Kedarnath

Kali Mathh -काली मठ

Kali Mathh -काली मठ

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Kali Mathh is the only hindu temple, where they dont worship any pindi or any idol or photo.  It is only that hole which Kali caused, which is worshipped here.  All Shaktas at least once in their life, visit this place, specially Bengali Shakta followers. Even if you do not have deep religious appetite, the place is so beautiful, untouched by tourists and civilisation, that it would be a mistake not to have visited there by anybody loving Himalayas.

So in a wintery Feb,2010 I fixed programme with my childhood friends, Pradeep, Awasthi and Vijay to be ready for a surprise visit ! We started from Delhi early morning around 5 am and crossing the usually jammed roads, in the fastest way possible and reached Haridwar around 9.  Taking a quick dip in Ganges, we continued our journey uphill and next stop was at Devprayag.  You all know it is from Devprayag that the name Ganga starts, after Bhagirathi meets with Alaknanda.  We stopped for a while for “Pind-daan” of my father who died 2 months before.

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Devbhoomi Uttarakhand …..2

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….2      देवभूमी उत्तराखण्ड यात्रा – केदारनाथ-बद्रीनाथ स्वामीजी से अनुमति ले 23-अक्टूबर-2010 की सुबह मैं वहां से केदारनाथ के लिये रवाना हुआ। हलकी…

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Dev Bhoomi Uttarakhand

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मेरी चारधाम यात्रा – यमुनोत्री मेरी बहुत समय से उत्तराखण्ड-यात्रा की इच्छा थी और बीतते समय के साथ आशंका बलवती होती गई कि इस…

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At Kedarnath Dham – The holy town

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After the darshan we immediately went to the rear side of the temple to see the ‘Bhimshila’, the miracle boulder that was perched at the boundary of the temple and had supposedly diverted the mud flow from damaging the temple. It really seemed to be a true act of God. The path the mud flow had taken from Gandhi tal, whose walls had ruptured leading to the floods, were clearly visible.

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Delhi to Kedarnath, a long and arduous journey

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The continuous rains had made the final climb even tougher. While I waited with the kids, my husband and Ajay bhaiya went in search of a tented accommodation put up by GMVN. I was told that there was a long queue even for this basic accommodation, however Ajaybhaiya managed to get 5 beds for us in tent no C80. The accommodation was very basic and each bed meant a foam mattress and a sleeping bag.

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केदारनाथ यात्रा 2014 – सोनप्रयाग से केदारनाथ।

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रामबाड़ा पहुँच तो होश उड़ गए। सिर्फ रामबाड़ा नाम के अलावा  पर सही माने मे कुछ नहीं बचा था। अभी  मैं मंदाकनी नदी के बाएँ ओर चल रहा था लेकिन रामबाड़ा बाद आगे का पूरा रास्ता जिस पहाड़ पर बना था वो पहाड़ पिछले साल ढह गया था। सीधा बोलूँ तो रामबाड़ा बाद प्रशाशन नया रास्ता बनाया था। नए रास्ते पर जाने लिए बाएँ ओर से मंदाकनी को एक पुल के  जरिए पार करके दाएँ ओर जाना था। और अभी तक इस पुल पर काम चल रहा था।

कितने भयानक रूप से जलजला आया होगा। रामबाड़ा का नामोनिशान मिटा दिया। मेरी पिछली यात्राओं मे मैं और मेरा साथी यहीं पर विश्राम किया करते थे और पेट भर पराँठे खाया करते थे। यहाँ पर रात को सोने का इंतज़ाम भी हुआ करता था। ऐसी ही मेरी एक यात्रा मे केदारनाथ के दर्शन से लौटते वक़्त हमने रात के 2 बजे यहीं रामबाड़ा पर एक दूकान वाले से विनती करके कुछ खाने की पेशकश की थी। उस वक़्त उसके पास सिर्फ आलू की सब्ज़ी थी। हम उस साल 6 दोस्त गए थे। सभी भूखे थे हमारी हालत पर दुकानदार को तरस आया और बोला कि चलो ठीक है अंदर आ जाओ और पहले चाय पी लो तबतक मैं आटा गूँद देता हूँ। गर्म-गर्म रोटी और आलू की सब्ज़ी खाकर मज़ा आ गया था। तो मेरा ये वाक्य सुनाने का तात्पर्य यह है कि रामबाड़ा अपने आप मे एक सम्पूर्ण कसबे की तरह था। जहाँ पर यात्रा सीजन मे लोग हजारों की संख्या मे होते थे।   यहीं पर खच्चर स्टैंड भी हुआ करता था। लेकिन इस बार सब खत्म। जो पहली बार गया होगा वो कल्पना और यकीन अभी नहीं कर सकता कि रामबाड़ा पर कैसा कहर टूटा था।

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