Sikkim

Sikkim is a state blessed by Natures Marvels. One can find this mountainous region blooming with flowers in the spring and frozen lakes in winter. Gangtok, the capital city is a modern hill station with all amenities. The weather is pleasing most of the year and its Buddhist past has a tremendous appeal. The Institute of Tibetology, Do-Drul Chorten, Enchey Monastery, Rumtek Monastery and monasteries at Pemayangtse and Tashiding are visit worthy places. Among other places are the sacred and serene Changu Lake, Khecheopalri Lake, the quaint hamlet of Pelling, the traditional “Lepcha” village at Chungthang, the view of the magnificent Kanchenjunga peak at Singhik and the remote and flower-bedecked valley at Yumthang. There are numerous activities attracting adventure tourism enthusiasts like trekking in Tendong Hill, the Versey Rhododendron Sanctuary, Menam Hill and Dzongri Trail. Hang-gliding at Jorethan, Kayaking and River Rafting on the river Teesta, Mountaineering and Mountain biking can be thrilling experiences.
Sikkim being mountainous terrain does not have an airport or railway network. The nearest airport is Bagdogra in West Bengal and nearest railhead is New Jalpaiguri. Gangtok can be reached by road from Siliguri, Darjeeling, Bagdogra and New Jalpaiguri.
Best Time to visit: March to May and then October to mid-December
Languages Spoken: Nepali, Sikkimese
Climate: Temperate climate with pleasant summers, heavy rainfall during monsoon and cold winters
Holy Places: Do-Drul Chorten, Enchey Monastery, Rumtek Monastery, monasteries at Pemayangtse and Tashiding
Places to visit: Institute of Tibetology, Pelling Hamlet
Natural Wonders: Changu Lake, Khecheopalri Lake, Singhik
Adventure tourism: Hang-gliding at Jorethan, Kayaking and River Rafting on the river Teesta, Trekking in Tendong Hill, the Versey Rhododendron Sanctuary, Menam Hill and Dzongri Trail and Mountain biking
Mountaineering Peaks: Freys Peak, Jopuno, Tinchenkhang, Byrmkhangse and Lamo Angden

सिक्किम त्रासदी : कुछ फुटकर यादें…

सिक्किम त्रासदी : कुछ फुटकर यादें…

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यही वज़ह है कि जब कोई प्राकृतिक आपदा उस प्यारी सी जगह को एक झटके में झकझोर देती है, मन बेहद उद्विग्न हो उठता है। हमारे अडमान जाने के ठीक दो महिने बाद आई सुनामी एक ऐसा ही पीड़ादायक अनुभव था। सिक्किम में आए इस भूकंप ने एक बार फिर हृदय की वही दशा कर दी है। हमारा समूह जिस रास्ते से गंगटोक फेनसाँग, मंगन, चूँगथाँग, लाचुंग और लाचेन तक गया था आज वही रास्ता भूकंप के बाद हुए भू स्खलन से बुरी तरह लहुलुहान

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सफ़र सिक्किम का भाग 8 : फूलों की तरह लब खोल कभी, खुशबू की जुबाँ में बोल कभी…

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दुनिया जहान की छोड़िए हम तो बात सिक्किम की कर रहे थे। क्या आपके लिए ये आश्चर्य की बात नहीं है कि सिक्किम जैसे अत्यंत छोटे से प्रदेश में भी इस फूल की 600 प्रजातियाँ हैं। दरअसल सिक्किम का कुछ हिस्सा समुद्र तल के करीब है तो इसके कुछ हिस्से कुछ 17000 फीट से भी ऊँचे हैं। इसलिए इस पूरे इलाके की आबो हवा इतने तरह के आर्किड्स की रचना करने में सहायक होती है।

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सफर सिक्किम का भाग 7 : बर्फ की वादियाँ , छान्गू झील और कथा बाबा हरभजन सिंह की !

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पिछली पोस्ट में आपने इस श्रृंखला में मेरे साथ यूमथांग घाटी की सैर की थी। शाम को हम गंगतोक लौट चुके थे। रात भर…

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Goecha La (Sikkim) Trek

Goecha La (Sikkim) Trek

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After spending a day in Gangtok, I proceeded to Yuksom, a small town about 150 km away from Gangtok which can be reached via Rwangla or Rangpo. This is the place from where the trek to Dzongri, Goecha La and to the base camp of Mt. Kanchenjunga begins. The way to Yuksom is absolutely gorgeous with marvelous mountain views with green/blue watered Rangit river flowing in the middle of this Himalayn Kingdom. I started of on 27th September for Yuksam via Rumtek and Rwangla. At Rumtek, we gave lift to a couple of people from Rwangla.

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In the Valley of Flower

सफ़र सिक्किम का भाग 6 : फूलों की घाटी यूमथांग !

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चूंकि ये घाटी 12000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है यहाँ गुरूडांगमार की तरह हरियाली की कोई कमी नहीं थी। कमी थी तो बस आसमान की उस नीली छत की जो सुबह में दिखने के बाद यहाँ पहुँचते ही गायब हो गई थी। पहाड़ों में बस यही दिक्कत है। अगर नीली छतरी का साथ ना हो तो प्रकृति का सारा नैसर्गिक सौंदर्य फीका पड़ जाता है।

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सफ़र सिक्किम का भाग 5 : चोपटा घाटी और लाचुंग की वो निराली सुबह..

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पहाड़ के ठीक सामने का हिस्सा जिधर हमारा होटल था अभी भी अंधकार में डूबा था। दूर दूसरे शिखर के पास एक छोटा सा पेड़ किरणों की प्रतीक्षा में अपनी बाहें फैलाये खड़ा था। उधर बादलों की चादर को खिसकाकर सूर्य किरणें अपना मार्ग प्रशस्त कर रहीं थीं।

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सफ़र सिक्किम का भाग 4 : वो तेज़ हवा, बेहोशी और गुरुडांगमार झील…

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पर ये क्या बाहर प्रकृति का एक सेनापति तांडव मचा रहा था, सबके कदम बाहर पड़ते ही लड़खड़ा गये, बच्चे रोने लगे, कैमरे को गले में लटकाकर मैं दस्ताने और मफलर लाने दौड़ा । जी हाँ, ये कहर वो मदमस्त हवा बरसा रही थी जिसकी तीव्रता को 16000 फीट की ठंड, पैनी धार प्रदान कर रही थी । हवा का ये घमंड जायज भी था। दूर दूर तक उस पठारी समतल मैदान पर उसे चुनौती देने वाला कोई नहीं था, फिर वो अपने इस खुले साम्राज्य में भला क्यूँ ना इतराये । खैर जल्दी-जल्दी हम सब ने कुछ तसवीरें खिंचवायीं ।

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