घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ डोट कॉम के सà¤à¥€ पाठकों को मेरी और से सादर नमसà¥à¤•ार. मैंने घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ पर रूचि लेना अà¤à¥€ कà¥à¤› समय पहले ही शà¥à¤°à¥‚ किया है अतः आप लोग मà¥à¤à¥‡ घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ परिवार की नयी सदसà¥à¤¯ कह सकते हैं. मेरे हसबेंड शà¥à¤°à¥€ मà¥à¤•ेश à¤à¤¾à¤²à¤¸à¥‡ इस अंतरजाल (वेबसाइट ) से पहले से ही यातà¥à¤°à¤¾ वृतà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥à¤¤ लेखक के रूप में जà¥à¥œà¥‡ हैं à¤à¤µà¤‚ उनकी घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ डोट कॉम के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‡à¤® तथा निषà¥à¤ ा देखकर मैं à¤à¥€ धीरे धीरे इस समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¤¨à¤• मंच से जà¥à¤¡à¤¼ गई तथा अब तो यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है की पूजा पाठके बाद दैनिक कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ के साथ ही होती है. अगर मैं यह कहूठकी घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ हमारे परिवार का à¤à¤• चहेता सदसà¥à¤¯ है तो कोई अतिशà¥à¤¯à¥‹à¤•à¥à¤¤à¤¿ नहीं होगी.
मैं आज अपनी इस पहली पोसà¥à¤Ÿ के साथ घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ पर लिखना शà¥à¤°à¥‚ कर रही हूठतथा मà¥à¤à¥‡ पूरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है की मà¥à¤à¥‡ अपने सà¤à¥€ घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ साथियों का आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ तथा मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ अनवरत मिलता रहेगा.
मैं अपने परिवार के साथ वरà¥à¤· में à¤à¤• या à¤à¤• से अधिक बार (मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर) घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ी कर ही लेती हूà¤, इन यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं में हमें बहà¥à¤¤ से खटà¥à¤Ÿà¥‡ मीठे अनà¥à¤à¤µ होते हैं तथा हर यातà¥à¤°à¤¾ हमें कà¥à¤› नया सिखा जाती है, अपनी यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं के इनà¥à¤¹à¥€ खटà¥à¤Ÿà¥‡ मीठे अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ से पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कà¥à¤› महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बिनà¥à¤¦à¥à¤“ं को कलमबदà¥à¤§ करके आज में आपलोगों को पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ कर रही हूà¤, आशा है की यह जानकारी साथी घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों के लिठलाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• सिदà¥à¤§ होगी, अगर à¤à¤¸à¤¾ होता है तो मैं समà¤à¥‚ंगी की मेरा पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ अरà¥à¤¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ रहा.
यातà¥à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ करने से पहले यातà¥à¤°à¤¾ समà¥à¤¬à¤‚धित निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित सà¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ पहलà¥à¤“ं पर गौर कर लें ताकि आपका सफ़र उरà¥à¤¦à¥‚ वाला सफ़र ही रहे, अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ वाला सफ़र (suffer) न बन जाà¤.
1. सफ़र की योजना:
सफ़र (यातà¥à¤°à¤¾) पर जाने से पहले हर पहलॠको धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ योजना पर अवशà¥à¤¯ कारà¥à¤¯ कर लें जैसे:
सबसे पहले हमारे पास उपलबà¥à¤§ दिनों की संखà¥à¤¯à¤¾, यातà¥à¤°à¤¾ के साधनों की सà¥à¤²à¤à¤¤à¤¾ आदि को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर à¤à¤• यातà¥à¤°à¤¾ कà¥à¤°à¤® (Itinerary) बना लें, इस यातà¥à¤°à¤¾ कà¥à¤°à¤® को तैयार करने में अंतरजाल (Internet) बहà¥à¤¤ सहायक होता है.
जहाठतक संà¤à¤µ हो सके हमारे गंतवà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर रातà¥à¤°à¤¿ विशà¥à¤°à¤¾à¤® (Stay) के लिठउपयà¥à¤•à¥à¤¤ होटल, धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤²à¤¾, गेसà¥à¤Ÿ हाउस आदि यातà¥à¤°à¤¾ से पहले ही (टेलीफोन/इनà¥à¤Ÿà¤°à¤¨à¥‡à¤Ÿ की मदद से) आरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करवा लें ताकी आप नई जगह पर परेशान होने से बच सकें.
सही समय पर रेल/ हवाई जहाज/ बस आदि में अपनी सीट आरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करवा लें ताकि आपको अनावशà¥à¤¯à¤• परेशानियों का सामना न करना पड़े.
गंतवà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ (Destination) के मौसम की पूरà¥à¤µ जानकारी अवशà¥à¤¯ ले लें तथा उसके अनà¥à¤¸à¤¾à¤° ही अपनी यातà¥à¤°à¤¾ की योजना बनायें, यह तब और महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाता है जब आपके साथ बचà¥à¤šà¥‡ या बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— à¤à¥€ यातà¥à¤°à¤¾ में शामिल हैं.
