A Road Trip to Enchanting Mukteshwar

February 07, 2013 By: Mishri Category: 04 April, 05 May, 06 June, 09 September, 10 October, 11 November, Hills, Mukteshwar, Nature, Roads, Uttarakhand, Weekend-Delhi

Hello Ghummakar(s),

This is my first attempt at writing. Hope you all will like it…

As soon as our calendar reflected a break of 2 days the “Ghummakar” inside us started taking turns. We started exploring each and every possible destination that we could cover via Road. Read several posts/blogs, had discussion with friends and finally post reading all the reviews of Mukteshwar on Ghummakar.com we finalized this place to knock down :)

Day 1:
We estimated a total run time of approx 8 hours in reaching Mukteshwar by Road from Ghaziabad. Wasting time on road due to traffic is a big NO-NO to us. So we started at sharp 4:45AM from Noida. Switched on the navigator and took NH-24. Road was quite smooth and due to early winter morning there was no traffic on roads. We touched Mc-Donalds in Gajraula by 6:15AM. We took a short break there, fed our hungry tummies and again hit the road. Road condition was nice till Moradabad bypass but a patch of 32 KMs was pathetic near Rampur district. The dense fog started from Tanda (around 7:30 AM) till Kaladhungi – around 10AM).

 Fog on road..the way to Rampur.

Fog on road..the way to Rampur.


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केदार यात्रा: ऋषिकेश – रुद्रप्रयाग – केदारनाथ

January 26, 2013 By: Vipin Category: 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, Hills, Kedarnath, Nature, Religious, Rishikesh, Roads, Uncategorized, Uttarakhand, Weekend-Delhi

Table of contents for केदार यात्रा

  1. केदार यात्रा: दिल्ली – ऋषिकेश
  2. केदार यात्रा: ऋषिकेश – रुद्रप्रयाग – केदारनाथ

आज सुबह करीब 2 बजे अलार्म बजने से पहले ही मेरी आँख खुल गयी, लगता था जैसे हमारे मच्छर मित्र भी चाहते थे कि हम रात भर माँ गंगा के अलौकिक रूप का दर्शन करते रहे और इसमें इन मच्छरों ने कोई कसर बाकी ना छोड़ी. ये मच्छर मित्र ही थोड़ी थोड़ी देर में हमें जगा दिया करते, ऐसे में भला अलार्म की क्या जरुरत! उठते ही कुंदन को जगाया कि चल भाई, कहीं ये बस भी निकल गई तो फिर कहीं मझधार में ना लटक जाएँ. कुंदन कल रात की थकान के मारे उठने के मूड में नहीं था पर फिर हिम्मत दिखाकर उठ ही गया. गंगा की दो चार बूँदें अपने ऊपर छिडकी और हो गया गंगा स्नान…तीन बजे से पहले ऋषिकेश बस स्टैंड पर पहुँचना था दिन की पहली बस पकड़ने के लिए, इसलिए जल्दी जल्दी अपने अपने झोले टांगकर निकल पड़े हम लोग. सुनसान गलियों से गुजरते हुए, शुरुआत में ही हमें कुछ कुत्तों से दो चार होना पड़ा जिन्हें देखकर अपनी हालत थोड़ी ढीली हो जाती है, बिना कोई प्रतुय्तर दिए और ऐसा ढोंग रचकर कि जैसे इन्हें देखा ही नहीं पतली गली से निकल लिए. थोड़ी दूर तक तो ये पीछा करते रहे, पर जब इनका प्रातःकालीन राग बंद हुआ, तब कहीं जाकर जान में जान आयी. झूला पुल पर पहुँचकर, सुबह के दो बजे गंगा की पावन लहरें असीम शान्ति और शीतलता सी प्रदान करती प्रतीत हो रही थी, ऐसे में कुछ क्षण यहाँ इस अप्रतिम आनंद का सुख भोगकर फिर यात्रा शुरू कर दी. लोजी पुल पार करते ही कुत्तों का एक और झुंड हमारा स्वागत करने को तत्पर बैठा था, पर यहाँ कुछ और लोग मौजूद थे जिससे हमें कुछ साहस मिला और हम इन कुत्तों से पीछा छुड़ाकर मुख्य सड़क पर पहुँच गए. प्रातः के इस पहर में भी अध्यात्मिक नगरी में हमारे सिवा कुछ अन्य लोगों के चहलकदमी जारी थी. घूमते घामते इस प्रातःकालीन बेला का मजा लेते हुए और फोटो खींचते हुए चले जा रहे थे, ऐसे में समय का पता ही नहीं चला. देखा तो तीन बजने में लगभग 15 मिनट ही बाकी थे. ऐसे में कुछ उतावली सी होने लगी और कदमों की रफ़्तार बढ़ाने लगे, चलते चलते सोचा की कोई वाहन आदि मिल जाता तो अच्छा रहता. वैसे इस समय भी यहाँ सडकों पर कुछ वाहन चल रहे थे. एक विक्रम वाला आता दिखाई दिया तो हाथ देकर रोका और पूछा कि बस स्टैंड चलोगे और वो सहर्ष ही राजी हो गया और रास्ते से कुछ और सवारियाँ भी उठा ली.

