December 22, 2012
By: Vishal Rathod
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 10 October, 11 November, 12 December, Allahabad, Best Time, FoG, Historical, Nature, Religious, Roads, Uttar Pradesh, Varanasi
Dear Soul Mates,
For people who love serenity and want to feel emotional vibrations of almighty , this place is never to be missed. This is my last post this year and I wish you all a Merry Christmas and Happy New Year . I am going on a small ghumakkari and will be back next year with more of travelogues. Till then enjoy my final post on this place of mythological and spiritual significance.
We finished our Vindhyavasini Dham at around 10 oclock and then moved towards our next destination that was Sitamarhi in Uttar Pradesh. Before going to Sitamarhi I will tell you that there are two places named identically as Sitamarhi. One is in Bihar where Sita, the wife of Lord Rama sprang to life out of an earthern pot, when Raja Janak was ploughing the field somewhere near Sitamarhi to impress upon Lord Indra for rain. It is said that Raja Janak excavated a tank at the place where Sita emerged and after her marriage set up the stone figures of Rama, Sita and Lakshman to mark the site. This place is in Bihar near Nepal Border.
The other place is one where Sita Maa goes underground after spending the life in forest in Valmiki Ashram after the Ramayana war in Uttar Pradesh . Here in this post I am going to show you the place where she goes underground. It is also called as ” Sita Samahit Sthal” ” “Sitamani” “Sitamadhi” site where she was enveloped with Goddess Bhagwati Prithvi Devi.
Here below in the Map I have shown you the detailed map how to go about from Vindhyachal, Mirzapur, Allahabad and Varanasi.

Sitamarhi , Sita Samahit Sthal , UP Map
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November 19, 2012
By: Jatdevta
Category: 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Chamba, Dehradun, Dhanaulti, Gangotri, Haridwar, Mussorie, Uttarakhand, Uttarkashi
वर्ष सन 2003 में फरवरी माह के आखिरी सप्ताह की बात है। कुछ दोस्तों ने कहा कि “संदीप भाई चलो महाशिवरात्रि नजदीक आ रही है कही घूम कर आते है”। मैंने कहा ठीक है चलो लेकिन मेरी एक शर्त है कि जहाँ भी जाना है, बाइक पर ही चलेंगे, अगर मानते हो तो मैं तैयार हूँ। उन्होंने कहा अरे भाई आपने तो हमारे मन की बात कह दी है, हम भी तो बाइक पर ही जाना चाहते है, लेकिन कोई साथ जाने वाला मिल ही नहीं रहा है। इसलिये तो हम आपके पास आये है। तो दोस्तों इस तरह यह बाइक यात्रा तैयार हो गयी थी। इस bike trip में कुल तीन बाइक शामिल हुई थी। जिसमें से एक बजाज की, दूसरी एलमएल की, तीसरी अपनी हीरो होंडा।

सुरकन्डा देवी में भयंकर बर्फ़
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November 10, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, Best Time, Dehradun, Delhi, StatesOfIndia, Uttarakhand
लोग कहते है कि घुमक्कडी में पैसे खर्च करना फ़िजूल खर्ची है लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। दूसरी बात पैसे खर्च करके भी कोई साधु महात्मा जितनी घुमक्कडी और भी करता होगा। मुझे नहीं लगता। जबकि मैं हमेशा कहता आया हूँ कि घुमक्कडी किस्मत से मिलती है समय व पैसों से नहीं, लेकिन कई लोग ऐसे भी मिल जायेंगे जिन्हे मेरी इस बात पर भी आपत्ति होगी। ऐसे लोगों को उनके हाल पर छोड देनी में ही अपनी भलाई है। जिससे मैं अपनी मनमौजी घुमक्कडी पर लगा रहता हूँ। तो चलिये दोस्तों आज आपको अपनी ऐसी पहली घुमक्कडी के बारे में बताता हूँ जिसमें मेरे साथ कई और युवक व युवती भी गये थे। युवती के फ़ोटो मैं नेट पर लगाना नहीं चाहता हूँ अत: कोई इस बारे में कुछ ना कहे। बात सन 2003 के दिसम्बर माह के आखिरी सप्ताह की बात है। मेरी मौसी व मामा का परिवार देहरादून में ही रहता है जिस कारण वहाँ साल में दो तीन बार आना-जाना हो ही जाता है। इसी तरह उपरोक्त तिथि को मेरी मौसी की लडकियाँ जिनकी ससुराल हमारे घर से 4-5 किमी दूर ही है। मौसी की लडकियों ने फ़ोन कर मुझे बताया कि वह व उनका देवर कुछ अन्य दोस्तों के साथ मसूरी घूमने जा रहे है। अगर तुम्हे चलना है तो शाम तक बता देना, क्योंकि रात को यहाँ से चल देना है।