2. सफ़र में आवशà¥à¤¯à¤• सामान:
सफ़र पर निकलने से पहले अपनी तैयारी बहà¥à¤¤ सोच समà¤à¤•र तथा शानà¥à¤¤à¤¿ से करें और सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करें की आप कà¥à¤› महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सामान रखना तो नहीं à¤à¥‚ल रहे हैं जैसे – आपका केमेरा, केमेरा का चारà¥à¤œà¤°, केमरे के लिठअतिरिकà¥à¤¤ मेमोरी कारà¥à¤¡ मोबाइल का चारà¥à¤œà¤°, आपके आरकà¥à¤·à¤£ टिकटों की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤, फोटो आईडी, शेविंग किट, गंतवà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ (Destination) से समà¥à¤¬à¤‚धित मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¿à¤•ा (Guide), आवशà¥à¤¯à¤• नक़à¥à¤¶à¥‡, अनà¥à¤¯ रोजमरà¥à¤°à¤¾ की आवशà¥à¤¯à¤•ता के सामान जैसे तेल, साबà¥à¤¨, कंघा, कà¥à¤°à¥€à¤®, टॉवेल आदि, मौसम के अनà¥à¤°à¥‚प तथा कम से कम मातà¥à¤°à¤¾ में कपड़े, ATM कारà¥à¤¡, कà¥à¤°à¥‡à¤¡à¤¿à¤Ÿ कारà¥à¤¡, आपके बिजनेस कारà¥à¤¡ आदि.
3. सफ़र के साथी:
यातà¥à¤°à¤¾ में आपके साथ जाने वाले सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की उमà¥à¤° à¤à¤• अति महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ तथा विचारणीय पहलॠहै, अतः उनकी सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤“ं को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखकर ही यातà¥à¤°à¤¾ नियोजित करनी चाहिà¤.
यदि आपके साथ यातà¥à¤°à¤¾ में बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— à¤à¥€ हैं और आपको रेल यातà¥à¤°à¤¾ करनी है तो आप उचित समय पर अपना रेल आरकà¥à¤·à¤£ करवा लें ताकि आपको बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के लिठलोअर बरà¥à¤¥ मिल सके.
यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना à¤à¥€ अति आवशà¥à¤¯à¤• है, अतः अपनी यातà¥à¤°à¤¾ की योजना à¤à¤¸à¥€ बनायें की बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों को परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ आराम मिल सके.
यातà¥à¤°à¤¾ से पहले बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों का सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ परिकà¥à¤·à¤£ अवशà¥à¤¯ करवा लें तथा आवशà¥à¤¯à¤• दवाई गोलियां साथ में लेकर जाà¤à¤, उनके लिठयातà¥à¤°à¤¾ के दौरान à¤à¥‹à¤œà¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤§à¤• हो यह à¤à¥€ सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ कर लें.
कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‡ बहà¥à¤¤ शरारती à¤à¤µà¤‚ चंचल होते हैं, अतः रेल यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोच के दरवाज़े के पास न जाने दें तथा अकेले न छोड़ें, बीच के सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ पर à¤à¥€ उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निचे न उतरने दें. दरà¥à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ के दौरान à¤à¥€ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का पूरा धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें तथा उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने से दूर न जाने दें, बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के à¤à¥€à¥œ में खो जाने का डर होता है. बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अपने अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤• का मोबाइल नंबर अवशà¥à¤¯ याद करवा दें. यदि बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥€à¤¡à¤¼ वाले धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर जा रहे हों तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के गले में आई डी कारà¥à¤¡ लटका दें.
4. सफ़र में खानपान:
सफ़र के दौरान खानपान का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚की बाहरी परिवेश में असà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯à¤•र खाना आपको असà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ कर सकता है अतः आप यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान अपने खानपान के रूटीन में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बदलाव न लायें तथा बाहर का खाना à¤à¤• सीमा में रहकर ही खाà¤à¤‚ .
हम जिस जगह पर घà¥à¤®à¤¨à¥‡ जा रहे हैं वहां अगर हमारी पसंद का à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलने की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम हो तो घर से ही खाने पीने का कà¥à¤› à¤à¤¸à¤¾ सामान जो कई दिनों तक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रहता हो तथा जलà¥à¤¦ ख़राब न हो जैसे डिबà¥à¤¬à¤¾à¤¬à¤‚द सà¥à¤¨à¥‡à¤•à¥à¤¸, अचार, नमकीन, मिठाइयाठतथा अनà¥à¤¯ परिरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ (Preserved) खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ पैक कर के रख लें.
फल, मà¥à¤‚गफली, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ शेक, पोपकोरà¥à¤¨, जैसी चीजों से आप अपने आप को हलà¥à¤•ा फà¥à¤²à¥à¤•ा à¤à¥€ महसूस करेंगे तथा इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ थोड़ी थोड़ी देर में लेने से कोई नà¥à¤•सान à¤à¥€ नहीं होगा.