ऋषिकेश में प्रातः पद यात्रा के दौरान...

ऋषिकेश में प्रातः पद यात्रा के दौरान…

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Shimla – Kufri – Jakhu Temple and Back Journey

January 20, 2013 By: Sushant Singhal Category: 01 January, 02 February, 05 May, 06 June, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Cities, Hills, Historical, Hotel, Nature, Religious, Roads, Shimla, Theme, Weekend-Delhi

Table of contents for Shimla Tour

  1. Shimla by Toy Train
  2. Shimla – Kufri – Jakhu Temple and Back Journey

Hi Friends,

Our hotel was at equal distance from Rly Station and Bus Stand. (Click to enlarge)

Our hotel was at equal distance from Rly Station and Bus Stand. (Click to enlarge)

You might have read from my previous post that starting from Saharanpur (U.P.) at 6.00 a.m. by own car, we i.e. my wife, son, nephew and myself reached Kalka at 10.30 a.m. and after leaving the car at the railway station parking, got into Kalka Shimla train in general compartment which looked like Kumbh Mela site within 5 minutes of arrival of Delhi-Kalka Queen at another platform.  You have also learnt how historic this narrow guage rail route is. This hillward journey from Kalka to Shimla started at 1.00 p.m. instead of 12.10 p.m. and after crossing 102 tunnels and 988 iron-less bridges, we reached at Shimla at around 8.00 p.m.  at an altitude of 2076 meters.   No sooner we stepped out of railway platform, a fevikwik type of hotel agent  securely stuck to us and could only be gotten rid of after  we rejected three hotels and finally checked in at Hotel Victory which is above Victory Tunnel .  Please continue…

Two-tiered bed in our hotel room - big enough for adults too.

Two-tiered bed in our hotel room – big enough for adults too.

All the members of my family fell in love with the room at first sight and felt happy that the stay would be a pleasant one.   In the meantime, I have been at the window of the room which gave excellent view of several hill ranges across the valley.  After settling ourselves in the room, we decided to have a walk and find some good place to eat.  At the Reception, the hotel Manager asked us if we would need a taxi in the morning for local sight seeing? We looked at each other and then I said, “May be.  What places should we include in our itinerary?”  He produced a pamphlet from his drawer  and told us that these are the sites he would take you to and these are the rates.  Since you are staying with us, we will offer you 10% discount.  You would get Indica taxi in excellent condition.  As far as I remember, he had told us Rs. 800/- for the full day sight seeing, which appeared quite reasonable to us in view of the itinerary given in the pamphlet.  As we learnt later,  there is a tendency to include as many places in the list as possible – how-so-ever insignificant or trivial they may actually be.  For example,  if we go from Shimla to Kufri, they would include five or six locations – all of which are enroute  just to make the list substantial.  However, we accepted the offer and went out to have a stroll on Mall Road feeling quite elated.  Shimla didn’t seem to us costly at all. (more…)

