तपोवन – एक अनोखी दुनिया

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वो साइन बोर्ड देख कर अपना माथा ठनका, मैं बोला, कमाल है यार, पहाड़ों पर भी निजी संपाति, हे भगवान, ऐसे हो रहा है भारत निर्माण ! वहीं थोड़ी दूरी पर ही हमें एक चरवाहा बकरियाँ चराता हुआ दिखाई दिया, हमने सोचा इस चरवाहे से ही कुछ जानकारी ले ली जाए ! पास जाकर पूछा तो पता चला कि ये सारा इलाक़ा तपोवन ही है, और ये निजी संपाति किसी बड़े व्यापारी की है !

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नौकूचियाताल, सातताल और भीमताल भ्रमण

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सातताल जाने का मार्ग वही था जिसपर चलकर कल हम लोग नैनीताल गए थे, भीमताल से लगभग 5-6 किलोमीटर चलने के बाद सड़क के बाईं ओर से एक मार्ग निकलता है, ये मार्ग घने जंगलों से होता हुआ सातताल तक जाता है ! हालाँकि कुछ लोगों ने बताया कि भीमताल से सातताल जाने के लिए एक कच्चा पर छोटा रास्ता भी है, अगर कभी फिर से नैनीताल आना हुआ तो इस कच्चे मार्ग से भी ज़रूर यात्रा करूँगा ! सातताल जाने का सड़क वाला मार्ग भीमताल-नैनीताल मार्ग की अपेक्षा थोड़ा कम चौड़ा और अपेक्षाकृत कम भीड़-भाड़ वाला है ! इस मार्ग के शुरुआत में ही एक शिक्षण संस्थान था, जहाँ लोगों की चहलकदमी थी पर आगे जाने पर हमें मुश्किल से इक्का-दुक्का गाड़ियाँ और लोग ही इस राह पर देखने को मिले !

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नैनीताल की गुफ़ाओं में बिताए कुछ यादगार पल

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रास्ते में जहाँ भी कहीं खूबसूरत नज़ारे दिखाई देते हम लोग झट से अपनी गाड़ी रोक कर थोड़ी देर वहाँ की खूबसूरती को निहारने लगते ! ऐसी यात्राओं पर अपनी गाड़ी लाने का ये सुख तो रहता है कि जहाँ मन चाहे आप रुक कर दो पल के लिए वहाँ की खूबसूरती को निहार सकते है ! खैर, ऐसे ही रास्ते भर जगह-2 रुकते-रुकाते हम लोग 1 घंटे में नैनीताल पहुँच गए !

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नौकूचियाताल का यादगार सफ़र

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इस मार्ग पर यात्रा करने के बाद मैं सभी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए अपने सभी पाठकों को ये बताना चाहता हूँ कि इस सड़क की हालत काफ़ी अच्छी है और यदि कोई घुमक्कड़ अपनी गाड़ी से नैनीताल जाना चाहे तो बेधड़क इस मार्ग से जा सकता है ! मेरी अपेक्षाओं के विपरीत ये मार्ग काफ़ी अच्छा है और मार्ग पर गाड़ी चलाते हुए कभी भी ये एहसास नहीं हुआ कि यहाँ गाड़ी लाकर मैने कोई ग़लती ही है ! लैंसडाउन यात्रा के बाद से ही मैं उत्तरांचल में किसी यात्रा पर अपनी गाड़ी लेकर जाने के लिए आशंकित था पर यहाँ आकर मुझे बहुत अच्छा महसूस हुआ !

