Delhi to Vaishno Devi

पिछले कुछ दिनों से राजधानी दिल्ली का मौसम काफी गर्म था. ऊपर से रोज -रोज भ्रस्टाचार के नित नए जुमले और दिनांक 13 /7 का  मुंबई धमाका दिल को काफी व्यथित कर दिया. सोंचा क्यों ने दो चार दिन के लिये राजधानी से दूर कहीं सुकून के पल विताऊँ. परिवार के लोगों के बीच प्रस्ताव रखा और सबों ने वैष्णो देवी जाने का प्रस्ताव पारित कर दिया. तदनुरूप हमने अपने एक अजीज मित्र [श्री संजय सिंह] से इसकी चर्चा की और वे लोग भी हमारे साथ हो लिए.
अगले दिन अर्थात 14 /7 को हम लोग रात्रि 9 बजे वैष्णो देवी के लिए प्रस्थान कर गए. हमारी ट्रेन [समर स्पेशल] आनंद विहार टर्मिनल से रात्रि 11 .30 मिनट पर थी अतः हमने बदरपुर से मेट्रो पकर कर सचिवालय एवं राजीव चौक होते हुए 11 बजे रात्रि को आनंद विहार पहुँच गए. मै पहली बार मेट्रो की सवारी कर रहा था. मेट्रो वाकई लाजबाब है. पहली बार एहसास हुआ कि दिल्ली वासियों के लिए यह एक बेहतरीन तौफा है. क्या बढ़िया सर्विस है. वैसे भी रात्रि का समय था और मेट्रो का तस्वीर लेना वर्जित है अतः हमने कोई तस्वीर नहीं ली.
आगे दिल्ली से जम्मू तक के रास्ते में हमें समर स्पेशल ने काफी रुलाया और जैसे तैसे साम 3 बजे हम जम्मू तवी पहुँच सके. अन्तंत सायं 5 .30 हम लोग कटरा पहुच गए.

हमारी बस का कटरा चेक पोस्ट पर आगमन

हमारी बस का कटरा चेक पोस्ट पर आगमन



बस अड्डा पहुँचते ही सबसे पहले माँ वैष्णवी के दर्शन के लिए यात्रा कूपन लिया. तत्पश्च्यात वहीँ जम्मू एवं कश्मीर पर्यटन विभाग के एक होटल में कमरा बुक कराया. होटल बढ़िया था एवं काफी अच्छी साफ़ सफाई थी. हमलोग कुल 8 लोग थे, 4 बच्चे एवं ४ बड़े. चुकी हमें रात्रि विश्राम नहीं करना था अतः एक कमरा ही काफी था.

बस अड्डे का मनोरम दृश्य

बस अड्डे का मनोरम दृश्य

हम सभी का ग्रुप फोटो

हम सभी का ग्रुप फोटो

यहाँ एक बात बताना भूल गया कि हमारे समर स्पेशल ट्रेन में खाने-पिने की कोई व्यवस्था नहीं थी अतः हम सभी के पेट में चूहे दौर रहे थे. हमलोग जल्द से जल्द नहा धोकर तैयार हुए एवं नजदीक ही एक रेस्टुरेंट में पेट पूजा के लिए पहुँच चुके थे. तक़रीबन 24 घंटे बाद ढंग का कुछ नसीब हुआ था फलस्वरूप खाने का आनंद ही कुछ और था. रात्रि के 8 .30 बज चुके थे और अब हमलोग दर्शन के लिए प्रस्थान कर चुके थे. मौसम साफ़ था. हलकी हवा चल रही थी. पूर्णमासी का चाँद [गुरु पूर्णिमा] होने के वजह से वहां का दृश्य काफी मनोरम लग रहा था. मेरे मित्र का लड़का काफी छोटा है इसलिए हमने एक पिठ्ठू भी कर लिया. ये अलग बात है की उस बच्चे ने कभी पिठ्ठू की सेवा नहीं ली. वैसे हमारा पिठ्ठू था भी गबरू जवान आप खुद ही उसका फोटो देख लीजिये. परन्तु वह था काफी व्यबहार कुशल. हमने उसे सिर्फ इस बात के लिए चुना क्योंकि उसके साथी उसके कद काठी का मजाक बना रहे थे.

