Sirsi and Sahasralinga , शिरसी और सहस्रलिंग

शिरसी और सहस्रालिंग :- शिवशक्ति का निवास

सुबह ६.३० बजे के करीब गोकर्ण,बायीं बाजू में हमारी सावित्री होटल और सामने देखिये मंदिर है.

हम शाम को कुछ 5 बजे मुरुडेश्वर स्टेशन पहुँचे और वहाँ से हमारी ट्रेन 5:40 मिनिट पर गोकर्ण जाने के लिए थी। हमने मत्स्यगंधा एक्सप्रेस पकड़ी जो मंगलौर से मुंबई की ओर जाती है। हमें उस ट्रेन ने गोकर्ण रोड 6:30 शाम को पहुँचा दिया (60 किमी) गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन से गोकर्ण शहर कुछ 13 किमी के अंदर है। वहाँ से हमें शेयरिंग आधार में वाहन मिलते है लेकिन क्योंकि हमें होटल भी गोकर्ण जा कर बुक करना था इसलिए हमने एक प्राइवेट टेक्सी कर ली थी। उस टेक्सी ने हमें करीब आधे घंटे में गोकर्ण शहर पहुँचाया दिया था। फिर हम होटल ढूँढने लगे, वैसे गोकर्ण में बहुत सारे होटल है लेकिन मुझे तो हर बार की तरह मंदिर के सामने वाले होटल ही ज्यादा पसंद आते है। हमने तीन चार होटल देखने के बाद होटल सावित्री मिल गया, जो कि मस्त बड़े बड़े कमरों वाला, काफी साफ़ सुथरा था, और मंदिर से केवल 3 मिनिट की दूरी पर था। जब चाहो भोलेनाथ के दर्शन करो, गरम पानी की सुविधा थी लेकिन हमारे कमरों में टीवी नहीं था, टीवी वाले रूम सब फूल थे, मैंने उस होटल के मालिक से बात करके रू 400 में कमरा का भाड़ा तय करके 2 कमरे बुक कर लिए। और गजब देखो, यह होटल गोकर्ण महाबलेश्वर मंदिर के मुख्य पंडित जी की थी। होटल के मालिक यानी पंडितजी मंदिर में गोकर्ण महाबलेश्वर आत्मलिंग की रोज सुबह सुबह पूजा करते है और आरती भी। और बाकि काफी बड़ी-बड़ी पूजा भी जैसे की पिंड दान, महारुद्राभिषेक, होमान्तक यज्ञ इत्यादि। तो जिस व्यक्ति को गोकर्ण महाबलेश्वर आत्मलिंग की पूजा, अभिषेख और यज्ञ कराने है तो कृपया होटल सावित्री में ही ठहरना चाहिए ताकि आपके सारे काम एक साथ आसानी से संपन्न हो जायेंगे।

हमारा आगे का प्लान शिरसी और याना जाने का था क्योंकि अगले दिन अब हम गोकर्ण में पूरे 2 दिन रहने वाले थे। शिरसी गोकर्ण से करीब 100 किमी दूर एक हिल स्टेशन है और कर्नाटक का मुख्य शक्तिपीठ भी है। इस शहर की परिधि में काफी नदियाँ शुरू होती है और यहाँ करीब 10-12 प्रसिद्द झरने है। गोकर्ण से यहाँ जाने के लिए हमें कर्नाटक स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसों का सहारा लेना पड़ता है। गोकर्ण से शिरसी जाने  वाले मार्ग के बीच में एक याना क्रोस आता है। यहाँ से हम याना के लिए जा सकते है। याना वह जगह है जहाँ भगवान भोलेनाथ भस्मासुर से दूर जाकर एक गुफा में छिप गए थे और वहाँ भगवान विष्णु ने भस्मासुर को अपनी चतुराई से भस्म किया था। मुझे यह जगह देखने की बहुत इच्छा थी। लेकिन यह जगह बहुत असमीप थी। यह गाँव मुख्य हाइवे से 15 किमी अंदर बहुत घने जंगल में था, और यहाँ बसे केवल दिन में 2 बार आती है, तो हमें अगर जाना होगा तो गाडी में जाना होगा अगर याना और शिर्शी पूरा देखना हो तो।

