Gangtok

सिक्किम त्रासदी : कुछ फुटकर यादें…

सिक्किम त्रासदी : कुछ फुटकर यादें…

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यही वज़ह है कि जब कोई प्राकृतिक आपदा उस प्यारी सी जगह को एक झटके में झकझोर देती है, मन बेहद उद्विग्न हो उठता है। हमारे अडमान जाने के ठीक दो महिने बाद आई सुनामी एक ऐसा ही पीड़ादायक अनुभव था। सिक्किम में आए इस भूकंप ने एक बार फिर हृदय की वही दशा कर दी है। हमारा समूह जिस रास्ते से गंगटोक फेनसाँग, मंगन, चूँगथाँग, लाचुंग और लाचेन तक गया था आज वही रास्ता भूकंप के बाद हुए भू स्खलन से बुरी तरह लहुलुहान

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सफ़र सिक्किम का भाग 8 : फूलों की तरह लब खोल कभी, खुशबू की जुबाँ में बोल कभी…

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दुनिया जहान की छोड़िए हम तो बात सिक्किम की कर रहे थे। क्या आपके लिए ये आश्चर्य की बात नहीं है कि सिक्किम जैसे अत्यंत छोटे से प्रदेश में भी इस फूल की 600 प्रजातियाँ हैं। दरअसल सिक्किम का कुछ हिस्सा समुद्र तल के करीब है तो इसके कुछ हिस्से कुछ 17000 फीट से भी ऊँचे हैं। इसलिए इस पूरे इलाके की आबो हवा इतने तरह के आर्किड्स की रचना करने में सहायक होती है।

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सफर सिक्किम का भाग 7 : बर्फ की वादियाँ , छान्गू झील और कथा बाबा हरभजन सिंह की !

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पिछली पोस्ट में आपने इस श्रृंखला में मेरे साथ यूमथांग घाटी की सैर की थी। शाम को हम गंगतोक लौट चुके थे। रात भर…

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Goecha La (Sikkim) Trek

Goecha La (Sikkim) Trek

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After spending a day in Gangtok, I proceeded to Yuksom, a small town about 150 km away from Gangtok which can be reached via Rwangla or Rangpo. This is the place from where the trek to Dzongri, Goecha La and to the base camp of Mt. Kanchenjunga begins. The way to Yuksom is absolutely gorgeous with marvelous mountain views with green/blue watered Rangit river flowing in the middle of this Himalayn Kingdom. I started of on 27th September for Yuksam via Rumtek and Rwangla. At Rumtek, we gave lift to a couple of people from Rwangla.

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सफ़र सिक्किम का भाग 5 : चोपटा घाटी और लाचुंग की वो निराली सुबह..

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पहाड़ के ठीक सामने का हिस्सा जिधर हमारा होटल था अभी भी अंधकार में डूबा था। दूर दूसरे शिखर के पास एक छोटा सा पेड़ किरणों की प्रतीक्षा में अपनी बाहें फैलाये खड़ा था। उधर बादलों की चादर को खिसकाकर सूर्य किरणें अपना मार्ग प्रशस्त कर रहीं थीं।

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सफ़र सिक्किम का भाग 4 : वो तेज़ हवा, बेहोशी और गुरुडांगमार झील…

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पर ये क्या बाहर प्रकृति का एक सेनापति तांडव मचा रहा था, सबके कदम बाहर पड़ते ही लड़खड़ा गये, बच्चे रोने लगे, कैमरे को गले में लटकाकर मैं दस्ताने और मफलर लाने दौड़ा । जी हाँ, ये कहर वो मदमस्त हवा बरसा रही थी जिसकी तीव्रता को 16000 फीट की ठंड, पैनी धार प्रदान कर रही थी । हवा का ये घमंड जायज भी था। दूर दूर तक उस पठारी समतल मैदान पर उसे चुनौती देने वाला कोई नहीं था, फिर वो अपने इस खुले साम्राज्य में भला क्यूँ ना इतराये । खैर जल्दी-जल्दी हम सब ने कुछ तसवीरें खिंचवायीं ।

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Namprikdang Of Dzongu, North Sikkim

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Having grown up amongst the same type of houses and among Lepcha neighbours and friends in Kalimpong, it was indeed heartening to connect with the ancient times at Namprikdang. Of course there was the official reception of VIPs in the traditional ways, the forgettable speeches after speeches, with clear and present hints to “vote for me”.

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Contemplation and Khangchendzonga

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Khangchendzonga at 8586m is the third highest peak in the world. It is not a calm and serene mountain as it appears to be when viewed from Darjeeling or Sikkim. Both ice and rock avalanches of incredible dimensions are frequent occurences.Hurricanes of incredible force are one of the deadliest of Kanchenjunga’s weapons which plays havoc with any intruder who ventures “to walk the heights of gods.” This is an article which I wrote sometime ago but Kanchenjuga remains ageless.

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