आप जहाठजा रहे हैं वहां जाने से पहले ही तय कर लें की आपको कहाठठहरना है तथा आसपास में कौन से अचà¥à¤›à¥‡ रेसà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤‚ हैं. जहाठतक संà¤à¤µ हो सके यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान नॉन वेज न खाà¤à¤‚ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह गरिषà¥à¤ होता है तथा आपका पेट अपसेट हो सकता है.
5. सफ़र और सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯:
परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ के दौरान आपका सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होना सबसे आवशà¥à¤¯à¤• है, यदि आप सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ ही नहीं होंगे तो आप यातà¥à¤°à¤¾ का आनंद नहीं उठा पाà¤à¤‚गे तथा आपकी वजह से आपके सफ़र के अनà¥à¤¯ साथी à¤à¥€ मज़ा नहीं ले पायेंगे. सफ़र में कà¥à¤› बिमारियों और परेशानियों से बचा जाठतो घà¥à¤®à¤¨à¥‡ फिरने का मजा दà¥à¤—à¥à¤¨à¤¾ हो जाता है.
सफ़र में बैठने के लिठसà¥à¤µà¤šà¥à¤› à¤à¤µà¤‚ हवादार सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का चयन करें. सफ़र में सà¥à¤µà¤šà¥à¤›, आरामदायक तथा ढीले ढाले परिधान (कपड़े) पहनें. सफ़र में टाइम पास करने के लिठअपनी पसंद की कà¥à¤› पतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ तथा संगीत सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठईअर पीस à¤à¥€ रखें.
सफ़र में गरिषà¥à¤ à¤à¥‹à¤œà¤¨ न करें, बिलकà¥à¤² à¤à¥‚खे रहकर सफ़र करना à¤à¥€ ठीक नहीं है. नाशà¥à¤¤à¤¾ हलà¥à¤•ा ही करें, साथ में निमà¥à¤¬à¥‚, इलायची, लौंग, पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¤¾ सत तथा ओरेंज टोफियाठरखें. पिने के पानी में कम मातà¥à¤° में गà¥à¤²à¥‚कोज, पिपरमेंट आदि मिलाà¤à¤‚.
कà¥à¤› लोगों को कार, हवाई जहाज, बस, à¤à¥‚ले आदि में चकà¥à¤•र आने तथा उलà¥à¤Ÿà¥€ होने की शिकायत रहती है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ चाहिठकी वे परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ पर निकलने से पहले अपने चिकितà¥à¤¸à¤• के परामरà¥à¤¶ से दवाईयाठआदि साथ कलेकर ही सफ़र के लिठनिकलें.
6. सफ़र और आपका सौंदरà¥à¤¯ (महिलाओं के लिà¤):
परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ तथा सफ़र के दौरान हमारे सौंदरà¥à¤¯ की देखà¤à¤¾à¤² à¤à¥€ अति आवशà¥à¤¯à¤• है. अतः निमà¥à¤¨ बिनà¥à¤¦à¥à¤“ं पर विशेष रूप से गौर फरमाà¤à¤‚.
सफ़र के दौरान पसीना अधिक आता है, अतः à¤à¤¸à¤¾ मेकअप करें जो पसीने से ख़राब न हो. सफ़र में हलà¥à¤•ा मेकअप करें तथा वेलवेट की बिंदी इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करें.
सफ़र के दौरान टà¥à¤°à¥‡à¤¨, बस में हवा की वजह से बाल उड़ते हैं और बिखर जाते हैं इसलिठहेयर सà¥à¤ªà¥à¤°à¥‡ लगा लेना ठीक रहता है. मेकअप किट हमेशा साथ रखें जिसमें सौंदरà¥à¤¯ का आवशà¥à¤¯à¤• सामान हो जैसे लिपसà¥à¤Ÿà¤¿à¤•, आइबà¥à¤°à¥‹ पेंसिल, टेलकम पावडर, हेयर पिन, सà¥à¤•िन टोनर, टिशॠपेपर, बिंदी, कंघा, कंडिशनर, कà¥à¤²à¥€à¤‚जिंग मिलà¥à¤•, मोइसà¥à¤šà¤°à¤¾à¤‡à¤œà¤°, आदि.
सफ़र में बालों को खà¥à¤²à¤¾ रखने के बजाये जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ बना लें या चोटी कर लें, यदि बाल छते हों तो पोनी टेल à¤à¥€ कर सकती हैं.
मौसम के अनà¥à¤°à¥‚प तà¥à¤µà¤šà¤¾ की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठसनसà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨, कोलà¥à¤¡ कà¥à¤°à¥€à¤®, लोशन आदि का उपयोग करें.
