Trip to Auli-Joshimath-Badrinath-Mana

September 06, 2012 By: Sonakshi Category: 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, Badrinath, Uttarakhand

The difference between HEAVEN & HELL is not of altitude but of attitude and I am lucky enough to have anku (ankita) who was born in the lap of SHIVALIK MOUNTAINS,another name for heaven. After being continuously tanned by the cruel heat of delhi and victim of 2nd year exams. We somehow decided to go on a trip to anku’s home town, joshimath. We are a group of 6 people ankita, mayank, anuj, abhimanyu (all maths honours), akanksha (chemistry honours) and me, sonakshi (economics honours student) in delhi university. Everyone’s exam ended by 7th june and accordingly we had 5 reserved seats in Jan shatabadi dehradun that was to departure by 3:15 p.m. On 8th june from new delhi railway station. Akanksha) was in ddn(dehradun) already. She has her home in dehradun. Abhimanyu also is a denradun resident.

Himalayas – The beauty beckons


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हरिद्वार से यमनोत्री

August 09, 2012 By: rastogi Category: 06 June, 07 July, 09 September, Haridwar, Religious, Roads, Uttarakhand, Weekend-Delhi, Yamunotri

Table of contents for दिल्ली - यमनोत्री - गंगोत्री

  1. हरिद्वार से यमनोत्री
  2. यमनोत्री से गंगोत्री

इस वर्ष 2012 मे जब पता लगा की गंगोत्री – यमनोत्री   के पाट 24 अप्रैल को खुल रहे है ,मन मे विचार आया की इस बार दर्शन अवश्य हो जाएँगे. . पिछले साल ही जाना था पर कुछ कारण वश जा नही सका.  अब जबकि द्वार अप्रैल  मे खुल रहे थे इसलिए उम्मीद थी कि ज़्यादा भीड़ नही होगी.आराम से दर्शन होंगे और ठहरने आदि की  भी कोई समस्या नही आएगी. क्योकि जैसे- जैसे भीड़ बढ़ती है त्यो –त्यो ही हर तरह की परेशानी भी आती है, आपको टॅक्सी कार , होटेल मँहगा मिलता है, , और सबसे बड़ी बात है कि आप तो दर्शन के लिए वहाँ जा रहे है अगर वही ढंग  से ना हो तो यात्रा अधूरी लगती है. मन को संतुष्टि नही मिलती है . यही सोंच कर मै अपना प्रोग्राम या तो शुरू मे बनाता हूँ या यात्रा के  आख़िर मे जब ज़्यादा भीड़ होने की गुंजाइश कम हो ,

