हरिद्वार और देहरादून का तूफानी दौरा

November 09, 2012 By: Sushant Singhal Category: 02 February, 03 March, 04 April, 05 May, 06 June, 10 October, 11 November, 12 December, Best Time, Cities, Dehradun, Haridwar, Hills, Historical, Religious, Roads, Theme, Uttar Pradesh, Uttarakhand, Weekend-Delhi

Table of contents for हरिद्वार - देहरादून

  1. हरिद्वार और देहरादून का तूफानी दौरा

कुछ वर्ष पहले की बात है, शाम को लगभग छः बजे बैंक से लौटा तो घर में घुसते ही बातचीत कुछ इस ढंग से शुरु हुई –

श्रीमती जी -  “बच्चों की एक दिन के लिये हरिद्वार घूमने की इच्छा है।“

मैं – “कब ?”

बड़ा बेटा – “आज ही चलें?”  शनिवार है, कल की छुट्टी है, कल शाम तक वापिस आ जायेंगे!”

मैं – पर इतनी जल्दी सब कुछ कैसे होगा?”

श्रीमती जी – “अगर आपको चलने में कोई दिक्कत नहीं है तो इंतज़ाम भी हो ही जायेगा। आपको तो कोई परेशानी नहीं है ना?”

मैं – “पर वहां रात को ठहरेंगे कहां? शनिवार है, बहुत भीड़ होगी।  रात को ठहरने की भी जगह नहीं मिलेगी।“

छोटा बेटा – “हरिद्वार में तो हज़ारों होटल, धर्मशाला, आश्रम हैं, कहीं न कहीं जगह मिल ही जायेगी!”

श्रीमती जी – “बच्चों का बहुत मन है तो बना लेते हैं प्रोग्राम !”

मैं – “देख लो, अगर आधा घंटे में निकल सकें तो ठीक है, वरना रात को निकलना ठीक नहीं रहेगा।“

बड़ा बेटा – “फिर मैं गाड़ी बाहर निकाल लूं?”

मैं – “गाड़ी तो निकल जायेगी पर पहले जाने की तैयारी तो कराओ! अटैची – सूटकेस में सामान लगाना नहीं लगाना है क्या?”

छोटा बेटा – “हुर्रे !  अटैची तो गाड़ी में पहले से ही रख दी है हमने !” आपकी ही इंतज़ार कर रहे थे!”

मैं – “क्या मतलब ?  बिना मुझसे पूछे ही?  अगर मैं मना कर देता तो?”

श्रीमती जी – “घूमने जाने के लिये आप मना कर दें !  हो ही नहीं सकता !  आधी रात को भी कहीं घूमने जाने को कह दूं तो नींद में उठ कर ही चल दोगे!”  बस, इसी विश्वास से हमने सब सामान गाड़ी में पहले से ही रख रखा है।   चलो, उठो !  अब मुंह फाड़े हमें क्या ताक रहे हो?  कुछ चाय-कॉफी चाहिये तो दे देंगे, वरना गाड़ी बाहर निकालो और चलो !”  इतना कह कर तीनों एक दूसरे को देख कर अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराये और फिर खीसें निपोर दीं !  मुझे लगा कि मेरा परिवार मेरी नस-नस से वाकिफ़ है। (more…)

हरि का द्वार हरिद्वार – भाग २..

June 23, 2012 By: Praveen Gupta Category: Cities, Haridwar, Religious, Theme, Uttarakhand