गढ़वाल घुमक्कड़ी: तपोवन – रुद्रप्रयाग – दिल्ली

January 16, 2013 By: Vipin Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Haridwar, Hills, Nature, Religious, Rishikesh, Roads, Rudraprayag, Uncategorized, Uttarakhand

शीर्षक पढ़कर आपको थोडा आश्चर्य तो जरुर हुआ होगा कि अरे ये क्या अभी तो यात्रा का मजा आने लगा था और अभी दिल्ली वापसी. जब आपको पढ़कर ऐसा लगा तो सोचिये भला मुझे कैसा लगा होगा जब ये यात्रा बीच में ही अधूरी छोड़नी पड़ी. जैसा की आपने पिछले लेख में पढ़ा कि हम लोग मनमोहक भविष्य बद्री के दर्शन करके कई जगह तीखी ढलानों से उतरते हुए मलारी वाले सड़क मार्ग तक पहुँच चुके थे. हमारा आगे का कार्यक्रम केदारनाथ की ओर रुख करने का था जिसके लिए हमें दुबारा रुद्रप्रयाग से होकर गुजरना था. वैसे इस सड़क पर दूर दूर तक किसी वाहन की उम्मीद नहीं दिख रही थी, सोचा चलो तपोवन से तो कुछ ना कुछ जुगाड़ मिल ही जाएगा. हम सभी गाइड साब को वापस भेजने की नाकाम कोशिश करते हुए आगे बढे चले जा रहे थे कि एक जीप आती दिखाई दी. हाथ दिया तो चालक साब ने रोक दी. हमने जोशीमठ जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने हमें बिठा लिया और गाइड साब भी थोड़ी देर पीछा करने के बाद सलधार से वापस लौट गए. रास्ते में हमने पूछा कि भाई कहाँ तक जाओगे, तो चालक साब बोले जहाँ तक चलोगे वहीँ ले चलेंगे. ऐसे निर्जन स्थान से सीधा रुद्रप्रयाग के लिए जीप पाकर हम लोग बड़े खुश हुए.

दीपक @ कोटेश्वर महादेव गुफा

दीपक @ कोटेश्वर महादेव गुफा


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गढ़वाल घुमक्कड़ी: भविष्य बद्री

January 02, 2013 By: Vipin Category: 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Hills, Nature, Religious, Roads, Uttarakhand

इस यात्रा में वे सभी जगहें जहाँ हमें मुफ्त रहने का ठिकाना मिला हमारे लिए सबसे यादगार रही, चाहे वो रुद्रप्रयाग में स्वामीजी के साथ उमरा नारायण मंदिर हो या कर्णप्रयाग में मास्टर सलीम का आशियाना या पिछली रात आश्रम में जोगियों संग, ये ना सिर्फ रहने के ठिकाने थे बल्कि यहाँ हमें सीखने को भी बहुत कुछ मिला और ये किसी भी घुमक्कड़ी को काफी हद तक सार्थक बनाता है. आज सुबह जब हम उठे तो स्वामीजी ने बताया कि कल रात आश्रम के बाहर किसी जीव की आवाजें सुनाई दी थी और सम्भवतः ये भालू ही था, ऐसा सुनकर हमारे तो रोंगटे खड़े हो गए थे. रोजमर्रा की जरुरी गतिविधियों को अंजाम देकर, हम लोग आश्रम के किचन में नाश्ते के लिए आमंत्रित किये गए जहाँ हरियाणा से आये युवा मस्त मलंग जोगी महाराज अपने मोबाइल में भजन सुनते हुए रोटियां सेक रहे थे…हाई-टैक जोगी…वैसे इस आश्रम के सभी जोगी साधक जीवन का सही मायनों में अनुसरण कर रहे थे.