कैम्पटी में काफ़िला।
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September 16, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 10 October, 11 November, Best Time, Gangotri, StatesOfIndia, Uttar Pradesh, Uttarakhand
गंगौत्री मन्दिर देखने के बाद, अगले दिन आसपास के स्थल देखने की चाह मन में उठ रही थी। मैंने भाई को कहा कि कल मैं यहाँ घूम लेता हूँ, उसके बाद परसो गौमुख चले चलेंगे। हमारी बाते भाई के स्टाफ़ के दो अन्य साथी पुलिसवाले भी सुन रहे थे। उन्होंने कहा कि गौमुख तो हम भी जाना चाहते है। मैंने कहा ठीक है चलना है तो कल तो नहीं, परसो तो पक्का चलना ही है। क्योंकि मैं कल यहाँ घूमना चाहता हूँ। इस तरह हमारी गौमुख यात्रा के लिये चार मस्त-मलंग की मस्त चौकडी जाने के लिये तैयार हो गयी थी। अगले दिन मैं सुबह-सुबह उठकर पुलिस चौकी के ठीक सामने सूर्य कुन्ड नाम की जगह जा पहुँचा, मुझे भाई ने बताया गया था कि यहाँ सुबह-सुबह इस झरने नुमा पानी की धार पर जब सूर्य की किरणे पडती है तो यह शानदार इन्द्गधनुष बनाती है। मुझे वह इन्द्रधनुष आज भी अच्छी तरह याद है कि कैसे सूरज की रोशनी पडते ही वहाँ उस झरने नुमा भागीरथी की तेज पानी की धार में उठते पानी की फ़ुहार में सात रंग अलग-अलग दिखाई पड रहे थे। मैं वहाँ सात-आठ दिन रहा था और शायद ही मैंने कोई दिन उसे देखे बिना जाने दिया हो। इसको देखने के बाद मैं आसपास के बाकि स्थल देखने के लिये चल पडा।

गंगौत्री से ग्यारह किमी आगे
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September 04, 2012
By: Jatdevta
Category: 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 09 September, 10 October, 11 November, Asia, Chamba, Dehradun, Gangotri, Haridwar, Rishikesh, StatesOfIndia, Uttarakhand, Uttarkashi
टैम्पो में हल्का सा झटका, सडक पर आये छोटे से गडडे में पहिया आने के कारण महसूस हुआ था। जैसे ही झटका लगा, मैंने पीछॆ मुडकर देखा तो काली सायी रात में ठीक से यह भी दिखाई नहीं दिया था। कि असली में वह गडडा था या कोई छोटा सा पत्थर पडा हुआ था। जब हमारा टैम्पो उस पुलिया से आधे किमी से भी ज्यादा दूरी पार कर गया तो टैम्पो चालक बोला “अब कोई खतरा नहीं है।” यह सुनकर सबकी जान, जो पता नहीं कहाँ अटकी पडी थी? वापस शरीर में आ गयी, जिससे सबके चेहरे चहकने लगे। मैंने व कई सवारियों ने उससे पूछा कि आखिर वहाँ उस पुलिया पर भूत वाली कहानी क्या है? तब चालक ने बताया था कि कुछ दिन पहले एक औरत सडक पार करते हुए किसी गाडी की चपेट में आ गयी थी। जिसके बाद अक्सर यहाँ पर उसी पुलिया के आसपास, जहाँ उसकी मौत हुई थी, वह भूत के रुप में अचानक गाडी के सामने आ जाती है जिस कारण कई वाहन चालक उसको असली औरत समझते हुए उसको बचाने के चक्कर में अपना वाहन दुर्घटनाग्रस्त कर बैठते है। वैसे मैं दिन में कई बार उस पुलिया के पास थोडी देर रुककर गया हूँ, लेकिन मुझे दिन में वहाँ ऐसा-वैसा कुछ दिखाई नहीं दिया। अब भूत की सच्चाई का भी मैं कुछ नहीं कह सकता कि वहाँ सच में भूत था या फ़िर ऐसे ही डराने के लिये अफ़वाह उडायी हुई थी।