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लैंसडाउन से वापसी का सफ़र

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टिप-एंड-टॉप जाने की मुख्य सड़क तो मंदिर के सामने ही है जबकि इस मुख्य सड़क के उस पार से ही एक कच्चा रास्ता उपर की ओर जा रहा था, हम तीनों इसी कच्चे रास्ते से उपर की ओर चढ़ने लगे ! यहाँ पर आपको तस्वीरों की कमी महसूस हो सकती है क्योंकि बारिश की वजह से हम लोग कैमरा अपने कमरे में ही छोड़ आए थे ! खैर, इस कच्चे रास्ते से होते हुए हम लोग सीधे टोल नाके के पास पहुँच गए ! पहाड़ों पर अक्सर ऐसा होता है, पक्के रास्ते बहुत ही घुमावदार और लंबे होते है, इसलिए यहाँ के स्थानीय लोग आवागमन के लिए इन कच्चे रास्तों का उपयोग ज़्यादा करते है !

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पलवल से लैंसडाउन का सफ़र

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गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी पर बने पुल से जब हम गुज़रे तो गंगा नदी का सौंदर्य देख कर मन खुश हो गया, रास्ता बढ़िया होने के कारण यहाँ तक का सफ़र हमने कब तय कर लिया पता ही नहीं चला ! लैंसडाउन जाने के लिए वैसे तो मेरठ से होकर भी एकमार्ग है पर सावन का महीना होने के कारण हमने उस मार्ग पर जाना उचित नहीं समझा ! अक्सर सावन माह में कावड़ियों की वजह से इस मार्ग पर काफ़ी अवरोध होता है, और अगर किसी सफ़र की शुरुआत में ही आपको ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ जाए तो सारे सफ़र का मज़ा ही किरकिरा हो जाता है !

खैर, यही सोच कर हमने इस मार्ग से ना जाने का निश्चय किया पर बाद में ये ही हमारी सबसे बड़ी ग़लती साबित हुई ! गूगल बाबा का सहारा लेकर हम लोग राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर आगे बढ़ते रहे, गजरौला तक तो मार्ग बहुत ही बढ़िया था, फिर गजरौला पहुँचने के बाद हम लोग इस राजमार्ग से उतरकर अपनी बाईं ओर गजरौला-चांदपुर मार्ग पर चल दिए ! इस मार्ग पर आगे अवरोध था इसलिए हमें वापस राजमार्ग 24 पर आकर 1 किलोमीटर आगे जाकर एक रेलवे फाटक को पार करके घूम कर गजरौला-चांदपुर मार्ग पर आना पड़ा !

गजरौला-चांदपुर मार्ग पर लगभग 35 किलोमीटर चलने के बाद हम लोग चांदपुर-नेथौर मार्ग पर पहुँच गए ! इस मार्ग पर तो स्थिति बहुत ही खराब थी, जैसे-2 हम लोग आगे बढ़ रहे थे रास्ता भी खराब होता जा रहा था ! राष्ट्रीय राजमार्ग 24 बहुत ही बढ़िया था, गजरौला-चांदपुर मार्ग ठीक-ठाक था, पर चांदपुर-नेथौर मार्ग तो इतना खराब था कि गाड़ी चलाने का भी मन नहीं कर रहा था ! यहाँ आकर हमने गूगल बाबा को जो कोसना शुरू किया तो वो पूरे सफ़र में जारी रहा, यहाँ पर तो मैनें कान पकड़ लिए कि कभी भी गूगल पर इतना भरोसा नहीं करूँगा !

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मसूरी से नोयडा का सफ़र

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भूख तो मुझे भी लगी थी, इसलिए मैं भी नींद में ही उनके पीछे-2 हो लिया ! अंदर जाकर ताज़े पानी से मुँह-हाथ धोए और फिर खाना खाने के लिए जाकर बैठ गए ! यहाँ का खाना बहुत बढ़िया था, और खाना परोसने वाले लोगों ने ग्रामीण परिधान धारण कर रखे थे ! कुल मिलकर इस रेस्टोरेंट में ग्रामीण परंपरा को दिखाने की कोशिश की गई थी ! हमने खाने के बाद यहाँ के गुलाब जामुन का भी स्वाद चखा, जोकि बहुत ही नरम और स्वादिष्ट थे !

