History

Humayun’s Tomb & Lotus Temple…….

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It was just another busy week at the office and after much anticipation Sunday arrived. Movie session on Saturday night did the trick and we woke up late on Sunday Morning. So we abandoned our plan to visit the Lotus Temple in the morning and  decided to go to Humayun’s Tomb first….

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The land of monasteries and mysteries of God……

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I entered the ‘Spiti Valley – The Middle Land’ realizing that i have lost all the contact with the world outside. If everything goes according to the plan, it would be after 3 days i.e. on 7th Oct evening when I’ll get the network back upon reaching Manali. But for now let me enjoy the beauty of the Spiti Valley for the final 27 kms left to cover from Sumdo to Tabo. As the valley now divided into two parts ‘Light & Shade’ looked magnificent in the setting sun….

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ग्वालियर में घुमक्कड़ी- जय विलास पैलेस

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इन सीढ़ियों से उतर कर हम महल के दूसरे भाग में पहुँचते हैं।  यहाँ पर उस समय सवारी में प्रयुक्त होने वाल तरह -तरह की बग्घी रखी हुई हैं। यहाँ पर उस समय सवारी में प्रयुक्त होने वाल तरह -तरह की बग्घी , डोली आदि रखी हुई हैं।

इसके साथ  ही महल के दूसरे भाग में हम पहुँचते हैं जिसे दरबार हाल के नाम से जाना जाता है।  यहाँ पर राजसी भोजनालय है जहाँ पर एक साथ बहुत सारे लोगो के खाने की व्यवस्था है।  मेहमानों के  साथ यहीं पर खाना खाने का प्रबन्ध है।  दरबार हाल की चकाचौंध उस समय के राज घराने के वैभव और विलासिता की दास्तान कह रहे थे।  इसकी छत में लटके विशालकाय झाड़ – फानूस का वजन लगभग तीन – तीन टन है।  इसकी छत इसका वजन उठा पायेगी या नहीं इसलिए छत के ऊपर दस हाथियो को चढ़ा कर छत की मजबूती की जाँच की गई थी।  दरबार हाल में जाने की सीढ़ियों के किनारे लगी रेलिंग कांच के पायो पर टिकी हुई है।  एक गार्ड यहाँ पर बैठा दर्शको को यही आगाह करवा रहा था कि रेलिंग को न छुए।

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A rare visit to Tanjore & Namakkal in Tamilnadu

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One very popular fact about this temple is that the due to its height, the shadow of the gopuram (the temple structure on top) will never fall on the ground. Right opposite to the entrance of the sanctum sanctorum is the giant Nandi, remaining at the disposal of the god almighty.

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Hawaii (Oahu Island): Part 1

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Amongst the various sights we visited were the USS Arizona Memorial and the Battleship Bowfin. USS Arizona was a memorial built on top of the ship sunk and destroyed with around 700 people still on board. We were shown a historic video before a motorboat quickly took us to the USS Arizona.

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सरधना– मैरी का चर्च, बेगम सुमरू और उनका राजप्रासाद

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गेट के निकट ही गाड़ी दीवार से सटाकर खड़ी कर हम अपना कैमरे का बैग और पानी की बोतल लिए एंट्री को तैयार थे, लेकिन गेट पर तैनात दो लोगों ने रोकते हुए साफ़ पूछा कि “क्या आप लोग कैथोलिक हैं?”, हम प्रश्न के लिए तैयार नहीं थे, फिर भी हमने दृढ़ता से उनके प्रश्न का नकारात्मक उत्तर देते हुए अपनी सम्बद्धता स्पष्ट की. पर उसने हमें साफ़ तौर से एंट्री देने से मना कर दिया. कारण: संडे के दिन १२ बजे तक का समय प्रार्थना के लिए निर्धारित है और उसमे केवल क्रिस्चियन ही जा सकते हैं. और भी तमाम लोग एंट्री की अपेक्षा में वहां मौजूद थे.

कुछ देर बाद फिर से प्रयास करने पर गेटमैन ने एंट्री दे दी हालाँकि अभी १२ बजने में लगभग २० मिनट शेष थे.

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Memories of Mewar (III): Udaipur, City of Lakes and Palaces.

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After visiting the Kumbhalgarh Fort, Ranakpur, the Krishna Temples at Kankroli and Nathdwara, and the Sajjan Garh Palace, we were now on the last leg of our trip to Mewar, Rajasthan, and had two full days to take in the beauty of Udaipur, the City of Lakes and Palaces. This beautiful city is also sometimes referred to as the ‘Venice of the East’, ‘Most Romantic City of India’ and ‘The Kashmir of Rajasthan’.

Udaipur was the capital of the kingdom of Mewar, ruled by the Sisodia clan of Rajputs. The founder of Udaipur was Maharana Udai Singh II, father of Maharana Pratap. Udaipur was founded in 1559, when a hermit blessed the king and asked him to build has palace at a spot on the east ridge of the Pichola Lake. In 1568, the Mughal emperor Akbar captured Chittaurgarh, and Udai Singh moved the capital to the site of his new residence, which became the city of Udaipur. As the Mughal empire weakened over the years, the Sisodia Maharanas recaptured most of Mewar district. Udaipur remained the capital of the state, which became a princely state of British India in 1818.

After India’s independence in 1947, the Maharaja of Udaipur acceded to the Government of India, and Mewar was integrated into India’s Rajasthan state.

