February 18, 2013
By: Abhee K
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Chennai, Cities, FoG, Religious, StatesOfIndia, Tamil Nadu, Theme, Weekend-Chennai
Chennai – Though a modern city, it continues to be traditional and conventional in certain ways. Traditional music, dance and all other art forms of Tamilnadu are very popular in the city. One can find a unique blend of culture from traditional foods to fast foods, from ancient temple architecture to modern high-rises and from classical music and dance to the growing nightlife in the city.
So today through this post I will take all of you to the few temples of Chennai. Chennai city is full of temples. Every street, every road will have one or two temples. There are many famous temples in Chennai. So, today we will see ISKCON Temple, Shirdi Sai baba temple, Marundeeshwar Temple. All these temples are on ECR, and can be clubbed easily for visiting.
ISKCON Temple – ISKCON is famous all over the world for its Radha Krishna temples which are acclaimed for their breath-taking beauty, high standards of worship and cleanliness, and satisfying spiritual vibrations. Chennai ISKCON temple was recently opened and still some part of it is under construction. For the construction of temple 6.5 acre of land was acquired at Injambakkam, Chennai. The temple has Basement, Ground floor, mezzanine floor and first floor. The ground floor houses a beautiful cultural hall, mezzanine floor will have rooms for guests and offices and on the first floor is the beautiful temple. Basement is a big prasadam hall. Temple houses beautiful deities of Lord Balbhadra, lord Jaggannath and Goddess Shubhadra, Lord Krishna with Goddess Radharani and their sakhi Lalitha and Vishakha and Lord Chaitanya & Lord Nityanand (Gaur-Nitai).
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January 16, 2013
By: Vipin
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Haridwar, Hills, Nature, Religious, Rishikesh, Roads, Rudraprayag, Uncategorized, Uttarakhand
शीर्षक पढ़कर आपको थोडा आश्चर्य तो जरुर हुआ होगा कि अरे ये क्या अभी तो यात्रा का मजा आने लगा था और अभी दिल्ली वापसी. जब आपको पढ़कर ऐसा लगा तो सोचिये भला मुझे कैसा लगा होगा जब ये यात्रा बीच में ही अधूरी छोड़नी पड़ी. जैसा की आपने पिछले लेख में पढ़ा कि हम लोग मनमोहक भविष्य बद्री के दर्शन करके कई जगह तीखी ढलानों से उतरते हुए मलारी वाले सड़क मार्ग तक पहुँच चुके थे. हमारा आगे का कार्यक्रम केदारनाथ की ओर रुख करने का था जिसके लिए हमें दुबारा रुद्रप्रयाग से होकर गुजरना था. वैसे इस सड़क पर दूर दूर तक किसी वाहन की उम्मीद नहीं दिख रही थी, सोचा चलो तपोवन से तो कुछ ना कुछ जुगाड़ मिल ही जाएगा. हम सभी गाइड साब को वापस भेजने की नाकाम कोशिश करते हुए आगे बढे चले जा रहे थे कि एक जीप आती दिखाई दी. हाथ दिया तो चालक साब ने रोक दी. हमने जोशीमठ जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने हमें बिठा लिया और गाइड साब भी थोड़ी देर पीछा करने के बाद सलधार से वापस लौट गए. रास्ते में हमने पूछा कि भाई कहाँ तक जाओगे, तो चालक साब बोले जहाँ तक चलोगे वहीँ ले चलेंगे. ऐसे निर्जन स्थान से सीधा रुद्रप्रयाग के लिए जीप पाकर हम लोग बड़े खुश हुए.