यही बात मेरे दिमाग में चल रही थी, इसलिए जब मैं गोकर्ण रोड स्टेशन से गोकर्ण आ रहा था टेक्सी में, तब मैंने उसके ड्राइवर से पूछ लिया तो उसने पूरे टूर के रू 1500 कहे जो मुझे लगा की बढ़िया है। अगर दो भागों में विभाजित करते है तो प्रति परिवार रू 750 होते है। मैंने मुकेश को कहा तो उसने कहा की वह बहुत थक गया है मुरुडेश्वर घूमकर। ऊपर से कैमेरा ठीक होगा की नहीं उसका टेंशन। मैंने फिर से पूछा की चल भाई याना, शिरसी और सहस्रलिंग कभी वापिस आने मिलेगा या नहीं कौन जाने? गाडी में जायेंगे और वापिस आ जायेंगे, थकान नहीं होगी। उसने कहा की फिर कभी भगवान बुलायेंगे तो जरूर जायेंगे। शायद बहुत थक गया होगा मुरुडेश्वर के बीच पर स्नान करके। शायद पहली बार उनके परिवार ने बीच पर स्नान किया था उस दिन। और हाँ यह बात तो सच है कि बीच पर स्नान करने से थकान जरूर महसूस होती है।तो गाडी करने की संभावना अब नहीं हो सकती है और हमे बस में जाना होगा । ठीक है मैंने सोनाली को कहा तो उसने भी मना कर दिया और कहा की बस में वह नहीं आएगी। क्योंकि उसे उल्टी होने की तकलीफ है और मार्ग भी ऊपर चढाई का है तो टेढा-मेढा तो होगा ही। अब यहाँ पर मुझे लगा की “सब लोगो ने मुझे कल्टी दी”(मुंबई भाषा में), अब क्या किया जाए?

जय हो मरिकम्बा देवी की ! मैं अकेला ही जाऊँगा, देवी के दर्शन के लिए और वह भी बस में। अब इस बार मेरा याना जाना रह ही गया। लेकिन सिर्फ एक मौक़ा और मिला तो मैं वहाँ जाकर ही रहूँगा इस बार अपने लिए। अब आने वाली यात्रा में किसी की सुनूँगा नहीं, भक्ति, दर्शन और घुमक्कडी नहीं करने के लिए तो कभी नहीं। जाना है तो जाना ही है।

लेकिन इससे एक बात का फायदा भी हो गया था कि मैं कुछ घंटो के लिए अपने मर्जी का मालिक भी बन गया था। तीन दिन से लगातार दूसरों के लिए घुमक्कडी का प्लान कर रहा था और उन्हें घुमक्कडी करवा रहा था। सचमुच बहुत बड़ी टेंशन होती है जब आप जिम्मेदार होते हो। यह तभी पता चलता है जब आप जिम्मेदारी अपने सर पर लेते हो। ऐसे ही कह देना कि प्लान करना बहुत सरल होता है। लेकिन एक-एक छोटी बात का ख्याल प्लानर को करना होता है। आपको अपने मजे और ख्याल से ज्यादा सामने वालों की छोटी-छोटी बात का भी ख्याल करना पड़ता है। क्या खाना है, क्या पीना है, कहाँ सोना है? सुबह का रूटीन, नहाना, पूजा करना, नाश्ता इत्यादि। यह सबसे ज्यादा कठिन और तकलीफ दायक होता है। इसके बावजूद आपको एक बहुत बड़ा सुकून भी मिलता है कि आप निष्काम भाव से किसी की सेवा कर रहे हो। इसलिए थोड़ी देर के लिए ही सही  में जिम्मेदारी से मुक्त हो गया तो मेरे दिमाग को भी थोडा आराम मिला। आगे भी 4-5 दिन तक मुझे ही सब को संभालना था।