7. सफ़र और आसà¥à¤¥à¤¾:
यदि आप धारà¥à¤®à¤¿à¤• यातà¥à¤°à¤¾ पर जा रहे हैं तो निमà¥à¤¨ पहलà¥à¤“ं पर अवशà¥à¤¯ विचार करें.
सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बात है की आप जिस धरà¥à¤® सà¥à¤¥à¤² पर दरà¥à¤¶à¤¨ के लिठजा रहे हों वहां से आपका विशà¥à¤°à¤¾à¤® सà¥à¤¥à¤² (होटल/धरà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤²à¤¾/गेसà¥à¤Ÿ हाउस) जितना हो सके नजदीक होना चाहिà¤, यह बड़ा सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• होता है तथा आप चलने की थकान व परेशानी से बच जाते हैं. करीब रहने से हमें à¤à¤—वान के दरà¥à¤¶à¤¨ à¤à¤• से अधिक बार करने का सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ मिल जाता है तथा हमें यह à¤à¥€ à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ होता है की हम किसी सिदà¥à¤§ जगह के इतने करीब रह रहे हैं. रात की तथा सà¥à¤¬à¤¹ की आरतियों तथा पूजन, अà¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• में à¤à¥€ बिना परेशानी के शामिल हà¥à¤† जा सकता है.
पूजा अरà¥à¤šà¤¨à¤¾ के लिठआवशà¥à¤¯à¤• सामान जैसे जाप के लिठमाला, पढने के लिठपोथी, जल चढाने के लिठछोटा कलश आदि साथ लेकर जाà¤à¤.
जहाठतक संà¤à¤µ हो धारà¥à¤®à¤¿à¤• यातà¥à¤°à¤¾ पर निकलने से पहले मंदिर (धरà¥à¤®à¤¸à¥à¤¥à¤²) के टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ/संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की वेबसाइट को अचà¥à¤›à¥‡ से पढ़कर तथा विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£ करके जाà¤à¤ जिससे आपको वहां पर होने वाले वारà¥à¤·à¤¿à¤•/मासिक/दैनिक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚, उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ आयोजनों की पूरà¥à¤µ जानकारी हो जाये तथा आप à¤à¥€à¥œ तथा परेशानी से बचे रहें तथा आपको दरà¥à¤¶à¤¨ सरलता तथा सà¥à¤²à¤à¤¤à¤¾ से हो जाà¤à¤ (जो आपका मà¥à¤–à¥à¤¯ उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ होता है). यदि आप उतà¥à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ में शामिल होना चाहते हैं तो à¤à¥€ पूरà¥à¤µ जानकारी आपके लिठअति आवशà¥à¤¯à¤• है.
यदि आपका धà¥à¤¯à¥‡à¤¯ ईशà¥à¤µà¤° के दरà¥à¤¶à¤¨ करना ही है तो अपनी यातà¥à¤°à¤¾ की योजना तीज, तà¥à¤¯à¥Œà¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚, विशिषà¥à¤ दिनों आदि को छोड़कर करें और à¤à¥€à¥œ परेशानी से बचकर संतोषजनक दरà¥à¤¶à¤¨à¥‹à¤‚ का लाठलें.
यदि इन छोटी छोटी बातों को आदत में शामिल कर लिया जाठतो आपका हर सफ़र सà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¤¾ सफ़र होगा. आपके अगले सà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¥‡ सफ़र के लिठमेरी और से ढेरों शà¥à¤à¤•ामनायें. बस अब मैं अपनी हिदायतों का सिलसिला अà¤à¥€ के लिठयहीं बंद करती हूठतथा मिलती हूठअगली बार मेरी अगली पोसà¥à¤Ÿ के साथ.








हमेशा की तरह सबसे पहले कमैंट मेरे :)
धन्यवाद कविताजी… आशा है लोग आपका लेख पढ़ कर अपना सफर सुहाना कर लेंगे… हालांकि दोनो जाटों के लिये फिलहाल ये काम नहीं आयेगा… क्योंकि वो तो मस्त मलंग घुमक्कड़ हैं. .. व अकेले ही (बिना बच्चों व घराली के) सफर करते हैं… LOL
और इस बार मात्रा की गलती देखने को नहीं मिली. मैं तो सीधा ही हिन्दी में मुद्रण कर लेता हूं क्योकि Windows में अगर हिन्दी Fonts activate कर लिये जायें तो सीधा बिना Transliteration के ही हिन्दी में टाइप किया जा सकता है, जिसमें शब्द बनाने आपके अपने हाथ में हो जाते हैं न कि गूगल के.
मेरे पहले सफर में साथ थे (1977 में), होलडाल, बर्तन, स्टोव, दालें, चावल, कपड़े तथा ऐसे ही अन्य सामान….और मेरे 2010 के सफर में थे कार, टैन्ट, हाथ से चार्ज होने वाली टार्च, GPS वाला फोन, हाथ घड़ी जो तापमान, ऊंचाई, तथा वातावरणीय-दाब बताती है…बिजली से गरम होने वाला कंबल, तथा हवा भरने वाले बिस्तर व सिरहाने… वाकई जमाना बहुत बदल गया है.