पहाड में एक गांव।
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August 31, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, Chamba, Corbett, Dehradun, Gangotri, Haridwar, Rishikesh, StatesOfIndia, Uttarakhand
Table of contents for गंगौत्री व गौमुख
- FIRST GAUMUKH TREKKING पहली गौमुख ट्रेकिंग/यात्रा, भाग 1 (भूत का डर)
गौमुख का मतलब गाय का मुख/मुँह। लोग तो ऐसा ही कहते थे, लेकिन जब मैंने गंगौत्री वाला गौमुख देखा तो मुझे कहीं से भी ऐसा नहीं लगा था कि यह गाय का मुँह कैसे है? खैर छोडो लगने ना लगने वाली बात को, आपको और मुझे तो यात्रा वृतांत लिखने व पढने से मतलब है। तो चलिये आज आपको अपनी पहली गौमुख यात्रा का विवरण बता देता हूँ। यह सन 1999 के नवम्बर माह के पहले सप्ताह/या अक्टूबर माह के आखिरी सप्ताह की बात रही होगी। इतना मुझे याद है कि जब मैंने यह यात्रा करने की सोची, तब दिवाली आने में लगभग 15-20 दिन बाकि रह गये थे। कहते है ना, जिसकी किस्मत में परमात्मा ने जी भर कर यात्रा लिखी हो, फ़िर वह एक स्थल पर टिक कर कैसे बैठ सकता है? बात उस समय की है जब मेरा छोटा भाई अपनी पुलिस की ट्रेंनिग देहारादून से पूरी करने के उपरांत उतरप्रदेश प्रांत (उस समय यही था, उतराखण्ड तो बाद में हुआ है।) के पर्वतीय अंचल के उतरकाशी जनपद में अपनी पहली नियुक्ति पर रवाना हुआ था। उस समय तक मैंने भी ऋषिकेश से आगे के पहाड नहीं देखे थे। ईधर मसूरी से आगे धनौल्टी तक अपनी आखिरी रेखा खिंची हुई थी। जैसे ही छोटा भाई उतरकाशी जनपद में थाना मनेरी (एशिया का सबसे बडा थाना क्षेत्र इसके अधीन आता है) के अंतर्गत आने वाले गंगौत्री मन्दिर वाले पुलिस चैक-पोस्ट पर तैनात हुआ तो उसी समय छोटे भाई ने मुझे फ़ोन पर बता दिया था कि यदि गंगौत्री देखनी है तो आ जाओ क्योंकि मैं अभी यहाँ पन्द्रह दिन दिवाली तक रहूँगा। मैंने तुरन्त जाने की तैयारी शुरु कर दी। मैंने दो जोडी कपडे व पाँच किलो देशी घी अपने बैग में रखा व अपने घर से गंगौत्री जाने के लिये स्टॆशन पर आ पहुँचा।

