a family member or friend is out of focus, under or overexposed, poorly composed or even partly damaged, it is very precious for the purpose of keeping visual record of our family and friends. It never ceases to give us pleasure.

  • Sir,
    Thanks for Sharing very detailed explanation of Use of Light. I will try a little bit of these on my P&S camera.

    • Dear Naresh Sehgal,

      All point and shoot cameras can benefit from improved lighting. Actually, P&S camera take away all responsibility of giving ‘correct exposure’ on themselves leaving us free to decide the mood, lighting set up of our picture and its subject matter. You can concentrate on light falling on your child’s face and on her smile so that you may decide the moment when to press the shutter.

      All of us are students of photography – including myself. I may be having more theoretical knowledge of photography but for taking good pictures, we also have to learn to see the potential of a good picture in a scene which presents itself before us. Many of our ghumakkars can do this superbly and take outstanding pictures – much better than I do. The latest example is a 5 year old Chatterjee – son of Amitava. His pictures of Nainital are mind blowing.

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  • Stone

    Another print-out worthy post Sushant sir.
    I also went through Akshat’s photo-stream, and its absolutely brilliant.

    • Dear Stone !

      Thank you very much for liking the post. I didn’t do justice to my friends by completing this post within one and half hour. I have become somewhat lazy and started and completed the post on 21st late night only. I fear the haste is very much visible in the post. :(

  • Saurabh Gupta

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    • Dear Saurabh Gupta,

      Thank you very much for liking the post. It is definitely more pleasurable to take pics once we try to make a photographs than when we take a photograph.

  • Thanks, very informative post. Pictures are breathtaking, even better than the life itself.

    • Dear Praveen Wadhwa,

      Thank you very much for the appreciative words.

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      • Dear Solanky Ji,

        Thank you for the nice comment. DSLR, even if it is very well within one’s budget, has some drawbacks owing to its large size and weight. If you are carrying a DSLR, people can’t ignore you and become conscious as soon as you aim your camera towards them. On the other hand, if you are shooting with a smart phone, people treat you as a harmless tourist and don’t take you seriously. This may give you some excellent candid pictures.

        As far as manual mode is concerned, I have written something below. It may interest you. And yes, thank you on behalf of Akshat for liking his pics.

  • Nirdesh Singh

    Hi Sushantji,

    I dont remember the name but there was a show on TV where this guy would teach science and this guy was really hilarious. It was amazing how he could make science so funny. And then there is Sushantji. Mazaa aa gaya.

    But I wish you had given some tips on Manual Mode – maybe some actual exposure reading for different times of day. This could help someone like me to migrate to M mode from the Auto mode.

    • Hi Nirdesh Singh,

      Thank you for coming to the post and writing about it. Even when the camera is in Manual mode, you don’t need to refer to some table to know the ‘correct aperture and shutter speed’ because Manual or auto, the exposure meter is always measuring the light. While in Manual mode, you are overriding the suggested readings either due to ignorance or for some special creative reason. Manual mode is highly useful when you ‘know’ that the camera’s exposure meter is being fooled by the existing lighting conditions. For example, if a dark complexioned person is standing in light coloured dress against a white wall, your camera’s exposure meter would be taking reading from the entire scene which is predominantly white and bright and would be led to believe that the scene is very bright. The dark face of your main subject of interest would be ignored unless you have switched to spot metering mode. The result would be grossly underexposed face of your model.

      Manual mode helps you in this case because you deliberately increase the exposure by at least two stops to suit the ‘main subject’. Obviously, the white wall will go still whiter because of increase in exposure but the face would come out correctly.

      You can also visualize a reversal of the situation. A bright person is standing on his roof top in the night with no wall behind him. You use flash in auto mode to take his photograph. The camera would measure the exposure taking into account the darkness of the scene and the face of the main subject would be overexposed beyond repair.

      Of course, you can use exposure compensation button to achieve the same deliberate over / under exposure but there is always the risk of forgetting the compensation setting in next photographs – ruining all of them unless you look into the view finder very diligently and recall the exposure compensation.

      So, in nut shell, your camera doesn’t know what part of the scene is really most important to you. It calculates average exposure requirement of the scene but that may be highly unsuitable in some situations. Modern camera’s are coming with matrix metering system in which they pick up info from as much as 35 different parts of the scene but still photographer is the best judge sometimes hence the need for manual mode.

      :) Too lengthy a lecture. Isn’t it?

  • Pingback: Ghumakkar Editorial Monthly Digest May 2013 / Ghumakkar – Inspiring travel experiences.()

  • Well lit log. Guess my time would come when I would develop this sense and take a lot of photographs. As of now, I have stopped carrying a regular camera and relying on my phone for all of my travels.

    Been a while had a kacchi imli :-). Thank you Sushant.