ठंडी सड़क पर कुछ कदमचलते ही हमे नीचे झील तक जाने का एक कच्चा रास्ता नजर आया तो उस रास्ते होते हुए झील की बिल्कुल पास पहुँच गए, अपने कैमरे कुछ फोटो यहाँ पर लेने के बाद वापिस ठंडी सड़क पर आ गए । नैनीताल के सुहाने मौसम में एक तरफ हरी-भरे पेड़-पौधों से लदी पहाड़ी तो दूसरी तरफ झील का मनोरम नजारा लेते हुए इस मार्ग से गुजरते हुए प्रकृति के सुन्दर स्वरूप के दर्शन करना वाकई में प्रकृति के गोद में होने का एक अनूठा अहसास दिला देता हैं । नैनी झील के जलीय जीवो को झील के पानी से पर्याप्त मात्रा में जीवन रक्षक गैस ऑक्सीजन मिलती रहे, इसके लिए ठंडी सड़क पर झील किनारे दो प्लांट लगे हुए है, एक तल्लीताल और दूसरा मल्लीताल की तरफ । यह प्लांट झील के पानी के शुद्धिकरण और पानी में घुलनशील जीवन रक्षक गैस आक्सीजन नियंत्रित करते है । जब यह प्लांट काम कर रहा होता तब झील के बीच पानी में कई सारे गोल छल्ले से नजर आते हैं ।
जागेश्वर के इन मंदिरों का निर्माण पत्थर की बड़ी-बड़ी शिलाओं से किया गया है । दरवाजों की चौखटें देवी देवताओं की प्रतिमाओं से अलंकृत हैं । मंदिरों के निर्माण में तांबे की चादरों और देवदार की लकडी का भी बखूबी प्रयोग किया गया है । इन मंदिर समूह कुछ मंदिर के शिखर काफी ऊँचे तो कुछ काफी छोटे आकार के भी हैं । जागेश्वर मंदिर समूह के ये मंदिर पहाड़ों की स्थापत्य और शिला कला के बेजोड़ नमूने होने के साथ-साथ पुरातत्व के नजरिये से भी बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं । जिसको देखते हुए भारतीय पुरात्तत्व विभाग ( A.S.I.) ने मंदिर के पास ही एक संग्रहालय भी बनाया हुआ है । इसमें जागेश्वर के मंदिरो से निकली अमूल्य प्राचीन मूर्तियों और अनेको प्रकार के प्राचीन पत्थरों, सामग्री को रखा गया है । इन मंदिरों को के कत्यूरी राजाओं ने आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच गुप्त साम्राज्य काल के दौरान बनवाया था ।
पाताल की यह गुफा काफी लंबी हैं, और गुफा अंदर प्रकृति के द्वारा चूने-पत्थर से निर्मित विभिन्न प्रकार की अद्भुत संरचनाये दृष्टिगोचर होती है और युगों-युगों का इतिहास एक साथ हमारे प्रकट हो जाता है । गुफा की हर संरचनाये हमारे ग्रन्थ-पुराण में वर्णित कथाओं और घटनाओ को सहज हमारे प्रस्तुत करते हुए हमे उनकी सच्चाई और वास्विकता का प्रमाण देती हैं । गुफा की दीवारों पर उभरी पत्थरों की यह सरंचनाये, एक बड़ी संख्या में हिंदू धर्म के सभी मंदिरो के तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करती नजर आती है । गुफा में बने पत्थरों के ढांचे हमारे देश के आध्यात्मिक वैभव की पराकाष्ठा के विषय में हमे सोचने को मजबूर करती हैं और गुफा के स्थापत्य को देख दांतो तले उंगली दबाने को मजबूर कर देती है ।