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Montreal City tour

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On Saturday we had started our journey.Our train departure time was 0645 from Toronto (Union station ).Business class coaches were quite good , spacious and clean . We were given warm welcome and assistance by VIA Rail friendly staff.The difference in Business class and Economy class here is only food.In Business class food is included where as in Economy class we have to buy food.As a usual routine we got our tea , biscuits and later breakfast in train.In the end they had served complimentary wine.It was a 05 hour journey and we reached Montreal at 1200 noon.As we were entering in the Montreal City we can feel just by looking at the road , houses and other infrastructure  that it is a completely different city not similar to Toronto.
When we were booking our Hotel we thought of two factors; one is cost/location i.e. distance from railway station as our return train was also early morning train.Secondly as were not able to decide on Hotels as per reviews posted in Google we decided to go for a chain and brand Hotels which are tried and tested.Thus we finally booked our room in Sheraton Hotel Montreal.Our decision of choosing a Hotel Near Central station and close to city centre helped us a lot as we have not used any public transport / Cab service in Montreal.So we walked from station to Hotel.It was a 06 minutes walk.

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ग्वालियर में घुमक्कड़ी – ग्वालियर का किला

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कुछ कदम आगे बढ़ता हूँ तो देखता हूँ कि किले की तरफ जाने वाली पतली सी सड़क के एक तरफ, पत्थर की चट्टानों को काट कर जैन समुदाय के तीर्थकरों कि मूर्तियां बनाई गईं हैं। इनमे से कई मूर्तियों भग्न अवस्था में थीं जिन्हे शायद किले पर विजय प्राप्त करने के बाद मद -मस्त मुस्लिम आक्रान्ताओ ने इस अवस्था में पहुँचाया था। यह बहुत ही कष्टप्रद विषय है कि इस्लाम को मानने वाले अविवेक में अपने विजयी दंभ को वह इन पत्थरो पर निकालने लगते है। एक तरफ तो यह मुग़ल अपने आप को कला प्रेमी के रूप में स्थापित करने की चेष्टा करते हैं और दूसरी तरफ चट्टानों पर की गई इन कलाकृतियों को नष्ट करते हैं। मंगलवार का दिन था इसलिए बहुत कम लोग ही किला घूमने के लिए जा रहे थे। छुट्टी का दिन होता तो शायद यहाँ पर भीड़ देखने को मिलती। वह दोनों युवक-युवती मुझे रास्ता बता कर तेजी से आगे बढ़ गए। मेरे पीछे एक विदेशी युवती भी चट्टानों को काटकर बनाये गए इन जैन तीर्थकारों को देखती हुई आ रही थी। मै धीरे – धीरे चढ़ाई पर चढ़ता हुआ आगे बढ़ रहा था पर मुझे दूर – दूर तक किला कही नहीं दिख रहा था। इतनी चढ़ाई चढ़ने के बाद मन ही सोंच रहा था कि इतनी चढ़ाई पर किला बनाने का अभिप्राय शायद यही होता होगा कि जल्दी तो किसी दुश्मन की हिम्मत ही नहीं होती होगी इतनी चढ़ाई पर चढ़ कर हमला करने की और अगर किया भी तो पहले ही उसकी सेना इतनी पस्त हो चुकी होती है कि जीत की बहुत कम ही गुंजाइश होती होगी। दो – तीन सौ गज या कुछ ज्यादा की चढ़ाई चढ़ने के बाद एक और गेट दिखाई पड़ता है। किले के दूसरे गेट से करीब 200 गज आगे आने पर चढ़ाई ख़त्म हो जाती है। यहाँ पर भी एक गार्ड रूम है। यहाँ पर एक प्राइवेट टैक्सी वाला बैठा था। किला और किले के अंदर उसके आस – पास की जगह घुमाने के लिए इसने 250 रूपये मांगे। इतनी चढ़ाई चढ़ने के बाद अब और आगे चलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मैंने कहा कि पीछे भी कुछ एक लोग आ रहे हैं उनसे पूछ लो अगर वह लोग चले चलेंगे तो हम लोग आपस में शेयर कर लेंगे । तभी वह विदेशी युवती भी आ गई।ड्राइवर ने उसके पास जाकर शेयर टैक्सी किराये पर लेने के लिए कहा पर वह उसकी बात ठीक से समझी नहीं तब मैंने उससे कहा कि अगर हम लोग यह टैक्सी शेयर कर ले तो सब जगह घूम लेंगे। यह टैक्सी वाला 250 रूपये मांग रहा है आधे – आधे हम लोग दे देंगे। वह युवती भी शायद थक गई थी , वह राजी हो गई।

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विराट नगर – पांडव अज्ञातवास का साक्षी, बौद्ध साक्षात्कार का बीजक और एक झांकता मुग़ल कालीन झरोखा

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जयपुर से विराट नगर के लिए सुबह सात बजे वाली बस मैं बैठकर 9 बजे पहुँच गया। विराट नगर जाने का मेरा केवल एक ही उद्देश्य था और वो था बीजक की पहाड़ी पर बना हुआ करीब 2500 हज़ार साल पुराना बोद्ध स्तूप। यह एतिहासिक स्मारक विराट नगर बस स्टैंड से करीब ३ कि .मी की दूरी पर एक ऊंची पहाड़ी के ऊपर बने एक समतल धरातल पर स्थित है। इस पहाड़ी पर तीन समतल धरातल है। सबसे पहले वाले पर एक विशाल शिला प्राकृतिक रूप से विद्यमान है जिसका स्वरूप एक डायनासोर की तरह प्रतीत होता है।

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