चलिए तो अब चलते है मेरे यात्रा विवरण पर। मैंने होटल में सामान रखा और हमेशा कि तरह थोडा घूमने निकल गया जगह देखने और परखने के लिए। गोकर्ण बहुत ही सुंदर समुद्री गाँव है, यहाँ आकार आपको शान्ति का आभास होगा. मुझे गोकर्ण से ज्यादा इस वक्त मेरे सिरसी जाने की ज्यादा चिंता हो रही थी। तो मैं सीधा पहुँच गया बस स्टैंड, वहाँ पता किया तो कहा कि पहले कुम्ता (गोकर्ण से 21 किमी) जाना होगा और फिर वहाँ से बस बदलनी होगी शिरसी  के लिए। लेकिन एक बस ड्राइवर ने कहा कि सुबह एक बस जाती है डाइरेक्ट शिरसी के लिए। सुबह 7:30 बजे। मैंने कहा वाह! याना के बारे उन्होंने पहले ही कह दिया कि बिना गाडी के मत जाओ जंगल वाले इलाके में अकेले। मैंने सोचा ठीक है चलो जाते है शिर्शी सुबह-सुबह। अब मैंने कुछ खाने पीने के होटलों के बारे में सूचना लेकर रूम पर चला गया। रात को खाना खाया और सो गए। इस तरह 18 तारीख मार्च 2012 कि खत्म हो गयी थी।

19 मार्च 2012 

मैं सुबह जल्दी उठ गया 5:00 बजे, मेरे मन में शिरसी जाने का उत्साह था। लेकिन उससे पहले मैं गोकर्ण महाबलेश्वर के दर्शन करना चाहता था। जल्दी जल्दी फ्रेश और स्नान करके, कैमरा लेकर मैं चल दिया मंदिर कि ओर। मंदिर सुबह 6 बजे शुरू होता है। भोलेनाथ शिवजी के आत्मलिंग मंदिर के सामने श्री महागणपति जी का भी मंदिर है जिनकी वजह से यह आत्मलिंग यहाँ स्थापित है। तो यहाँ के लोगों की प्रक्रिया अनुसार पहले गणपतिजी के दर्शन करने चाहिए और फिर गोकर्ण मह्बलेश्वर के। मैंने भी वैसा ही किया था। यह दोनों मंदिरों के विवरण मैं आपको बाद में बताऊँगा, पहले ले चलता हूँ आपको शिरसी  की यात्रा पर। दोनों मंदिरों के दर्शन करके मैं सीधा चला बस स्टॉप पर, अब बस स्टॉप पहुँचते ही करीब 7 बज गए थे करीब आधा घंटा था बस के लिए। तो मैंने सोचा क्यूँ न भद्रकाली मंदिर चला जाए। आपको मैंने जो गोकर्ण कि कहानी बताई थी उसमे भद्रकाली कि महिमा बताई थी तो चलो मैं आपको भद्रकाली माँ के दर्शन कराता हूँ. भद्रकाली मंदिर गोकर्ण बस स्टॉप से एक किमी कि दूरी पर है। मैं वहाँ जल्दी जल्दी चला माता के दर्शन किये फोटो खींचे और फिर आया बस स्टॉप पर।

भद्रकाली माता का मंदिर

भद्रकाली माता की मूर्ती के दर्शन – बोलिए जय माता दी

गोकर्ण से शिरसी :- बस स्टॉप से बस निकलने ही वाली थी कि मैं वहाँ बस पहुँच ही गया और बस में बैठ गया। अब यहाँ से शिरसी (100 किमी) यानी करीब तीन घंटे लगेंगे। रास्ते में मैंने कुछ वहाँ के बागान कि तस्वीरे ली और फिर करीब 20 किमी जाने के बाद घना जंगल शुरू हो गया, जंगल इतना घना था कि सच में वहाँ पेडों के बीच में आदमी भी ना जा सके। खचाखच पेडों से भरा जंगल बहुत डरावना लग रहा था। साथ में जीव जंतु की आवाजे भी आ रही थी, बीच में मुझे याना क्रोस भी दिखाई दिया जहाँ से याना के लिए जा सकते है। भोलेनाथ और हरी को बस में बैठे बैठे प्रणाम किया और चला शिरसी कि ओर बीच में बंडाला नाम का एक गाँव आता है, वहाँ मैंने नाश्ते के तौर इडली खाई। 10 मिनिट के बाद बस फिर चल पडी थी।