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पिछोला झील और रोपवे भ्रमण

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अपनी योजना के मुताबिक मैने तो उदयपुर में घूमने के लिए जगहों की एक लंबी-चौड़ी सूची बना रखी थी ! पर जो जानकारी हमें नाश्ता करते हुए मौसी जी से मिली, वो बहुमूल्य थी ! इस जानकारी के मुताबिक आज हम लोग स्थानीय भ्रमण के लिए जाने वाले थे ! नाश्ता करने के बाद हमने अपने साथ ले जाने का ज़रूरी समान अपने बैग में रखा और जूते पहनकर तैयार हो गए !

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धनोल्टी से मसूरी का सफ़र

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जब हमने होटल का कमरा देखा तो हमें वो पसंद आ गया, कमरे की खिड़की से बाज़ार का नज़ारा भी दिखाई दे रहा था !हालाँकि होटल की हालत देख कर ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं था कि ये बहुत पुराना होटल है, कमरे की सजावट और पुराने जमाने के खिड़की-दरवाजे इस बात का प्रमाण दे रहे थे कि ये होटल बहुत पुराना है ! असल में हमारे दो कमरे थे जो एक दरवाजे के माध्यम से आपस में जुड़े हुए थे, हमने सोचा एक रात की ही तो बात है और फिर आलीशान होटलों में तो हम अक्सर ही रुकते है, इस बार ऐसे माहौल का भी आनंद लिया जाए ! जब कमरे का किराया पूछा तो होटल के मालिक ने बताया 1000 रुपए प्रतिदिन !

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एक यात्रा मेहंदीपुर बालाजी की

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उसने बताया कि उसके किसी परिचित ने जानकारी दी है कि बालाजी में शनिवार और मंगलवार को काफ़ी भीड़ रहती है ! आज रात को घर से निकलने पर हम भगवान के दर्शन के लिए तो कल सुबह ही जा पाएँगे और कल शनिवार होने की वजह से हमें दर्शन के लिए कई घंटो तक लाइन में खड़े होकर इंतज़ार करना पड़ सकता है ! साथ ही उसने ये भी सुझाया कि क्यों ना हम लोग बालाजी जाने के लिए यहाँ से कल दिन में चलें ! शाम को यहाँ से निकलने पर हम लोग रात तक वहाँ आराम से पहुँच जाएँगे और फिर रविवार को सुबह भगवान के दर्शन करके शाम तक घर वापस आ जाएँगे !

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आओ चले आगरा की ओर

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योजना के मुताबिक, हम लोग मेरी मारुति रिट्ज़ लेकर रविवार सुबह 6 बजे घर से आगरा के लिए निकलने वाले थे, ताकि समय से ताजमहल पहुँच सके और उसी दिन रात तक वापस भी आ सके ! सोमवार को छुट्टी तो थी नहीं इसलिए हमें रविवार की रात तक ही वापस आना था ताकि सोमवार सुबह समय से ऑफीस जा सकूँ ! यार दोस्तों से पता चला था कि ताजमहल देखने के लिए टिकट लेने के बाद बहुत लंबी कतार लगती है ! हम लोग अपना समय कतार में खड़े होकर नहीं बिताना चाहते थे इसलिए हम लोगों ने सुबह समय से निकलने की योजना बनाई थी !

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राजस्थान यात्रा – दिल्ली से उदयपुर

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मेरा तो ये मानना है कि अगर आप पर्यटक बनकर मोल-भाव करोगे तो कोई भी आपसे ज़्यादा पैसे माँगेगा ! ऐसा व्यवहार करो जैसे आप यहाँ अक्सर आते रहते हो और आपको यहाँ के बारे में अच्छे से पता है ! यही हमने यहाँ भी किया, शशांक सारा सामान लेकर थोड़ा दूर खड़ा हो गया और मैने सारा-मोल भाव कर लिया ! फिर क्या था, मैने आवाज़ लगा कर शशांक को बुलाया जोकि थोड़ी दूरी पर खड़ा था, हम लोग ऑटो में बैठे और अपने गंतव्य की ओर चल दिए !

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