सही कह रहे हो साइलेंट साहब। अपने तो इनमें से कुछ भी काम का नहीं है। लेकिन कविता जी, निराश मत होना कि आपने इतनी मेहनत से यह लेख लिखा है और इधर एक झटके में बेकाम का बता दिया। ऐसा नहीं है।
असल में घुमक्कडी और पर्यटन दो अलग-अलग चीजें हैं। आपने जो बताया है, वो पर्यटकों के बेहद काम है। जाने से पहले तैयारी, सफर के मेम्बर, हर मेम्बर का उम्र के हिसाब से ख्याल, साथ ले जाने वाली चीजें सबकुछ पर्यटकों के काम की चीजें हैं। जबकि घुमक्कडों का स्वभाव थोडा अलग होता है। जब भी जिधर भी मुंह उठ जाये, वे निकल पडते हैं। वे नहीं देखते कि कहां जाना है, कैसे जाना है, कहां रुकना है, क्या खाना है।
बेहतरीन प्रयास।
नीरज जी,
सुबह से आपकी कमेन्ट का इंतज़ार हो रहा था. सुन्दर शब्दों में कमेन्ट तथा उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद. आपने बिलकुल सही फ़रमाया की ये सारे सुझाव हम जैसे पर्यटकों के लिए हैं, और आप ठहरे ठेठ घुमक्कड़, अलग अलग तरह की यात्राओं के लिए तैयारी भी अलग अलग तरह से करनी होती है. मेरी पिछली पोस्ट (यात्रा: कभी ख़ुशी कभी गम) को आपकी ओर से समीक्षा का इंतज़ार है.
धन्यवाद.
साइलेंट सोल जी,
हमें भी सबसे पहले आपकी ही कमेन्ट की उम्मीद रहती है. पोस्ट को पढने तथा पसंद करने के लिए धन्यवाद.
कविता,
आपका यह प्रयास भी सराहनीय रहा. अपने सफ़र को सुहाना बनाने के लिए आपके सुझाव (टिप्स) साथी घुमक्कड़ों के लिए बड़े लाभकारी सिद्ध होंगे.
धन्यवाद.
प्रिय मुकेश जी ,
मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद .
Good one Kavita jee…………..
These are necessary things we need to remember while travelling …………….
But still after so much planning also when the trip actually takes places,
its actually totally different ……………………………
विशाल जी,
लेख को पढने तथा पसंद करने के लिए आभार. मैं भी आपसे सहमत हूँ की योजना और क्रियान्वयन में बहुत फर्क होता है. एक अच्छी योजना के बावजूद भी कई बार हम कुछ अति महत्वपूर्ण चीजें भूल जाते हैं.
धन्यवाद.
कविता जी ,
मैंने अक्सर देखा की सफर में जाने पहले कितनी भी तैयारी कर लो फिर भी कुछ न कुछ रह ही जाता हैं, और फिर बाद में परेशानी भी उठानी पढ़ती हैं …लेख के माध्यम से जरुरी और महत्तवपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने के अच्छी कोशिश रही आपकी
धन्यवाद….
Ritesh ji,
Thank you very much for your kind words and liking the post.
Thanks.
उपयोगी लेख है कविता जी । जैसा कि नीरज जी ने कहा कि पर्यटको के लिये ज्यादा उपयोगी है हमें तो अगर कोई कहे कि अभी इसी वक्त चलना है तो चल देंगे । पर हां दवाईयां मै नही भूलता और दवाईयो में विशेषकर बीटाडीन की टयूब और पटटी । छोटा सा सामान है पर जरूरत पडने पर अनमोल
Manu ji,
Thanks for liking the write up, and yes I admit that my write up does not suits to the great ghumakkars like Neeraj ji, Sandeep ji and yourself.
Thanks.
कविता जी
आप का लेख बहुत पसंद आया l As an efficient homemaker, you put in a lot of effort to ensure that your family is not inconvenienced during your travels. Not surprising that Mukeshji does not like to travel alone :-)
I would like to add two things:
1. A good hand sanitiser / pack of wet wipes is a must because it is easy to pick up an infections while travelling.
2. A few empty plastic bags for storing wastes like food wrappers, disposable cups and empty mineral water bottles. Most of the tourists spots in India lack dust bins and it is important to avoid littering such places. We must retain litter in plastic bags till we find a suitable place to dispose it.
Narayan ji,
Thank you very much for such detailed comment, and we all at ghumakkar like your style of commenting in details. Your suggestion of keeping empty poly bags is really worthwhile.
Thanks.
narayanji, I really liked yr suggestion of keeping empty bags for collecting trash. This is a very small … but very important thing… to keep the places clean.
This is in line with my request to all Ghumakkars to take a vow to keep the tourist places clean.
Quite useful things for a tour.
Ashok ji,
Thank you very much for your encouraging words.
Thanks.
