June 23, 2012
By: Jatdevta
Category: 01 January, 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 07 July, 08 August, 09 September, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Nainital, Uttarakhand
ओशो के भीमताल कैम्प में कई प्रवचन सुनने को मिले, जिसमें से आपके लिये ओशो के कुछ चुनिन्दा प्रवचन में से एक आपके लिये लाया हूँ मुझे तो इसमें काफ़ी दम लगा, आपको कैसा लगा, वो तो आप जाने। यह तो मैंने पहले ही बता दिया था कि यहाँ पर रुकने व् तीन समय का खाने सहित किराया पांच सौ रूपये डेली था अगर हम यहाँ खाने व् रुकने का मिलाकर कमरे के चार्ज का हिसाब लगाए तो घाटे का सौदा नहीं था, मैंने यहाँ के कई होटल में बात की थी जिसम से दो तीन ही इस कीमत में खाना व् रुकना देने पर तैयार थे, एक जरूरी बात और यहाँ पर कोई भी बन्दा रुक सकता है एक दिन दो दिन दस दिन बिलकुल होटल की तरह, उसे यहाँ के ओशो सन्देश में शामिल होना जरूरी नहीं है खासकर मेरे जैसा तो सिर्फ यह जानने को शामिल हुआ कि आखिर ओशो का मामला है क्या? क्योंकि इससे पहले मुझे ओशो के बारे में ज़रा सा भी पता नहीं था, यहाँ आकार एक बार भी मुझे नहीं लगा कि मैं ऐसे वैसे बाबाओं के चक्कर में फंस गया हूँ, सबको पूरी आजादी थी बस उनकी वेशभूषा पहननी जरूरी थी जो मैंने नहीं पहनी थी क्योंकि मैं किसी भी टाइप के बाबा का भक्त नहीं हूँ, अब वो चाहे ओशो ही क्यों ना हो, हाँ यह बात अलग है कि यदि बाबाओ की कोई बात गलती से भी मुझे उचित लगती है तो मैं उसपर अमल करता हूँ लेकिन उनका भक्त बने बिना?

भीमताल ओशो कैम्प में ओशो का फ़ोटो दर्शाया गया है।
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June 19, 2012
By: Jatdevta
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अब तक सुनते आये थे कि तालों में ताल नैनीताल, भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल जैसी कई ताल है जो कि नैनीताल के आसपास फ़ैली हुई है। इन सब तालों को देखने की इच्छा कई सालों से मन में हिलोरे मार रही थी। वैसे तो मैं भारत में बहुत सी जगह घुमक्कडी कर चुका हूँ लेकिन अभी तक मेरा चक्कर उतराखण्ड के कुमायूँ क्षेत्र में नहीं हुआ था। बनारस से आते ही सोच लिया था कि जैसे भी हो अबकी बार तो नैनीताल का एक चक्कर जरुर लगाना ही है। अपने एक ब्लॉगर बंधु जो अन्तर सोहिल के नाम से लिखते है। एक बार मैंने उन्हें नैनीताल के घूमने की इच्छा बतायी तो उन्होंने कहा कि अगर आप भीमताल आदि देखना चाहते हो तो मैं भी साथ चलूँगा। अन्तर सोहिल जी जो कि ओशो के आश्रम में जाकर वहाँ पर उनकी शिक्षा का आनन्द उठाते रहते है। उन्होंने बताया कि भीमताल में एक ओशो आश्रम है जिसमें जुलाई की दिनांक 15.06.2011 से तीन दिन का कैम्प लगने जा रहा है। मैंने सोचा कि अच्छा मौका है दो जानकारी एक साथ देखने को मिलेगी। पहली प्राथमिकता तो वहाँ घूमने की ही थी, दूसरी ओशो के आश्रम के बारे में जानने का मौका था कि आखिर ओशो आश्रम में क्या होता है लगे हाथ यह भी समझने का मौका मिलेगा। पहले तो हम दोनों का ही जाने का कार्यक्रम बना हुआ था। जिस कारण मैं तो अपनी नीली परी पर जाने की खुशी में तैयार ही था। लेकिन जिस दिन हमें जाना था उससे एक दिन पहले अन्तर सोहिल जी का फ़ोन आया, उन्होंने कहा जाटदेवता जी एक दोस्त और साथ हो लिया है अब बाइक पर कैसे जायेंगे। बाइक एक जाने वाले तीन, मामला वाकई परेशानी करने वाला था। आखिरकार इसका समाधान निकला कि बाइक से ना जाकर बस से जाया जाये। तब तय हुआ कि रात के ठीक 9 बजे आनन्द विहार बस अडडे पर मिलते है वहाँ से रात की बस में बैठकर भीमताल चला जाये।

यहाँ से भुट्टा लेकर खाया गया था।
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