मै स्वभाव से काफी भुल्क्कर हूँ. साल में 4 -5 मोबाइल गुम हो जाना आम बात है. अभी यात्रा सुरु भी नहीं किया था कि अपना ब्लैक बेरी एक जगह भूल आया और काफी आगे निकल आया. सबके सब परेसान हो गए परन्तु पता नहीं मुझे विश्वास था कि हमें हमारा मोबाइल मिल जायेगा. तुरंत ही मै अपने मित्र संजय जी के साथ मोबाइल के खोज में निकल लिए. पूरे रास्ते में सभी दुकान एक जैसी प्रतीत होती है अतः उस जगह विशेष को याद करना मुस्किल हो रहा था. आखिर हम उस जगह पहुँच ही गए और एक यात्री जिसे कि मेरा मोबाइल मिला था वो हमारा ही इन्तजार कर रहा था. काफी सज्जन व्यक्ति थे और हमने उनका धन्यवाद किया और वापस यात्रा मार्ग पर आगे बढ़ गए.
रात्रि 12 .30 हमलोग अर्ध-कुमारी पहुच चुके थे. वहां दर्शनार्थियों की अच्छी खासी भीड़ थी और हम चाह कर भी अन्दर गुफा में प्रवेश नहीं कर पाए. 12 -12 घंटे का वेटिंग चल रहा था. चुकि हमारे साथ बच्चे भी थे और समयाभाव भी था अतः हमने आगे बढ़ने का फैशला किया. अर्ध्कुमारी से आगे बढ़ते ही बादलों ने अठखेलियाँ करना सुरु कर दिया. हवा सर्द हो चुकि थी और हमलोग बादलों के बीच लुका छिपी करते आगे बढ़ रहे थे. विदित हो कि बारिश का एक बूँद भी नहीं पड़ा. हम सभी लोग थकान एवं दर्द को भुलाकर उस ख़ूबसूरत मौसम का आनंद ले रहे थे. ये रात्रि सायद मेरे जिंदगी का एक बेहतरीन रात्रि था. क्या मौसम एवं कैसा मनोरम दृश्य? गहरी खाई, ऊंची पहाड़ी , सनसनाती सर्द हवा, बीच – बीच में बादलों का झुरमुट एवं साथ चल रहे सह यात्रियों का “जय मातादी” का जयकारा. हम लोग सायद ही उस पल को कभी भूल पायें. लग रहा था जन्नत की सैर कर रहे हों. हाँ, बच्चे इस ठंढ को बर्दास्त नहीं कर पा रहे थे. फलस्वरूप महिलायों ने अपनी-अपनी चुन्नी से बच्चों को ढका और हम आगे बढ़ते रहे.

इस बीच हमलोग कब हिमकोटी पहुँच गए पता ही नहीं चला. वहां सबों ने चाय की चुस्की ली और थोरा सुस्ताने के बाद आगे बढ़ गए. रत्रि 3 .30 हमलोग भवन के नजदीक पहुँच गए. माँ का भोग-प्रशाद खरीदने के बाद दर्शन के लिए हमलोगों ने अपना नंबर लगा दिया जो कि 157 था. इस बीच सभी लोग स्नान करने को चल दिए. उफ, क्या सर्द पानी था. लग रहा था अगर और कुछ ज्यादा स्नान किया तो यहीं पर राम नाम सत्य समझो. खैर नित्यक्रिया एवं स्नान ध्यान से निवृत होकर हमलोग अपना सामान लॉकर में रख कर माता के दर्शन के लिए पक्तिवध हो गए. सुबह के 5 बज चूका था. तक़रीबन 5 .45 में हमलोग दर्शन के लिए गुफा में प्रवेश कर चुके थे. इस बीच अन्दर माँ के सुबह की आरती की तैयारी चल रही थी और बाहर सूरज की लालिमा सम्पूर्ण परिदृश्य को अलौकिक बना रहा था. मानो लग रहा था आज माँ का साक्षात दर्शन होगा. यहाँ यह बताना जरूरी है कि माँ का पट सुबह 6 से 8 बजे के बीच आरती एवं साफ़ सफाई के लिए बंद रहता है. चुकि हम लोग अंतिम दरवाजा पर पहुँच चुके थे अतः हमें आगे बढ़ने दिया गया और बड़े ही शांति एवं सुकून से हमने माँ का दर्शन किया. दर्शन करके हमलोग धन्य हो चुके थे और काफी आह्लादित एवं प्रफ्फुल्लित महसूश कर रहे थे.