पहाडकी पहली ट्रेन यात्रा
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August 28, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, Rishikesh, StatesOfIndia
उतर भारत में सावन का महीना भोले नाथ के नाम कर दिया जाता है, वैसे तो सम्पूर्ण भारत में सावन माह में भोले के भक्त चारों ओर छाये हुए रहते है, लेकिन इन सबका जोरदार तूफ़ान सावन के आखिरी में चलता है। संसार में भोले के नाम से चलने वाली कांवर यात्रा विश्व की सबसे लम्बी मानव यात्रा मानी जाती है। किसी जगह मैंने पढा था कि दुनिया में कावंर यात्रा की ऐसी एकमात्र यात्रा है जो हजार किमी से भी ज्यादा लम्बाई ले लेती है। गंगौत्री या देवभूमि उतराखण्ड (हिमाचल भी देवभूमि कहलाती है) का प्रवेश दरवाजा हरिद्धार से दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पंजाब व अन्य राज्यों में शिवभक्त कावंर रुप में गंगाजल धारण कर, सावन माह में भोलेनाथ पर अर्पण करते है। एक बार मैंने भी यह सुअवसर पाया था। जब मैंने गौमुख से केदारनाथ ज्योतिर्लिंग तक गंगा जल धारण कर पैदल यात्रा(ट्रेंकिग) की थी। वह यात्रा मेरी अब तक की सबसे लम्बी पद यात्रा रही है लेकिन मुझे लगता है कि मेरा यह अभिलेख(रिकार्ड) जल्द ही धवस्त होने जा रहा है क्योंकि मैं बहुत जल्द वृंदावन क्षेत्र की चौरासी कौस (256 किमी) की पद यात्रा पर जा सकता हूँ, इसके अलावा एक पैदल यात्रा का फ़ितूर भी मेरी जाट खोपडी मे घुसा हुआ है, मेरा एक D.E.O. साथी जो दो साल पहले तक मेरे साथ कार्य करता था। आजकल उसका स्थानांतरण दूसरे क्षेत्र में हो गया है। कुछ दिन पहले उसका फ़ोन आया था कि संदीप चलो बालाजी की पद यात्रा करके आते है। अभी तक मेरे मन में दोनों यात्रा करने की है लेकिन समय अभाव के कारण कोई एक यात्रा निकट भविष्य में सम्भव हो पायेगी। देखते है जाट देवता को मिलने के लिये अबकी बार कौन से भगवान दर्शन के लिये खाली है?
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August 18, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Dehradun, StatesOfIndia, Uttarakhand
चौथे या पाँचवे दिन की बात है, शाम को यह तय हुआ था कि संदीप व बबलू को हरिद्धार या ऋषिकेश में से किसी एक जगह घूम-घाम कर शाम तक देहरादून वापिस घर आ जाना है। इसी कारण अगली सुबह मैं फ़टाफ़ट नहा-धोकर तैयार हो गया था। लेकिन अचानक मामाजी का फ़ोन आया कि ट्रक का एक पहिया पेन्चर हो गया है, स्टपनी वाला टायर जो रिजर्व में रहता है वह भी एक दिन पहले ट्रक में कुछ काम कराने के लिये मिस्त्री के यहाँ रखवाया हुआ था। अत: बबलू को स्कूटर लेकर मामाजी के पास जाना पडा उस समय तक मुझे काम चलाऊ स्कूटर चलाना आता था। स्कूटर घर से कोई दस किमी या उसके आसपास स्थित प्रेमनगर की दिशा में लेकर जाना था। बबलू ने कहा अब तो आज कही बाहर जाना नहीं हो पायेगा, तुम घर पर ही आराम करो। इस बीच मामीजी ने आवाज लगायी कि संदीप खाना तैयार है खा लो। सुबह के आठ बज चुके थे। बबलू बिना खाना खाये (शायद उसने खाया था, ठीक से याद नहीं) स्कूटर लेकर चला गया। बबलू के जाने से पहले मैंने उससे कहा कि क्या मैं तुम्हारी साईकिल लेकर कहीं घूम आऊँ? उसने कहा “ठीक है, तुम आज भी मेरी साईकिल लेकर जा सकते हो, क्योंकि आज मुझे साईकिल से कुछ भी काम नहीं है। बबलू स्कूटर लेकर प्रेमनगर क्षेत्र की ओर चला गया था।

देहरादून से सहारनपुर सीमा तक।
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