कविता जी की ये दूसरी पोस्ट है जो प्रकाशित हुई है , हालांकि ये लिखी पहले गए थी, उसी प्रकार से जैसे आपकी पहली फिलिम कोई और होती है और रिलीज़ कोई और होती है पहले :-)
मुझे दो बातें बहुत अच्छी लगें, पहली रेल आरक्षण और लोअर बर्थ वाली और दूसरी सौंदर्य वाली :-), अभी तक महिला ब्रिगेड में किसी का कमेन्ट नहीं आया , आशा करता हूँ की सौन्दर्य सेक्शन में कुछ और बढ़ोतरी होगी. :-)
अब थोडा प्रचार हो जाए, यानी के एक ad -break
घुमाक्कर पर हर २२ तारीख को हम एक अंतर्दृष्टि , “Insights” , पोस्ट प्रकाशित होती है. पिछली पोस्ट्स के लिंक डाल रहा हूँ यहाँ |
https://www.ghumakkar.com/2011/12/22/what-is-on-your-mind-and-what-goes-into-your-bag/
https://www.ghumakkar.com/2012/01/22/camera-derie/
अगर आप कोई ऐसा लेख लिखना चाहते हैं तो मुझसे या संपादिका जी से संपर्क करें |
“अगर आप कोई ऐसा लेख लिखना चाहते हैं तो मुझसे या संपादिका जी से संपर्क करें |”
Tks Nandan, but how to contact ? through telepathy ?
You should have given the contact mail or phone number…. not everybody knows it.
Please mail at info AT Ghumakkar.com for this. We have been re-iterating it in our monthly newsletters. This has started from November only in a ‘formalized form’ and as of now, we are limiting this to ‘one per month’ but as it generated more traction, we would review our plans.
नंदन जी,
आपने बिलकुल सही कहा, फिल्म बनी पहले कोई और थी और रिलीज़ कोई और हो गई. हमारा घुमक्कड़ का संसार भी कुछ कुछ बौलीवूड की तरह ही है, पोस्ट को साथी घुमक्कड़ों की ओर से खूब प्रशंसा मिली तो हम कहते हैं की पोस्ट हिट हो गई, और कम रिस्पोंस मिला तो कहते हैं की ये पोस्ट तो फ्लॉप हो गई.
घुमक्कड़ की महिला ब्रिगेड पिछले कई दिनों से निष्क्रिय दिखाई दे रही है. देवस्मिता, विभा, जयश्री, नवीना, अर्चना, मयूरी, स्मिता…etc सब की सब ऐसे गायब हो गईं हैं जैसे कछुआ छाप के जलने से मच्छर गायब हो जाते हैं . नंदन जी प्लीज़ बुलाइए इन्हें वरना मेरे लेख के सौंदर्य से सम्बंधित सेक्शन का क्या होगा? कम से कम संपादिका महोदया (विभा जी) तो नज़रे इनायत कर ही सकती हैं.
कविता जी पहले तो आपको जाट वाली जोरदार राम-राम, आपने बहुत ही अच्छा लेख लिखा है, वैसे आप सोच रही होंगी कि जाट देवता संदीप पवाँर कहाँ गायब हो गये जो आपके लेख पढने नहीं आये, बीते एक सप्ताह से अपना गुजरात का भ्रमण हो रहा था। अत: फ़ुर्सत मिली तो अपनी हाजिरी लग गयी, हाँ कल एक कमैंट जरुर किया था त्यागी भाई की पोस्ट पर। आपने जितना भी लिखा है वो सब ना सही लेकिन उसमें से ज्यादातर भाग लगभग सभी के काम आयेगा, कुछ दो-चार उल्टी खोपडी के प्राणी( दो सिरफ़िरे जाट+ एक त्यागी+ एक पण्डित) भी इस दुनिया में है उनके भले ही यह लेख काम ना आये कोई बात नहीं अपवाद हर चीज का होता है। मुझे लगता है कि शान्त आत्मा जी रिकार्ड बीच-बीच में तोडता रहना पडेगा। जैसा कि त्यागी भाई ने कहा कि दवाई साथ होनी चाहिए, अपुन को तो वो भी याद नहीं रहती है। कविता जी लगता है कि महिला टीम का चुपचाप रहना रहस्मयी है?
संदीप जी,
आपको भी राम राम. आपने बिलकुल ठीक कहा, मैं सोच ही रही थी की जाट देवता आजकल किस लोक में भ्रमण कर रहे हैं. फिर सोचा की आप घुमक्कड़ पर नहीं हो इसका मतलब है की आप घुमक्कड़ी पर हो, और मेरा अंदाजा बिलकुल सही निकला, आप सोमनाथ, द्वारका जी के दर्शन के लिए निकले थे. आशा है आपकी यात्रा हमेशा की तरह यादगार रही होगी.
वैसे कहा जाता है की महिलाएं चुप नहीं रहतीं, लेकिन घुमक्कड़ ऐसी विचित्र जगह है जहाँ महिलाएं हमेशा चुप ही रहती हैं. मैं यहाँ अपवाद बनकर अवतरित हुई हूँ.
