हिन्दी में घुमक्कड़ी

आस्था और सुन्दरता का संगम – स्वर्ण मंदिर अमृतसर

By

आप को बता दू की अगर बॉर्डर देखने का मन हो तो सुबह या 12/1 बजे तक भीड़ बढ़ने से पहले हो आये ताकि इत्मीनान से देख सके और हो सकता है पाकिस्तानी रेंजर आपको चाय पानी पूछ ले…साधारण दिनों में बॉर्डर पे आपसी भाईचारा और मित्रता का माहौल रहता है दोनों और के सैनिको के मध्य..बातचीत हंसी मजाक..चलता रहता है.

Read More

वाह ताज – खूबसूरती और प्रेम का अनोखा संगम

By

सुबह सुबह साड़े पांच बजे नींद खुल गयी एवं पत्नी का मूड एक बार फिर ताज देखने का हुआ…हलकी ठण्ड में पैदल ही पहुच गये और आश्चर्यचकित हो के देखते क्या है की सिर्फ हम गिने चुने दो चार भारतीय थे और लगभग पांच सात सौ की संख्या में विदेशी पर्यटक…हर देश के …कही से इंग्लिश भाषा सुनाई दे रही थी तो कही कोई गाइड स्पेनिश या जर्मन भाषा में इन पर्यटकों से बात कर रहा था…पता चला की लगभग सभी विदेशी सुबह ही यहाँ आते है भारतीय भीड़ से दूर और ये सुझाव उन्हें गाइड और होटल वाले देते है…पिछले दिन भी विदेशी पर्यटक काफी थे पर आज ऐसा लगा की हम लोग विदेश घुमने आये है …इतने अधिक विदेशी एक साथ एक ही जगह पे भारत में कही नही देखने को मिलते..

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — तोष, कसोल और छलाल

By

कसोल से लगभग दो किलोमीटर दूर छलाल गांव तक इस पुल को पार करने के बाद केवल पैदल ही जाया जा सकता है. छलाल गांव में जाने वाला रास्ता पार्वती नदी के किनारे है. रास्ते के एक ओर पार्वती नदी के जल का मधुर स्वर पूरे रास्ते आपके कानों से टकराता रहता है. और दूसरी ओर ऊँचे पर्वत इस मार्ग को मनोहारी बना देते है. देवदार के घने वृक्षों से होकर छलाल गांव तक की पदयात्रा का अनुभव अपने आप में अनूठा है.
छलाल गांव में पहुँचने पर शाम हो चुकी थी. रात्रि विश्राम के लिए छलाल में रूककर अगले दिन आगे की यात्रा का निर्णय लिया.

Read More

नव वर्ष और गोवा

By

यहाँ मैं ये अवश्य बताना चाहूँगा की यूथ हॉस्टल द्वारा आयोजित ये कार्यक्रम इतना सुनियोजित सुसंगठित एवं व्यवस्थित होता है की इसमें आप किसी तरह की कमी नहीं निकाल सकते..स्वादिष्ट नाश्ता शुद्ध शाकाहारी भोजन…इतने न्यून राशि में नव वर्ष को गोवा जैसी अत्यंत महँगी जगह पे आना साधारण मध्य वर्गीय के लिए बहुत मुश्किल के किन्तु इस आयोजन में ये खर्च न्यून से भी न्यूनतम है..इसके लिए आयोजनकर्ता यूथ हॉस्टल वन्दनीय है जिसमे सभी कार्यकर्त्ता वोलेंटियर होते है जो अपने कार्यस्थल से छुट्टी ले के इस 20/25 दिन के आयोजन को सफल बनाते है.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा से वापसी

By

नकथान में ग्रामवासियों को दैनिक जीवन के क्रिया कलापों को करते देखा जा सकता है. अपने आस-पास उपलब्ध दैनिक जीवन के सीमित सुविधा, संसाधनों से संतुष्ट यहाँ के लोग जीवन को वास्तविक रूप में जीते हैं. झरनों का बहता स्वच्छ-शुद्ध जल, पहाड़ों से होकर आती शीतल सुगन्धित वायु, पहाड़ों के बीच बहती पार्वती नदी, छोटे-छोटे खेत और बागों में उगने वाले फल, सब्जी और अन्न और साथ में रहने वाले सहयोगी पशु. जीवन को वास्तविक रूप में जीने के लिए बस इतना ही चाहिए इसके अतिरिक्त बाकी सब जीवन को और अधिक सुविधा-संपन्न बनाने की कभी न ख़त्म होने वाली लालसा ही है.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — खीर गंगा

By

खीर गंगा का प्रमुख आकर्षण यहाँ बना हुआ प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड “पार्वती कुंड” है. प्राचीन मान्यता के अनुसार खीर गंगा में प्राचीन समय में खीर बहती थी जो पहाड़ों के बीच से होकर पार्वती कुंड में गिरती थी. वर्तमान में भी पार्वती कुंड के पानी का रंग सफ़ेद है और खीर की मलाई जैसे छोटे-छोटे कतरे पार्वती कुंड के पानी में देखे जा सकते है. इसी कारण से इसका नाम खीर गंगा पड़ा. पार्वती कुंड में नहाने से पहले कुंड की पवित्रता बनाये रखने के लिए कुंड के बाहर गिरते पानी में नहाना आवश्यक है.