गोकर्ण से शिरसी जाने वाले मार्ग में गाँव . ज़रा इस तरह के घर तो देखिये . थोड़े दिनों में यहाँ भी सीमेंट के बंगले दिखाई देंगे .

घना जंगल शिरसी जाते वक्त – पूरे रास्ते इससे भी घना जंगल से पार करना होता है.

करीब 10 बजे मैं पहुँच गया शिरसी  और वहाँ पहुँचते ही जल्दी-जल्दी मरिकम्बा माता के मंदिर के बारे में रास्ता पता किया।

लो देख लो शिरसी शहर के मुख्य चौराहे का नाझारा

माता के दर्शन किये और प्रणाम किया। जोर से जयकारा लगाया, बोलो जय माता दी।

मरिकम्बा मंदिर का मुख्य द्वार

माता के मंदिर का हाथी

शिर्शी की देवी मरिकम्बा :- यह देवी का मंदिर 1688 में बना गया है। यहाँ लोग केवल कर्नाटक से ही नहीं बल्कि बहुत सारे राज्यों से आते है। हर 2 वर्ष में यहाँ एक उत्सव होता है जब सब लोग देवी कि मूर्ती को बाहर निकालते है और उसे शिर्शी के जंगल में घुमाते है कुछ 7 दिन के लिए। जहाँ से इस मूर्ती कि खोज हुई थी कुछ चोरों द्वारा। कुछ चोर अपना खजाना छुपाने के लिए जंगल में खुदाई कर रहे थे तब उन्हें यह मूर्ती मिली थी और उन्होने शिर्शी में स्थापित कर दी थी। मंदिर बहुत ही बड़ा है और पूरे मंदिर में सफ़ेद रंग पर लाल रंग के भव्य चित्र है। काफी बारीकी से की गयी है पेंटिंग। आप बारीकी नीचे दिए गए फोटो में देख सकते है। माता की मूर्ती करीब 7 फ़ुट की है और नारंगी रंग की है, उसे भव्य आभूषणों से सजाया गया है।

मंदिर में लाल रंग की पेंटिंग से बहुत सारी गाथाओं का वर्णन किया गया है.

पेंटिंग में बारीकियां देखिये,पुरे  मंदिर की दीवारो को ऐसी सुंदर और बारीकी से की गयी पेटिंग से शोभा गया है.

बलि प्रथा :- यहाँ पर एक प्रथा थी जिसे हम बलि प्रथा कहते है। यहां पर भैस, बकरी आदि जानवरों की बलि चढ़ा कर माता को उनका लहू पिलाते थे। कुछ साल हो गए है जब से यह प्रथा बंद हो गयी है। यहाँ मंदिर में एक मोटा भैसा बंधा है जिसका लहू इंजेक्शन से निकाल कर माता को चढाते है। यह बात मेरी समझ से बाहर है। मेरी इस पर कोई टिपण्णी नहीं है। मैंने केवल आपको जानकारी दी है। चलो मरिकम्बा माता के दर्शन कर लो .

मरिकम्बा देवी का भव्य और सुंदर  चेहरा, वहा उस पल आपको लगेगा कि बस माता को देखते ही रहे .

मरिकम्बा देवी की ७ फूट लंदी सुंदर और भव्य मूर्ती 

ऊपर वाला देवी के चित्र का श्रेय :- ऊपर वाली फोटो मंदिर की वेबसाइट के ” download ” section  से ली गयी है .