दीपक @ कोटेश्वर महादेव गुफा
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January 02, 2013
By: Vipin
Category: 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Hills, Nature, Religious, Roads, Uttarakhand
इस यात्रा में वे सभी जगहें जहाँ हमें मुफ्त रहने का ठिकाना मिला हमारे लिए सबसे यादगार रही, चाहे वो रुद्रप्रयाग में स्वामीजी के साथ उमरा नारायण मंदिर हो या कर्णप्रयाग में मास्टर सलीम का आशियाना या पिछली रात आश्रम में जोगियों संग, ये ना सिर्फ रहने के ठिकाने थे बल्कि यहाँ हमें सीखने को भी बहुत कुछ मिला और ये किसी भी घुमक्कड़ी को काफी हद तक सार्थक बनाता है. आज सुबह जब हम उठे तो स्वामीजी ने बताया कि कल रात आश्रम के बाहर किसी जीव की आवाजें सुनाई दी थी और सम्भवतः ये भालू ही था, ऐसा सुनकर हमारे तो रोंगटे खड़े हो गए थे. रोजमर्रा की जरुरी गतिविधियों को अंजाम देकर, हम लोग आश्रम के किचन में नाश्ते के लिए आमंत्रित किये गए जहाँ हरियाणा से आये युवा मस्त मलंग जोगी महाराज अपने मोबाइल में भजन सुनते हुए रोटियां सेक रहे थे…हाई-टैक जोगी…वैसे इस आश्रम के सभी जोगी साधक जीवन का सही मायनों में अनुसरण कर रहे थे.

किचन में रोटियाँ सेकते जाट जोगी…
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December 21, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, Asia, Best Time, Bikaner, Rajasthan
रामदेवरा बाबा के यहाँ से जब चले तो शाम का समय हो रहा था। उस समय बीकानेर के लिये कैसी भी मतलब सवारी गाड़ी या तेजगति वाली एक्सप्रेस गाडी भी नहीं मिलने वाली थी। इस कारण हमने बीकानेर जाने के लिये बस से आगे की यात्रा करने की ठान ली। वहाँ से बीकानेर 150 किमी से ज्यादा दूरी पर है। यहाँ आते समय जिस बस अड़डे पर उतरे थे, हम वहीं पहुँच गये, वहाँ जाकर मालूम हुआ कि इस समय यहाँ से बीकानेर की बस मिलनी मुश्किल है अगर आपको बीकानेर जाने वाली बस पकड़नी है तो आपको लगभग एक किमी आगे हाईवे पर जाना होगा। हाईवे से होकर जानेवाली बसे जैसलमेर/पोखरण से सीधी बीकानेर चली जाती है। हम सीधे पैदल ही हाईवे पहुँच गये थे। जैसे ही हम हाईवे पर पहुँचे तो देखा कि तभी एक बस वहाँ आ गयी थी। हम तुरन्त उस बस में सवार हो गये।

मन्दिर में चूहों की मौज है।
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December 18, 2012
By: Vipin
Category: 01 January, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Hills, Nature, Religious
पिछली रात सोने से पहले तक भी हम लोग ये तय नही कर पाए थे कि अगले दिन का कार्यक्रम क्या रहेगा. लेकिन हमारे साथी पुनीत की ज़ख्मी टाँग को देखते हुए आज की यात्रा जोशिमठ के आस पास ही रखने का विचार था. जोशिमठ के पास सबसे नज़दीक सबसे पहले दिमाग़ मे आया ‘औली’ जो कि यहाँ से मात्र 13 किमी की दूरी पर ही था. औली की ओर जाने के लिए जीप का पता किया तो उस समय यात्रा सीज़न होने की वजह से सिर्फ़ एकाध जीप ही उपलब्ध थी और वो भी पहले से ही फुल हो चुकी थी. अगली जीप के आने का भी कोई पक्का भरोसा नही था. जीप स्टैंड के पास ही एक छोटा सा खाने का ठेला देखकर सोचा ‘चलो नाश्ता ख़त्म होने तक अगर कोई जीप आ गयी तो ‘औली’ नही तो कहीं और सही’. नाश्ता ख़त्म हो गया, पेट भर गया लेकिन कोई भी जीप बिना बुकिंग के औली जाने को तैयार नही थी. जोशिमठ से ही एक रास्ता नीति घाटी मे मलारी की ओर भी जाता है जहाँ ये रास्ता भारत-तिब्बत सीमा पर ख़त्म होता है. इसी रास्ते के बीच मे एक खूबसूरत गाँव है तपोवन जो कि अपने गंधक युक्त गर्म जल के श्रोतों के कारण प्रसिद्ध है. इस जगह की बेमिसाल खूबसूरती के बारे मे मैने कुछ साल पहले अपने किसी रिश्तेदार से सुना था और तभी से यहाँ जाने की तमन्ना दिल मे थी. अपने मित्रों के साथ इस बात को साझा किया तो सभी चलने को एकदम तैयार हो गये. तपोवन की जोशिमठ से दूरी तकरीबन 16 किमी है, गाड़ी तो मिल नही रही थी, सोचा ‘चलो पद यात्रा ही शुरू कर दें, जैसे ही कोई गाड़ी मिलेगी लद जाएँगे’.