Read More

पार्वती घाटी (कुल्लू) में एकल (solo) घुमक्कड़ी — मणिकर्ण

By

गुरुद्वारा श्री मणिकर्ण साहिब के अतिरिक्त यह स्थान अपने गर्म पानी के स्रोतों के लिए भी प्रसिद्ध है. खौलते पानी के स्रोत मणिकर्ण का सबसे अचरज भरा और विशिष्ट आकर्षण हैं. इन स्रोतों के गंधकयुक्त गर्म पानी में कुछ दिन स्नान करने से चर्म रोग या गठिया जैसे रोगों में विशेष लाभ मिलता है. इस पानी में गंधक के कारण अधिक देर तक नहाने से चक्कर भी आ सकते हैं. इन्हीं स्रोतों के गर्म पानी का उपयोग गुरुद्वारे के लंगर के लिए चाय बनाने, दाल व चावल पकाने के लिए किया जाता है. गर्म पानी के इन स्रोतों में पानी के तापमान का अनुमान नीचे दिया गए विडियो से लगाया जा सकता है.

Read More

वज्रेश्वरी के गर्म पानी के स्रोतों का आश्चर्य

By

एक-दूसरे पर जल के छीटें फेंकना, हंसी-मज़ाक करना, पानी के बीच अपनी फोटो खिंचवाना इत्यादि जल-क्रियाओं से लोग खुशियाँ मना रहे थे. तैरना जानने वाले लोग तो उस नदी के बीचो-बीच तैर रहे थे. कुछ स्त्रीयां नदी के तट पर बैठ कर अपनी-अपनी अंजुलियों में किनारे पर आई हुईं छोटी-छोटी मछलियों को पकड़ने की चेष्टा कर रहीं थीं.

Read More

एशिया का एकमात्र टैंक म्यूजियम , अहमदनगर टैंक म्यूजियम

By

सारा परिसर कई प्रकार के टैंकों से भरा था. मगर मेरी नज़र किसी भारतीय टैंक को ढूँढने में लगी हुई थी. अंत में उसी परिसर में एक भारतीय टैंक सुशोभित दिखाई दिया, जिसका नाम “Vijayanta” था. यह टैंक सेंचुरियन टैंकों की श्रेणी का था, जिसे सम्पूर्ण रूप से भारत में बनाया गया था. यह १९६६ में सेना में शामिल हुआ और २००४ में इसे सेवानिवृत किया गया. १९७१ के युद्ध में इसने अहम् भूमिका निभाई. पर उससे भी ज्यादा गौरव की बात यह है कि इसी टैंक ने भारत को टैंकों की दुनिया में निर्माणकर्ता राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल कर दिया.

Read More

दिल्ली से हाटु पीक नारकंडा की बाइक यात्रा

By

हाटु पीक से करीब दो किलोमीटर पहले से ही सड़क पूरी तरह से बर्फ से ढकी हुई थी और जैसे ही हमने उसके ऊपर बाइक चलाने की कोशिश की, बाइक आगे जाने की बजाय पीछे की तरफ फिसलने लगी। हमारे पीछे कुछ फ़ीट पर खाई थी और रोकने के बावजूद बाइक पीछे की तरफ फिसल रही थी इसलिए मैंने बाइक को दाहिने हाथ के तरफ गिरा दिया जिससे बाइक का हैंडल बर्फ में धंस गया और बाइक रुक गयी।

Read More

अंजनेरी पर्वत की पदयात्रा

By

पर्वत की तलहटी वहाँ से लगभग २ किलोमीटर दूर थी. वहाँ तक का रास्ता घुमावदार, पथरीला और उबड़-खाबड़ था. उस पर चलने वाली गाड़ियाँ भयानक हिचकोले ले रहीं थी. पर पदयात्री की लिए, उस मौसम में, वह रास्ता बेहद ख़ूबसूरत नज़ारा पेश कर रहा था. मैं धरती पर नीचे उतर आये बादलों के बीच चल रहा था, पौधों और वृक्षों से हरे हो चुके पहाड़ों को निहार रहा था, कलकल बहने वाले झरनों की आवाज सुन रहा था, उन्मुक्त स्वच्छ हवा में साँसे ले रहा था. ऐसे में सड़कों का पथरीला होना क्या महत्व रखता है? तीन-चार घुमाव के बाद रास्ता समतल हो गया. अब तो प्रकृति की छटा देखते ही बनती थी. बस एक तस्वीर की कल्पना कीजिये

Read More

पांडव लेनी (गुफा), नासिक की पदयात्रा

By

नामकरण के किस्सों को जानने के पश्चात् मैं इन्हें देखने के लिए और लालायित हो उठा. कदम तेजी से बढ़ने लगे और मैं गुफा-वृन्द के गेट पर आ गया. वहां २४ लाजवाब गुफाएं थीं. पुरातत्व विभाग द्वारा एक बोर्ड भी लगा हुआ था, जिसमें बताया गया की वे गुफाएं लगभग २०० वर्षों में बनीं थीं. कई गुफाएं तत्कालीन सम्राटों और धनिक-सम्मानित लोगों के द्वारा दान में दी गयी राशि से बनाई गयीं थीं और बौद्ध धर्म के हीनयान सम्प्रदाय के अनुयायियों द्वारा उपयोग में लाई जातीं थीं.

Read More