किचन में रोटियाँ सेकते जाट जोगी...

किचन में रोटियाँ सेकते जाट जोगी…

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गढ़वाल घुमक्कड़ी: जोशीमठ – तपोवन – बाबा आश्रम

December 18, 2012 By: Vipin Category: 01 January, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 10 October, 11 November, 12 December, Badrinath, Hills, Nature, Religious

पिछली रात सोने से पहले तक भी हम लोग ये तय नही कर पाए थे कि अगले दिन का कार्यक्रम क्या रहेगा. लेकिन हमारे साथी पुनीत की ज़ख्मी टाँग को देखते हुए आज की यात्रा जोशिमठ के आस पास ही रखने का विचार था. जोशिमठ के पास सबसे नज़दीक सबसे पहले दिमाग़ मे आया ‘औली’ जो कि यहाँ से मात्र 13 किमी की दूरी पर ही था. औली की ओर जाने के लिए जीप का पता किया तो उस समय यात्रा सीज़न होने की वजह से सिर्फ़ एकाध जीप ही उपलब्ध थी और वो भी पहले से ही फुल हो चुकी थी. अगली जीप के आने का भी कोई पक्का भरोसा नही था. जीप स्टैंड के पास ही एक छोटा सा खाने का ठेला देखकर सोचा ‘चलो नाश्ता ख़त्म होने तक अगर कोई जीप आ गयी तो ‘औली’ नही तो कहीं और सही’. नाश्ता ख़त्म हो गया, पेट भर गया लेकिन कोई भी जीप बिना बुकिंग के औली जाने को तैयार नही थी. जोशिमठ से ही एक रास्ता नीति घाटी मे मलारी की ओर भी जाता है जहाँ ये रास्ता भारत-तिब्बत सीमा पर ख़त्म होता है. इसी रास्ते के बीच मे एक खूबसूरत गाँव है तपोवन जो कि अपने गंधक युक्त गर्म जल के श्रोतों के कारण प्रसिद्ध है. इस जगह की बेमिसाल खूबसूरती के बारे मे मैने कुछ साल पहले अपने किसी रिश्तेदार से सुना था और तभी से यहाँ जाने की तमन्ना दिल मे थी. अपने मित्रों के साथ इस बात को साझा किया तो सभी चलने को एकदम तैयार हो गये. तपोवन की जोशिमठ से दूरी तकरीबन 16 किमी है, गाड़ी तो मिल नही रही थी, सोचा ‘चलो पद यात्रा ही शुरू कर दें, जैसे ही कोई गाड़ी मिलेगी लद जाएँगे’.

पदयात्रा के दौरान एक ट्रक पर लिखे कोटेश्वर महादेव को दिखाते हुए…

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जोरदार बर्फ़ व भंयकर बारिश के बीच सुरकन्डा देवी-उत्तरकाशी-Surkanda devi-Uttarkashi bike trip in heavy snow and heavy rain

November 19, 2012 By: Jatdevta Category: 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Chamba, Dehradun, Dhanaulti, Gangotri, Haridwar, Mussorie, Uttarakhand, Uttarkashi

वर्ष सन 2003 में फरवरी माह के आखिरी सप्ताह की बात है। कुछ दोस्तों ने कहा कि “संदीप भाई चलो महाशिवरात्रि नजदीक आ रही है कही घूम कर आते है”। मैंने कहा ठीक है चलो लेकिन मेरी एक शर्त है कि जहाँ भी जाना है, बाइक पर ही चलेंगे, अगर मानते हो तो मैं तैयार हूँ। उन्होंने कहा अरे भाई आपने तो हमारे मन की बात कह दी है, हम भी तो बाइक पर ही जाना चाहते है, लेकिन कोई साथ जाने वाला मिल ही नहीं रहा है। इसलिये तो हम आपके पास आये है। तो दोस्तों इस तरह यह बाइक यात्रा तैयार हो गयी थी। इस bike trip में कुल तीन बाइक शामिल हुई थी। जिसमें से एक बजाज की, दूसरी एलमएल की, तीसरी अपनी हीरो होंडा।