हरिद्वार – ऋषिकेश
अपने होटल से हम गंगा स्नान करने के इरादे से हर की पौड़ी जैसे ही पहुंचे, हमारे होश उड़ गए, वंहा पर भयंकर भीड़ देखकर. फिर विचार किया कि ऋषिकेश स्वर्गाश्रम चला जाए, वंही पर माँ गंगा में डुबकी लगायेगे. हरकी पौड़ी और गंगा जी को पार करके हम ऋषिकेश मार्ग पर पहुंचे. एक थ्रीव्हीलर में बैठकर हम लोग सीधे स्वर्गाश्रम पर पहुँच गए. करीब ३५-४० मिनट का समय हम लोगो को लगा. और करीब २० रूपये सवारी के हिसाब से हमने किराया दिया. हम लोग शिवानंद झूला या फिर राम झूला पार करके स्वर्गाश्रम पर पहुँच गए. फिर हमने और बच्चो ने माँ गंगा में डुबकी लगाई. माँ गंगा में स्नान करके मन पवित्र हो गया. पता नहीं क्या बात हैं कि माँ गंगा में कितनी बार भी स्नान करो मन नहीं भरता हैं. और एक खास बात ओर हैं कि कितनी ही गर्मी क्यों न हो, गंगा जी में स्नान करके सुड़की आ जाती है.
ऋषिकेश हरिद्वार से करीब २५ किलोमीटर दूर हैं. इसको हिमालय का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है. ऋषिकेश हिन्दुओ के सबसे पवित्र स्थलों में से एक हैं. ऋषिकेश को केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. यह कहा जाता हैं कि यंहा पर भगवान विष्णु ऋषिकेश अवतार में प्रकट हुए थे. इसलिए इस स्थान का नाम ऋषिकेश हैं. वैसे तो ऋषिकेश में सैकड़ो मंदिर आश्रम हैं, पर समय अभाव के कारण में कुछ ही मंदिरों और आश्रमो में जा सका.
यंहा स्वर्गाश्रम पर गंगा जी का बहाव बहुत तेज हैं, गहराई बहुत है, तो स्नान करते समय एक तो किनारे पर ही नहाये, और यंहा पर जंजीरे भी पड़ी हुई हैं, जिन्हें पकड़कर स्नान कर सकते है. बच्चो को स्नान कराते समय बच्चो का ध्यान रखे, उन्हें आगे मत जाने दे. एक बात का और ध्यान रखे कि यंहा पर अपने सामान का ध्यान रखे, यदि एक मिनट को भी आप कि नज़र चूक गयी तो आपका सामान गायब हो जाएगा. ये गलती हमारे से हुई थी. मेरी पत्नी नीलम का पर्स साफ़ हो गया था.

नहा धोकर फोटो भी जरा फोटो भी खिचवाले

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यात्रा हरि के द्वार हरिद्वार की – भाग १

June 16, 2012 By: Praveen Gupta Category: Cities, Haridwar, Religious, StatesOfIndia, Theme, Uttarakhand

हरिद्वार

मैं ओर बच्चे बैठे बैठे प्रोग्राम बना रहे थे कि पेपर खत्म हो गए हैं, कंहा घूमने चला जाए, बच्चे कहने लगे कि पापा हरिद्वार यंहा से यानिकी मुज़फ्फरनगर से कुल ८९ किलोमीटर हैं, सबसे नज़दीक हैं, ओर हमें वंहा पर गए भी काफी समय हो गया हैं, तो हरिद्वार ही चलते हैं, बच्चो ने ठीक ही कहा था, हमारे मुज़फ्फरनगर से इतना नज़दीक होते हुए भी हम हरिद्वार नहीं जा पाते हैं. जबकि हरिद्वार हिन्दुओ का सबसे बड़ा तीर्थ स्थान हैं. पुरे संसार में हिंदू कंही भी हैं, वो एक बार हरिद्वार जरुर जाना चाहता हैं, ओर मरने के बाद भी उसकी अस्थिया हरिद्वार में ही गंगा जी में प्रवाहित कि जाती हैं.
कुछ हरिद्वार के बारे में
हरिद्वार यानि हरि का द्वार, या हरद्वार कहो यानि भोले कि नगरी. हरिद्वार हिन्दुओ का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल, देव भूमि उत्तराखंड का प्रवेश द्वार. माँ गंगा पहाड़ों से उतरकर हरिद्वार में ही मैदानों में प्रवेश करती हैं. इसलिए हरिद्वार का एक नाम गंगा द्वार भी हैं. हरिद्वार कुम्भ कि भी नगरी हैं. हर १२ साल बाद यंहा पर कुम्भ मेले का आयोज़न होता हैं. जिसमे पुरे भारतवर्ष से साधु संत, सन्यासी, तीर्थ यात्री आते हैं और महीने भर चलने वाले इस आयोजन में, अलग अलग तिथियों में गंगा जी में स्नान करते हैं. जिसे शाही स्नान भी कहते हैं. ये कंहा जाता हैं कि देवासुर संग्राम में जब असुर लोग अमृत लेकर के भाग रहे थे, तब अमृत कि बूंदे जंहा जंहा गिरी थी, वंही पर अमृत कुंड बन गए थे. उन्ही स्थानों पर हर १२ साल बाद कुम्भ मेले का आयोजन होता हैं. हरकी पौड़ी पर भी अमृत कि बूंदे गिरी थी. ये अमृत कुंड हर कि पौड़ी पर स्थित हैं, इसी लिए हरकी पोड़ी पर स्नान करने कि महत्ता हैं. हरिद्वार का एक नाम मायापुरी भी हैं.

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