मेरी यह पोस्ट आपके टाइप के घुमक्कड़ के लिए सूटेबल नहीं है, फिर भी आपने पसंद किया उसके लिए एक बार फिर से धन्यवाद.
“मुझे लगता है कि शान्त आत्मा जी रिकार्ड बीच-बीच में तोडता रहना पडेगा।” – भाई मेरा कौनसा रिकार्ड तोड़ोगे..??
.
.
.
“वैसे कहा जाता है की महिलाएं चुप नहीं रहतीं, लेकिन घुमक्कड़ ऐसी विचित्र जगह है जहाँ महिलाएं हमेशा चुप ही रहती हैं. मैं यहाँ अपवाद बनकर अवतरित हुई हूँ.”
Yes the Mahila Brigade must participate fully… but seems they only need “Vah-Vah” for their own posts.
also other Editors should comment and welcome newcomers….. by far I have seen only Nandan doing this…
आप सही कह रहें हैं साइलेंट जी। सारे एडिटर्स को कमेन्ट करना चाहिये। पर यकीन करिये, यह अनिच्छा की वजह से नहीं है। हम कमेन्ट करने में बेहतर होने की कोशिश करेंगे।
कविता जी, पहले तो घुमक्क्ङ पर आपका स्वागत है। और फिर देर से कमेन्ट करने के लिये मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
आपकी इन्साइट्ज़ पोस्ट बहुत महत्वपूर्ण टिप्स से परिपूर्ण है। सभी घुमक्कङों के लिये काफ़ी सहायक होगी।
सौन्दर्य प्रसाधनो में मैं अपने साथ ज़्यादा कुछ नहीं ले जाती सफ़र के समय। एक डियोडरेंट, लिपगार्ड, आईलाइनर, मौयस्चराइज़र, और वेट टिशूज़ ज़रूर रखना पसन्द करती हूँ।
मगर सभी की अपनी अपनी ज़रूरतें होती हैं। वैसे रोज़ के मेक-अप के समान के अलावा ज़्यादा कुछ काम नहीं आता सफ़र में। मगर मैं ऐसे लोगों को भी जानती हूँ जो हेयर-ड्रायर और हेयर-प्रेस भी साथ रखते हैं। :)
विभा जी,
इन सुन्दर शब्दों में उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय से धन्यवाद, देर से आये लेकिन दुरुस्त आये. सफ़र के दौरान सौंदर्य प्रसाधनों के मामले में आपकी पसंद मुझे बड़ी अच्छी लगी.
जहाँ तक कमेंट्स का सवाल है, यह मेरा व्यक्तिगत द्रष्टिकोण है की अपनी पोस्ट प्रकाशित होने के बाद हर लेखक को अगर किसी चीज़ का इंतज़ार होता है तो वो होता है पाठकों की प्रतिक्रिया का, पाठकों की पतिक्रियाओं से ही लेखकों को अपने लेखन में निरंतर सुधार और निखार लेन की प्रेरणा मिलती है.
लेकिन मुझे इस बात का दुःख है की घुमक्कड़ पर पाठकों की संख्या तो बहुत है लेकिन लेखकों के कार्य को सराहने वालों यानी कमेन्ट करने वालों की संख्या बहुत कम है, सिर्फ आठ या दस लोग ही नियमित रूप से कमेन्ट करते हैं. उन आठ दस कमेंटरों के अलावा जितने भी अन्य लेखक हैं वे अपनी पोस्ट प्रकाशित होने के बाद कुछ दिनों तक कमेंट्स का जवाब देने के लिए (वाह वाही बटोरने के लिए) ही घुमक्कड़ पर सक्रीय रहते हैं, और फिर ऐसे गायब होते हैं जैसे गधे के सर से सींग, फिर वे दुबारा घुमक्कड़ पर तभी सक्रीय होते हैं जब उनकी अगली पोस्ट प्रकाशित होती है.
ऐसे लोगों की पोस्ट पर हमारी भी कमेन्ट करने की इच्छा नहीं होती है. आशा है मेरी इस टिप्पणी के बाद इस श्रेणी के लोगों के व्यव्हार में कुछ बदलाव आये.
धन्यवाद.
I can speak for myself and what I do is that I try to read a story well and then try to comment on it in the best way possible. I personally think that this is what I owe to the Author for the great work he has done. I have full control on myself and I can strive to better my ‘aacharan’ but I must understand that I have no control on others’ time and intention, so I should never judge others. If someone is doing something or not doing something, it would be for a reason.
For last 5 years, I have seen folks who have been very very supportive, encouraging and have always left valuable comments on almost every story. But as you grow, sometimes you acquire new responsibilities (marriage, parenthood, difficult job, relocation to a new place etc) and it gets difficult to spend as much as time as you would want to. I have never doubted their intention and that keeps me going.