पिछली साल मै अमरनाथ यात्रा पर गया था. जब वहाँ के फोटो फेसबुक पर अपलोड किए तब हमारे कुछ मित्रो ने कहा  कि अगली बार जब भी  यात्रा पर जाओ तो हमे भी साथ ले चलना. अब जब मैने गंगोत्री-यमनोत्री का प्रोग्राम बनाया तो उनसे पूछा  पर कोई भी साथ चलने को तैयार  नही हुआ. एकला चलो रे की तर्ज पर  मै   अपनी फैमिली के साथ 5 मई  को सुबह 7 बजे से पहले ही मोहन नगर हरिद्वार जाने के लिए पहुँच गया. अगले दिन पूर्णिमा थी इस  कारण से कई बस वगैर रुके चली जा रही थी,टॅक्सी भी नही जा रही थी.  ऐसा पहली बार हुआ वरना मोहन नगर से हरिद्वार जाने की कभी समस्या नही होती है. हम हर बार  आराम से हरिद्वार पहुँच जाते थे , खैर एक बस रूकी.  बस मे काफ़ी भीड़ थी. चारो  लोगो  को अलग –अलग  सीट मिल गई. कुछ सवारी तो खड़े-खड़े सफ़र कर रही थी. 1 बजे हरिद्वार पहुच गये. होटेल पहले ही बुक कर लिया था  ठहरने की कोई समस्या नही थी. अभी 20-25 दिन पहले मै  अपने और अपने साले के परिवार के साथ यहाँ आए थे. और इसी होटेल हेवेन मे ठहरे थे. यह होटेल हर की पौड़ी  के पास गंगा के सामने है.  सामने बहती हुई गंगा के दर्शन होते रहते है. होटेल साधारण है पर व्यू पॉइंट अच्छा है.  इस बार भी यहाँ ही ठहरने का प्रोग्राम बनाया था. रूम का किराया उसने 500 रुपये चार्ज किया.   होटेल वाले से पहले ही बता चुके थे कि हमे आगे यमञोत्री – गंगोत्री जाना है और वहाँ जाने के  लिए बस, टॅक्सी का इंतज़ाम कर दे. आम तौर पर हर होटेल वाले के टॅक्सी , बस ऑपरेटर वालो से कमीशन तय होता है और यह लोग इस तरह का इंतज़ाम ठीक  करवा देते है,  मेरे पहुँचते ही होटेल वाले ने कई जगह फोन मिलाने शुरू कर दिए. फिर बोला  इस समय छोटी कार से यमञोत्री – गंगोत्री जाना ठीक नही है क्योकि रास्ता काफ़ी खराब है आपको बड़ी गाड़ी बेलोरो, स्कॉर्पियो . टाइप लेनी होगी. उसने दोबारा एक दो लोगो से बात कर के बताया की बेलोरो गाड़ी तय की है जिसका मुझे 5 दिन का किराया 2100  के हिसाब से 10500 देना होगा. मुझे लगा यह ठीक मोंग रहा है , मैने हाँ कर दी. वेलोरो मे 8 लोग ट्रॅवेल कर सकते है पर हम 4 लोग ही थे, मैने दिल्ली  मे अपने कुछ एक मित्रो को फोन भी किया कि  4 सीट खाली है आ जाओ पर कोई भी इतने शॉर्ट नोटिस पर चलने को तैयार  नही हुआ. होटेल वाले ने बताया  अगले दिन यानी  रविवार को सुबह 8 बजे कार आ जाएगी, चलने के लिए तैयार   रहे. अब सब लोग आराम करने लगे ,   शाम को हर की पौड़ी पर पहुँचे , पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए काफ़ी भीड़ होती है. हर की पौड़ी पर काफ़ी भीड़ हो रही थी. अभी आरती मे देर थी, फटाफट  गंगा मे डुबकी लगा ली. गंगा स्नान के थोड़ी देर बाद आरती शुरू हो गई. इतनी भीड़ थी ना तो  आरती दिख रही थी और ना ही खड़े होने की जगह थी. पहले हरिद्वार मे गंगा आरती मे इतनी भीड़ नही होती थी पर अब तो हर जगह भीड़ ही भीड़ नज़र आती है. आरती के बाद बाहर आने मे  आधे घंटे से ज़्यादा वक्त लग गया . रात मे होशियारपुर के नाम से एक रेस्टोरेंट  मे खाना खाया. इस रेस्टोरेंट  का काफ़ी नाम है , खाना भी अच्छा होता है. दूसरे दिन यमञोत्री के लिए प्रस्थान करना था हम लोग 10 बजे होटेल पहुँच सोने की तैयारी करने लगे.

हर की पौड़ी


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अनजान सफ़र : दिल्ली – यमुनोत्री – उत्तरकाशी

June 13, 2012 By: rodneyrock2000 Category: 05 May, 06 June, 07 July, 09 September, 10 October, Hotel, Uttarakhand, Uttarkashi, Yamunotri

ये बात उस समय की है जब मैं २२ साल का था, और गाजियाबाद के होटल मे काम करता था, सेल्स टीम का सदस्य होने के कारण मुझे देशी और विदेशी लोग को देहली, आगरा और अन्य जगह घुमाने का खूब मौक मिलता था, जिस कारण मैं अपनी घुमकड़ी की इच्छा भी पूरी कर लेता था, मेरे उत्तराखंड के होने की वजह से हमारे होटल के डिरेक्टर ने एक  दिन मुझे बुला के कहा की उनकी वाइफ के रिश्तेदार विदेश से आ रहे है चार धाम की यात्रा के लिए, तो तुम ऋषिकेश जा कर गढ़वाल मंडल के गेस्ट हाउस की बुकिंग करवा दो, (आप लोगो को बता दूँ की गढ़वाल मंडल के होटल चार धाम मे भी  है जो सीजन मे हमेशा बुक रहते है और उनकी बुकिंग ऋषिकेश ऑफिस से आप करवा सकते है)

जून का महीना था और मैं दोपहर की बस पकड़ कर ऋषिकेश पहुच गया, सीधे गढ़वाल माडल के ऑफिस मे जा के पता चला की की भई हमे  तो चारो धामों मे जा कर ही बुकिंग करवानी पड़ेगी कियुकी उनके पास अभी जानकारी  नहीं है की कहाँ रूम खाली है. अब घुमकड़ी का कीड़ा जाग उठा की जब भगवान खुद दर्शन देने की लिए बुला रहे है तो तू क्यों चिंता करता है, सीधे डिरेक्टर साहब को फ़ोन मिलाया की सर यहाँ से बुकिंग बंद है चारो धामों मे जा कर ही बुकिंग करवानी पड़ेगी आप का क्या आदेश है, उनका जवाब वो ही था जो मैंने सोचा था. डिरेक्टर जी का एक बंगला मसूरी मे भी है जो ऋषिकेश से १ या १.३० घंटे दूर है, उन्होंने मुझे कहा की वह किसी को पैसो के साथ ऋषिकेश भेज रहे है, तुम पैसे लेके आगे की यात्रा पे चले जाना. अब पूरी फुर्सत थी तो लक्ष्मण झुला और ऋषिकेश के नजारों के दर्शन किये और जानकारी इक्कठा करी की आगे की यात्रा कैसे की जाये.