वेबसाइट  :- www.marikamba.org

शाल्मला नदी पर सहस्रलिंग :- अब माता के दर्शन के बाद मैं चला एक जगह जिसे कहते है सहस्रलिंग कहते है। सहस्रलिंग शिरसी  से करीब 12 किमी दूर शिरसी – येल्लापुर हाइवे से कुछ अंदर है, यहाँ आप बस नहीं तो शेयर ऑटो करके आ सकते है। सहस्रलिंग पत्थरों से बनाए गए 1008 शिवलिंग है जो शाल्मला नदी पर स्थित है। इसके इतिहास के बारे में मैंने बहुत जाने कि कोशिश कि लेकिन मुझे ज्यादा पता नहीं चल पाया, लेकिन एक बात यहाँ आकर आपका मन जरूर शिवमय हो जाएगा इस बात कि गारंटी देता हूँ। बहती हुई शाल्मला नदी स्वयं इन शिवलिंगों का अभिषेक करती है 24 घंटे। घने जंगल, पवित्र वातावरण, शाल्माला नदी कि खडखडाहट के बीच स्थित यहाँ बड़ा भव्य आभास होता है। यहाँ हर शिवरात्रि पर बहुत भीड़ रहती है। पिकनिक के हिसाब से भी यह बहुत बढ़िया स्थल बनता है नहाने और मौज मस्ती के लिए। शहर से दूर आप काफी आनंद और अध्यात्मिक शान्ति का आभास कर सकते होता है । अब आप इस स्थल का दर्शन कर ले । ओम नमः शिवाय ।

शाल्माला नदी और सहस्रलिंग

सभी पठारो पर शिवलिंग – सहस्रलिंग 

नदी द्वारा होता है अभिषेक :- सहस्रलिंग

 खूबसूरत नक्काशी – सहस्रालिंग

नंदी और भोलेनाथ :- सहस्रलिंग

 और देखिये सहस्रलिंग

भगवान राम और सीता मैय्या शिवलिंग की पूजा करते हुए :- सहस्रलिंग

शाल्माला नदी और सहस्रलिंग

आपको इस जगह का आभास कराने के लिए एक विडियो डाल रहा हूँ ताकि आपको भी इस जगह के वातावरण का कुछ आभास हो जाए.

यहाँ से दर्शन करके मैं शिरसी  आया तब 11:30 बज गए। अब जाने का वक्त आ गया था। वैसे शिरसी  में करीब 15 जगह है जहा पर आप घूम सकते हो और प्राकृतिक जंगलों, पशुओं और नदियों का आनंद ले सकते हो, लेकिन मेरे पास समय नहीं था और मुझे और भी जिम्मेदारियाँ थी इस यात्रा को पूरा करने की। इसलिए मैंने वापिस जाना ही उचित समझा, वरना 2-4 जगह तो देख ही सकता था।

वैसे आपके लिए मैंने कुछ जगह जो देखने लायक है उसके नाम निकाल के रखे है। आप लोग गोकर्ण जाए तो सिरसी  जाना न भूलिए वह भी गाडी से क्यूंकि एक ही दिन में आप करीब 10 से 15 जगह देख सकते हो, प्राकृतिक सौंदर्य और नयापन की गारंटी मैं देता हूँ।

शिरसी के नजदीक में घूमने के लिए सुंदर स्थान

1) याना 2) सहस्रलिंग 3) शिवगंगा फ़ाल्स 4) बुरुदे फ़ाल्स 5) बेन्नी होले फ़ाल्स 6) मतिघट्टा फ़ाल्स 7) पंचलिंग 8) वाते हल्ला फ़ाल्स 9) मुरेगार फ़ाल्स 10) द्रोणागिरी 11) जोग फ़ाल्स 12 ) बनागेरे फ़ाल्स 13 ) गिलिगुन्दी गुफा 14) कुम्ब्री गुड्डा 15) मब्गी फ़ाल्स.