माँ के मंदिर का विहंगम तस्वीर

माँ के मंदिर का विहंगम तस्वीर

माँ के मंदिर का  तस्वीर

माँ के मंदिर का तस्वीर

सुबह 6 .30 हम लोग मंदिर से बाहर आ गए. अब भैरो नाथ के दर्शन कि बारी थी. परन्तु बच्चों ने आगे कि चढ़ाई चढ़ने से इनकार कर दिया. वैसे भी साम के 4 .15 में जम्मू तवी से हमारी वापसी ट्रेन थी. फलस्वरूप हमलोग निचे कटरा की ओर प्रस्थान कर गए.

मेरे मित्र एवं उनके परिवार के द्वारा माँ को वापसी में प्रणाम

मेरे मित्र एवं उनके परिवार के द्वारा माँ को वापसी में प्रणाम

मेरी पत्नी, लड़की एवं अन्य

मेरी पत्नी, लड़की एवं अन्य

मेरी  लड़की-निधि

मेरी लड़की-निधि

मेरे मित्र- श्री संजय जी

मेरे मित्र- श्री संजय जी

मेरी पत्नी- श्रीमती रानी

मेरी पत्नी- श्रीमती रानी

वापसी में घोड़ों एवं खच्चरों ने काफी पड़ेसान किया. इनके बीच आम दर्शनार्थियों का चलना काफी दुस्कर है. व्यस्थापकों को इसकी सुध लेनी चाहिए. खैर 12 .15 बजे हमलोग नीचे पहुँच गए और अपने होटल का बिल भुगतान कर एक टैक्सी [सुमो] भाड़े पर लिया. प्रशाद, माला एवं अन्य चीजों की खरीदारी की एवं भोजन करने के पश्चात् 2 .25 में जम्मू के लिए रवाना हो गए. साम के 4 .05 मिनट पर हमलोग जम्मू स्टेशन पर थे और पहुँचते हे हमारी ट्रेन भी आ गयी. अब हमलोग वापसी दिल्ली यात्रा पर थे. ये यात्रा काफी भाग दौर भरी रही और हमलोग लगभग 84 घंटे तक भागते ही रहे. सुबह 6.30 में दिल्ली एवं 8 बजे पुनः मेट्रो से अपने घर शिवदुर्गा विहार, सूरजकुंड, फरीदाबाद पहुँच गए. कुल मिलाकर यात्रा काफी आनंद-दाई एवं उत्तेजना से परिपूर्ण रहा.

!!!!!जय मातादी!!!!!

19 Comments

  • Gaurav Deep says:

    Bahut bahut dhanyawad apna anubhav hummare sath share karne ke liye. Aapne kafi details mein likha hai , jo kaye logo ke kaam aayega words ka selection bhi achha tha laaga jaise koi upanyas padh raha huun , par hindi thodi zayada klisht ho gayi aur Google translator english mein sahi sahi convert nahi kar saka !

    • Manojkecy says:

      Dear Gaurav ji,

      Namaskar !

      Thanks for your kind words. There are two reasons to post the story in Hindi. First there are majority of authors who writes in English & secondly I can express myself better in Hindi.

      Regards

      Manoj

  • Vibha says:

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  • vinaymusafir says:

    Jai Matadi,

    kafi accha laga aapka yatra varnan.
    Main bhi abhi picchle mahine hokar aaya hoon. bahut bheed thi.
    Par bahut accha anubhav raha

  • Sharma Shreeniwas says:

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    • Manojkecy says:

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  • Nandan says:

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    http://www.ghumakkar.com/2008/09/11/my-first-trek-to-ma-vaishno-devi/

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    • Manojkecy says:

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  • Sahil Sethi says:

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  • Manojkecy says:

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  • Brajesh Kumar says:

    Dear Manoj Ji,

    Many thanks for you are sharing your best experience about trip to Vaishno Devi.

    Will try to join you for next trip to Vaishno Devi

    Thanks and regards

    Brajesh Kumar( Ramesh)

    D2/185 SDV

    • Manojkecy says:

      Ramesh Ji,

      Sorry, we missed you though we had 2 additional ticket. Nex time we will visit together.

      Regards

      Manoj

      • Brajesh Kumar says:

        Dear Manoj ji,

        Many thanks for your quick response.

        Sanjay sir already asked me for this trip, but due to busy schedule I was not able to join this trip.

        Will try to join for next trip.

        Thanks and regards

        Ramesh

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