जानकारी मिली की पहले यमनोत्री जाओ फिर गंगोत्री फिर बद्रीनाथ और केदारनाथ. श्याम को वो सज्जन भी आ गए जो मसूरी से पैसे लाये थे, अच्छा ये बता दूँ की उत्तराखंड मे बसे तडके निकाल पड़ती है कियु की रूट लम्बा होता है, पता चला की सुबह ३.३० बजे की  बस है यमनोत्री की, और अभी टिकिट खिड़की बंद हो गयी है और सुबहे ३.०० बजे खुलेगी, अब रात काटने के लिए एक होटल मे १५० रूपए  मे कमरा लिया और सुबहे २.३० बजे सो कर उठा, फटाफट मुह हाथ धो कर सीधे बस अड्डे पंहुचा, यात्रा का समय होने के कारण बहुत भीड़ थी पता चला की यमनोत्री की बस पूरी फुल है पैर रखने की भी जगह नहीं है, तो सोच मे पड़ गया की क्या करू अगर ये बस छूट गयी तो फिर टाइम से यमनोत्री नहीं पहुच पाउँगा  (आप को ये बताना जरूरी है की मैं गढ़वाल से तो हूँ पर पौड़ी गढ़वाल से, और मुझे टिहरी और चमोली गढ़वाल के बारे मे कुछ भी नहीं पता नहीं है.)
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दो धाम की यात्रा – यमुनोत्री और गंगोत्री

June 10, 2012 By: Anand Bharti Category: 06 June, 07 July, 09 September, 10 October, Gangotri, Hills, Hotel, Religious, Roads, Uttarakhand, Yamunotri

हम लोग काफी दिनों से सोच रहे थे कि यमुनोत्री एवं गंगोत्री की यात्रा की जाये परन्तु बच्चों के एग्जाम की वजह से कार्यक्रम बन नहीं पा रहा था. बच्चो ने ही सुझाव दिया कि क्यों ना आप लोग अकेले ही चले जाओ क्योंकि यह समय चारधाम यात्रा का भी है रास्ते में बहुत सारे साथी मिल जायेंगे. फिर भी हम दोनों पति पत्नी को लग रहा था कि बच्चो को कैसे अकेले दिल्ली में छोड़कर जाएँ. तभी एक विचार दिमाग में आया कि क्यों न बच्चों कि मौसी जो कि बिजनौर में रहती हैं उनको दिल्ली बुला लिया जाये उनका बेटा भी दिल्ली में हमारे ही साथ रहकर पढाई कर रहा हैं.यह आईडिया काम कर गया वह दिल्ली आने को तैयार हो गयीं.

अब आगे का कार्यक्रम तय करना था कि कैसे जाया जाये सोचा कि अपनी मारुती स्विफ्ट से ही चला जाये ताकि रास्ते में आने वाली खूबसूरत जगहों का भी आनंद लिया जा सके. अब हम दो यात्री तो तैयार ही थे हमारी दीदी का पुत्र रंजीत जो दिल्ली में ही रहता था वह भी चलने को तैयार हो गया. अब हम तीन लोग हो गए थे. यात्रा 6 मई 2012 से प्रारंभ करने का विचार था तभी एक और आईडिया आया कि क्यों न दीदी के दूसरे पुत्र एवम उसकी पत्नी को साथ में ले लिया जाये जो कि बरेली (उत्तर प्रदेश) में रहते हैं. वह दोनों लोग भी साथ चलने को तैयार थे परन्तु एक समस्या आ गयी कि विशाल की पत्नी अनु की 8 मई से 21 मई तक स्नातकोत्तर की परीक्षायें थीं. परीक्षा को ध्यान में रखते हुए हम लोगो ने यात्रा कार्यक्रम में तबदीली की और यात्रा 21 मई से ही शुरू करने का कार्यक्रम बनाया. हम लोगों ने भारत के समस्त महत्वपूर्ण स्थानों की यात्रा की हैं कभी अपनी गाड़ी से कभी ड्राईवर को साथ लेकर.  किन्तु यह ऐसी पहली यात्रा होने जा रही थी  जिसमे काफी दूरी तक पहाड़ो पर 11000 फीट की ऊंचाई तक यात्रा होनी थी और मैं अकेला गाडी चलाने वाला था हालाँकि दोनों भांजे गाड़ी चलाना जानते हैं परन्तु पहाड़ो पर गाडी चलाने का अनुभव नहीं है. खैर हिम्मत करके अकेले ही चलाने का मन बना लिया. हमने पूरी यात्रा का कार्यक्रम निम्नानुसार बनाया.

यमुनोत्री मंदिर


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