अब मैं चला फिर से गोकर्ण की ओर, यहाँ आते वक्त मुझे मंजुनाथ नायक मिला था जिसने मुझे चित्र और गोकर्ण की कहानी बताने में बहुत मदद की, मैं कुछ 2:00/ 2:30 बजे गोकर्ण पंहुचा था, वहाँ जाकर पता लगा  कि मुकेश के परिवार और सोनाली ने जी भरके भोलेनाथ गोकर्ण महाबलेश्वर का अभिषेख किया और बीच पर फिर से स्नान किया. चलिए शिरसी नहीं आये लेकिन खूब मजा तो आया उनको . मेरा काम हो गया. फिर कुछ 4 बजे मैंने ओम बीच का प्लान बनाया जो गोकर्ण से 5 किमी की दूरी पर था, जिसके बारे में अगले लेख में बताऊँगा।

तब तक के लिए …………..जय राम जी की, जय भोले नाथ

16 Comments

  • JATDEVTA says:

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    • Jai Bhole Nath,

      Guptaji, Sahatraling darshan karke itne Shivmaya ho gaye ki hamare Vishalji ko Vinodji naam de diya.

      Rathod Sir, what a beautiful description, no words to explain about the pics of Shivlingas. Thanks to enable us to accompany this ‘MAHAYATRA’ .

      Once again : Vayam Shivmayam, Shankarmayam sahatralingamayam ch:

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  • Mahesh Semwal says:

    I never heard about these places , thanks for sharing the unexplored place with us.

    Shivlings on stones are natural or man made?

  • Raman Kumar says:

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  • SilentSoul says:

    Vishal thanks for introducing to a new place. I have never heard names of these places. The sahasralinga is really awesome and seeing their fotos made me tingle in spine.

    I am surprised who made these 1000 lingas that too in a river. I am sure some old karnataka fellow would be able to tell. anytime you know the history of these lingas do let me know.

    thanks for sharing this wonderful place

  • Surinder Sharma says:

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  • Ritesh Gupta says:

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  • Nandan Jha says:

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  • D.L.Narayan says:

    Dear Vishal,

    Thanks for sharing the beautiful visuals of the Sahasralinga teerth with us. I have heard about it but you have revealed the beauty of this place and makes me want to go there as soon as possible.

    The story about the place is that a local Raja was advised by his astrologer/purohit to carve a thousand lingas on the rocks on the Shalmala river in order to get a male child. He did it and his prayers were answered. I do not have anything more specific about this amazing but little known place.

  • Thank you all the readers for your comments and appreciation . Well Sirsi and Sahasralinga are awesome places near Gokarna . Apart from these two there are lot many more places . Two days are more than enough to visit all these places in a car. Morever these places have natural beauty and environment. So mind remains peaceful calm and relaxed.

    About the history I tried a lot find it when I went there, but since there was no rush , only some local people from Karnataka had come to see Sahasralinga. When I asked them no one knew Hindi or English :- (

    So @ Mahesh jee ,@ Ramanjee I was unable to write in the post about its history . Any ways D.L. has written something about it. Thanks D.L.

    I am also waiting for our fellow ghumakkar Mr. Venkatt to comment . Probably he might definitely know about this place . Dear Venkatt jee if you read this post , please find and comment us about the history of this place.

    Thanks once again for reading

  • Mukesh Bhalse says:

    Vishal,
    One of the brilliantly written post. The sculpture of Shivlinga, Nandi and Raam, Sita on rocks in a river is amazing.

    While going through the pictures I thought by denying to accompany you I have missed a big opportunity of having view of these mysterious shivlingas.

    Thank you very much for sharing such beautiful pictures with us.

  • Hi Vishal,

    You know, staying away from home and reading (re-reading actually) about a town close to your “Home” gives you some kind of thrill :) Being a Kannadiga myself, I instantly got attracted to the kannada text in some of your pictures. Good feeling!

    I have heard a lot about the temples in Sirsi, I havent been there though. I have a lot to see in that belt. Mangalore (the beeches) , karwar etc are the only ones I have seen in South Canara region. Thanks for the virtual touring !

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