कर्मन्यावाधिकरास्ते माँ फलेषु कदाचन: :-).
शान्ताआत्मा जी आपका रिकार्ड है कि आप ज्यादातर लेख पर सबसे पहले अपना कमैंट दे दिया करते है, लेकिन जैसे ही मैंने आपका रिकार्ड बीच-बीच में तोडते रहने के बारे में कहा तो पता नहीं आप कहाँ शान्त होकर धरने पर बैठ गये है? जो कि नजर नहीं आ रहे है।
कविता जी आपने एक बात सबसे अच्छी कही है कि जब किसी कि अरे मैं तो कहता हूँ कि बल्कि ज्यादातर लेखकों की ही यही आदत हो चुकी है कि उनका अपना लेख आने से एक दो दिन पहले ही व एक दो दिन बाद तक ही कमैंट करने का कार्य करने की खानापूर्ति कर दी जाती है, उसके बाद 10-15 दिन तक और शायद महीनों तक भी उन लेखकों के दर्शन भी नहीं होते है यह परिपाटी बहुत ही गलत है, जैसे यदि मैं उसे कमैंट दूँगा तो वो मुझे कमैंट देगा। इस कार्य को अपने ब्लॉग की दुनिया में कहते है कि तु मेरी पीठ खुजा मैं तेरी पीठ खुजाऊ। बिल्कुल बन्दरों की तरह। अरे भाईयों और अपने भाईयों की बहनों(मेरी कोई बहन नहीं है) उठो अपने स्तर से थोडा ऊपर उठो, जहाँ दो तीन दिन में कोई लेख पढने वाले 500 से ज्यादा होते है वहाँ कम से कम अलग-अलग पाठक मिलाकर 50 का आंकडा तो हर हालात में पार होना ही चाहिए, जरुरी नहीं कि शाबासी दी जाये, लेख में कमी सलाह आदि बहुत से विषय होते है,
बस……………. अगर मैं जारी रहा तो यह कमैंट ना रहकर एक पोस्ट का रुप ले लेगा। पढे लिखे समझदारों को ईशारा ही काफ़ी होता है।
काविता जी नमस्कार,
आज आपका इनसाइट पढ़ा मैंने ,आपने काफ़ी ज्ञानवर्धक विषयों पर अच्छी चर्चा कि है …. कैमरा में मेमोरी और दवाएँ ले जाना ये उचित सलाह है ……… लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि घुमक्कड़ी का असली मजा तो उस जगह पर पहुँचकर ही सारे इंतेज़ाम करने में आता है …. बिना किसी नक्शे के , ….. वहाँ के निवासियों से बात करके , पैदल चल कर …. छोटी छोटी चीजों को समझकर …. जगह जगह रुक कर वहाँ के चित्र खींच कर …….. कई बार ऐसा भी होता है कि हमे वहाँ के निवासियों से ऐसी ऐसी सुंदर जगहों के बारे में पता चलता है कि हमारा प्लान वहीं बदल जाता है …….. इसलिए ट्रैवल प्लान करने में घुमक्कड़ी का असली मज़ा नहीं है
लेकिन अगर कोई अपने पूरे परिवार के साथ जाना चाहता है तो आपका ये लेख अत्यन्त ही लाभकारी साबित होता है.
और एक जरूरी बात ……… हमेशा एक 500 रु का नोट अपने जुराबो में रखना ना भूले …….. अगर कोई आपको लूट भी ले तो कोई गम नही ……. आप सुरक्षित घर तो पहुँच सकते है……
गिरिराज जी,
पोस्ट को पढने, पसंद करने तथा कमेन्ट करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. आपकी बात बिलकुल सही है, उन्मुक्त घुमक्कड़ी करने का मज़ा ही कुछ और है, बिना प्लान के बिना तैयारी के, लेकिन यह सब पारिवारिक घुमक्कड़ी के मामले में ठीक नहीं होता, क्योंकि बच्चे साथ होते हैं और ढेर सारा सामान भी साथ होता है.
आपका जुराब में रुपये छुपाने का आइडिया बड़ा अच्छा लगा, लेकिन जब मुसीबत आनी होती है तो सारी तैयारी धरी की धरी रह जाती है.
धन्यवाद.
This is really a very very helpful article for travellers. I am in travel trade and I suggest this page to my clients when they ask me what to carry during the trip. Thanks for this very very good article, it makes my work easy :).
Koustubh ji,
I am very glad to hear that my post is assisting you in your trade. It gave me immense pleasure. Thank you very much for your lovely words.
Thnx.
आपने काफी व्यवहारिक आलेख लिखा है। आपकी सोमनाथ द्वारका वाली पोस्ट हमारी गुजरात यात्रा के दौरान काम आई। हालांकि द्वारका के बारे कुछ जानकारियों में अंतर था। मैं पर्यटन पर ब्लाग लिखता हूं। http://www.daanapaani.blogspot.in मुझसे मेल पर संपर्क करें vidyutm@yahoo.com