सुरकन्डा देवी में भयंकर बर्फ़
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गढ़वाल घुमक्कडी: बद्रीनाथ – माणा – वसुधारा – जोशिमठ

November 18, 2012 By: Vipin Category: 05 May, 06 June, 10 October, 11 November, Badrinath, Hills, Nature, Religious, Roads

आज का कार्यक्रम बद्रीनाथ के आसपास कुछ कम भीड़भाड़ वाले खूबसूरत स्थलों मे विचरण करने और शाम को बसेरे के लिए जोशिमठ पहुँचने का था. कल रात सोने से पहले सबने सुबह जल्दी उठने का वादा किया था, पर थकान के मारे सब ऐसे चूर थे की आँख खुलने के बाद भी बस थोड़ी देर और, बस थोड़ी देर और करते करते वाकई देर हो गयी. चलो कोई बात नही, उठे तो सही! इस बार बद्रीनाथ आने की एक ख़ास वजह थी ना सिर्फ़ भारतीय सीमा पर बसे अंतिम ग्राम माणा को देखना बल्कि उससे भी परे कुदरत के एक अनमोल रत्न वसुधारा जल प्रपात के दर्शन करना. चूँकि बद्रीनाथ से वसुधारा की दूरी थोड़ा ज़्यादा (लगभग 8 किमी) थी और हम सब लोग पैदल यात्रा करने वाले थे, इसलिए साथियों को सुबह केवल ये ही सूचना दी गयी की हम 3 किमी दूर बसे अंतिम ग्राम माणा और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखेंगे और फिर जोशिमठ वापस चलेंगे. ऐसा कहने की एक वजह थी उच्च पर्वतीय स्थलों पर पैदल चलने से होने वाली थकान और 8 किमी सुनकर तो मेरे साथी वैसे ही मना कर देते, इसलिए सोचा के माणा की ओर बढ़ते बढ़ते जैसे जैसे दूरी कम होगी और खूबसूरत नज़ारे अपना घूँघट उठा रहे होंगे तो मैं भी मौके का फ़ायदा उठाकर वसुधारा की तारीफों के ऐसे पुल बाँधूंगा के देखे बिना कोई भी वापिस जाने की बात नही करेगा और हुआ भी कुछ ऐसा ही. जल्दी से रोजाना की ज़रूरी गतिविधियों को अंजाम देकर, अपने बहादुर सिपाही तैय्यार थे किला फ़तेह करने को. मौसम कल रात की तरह ही सर्द था और चलते चलते हम लोग जल्दी ही माणा जाने वाली सड़क पर पहुँच गये. चूँकि ये इलाक़ा भारत-तिब्बत सीमा के पास का है, इसलिए यहाँ सेना के लोगों की चहलकदमी होना कोई आश्चर्य की बात नही और उनकी यहाँ उपस्तिथि की वजह से ही माणा तक की ये सड़क काफ़ी चौड़ी व पक्की है. यहाँ से बीआरओ ने माणा पास (5608 मीटर) जो की यहाँ से लगभग 50 किमी दूर भारत-तिब्बत की सीमा पर है, तक भी एक सड़क बनाई है जिसे हाल ही मे बीआरओ द्वारा ‘विश्व की सर्वाधिक उँचाई पर बनी गाड़ी चलाने योग्य सड़क’ का दर्जा दिया गया है. ऐसा कहा जाता है कि सन्न 1951 तक इसी रास्ते गढ़वाल और तिब्बत के बीच व्यापार हुआ करता था जिसे बाद मे चीनी सरकार ने आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया. इसी माणा पास के नज़दीक एक खूबसूरत झील है देवताल जिसे सरस्वती नदी का उद्गम स्थल माना जाता है.

एक सैनिक के साथ पुनीत व दीपक माणा रोड पर

सैनिक छावनी के पास अपनी टोली


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