पदयात्रा के दौरान एक ट्रक पर लिखे कोटेश्वर महादेव को दिखाते हुए…
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December 17, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, Best Time, Bikaner, Jaisalmer, Jodhpur, Rajasthan
जैसलमेर से यहाँ सम वाले रेत के टीले देखने के लिये आते समय बीच मार्ग में सीधे हाथ की ओर किसी एक जगह एक किले जैसा कुछ दिखाई दे रहा था। वहाँ एक बडा सा बोर्ड भी लगा हुआ था जिस पर लिखा हुआ था सूर्यगढ़ पैलेस। राजस्थान में तो वैसे भी जहाँ देखो, वहाँ किले या गढ़ ही गढ़ बने हुए मिल जाते है। ज्यादातर थोडा सा ऊँचाई पर स्थित किले को गढ ही कहा जाता है। तो दोस्तों आज के लेख में आपको पहले इसी सूर्यगढ़ की सैर करायी जा रही है।
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December 03, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, FoG, Jaisalmer, Jodhpur, Rajasthan, StatesOfIndia
वैसे तो हम पिछले लेख में ही लंका पति महाराज रावण की ससुराल अथवा रावण की पत्नी मन्दोदरी का मायका मण्डौर पहुँच गये थे। लेकिन लेख ज्यादा लम्बा होने के कारण रावण की ससुराल नहीं दिखाई गयी थी, चलिये दोस्तों आज आपको मन्डौर के दर्शन भी कराये जा रहे है। रामायण काल को बीते हुए कई हजार साल हो चुके है अत: उस काल की कोई असली निशानी मिलने की उम्मीद तो हमको बिल्कुल भी नहीं थी। लेकिन जितना कुछ हमें दिखाई दिया उसने हमारा दिल गार्डन-गार्डन कर दिया था। मैंने बाग-बाग की जगह गार्डन-गार्डन इसलिये लिखा है कि यहाँ जिस स्थल को रावण की ससुराल कहा जाता है उसे आजकल मण्डौर गार्डन के नाम से पुकारा जाता है। पहले इसे माण्डव्यपुर कहा जाता था। यहाँ चौथी शातब्दी के एक किले के खण्डहर बचे हुए है। अब इस स्थल का चित्रमय विवरण झेलने के लिये तैयार रहे। रावण के बारे में अधिक जानने के लिये यह लिंक जरुर देखे।
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November 28, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Asia, Best Time, Jodhpur, Rajasthan, StatesOfIndia
पिछले लेख पर आपको नागौरी दरवाजे तक लाकर किले की एक झलक दिखाकर ईशारा सा कर दिया गया था कि अगली लेख में आपको क्या दिखाया जायेगा? तो दोस्तों आज के लेख में हम चलते है, मेहरानगढ दुर्ग की ओर…….. आगे चलने से पहले आपको नागौरी दरवाजे के बारे में भी थोडा सा बता दिया जाये तो बेहतर रहेगा। इतिहास अनुसार- बताया जाता है कि यहाँ के तत्कालीन महाराजा अभय सिंह ने अपने शासन काल 1724 से 1749 की अवधि में इस नागौरी दरवाजे का निर्माण कार्य कराया था। इस ओर से नागौर शहर जाया जाता था इसलिये इसका नाम नागौरी दरवाजा पड गया था। अब इस दरवाजे से आगे दुर्ग की ओर चले चलते है।

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